पूर्णिया में आधार सत्यापन और क्यूआर कोड से शुरू हुई पेपरलेस जमीन रजिस्ट्री, धोखाधड़ी पर लगेगी लगाम बिहार के पूर्णिया जिले में जमीन की रजिस्ट्री अब पूरी तरह पेपरलेस हो गई है। आधार सत्यापन, डिजिटल पीडीएफ कॉपी और क्यूआर कोड तकनीक के जरिए धोखाधड़ी तथा दोहरी जमीन बिक्री रोकने में बड़ी मदद मिलेगी। बिहार के पूर्णिया जिले में भूमि निबंधन की व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव आया है, जहां अब जमीन की रजिस्ट्री पूरी तरह से पेपरलेस प्रक्रिया के जरिए की जा रही है। राज्य सरकार द्वारा शुरू की गई इस आधुनिक डिजिटल व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य रजिस्ट्री प्रक्रिया को सुगम, पारदर्शी और पूरी तरह सुरक्षित बनाना है। इस नई प्रणाली के लागू होने के बाद अब जमीन खरीदने और बेचने वाले लोगों को मोटी-मोटी फाइलें, ढेरों कागजात या दशकों पुराने केबाला हाथ में लेकर दफ्तरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं रही। जमीन से जुड़े तमाम रिकॉर्ड अब डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित कर दिए गए हैं, जिन्हें जरूरत पड़ने पर आसानी से देखा जा सकता है। इस व्यवस्था से न केवल आम जनता के समय और संसाधन की बचत हो रही है, बल्कि जमीन सौदों में होने वाले फर्जीवाड़े पर भी कड़ी नकेल कसी जा रही है। आधार आधारित सत्यापन और डिजिटल e-कॉपी की प्रक्रिया नया निबंधन तंत्र सुरक्षा के बहुस्तरीय मानदंडों पर काम करता है। रजिस्ट्री की प्रक्रिया के दौरान सबसे पहले जमीन के खरीदार और विक्रेता दोनों का आधार नंबर के जरिए बायोमेट्रिक और डिजिटल सत्यापन किया जाता है। इसके उपरांत, इस सौदे के गवाहों का भी आधार आधारित सत्यापन पूरा किया जाता है, जिससे फर्जी पहचान या किसी अन्य व्यक्ति के स्थान पर खड़े होकर दस्तखत करने की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाती है। प्रक्रिया संपन्न होने के बाद निबंधन विभाग द्वारा दस्तावेज की एक आधिकारिक डिजिटल कॉपी तैयार की जाती है। यह डिजिटल दस्तावेज खरीदार को पीडीएफ (PDF) प्रारूप में उपलब्ध कराया जाता है। इस इलेक्ट्रॉनिक फाइल पर एक विशिष्ट क्यूआर (QR) कोड अंकित होता है। इस क्यूआर कोड की मदद से भविष्य में कभी भी और कहीं भी संबंधित जमीन के दस्तावेज की सत्यता एवं प्रामाणिकता की तत्काल जांच की जा सकती है। इससे असली और नकली केबाला के बीच का अंतर तुरंत स्पष्ट हो जाता है। फर्जीवाड़े और दोहरी बिक्री की शिकायतों पर लगेगी लगाम पूर्णिया के जिला अवर निबंधक उमाशंकर मिश्र ने इस नई व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डालते हुए बताया कि पेपरलेस निबंधन का प्राथमिक ध्येय प्रक्रिया को सरल करने के साथ-साथ इसे साइबर और भौतिक जालसाजी से मुक्त रखना है। पूर्व की कागजी व्यवस्था में कई बार ऐसी शिकायतें देखने को मिलती थीं जहां एक ही जमीन को फर्जी दस्तावेजों के सहारे अलग-अलग व्यक्तियों को बेच दिया जाता था। ऐसी धोखाधड़ी से आम लोगों को भारी कानूनी और वित्तीय नुकसान उठाना पड़ता था। ऑनलाइन डेटाबेस और रियल-टाइम डिजिटल सत्यापन की मौजूदगी में अब कोई भी व्यक्ति एक ही जमीन का दोबारा निबंधन कराने में सफल नहीं हो सकता। जैसे ही कोई पुराना रिकॉर्ड सिस्टम में सर्च किया जाएगा, उसकी वर्तमान स्थिति और मालिकाना हक की जानकारी सामने आ जाएगी। इससे बेनामी संपत्ति और भू-माफियाओं के अवैध कारनामों पर सीधी रोक लग सकेगी। शुरुआती भ्रम दूर होने के बाद डिजिटल व्यवस्था पर बढ़ा भरोसा जिला