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  "type": "article",
  "title": "सिक्किम के नामची में सुरंग ढहने से 20 मजदूरों की मौत, एनएचपीसी प्रोजेक्ट में मीथेन गैस से हुआ धमाका",
  "summary": "सिक्किम के नामची जिले में एनएचपीसी हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की एक निर्माणाधीन सुरंग में मीथेन गैस के धमाके से भारी मलबा गिर गया। इस खौफनाक हादसे में 25 मजदूर दब गए, जिनमें से 20 की मौत हो चुकी है और रेस्क्यू टीमें जहरीली गैसों के बीच बाकी शवों की तलाश कर रही हैं।",
  "content": "सिक्किम के नामची जिले में एक बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट पर हुआ हादसा एक बड़ी त्रासदी में बदल गया है, जिसमें कम से कम 20 मजदूरों की जान चली गई है। 20 जुलाई की दोपहर को समरडूंग इलाके में बन रहे एनएचपीसी तीस्ता स्टेज VI हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की एक निर्माणाधीन सुरंग में जोरदार धमाका हुआ और वह पूरी तरह से ढह गई। इस अचानक हुई आपदा ने 25 निर्माण मजदूरों और प्रोजेक्ट अधिकारियों को मलबे के नीचे जिंदा दफन कर दिया। जैसे-जैसे रेस्क्यू ऑपरेशन 24 घंटे का आंकड़ा पार कर गया, अधिकारियों और परिवारों की सबसे बुरी आशंकाएं सच साबित हुईं, और एक आम कार्यस्थल एक खौफनाक कब्र में तब्दील हो गया।\n\nमीथेन गैस का रिसाव और सुरंग का ढहना\nशुरुआती जांच से पता चलता है कि यह भीषण आपदा चट्टानों के भीतर फंसी अत्यधिक ज्वलनशील मीथेन गैस के अचानक रिसाव के कारण हुई। जब इस गैस ने आग पकड़ी, तो हुए भारी धमाके ने सुरंग के ढांचे को पूरी तरह से हिला कर रख दिया और वह ढह गई। धमाके के तुरंत बाद सुरंग के अंदर घना, अंधा कर देने वाला धुआं और जहरीली गैसें भर गईं, जिससे अंदर गहराई में काम कर रहे मजदूरों के लिए बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा। मलबे के भारी वजन ने 25 लोगों को जिंदा ही दबा दिया, जिसके बाद प्रशासन ने नुकसान का आकलन करते हुए एक बेहद खतरनाक और तेज रिकवरी अभियान शुरू किया।\n\nशवों की बरामदगी और चुनौतीपूर्ण रेस्क्यू ऑपरेशन\n21 जुलाई को इस भारी जनहानि की पुष्टि करते हुए नामची की पुलिस अधीक्षक सोनम डी भूटिया ने बताया कि राहत और बचाव टीमों ने अब तक मलबे से 12 क्षत-विक्षत शवों को बाहर निकाल लिया है। अधिकारियों द्वारा इनमें से सात पीड़ितों की पहचान भी कर ली गई है। हालांकि, बाकी मजदूरों की किस्मत तय हो चुकी है, और कुल 20 मौतों की आधिकारिक पुष्टि की गई है। ढहे हुए ढांचे के सबसे गहरे हिस्सों में दबे बाकी पांच मजदूरों को खोजने के लिए दिन-रात सर्च ऑपरेशन जारी है। यह रेस्क्यू मिशन बेहद खतरनाक है, क्योंकि कई आपातकालीन एजेंसियां लगातार जहरीली गैसों और अस्थिर मलबे से जूझ रही हैं, जहां आगे भी ढहने का खतरा बना हुआ है। इस मुश्किल काम में मदद के लिए पड़ोसी राज्य पश्चिम बंगाल से एक विशेष माइनिंग रेस्क्यू टीम को भी तत्काल बुलाया गया है ताकि वे इस जानलेवा माहौल में रास्ता बना सकें।\n\nसरकारी सहायता और मुआवजे का ऐलान\nइस दुखद घटना के बाद, सिक्किम के मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने रेस्क्यू कार्यों का जायजा लेने और जमीनी हकीकत का आकलन करने के लिए समरडूंग घटनास्थल का दौरा किया। घटना की गंभीरता को देखते हुए, मुख्यमंत्री ने मीथेन गैस रिसाव और उसके बाद सुरंग ढहने के सटीक कारणों की जांच के लिए तुरंत एक विशेष जांच समिति बनाने का ऐलान किया। पीड़ित परिवारों को तत्काल आर्थिक राहत देने के लिए, राज्य सरकार ने मारे गए प्रत्येक मजदूर के परिवार को 4 लाख रुपये का मुआवजा देने की मंजूरी दी है, साथ ही घायलों के लिए 50,000 रुपये की मदद की घोषणा की है। केंद्र सरकार ने भी संकट पर तुरंत प्रतिक्रिया दी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुख्यमंत्री तमांग से फोन पर बात की और उन्हें नई दिल्ली से हर संभव प्रशासनिक मदद का भरोसा दिया। