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  "title": "पटना साहिब में विराजे गुरु गोबिंद सिंह के चरण: ऑकलैंड में प्रधानमंत्री मोदी ने साझा की 300 साल पुरानी गौरवगाथा",
  "summary": "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑकलैंड में प्रवासी भारतीयों को संबोधित करते हुए श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराज के जोड़ा साहिब की ऐतिहासिक यात्रा और उसके पटना साहिब पहुंचने की कहानी सुनाई।",
  "content": "न्यूजीलैंड के ऑकलैंड में प्रवासी भारतीयों के एक बड़े समुदाय को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बेहद प्रेरणादायक और भावनात्मक ऐतिहासिक वृत्तांत साझा किया। अपने संबोधन के दौरान प्रधानमंत्री ने दुनिया भर में रह रहे भारतीयों और भारत भ्रमण पर आने वाले यात्रियों से विशेष रूप से बिहार के पटना स्थित तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब जाने और वहां के दर्शन करने का आग्रह किया। इस अपील के साथ ही उन्होंने सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराज से जुड़ी 300 साल पुरानी एक अनमोल विरासत के बारे में विस्तार से चर्चा की।\n\nगुरु सेवा की अनूठी परंपरा\nप्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार में मंत्री हरदीप सिंह पुरी का परिवार पीढ़ियों से गुरु घर की सेवा में समर्पित रहा है। हरदीप सिंह पुरी के पूर्वज श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराज के अत्यंत निकट थे और उन्होंने अपना जीवन गुरु की सेवा में लगा दिया था। इसी असीम सेवाभाव और भक्ति का परिणाम था कि उनके परिवार को गुरु महाराज की एक परम पवित्र और अमूल्य धरोहर को संरक्षित करने का सौभाग्य मिला। यह धरोहर स्वयं श्री गुरु गोबिंद सिंह जी और माता साहिब कौर जी का पवित्र जोड़ा साहिब, यानी उनकी चरण पादुकाएं थीं।\n\nसंकट के काल में अटूट सुरक्षा\nइस पवित्र निशानी को पुरी परिवार ने पिछले 300 वर्षों से गुरु का साक्षात आशीर्वाद मानकर अत्यंत सावधानी और श्रद्धा के साथ सहेज कर रखा था। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि समय की धारा में सदियां गुजर गईं और पीढ़ियां बदल गईं, लेकिन गुरु की इन चरण पादुकाओं के प्रति परिवार की निष्ठा में रत्ती भर भी कमी नहीं आई। सबसे कठिन दौर तब आया जब देश का विभाजन हुआ। उस समय फैली व्यापक हिंसा और अराजकता के बीच भी हरदीप सिंह पुरी के पूर्वजों ने इस पवित्र धरोहर को अपनी जान से भी ज्यादा सुरक्षित रखा। वे उस त्रासदीपूर्ण समय में पाकिस्तान से इस जोड़ा साहिब को सकुशल दिल्ली लेकर आने में सफल रहे।\n\nपटना साहिब को समर्पित करने का निर्णय\nदिल्ली में लंबे समय तक इन चरण पादुकाओं को सहेजने के बाद, पुरी परिवार के मन में यह विचार आया कि यह पावन निशानी केवल उनके घर तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। परिवार ने महसूस किया कि गुरु महाराज की यह धरोहर पूरी सिख संगत की अमानत है, जिसे आम श्रद्धालुओं के दर्शनार्थ उपलब्ध कराया जाना चाहिए। इस पवित्र संकल्प को साकार करने के लिए एक विशेष समिति का गठन किया गया, जिसमें सिख धर्म के इतिहास और परंपराओं के विशेषज्ञों को शामिल किया गया।\n\nइतिहास का पावन मिलन\nप्रधानमंत्री ने साझा किया कि समिति ने गहन मंथन के पश्चात यह सर्वसम्मत निर्णय लिया कि इस पवित्र जोड़ा साहिब को उस स्थान पर स्थापित करना चाहिए, जो गुरु महाराज का जन्मस्थान है। इस प्रकार, तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब को इन चरण पादुकाओं का अंतिम और स्थायी स्थान चुना गया, क्योंकि यहीं गुरु गोबिंद सिंह महाराज का प्राकट्य हुआ था और यहीं उनके चरण पहली बार पड़े थे।\n\nश्रद्धा का केंद्र बना पटना साहिब\nआज यह पवित्र धरोहर पटना साहिब में पूरे मान-सम्मान के साथ सुशोभित है, जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में श्रद्धालु इसके दर्शन कर आत्मिक शांति का अनुभव करते हैं। प्रधानमंत्री ने इस बात को अपना सौभाग्य बताया कि उन्हें उस ऐतिहासिक और आध्यात्मिक अवसर का गवाह बनने का मौका मिला जब यह धरोहर आधिकारिक रूप से तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब को सौंपी जा रही थी। उन्होंने अपनी बात को दोहराते हुए फिर से आह्वान किया कि हर भारतीय को अपने जीवनकाल में एक बार पटना साहिब अवश्य जाना चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब जाने वाले श्रद्धालुओं के लिए गुरु गोबिंद सिंह जी की ऐतिहासिक धरोहर के दर्शन करना अब सुलभ हो गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. तख्त श्री हरिमंदिर जी पटना साहिब में कौन सी ऐतिहासिक धरोहर मौजूद है?\nवहां सिखों के दसवें गुरु, श्री गुरु गोबिंद सिंह महाराज और माता साहिब कौर जी का पवित्र जोड़ा साहिब यानी चरण पादुकाएं स्थापित हैं।\n\n2. यह धरोहर कितने वर्षों तक पुरी परिवार के पास सुरक्षित रही?\nयह पवित्र धरोहर पूरे 300 वर्षों तक हरदीप सिंह पुरी के पूर्वजों द्वारा सुरक्षित रखी गई थी।\n\n3. क्या विभाजन के दौरान इस धरोहर को कोई नुकसान हुआ?\nनहीं, विभाजन के दौरान फैली अराजकता के बावजूद पुरी परिवार ने इसे पूरी हिफाजत से रखा और इसे सुरक्षित पाकिस्तान से दिल्ली ले आए।\n\n4. इस धरोहर को पटना साहिब में ही क्यों रखा गया?\nसमिति ने इसे गुरु महाराज का जन्मस्थान मानते हुए पटना साहिब को इसके स्थायी निवास के रूप में चुना, क्योंकि यहीं उनके कदम पहली बार पड़े थे।\n\nप्रेरणा और सबक\n• पीढ़ियों की निष्ठा: किसी भी कठिन समय में अपने मूल्यों और सौंपे गए दायित्व को निभाने की संकल्प शक्ति ही असली विरासत है।\n• त्याग की भावना: व्यक्तिगत स्वामित्व से ऊपर उठकर सार्वजनिक हित के लिए अपनी बहुमूल्य वस्तु को समर्पित करना ही सच्ची भक्ति है।\n• विशेषज्ञों का सम्मान: बड़े और ऐतिहासिक निर्णयों को लेने के लिए ज्ञान और परंपरा के विशेषज्ञों की सलाह लेना अत्यंत आवश्यक है।\n• अडिग धैर्य: 300 वर्षों तक निरंतर सेवा और सुरक्षा करना यह दर्शाता है कि समर्पण पीढ़ियों के बीच कैसे जीवित रहता है।",
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  "category": "बिहार",
  "publishedAt": "2026-07-11",
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