अवर निबंधक उमाशंकर मिश्र ने यह भी स्वीकार किया कि जब इस नई पेपरलेस व्यवस्था की शुरुआत हुई थी, तब शुरुआत में आम लोगों के मन में कई तरह के भ्रम और आशंकाएं मौजूद थीं। बहुत से नागरिकों को लगता था कि यदि उनके हाथ में भौतिक कागजी दस्तावेज नहीं होंगे, तो भविष्य में मालिकाना हक सिद्ध करने या कानूनी विवाद की स्थिति में उन्हें भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, निबंधन कार्यालय द्वारा चलाए गए जागरूकता प्रयासों और डिजिटल प्रणाली के सुरक्षा फायदों की जानकारी मिलने के बाद अब जनता का विश्वास इस पारदर्शी व्यवस्था में तेजी से बढ़ा है। अधिकारी ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे भूमि खरीद-बिक्री के दौरान इस पेपरलेस सुविधा का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। आधार सत्यापन, डिजिटल स्टोरेज और क्यूआर कोड जैसी तकनीक से लैस यह व्यवस्था कागज और समय की बचत करने के साथ-साथ भूमि सौदों को सौ प्रतिशत सुरक्षित बनाती है। इसका आप पर असर पेपरलेस जमीन रजिस्ट्री प्रणाली लागू होने से संपत्ति खरीदारों और विक्रेताओं के लिए दस्तावेज प्रबंधन और पहचान सुरक्षा में दूरगामी बदलाव आएगा। • पूर्णिया और बिहार में: स्थानीय नागरिकों को अब जमीन रजिस्ट्री के लिए केबाला या भारी-भरकम पुराने कागज साथ ले जाने की जरूरत नहीं होगी। इसके स्थान पर आधार बायोमेट्रिक सत्यापन और पीडीएफ e-कॉपी से प्रक्रिया तुरंत और सुरक्षित रूप से पूरी हो जाएगी। • भारत में: डिजिटल भूमि रिकॉर्ड अपनाने से एक ही संपत्ति को फर्जी कागजात बनाकर दोबारा बेचने वाले भू-माफिया गिरोहों पर नकेल कसेगी। देश के अन्य राज्यों के लिए भी यह व्यवस्था पारदर्शी संपत्ति सौदों का मानक मॉडल बनेगी। • दस्तावेज़ सुरक्षा: क्यूआर कोड युक्त डिजिटल कॉपी मिलने से भविष्य में जमीन के कागजात खोने या फटने का जोखिम समाप्त हो जाता है। खरीदार किसी भी समय क्यूआर कोड स्कैन करके अपने दस्तावेज की प्रामाणिकता ऑनलाइन जांच सकते हैं। • समय और खर्च की बचत: निबंधन कार्यालयों के बार-बार चक्कर लगाने और वकील या बिचौलियों के भौतिक पेपर तैयार करने के खर्च में कमी आएगी। ऑनलाइन रिकॉर्ड सत्यापन के कारण रजिस्ट्री प्रक्रिया पहले से काफी कम समय में संपन्न होगी। सवाल-जवाब 1. पूर्णिया में पेपरलेस जमीन रजिस्ट्री का मुख्य फायदा क्या है? इस व्यवस्था से लोगों को भारी कागजात लेकर नहीं चलना पड़ेगा, और आधार सत्यापन व क्यूआर कोड तकनीक के जरिए जमीन के फर्जीवाड़े तथा दोहरी बिक्री पर रोक लगेगी। 2. पेपरलेस रजिस्ट्री के दौरान पहचान की जांच कैसे की जाती है? रजिस्ट्री के दौरान जमीन के खरीदार, विक्रेता और गवाहों का आधार आधारित बायोमेट्रिक व डिजिटल सत्यापन किया जाता है। 3. रजिस्ट्री की डिजिटल कॉपी किस प्रारूप में और कैसे मिलती है? निबंधन पूरा होने के बाद खरीदार को पीडीएफ प्रारूप में ई-कॉपी दी जाती है, जिसमें दस्तावेज की सत्यता जांचने के लिए एक विशेष क्यूआर कोड अंकित होता है। 4. क्या बिना भौतिक कागजात के भविष्य में मालिकाना हक साबित करने में दिक्कत होगी? जिला अवर निबंधक उमाशंकर मिश्र के अनुसार क्यूआर कोड और डिजिटल रिकॉर्ड पूरी तरह सुरक्षित एवं आधिकारिक हैं, जिससे भविष्य में दस्तावेज की सत्यता जांचना और भी आसान हो गया है। https://trendkia.com/bihar/purnia-men-adhara-satyapana-aura-kyuara-koda-se-shuru-hui-peparalesa-jamina-rajistri-dhokhadhari-para-lagegi-lagama-23610 TrendKia — Har trend, sabse pehle.