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने मृतकों के परिवारों के लिए 2 लाख रुपये और घायलों के लिए 50,000 रुपये की अतिरिक्त मदद की भी घोषणा की।\n\nपीड़ित परिवारों के लिए प्रशासनिक समन्वय\nइस आपदा से निपटने और प्रशासनिक कार्यों को व्यवस्थित करने के लिए नामची में मुख्य सचिव रवींद्र तेलंग की अध्यक्षता में एक हाई-लेवल रिव्यू मीटिंग बुलाई गई। इस अहम बैठक में जिला प्रशासन के शीर्ष अधिकारियों, विभिन्न रेस्क्यू एजेंसियों, एनएचपीसी लिमिटेड, पश्चिम बंगाल प्रशासन और निर्माण में शामिल कंपनी पटेल इंजीनियरिंग लिमिटेड के अधिकारी शामिल हुए। बैठक के दौरान, नामची जिला प्रशासन को सीमावर्ती शहर रंगपो में एक विशेष सहायता प्रणाली स्थापित करने के स्पष्ट निर्देश दिए गए। इस सिस्टम को विशेष रूप से मृतकों की पहचान में तेजी लाने और यह सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है कि प्रभावित परिवारों, विशेषकर जो दूसरे राज्यों से आ रहे हैं, उन्हें इस बेहद कठिन समय में अपने प्रियजनों के शव प्राप्त करने से लेकर घोषित आर्थिक सहायता पाने तक हर संभव मदद बिना किसी परेशानी के मिल सके।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह दुखद घटना बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट्स में काम करने वाले मजदूरों के सामने आने वाले गंभीर खतरों और सुरक्षा की कमी को उजागर करती है।\n• सिक्किम में: इस हादसे से स्थानीय लोगों में डर का माहौल है और प्रशासन क्षेत्र में चल रहे अन्य हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा व्यवस्था की कड़ी जांच कर रहा है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुरंग धंसने का यह हादसा कहां हुआ?\nयह हादसा सिक्किम के नामची जिले के समरडूंग में एनएचपीसी तीस्ता स्टेज VI हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के निर्माण के दौरान हुआ।\n\n2. सुरंग के ढहने का क्या कारण था?\nअधिकारियों को संदेह है कि चट्टानों के अंदर फंसी मीथेन गैस के अचानक रिसाव से भारी धमाका हुआ, जिससे सुरंग का ढांचा ढह गया।\n\n3. इस आपदा में कितने लोगों की जान गई?\nमलबे में फंसे 25 मजदूरों में से 20 की मौत की पुष्टि हो चुकी है। बचाव टीमों ने अब तक 12 शव निकाले हैं।\n\n4. पीड़ितों के लिए क्या मुआवजा घोषित किया गया है?\nमुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग ने मृतकों के परिवारों को 4 लाख रुपये और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केंद्र की ओर से 2 लाख रुपये की अतिरिक्त मदद का ऐलान किया है।\n\n5. बचाव अभियान कौन चला रहा है?\nस्थानीय प्रशासन और पश्चिम बंगाल से आई एक विशेष माइनिंग रेस्क्यू टीम सहित कई एजेंसियां जहरीले माहौल में बाकी मजदूरों को खोजने के लिए मिलकर काम कर रही हैं।",
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  "category": "बिहार",
  "publishedAt": "2026-07-22",
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    "सुरंग ढहने की घटना"
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