# पूर्णिया के इस गांव के किसान अकेले भर देते हैं पूरे जिले की सब्जी मंडी

> बिहार के पूर्णिया जिले के नया टोला ठाडा गांव में करीब 99% लोग आज भी खेती पर निर्भर हैं और यहीं के किसान हरदा बाजार की सब्जी मंडी में सबसे ज्यादा सब्जियां पहुंचाते हैं।

**Type:** article · **Category:** बिहार · **Published:** 2026-07-15 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bihar/purnia-ke-isa-ganva-ke-kisana-akele-bhara-dete-hain-pure-jile-ki-sabji-mndi-7777 · **Language:** Hindi
**Tags:** खेती, पूर्णिया, बिहार, सब्जी मंडी, ग्रामीण अर्थव्यवस्था, किसान, हरदा पंचायत, आधुनिक खेती

बिहार के पूर्णिया जिले में एक ऐसा गांव है जिसकी पूरी पहचान सिर्फ एक चीज से बनती है, खेती। नया टोला ठाडा नाम के इस गांव में करीब 99% लोग आज भी खेती पर ही निर्भर हैं, जबकि देश के कई गांव धीरे-धीरे खेती छोड़कर दूसरे कामों की तरफ बढ़ रहे हैं।

## यहां हर घर की पहली पसंद है खेत
नया टोला ठाडा गांव पूर्णिया जिले की हरदा पंचायत में आता है और जिला मुख्यालय से इसकी दूरी महज 8 किलोमीटर है। इस गांव में चाहे युवा हो या बुजुर्ग, हर किसी की पहली प्राथमिकता खेती ही होती है। गांव के गिने-चुने लोग ही सरकारी नौकरी में हैं, बाकी सब पीढ़ी दर पीढ़ी खेत में ही मेहनत करते आ रहे हैं।

## बुजुर्गों से लेकर युवाओं तक, सबकी दिलचस्पी बराबर
पूर्णिया जिले में इस गांव की सबसे खास बात यह है कि यहां बुजुर्ग और युवा, दोनों को खेती में बराबर दिलचस्पी है। गांव के विजय सिंह, भोला सिंह, हरेंद्र कुमार, पंकज कुमार और 73 वर्षीय रामचंद्र सिंह सहित कई ग्रामीणों ने बताया कि आज भी गांव के 99% लोग खेती पर ही निर्भर हैं। उनके लिए खेती सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि घर चलाने की सबसे बड़ी कमाई का जरिया है। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि यहां के किसान लगातार नई-नई फसलें और आधुनिक तकनीक आजमाते रहते हैं, जिसकी वजह से पूरे जिले में इस गांव का नाम होता है।

## 55 साल पहले वैशाली से आए लोगों ने बोया था पहला बीज
ग्रामीणों के मुताबिक इस गांव में खेती अपने आप शुरू नहीं हुई। करीब 55 साल पहले वैशाली से आए कुछ लोग यहां बसे और उन्होंने ही सबसे पहले इस जमीन पर खेती शुरू की थी। उन्हीं की मेहनत आगे चलकर पूरे गांव का मुख्य पेशा बन गई और यह सिलसिला आज तक चला आ रहा है।

## हरदा बाजार की सब्जी मंडी की सबसे बड़ी सप्लायर
इसका असर सीधा हरदा बाजार की सब्जी मंडी में दिखता है। ग्रामीणों ने बताया कि रोज सबसे ज्यादा सब्जी लेकर यहीं के किसान मंडी में बेचने पहुंचते हैं। साथ ही, जिले में सबसे ज्यादा सब्जी उत्पादन भी इसी एक गांव से होता है, जिससे यह गांव पूरे जिले की सब्जी सप्लाई चेन की रीढ़ बन गया है।

## सरकार का प्रोत्साहन और युवाओं की भागीदारी
ग्रामीणों ने आगे बताया कि गांव में चंद लोग ही सरकारी नौकरी में हैं, जबकि 99% आबादी पूरी तरह खेती पर टिकी है। नई फसल और नई तकनीक अपनाकर यहां के किसान हर सीजन में आगे बढ़ते जा रहे हैं। गांव के युवा भी खेती में खास दिलचस्पी दिखाते हैं, जिसके चलते सरकार की तरफ से कई युवाओं को प्रदर्शनी में प्रोत्साहित भी किया जाता है। यही सब वजहें हैं जिनकी वजह से नया टोला ठाडा गांव आए दिन पूर्णिया जिले में चर्चा का विषय बना रहता है।

## इसका आप पर असर
यह खबर सीधे सब्जियों की सप्लाई और किसानों की आजीविका से जुड़ी है।

- **भारत में:** यह गांव दिखाता है कि छोटे किसान भी नई तकनीक अपनाकर आसपास के पूरे बाजार की सब्जी जरूरतें पूरी कर सकते हैं।
- **पूर्णिया में:** हरदा बाजार की सब्जी मंडी में आने वाली सबसे ज्यादा सब्जी इसी गांव के किसानों पर निर्भर है, इसलिए स्थानीय सब्जी की उपलब्धता सीधे इसी गांव की फसल पर टिकी रहती है।

## सवाल-जवाब

### 1. नया टोला ठाडा गांव कहां स्थित है?
यह गांव बिहार के पूर्णिया जिले की हरदा पंचायत में, जिला मुख्यालय से करीब 8 किलोमीटर दूर स्थित है।

### 2. इस गांव में कितने प्रतिशत लोग खेती करते हैं?
गांव के करीब 99% लोग खेती पर निर्भर हैं और यही उनका मुख्य पेशा है।

### 3. इस गांव में खेती की शुरुआत कब हुई थी?
ग्रामीणों के मुताबिक करीब 55 साल पहले वैशाली से आए लोगों ने इस गांव में खेती शुरू की थी।

### 4. इस गांव की सब्जियां कहां बेची जाती हैं?
यहां के ज्यादातर किसान अपनी सब्जियां हरदा बाजार की सब्जी मंडी में लेकर बेचने जाते हैं, जहां सबसे ज्यादा सब्जी इसी गांव से पहुंचती है।

### 5. यह जानकारी किन ग्रामीणों ने दी है?
स्थानीय ग्रामीण विजय सिंह, भोला सिंह, हरेंद्र कुमार, पंकज कुमार और 73 वर्षीय रामचंद्र सिंह सहित कई ग्रामीणों ने यह जानकारी दी है।

### 6. क्या गांव के युवा भी खेती में रुचि लेते हैं?
हां, गांव के युवा खेती में खास दिलचस्पी दिखाते हैं और सरकार की तरफ से उन्हें प्रदर्शनी में प्रोत्साहित भी किया जाता है।

## प्रेरणा और सबक
नया टोला ठाडा गांव की कहानी बताती है कि लगातार मेहनत और नई सोच से एक पूरा गांव अपनी अलग पहचान बना सकता है।

- **निरंतरता से पहचान बनती है:** 55 साल पहले वैशाली से आए लोगों ने जो खेती शुरू की थी, वही आज पूरे जिले में गांव की पहचान बन गई है।
- **हर पीढ़ी की भागीदारी जरूरी है:** बुजुर्ग रामचंद्र सिंह से लेकर गांव के युवाओं तक, सभी खेती में बराबर दिलचस्पी दिखाते हैं, जिससे परंपरा टूटती नहीं।
- **नई तकनीक अपनाने से फायदा मिलता है:** नई फसल और आधुनिक तरीके अपनाकर किसान पूरे जिले में अलग पहचान बना पाए हैं।
- **सरकारी मंच का इस्तेमाल फायदेमंद है:** गांव के युवाओं को सरकार की प्रदर्शनी में प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे उनकी मेहनत को पहचान मिलती है।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._