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  "title": "सिंगापुर से पटना लौटीं रोहिणी आचार्य का एयरपोर्ट पर स्वागत करने खुद पहुंचे लालू प्रसाद और राबड़ी देवी",
  "summary": "पारिवारिक मतभेदों की पृष्ठभूमि के बीच सिंगापुर से पटना एयरपोर्ट पहुंचीं रोहिणी आचार्य का स्वागत करने राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और मीसा भारती खुद पहुंचे।",
  "content": "सिंगापुर की उड़ान से बिहार की राजधानी पटना के जयप्रकाश नारायण हवाई अड्डे पर उतरीं रोहिणी आचार्य का स्वागत करने के लिए राष्ट्रीय जनता दल के शीर्ष नेता खुद पहुंचे। आमतौर पर राजनीतिक या पारिवारिक खींचतान के दौर में जब भी रोहिणी पटना आई थीं, तब हवाई अड्डे पर उन्हें लाने या छोड़ने के लिए परिवार का कोई वरिष्ठ सदस्य मौजूद नहीं रहता था और केवल पार्टी के समर्थक ही वहां दिखते थे। इस बार का दृश्य पूरी तरह बदला हुआ था, जहां राजद प्रमुख लालू प्रसाद, बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और उनकी बड़ी बहन व सांसद मीसा भारती खुद उन्हें लेने पहुंचे।\n\nहवाई अड्डे पर पैर छूकर लिया माता-पिता का आशीर्वाद\nहवाई अड्डे के परिसर में पार्टी कार्यकर्ताओं का भारी जमावड़ा लगा हुआ था। रोहिणी आचार्य को अंदर से लाने के लिए मीसा भारती खुद टर्मिनल भवन के भीतर गईं, जबकि लालू प्रसाद और राबड़ी देवी बाहर अपनी गाड़ी में बैठकर बेटी के आने की प्रतीक्षा करते रहे। रोहिणी जैसे ही वाहन के पास पहुंचीं, उन्होंने सबसे पहले पिता लालू प्रसाद के पैर छुए और फिर मां राबड़ी देवी का चरण स्पर्श कर उनका आशीर्वाद लिया। इसके बाद उन्होंने माता-पिता को गले लगाया। इस मुलाकात के दौरान लालू प्रसाद, राबड़ी देवी और रोहिणी तीनों की आंखें नम हो गईं और पूरा माहौल भावुक हो गया।\n\n \n\nदौरे को पूरी तरह निजी बताते हुए राजनीति से दूर रखने की अपील\nएयरपोर्ट पर मीडिया कर्मियों ने जब मीसा भारती से इस एकजुटता पर सवाल किया तो उन्होंने इसे एक सामान्य पारिवारिक शिष्टाचार बताया। मीसा भारती ने स्पष्ट किया कि जब भी घर का कोई सदस्य बाहर से आता है, तो पूरा कुनबा उसे घर लाने के लिए हवाई अड्डे पहुंचता है। दूसरी तरफ, मीडिया से मुखातिब होते हुए रोहिणी आचार्य ने इस पूरी यात्रा को विशुद्ध रूप से व्यक्तिगत करार दिया। रोहिणी ने कहा कि यह बहुत ही निजी कार्यक्रम है और वह केवल अपने माता-पिता से मिलने के लिए आई हैं, इसलिए इस मुलाकात को कतई राजनीतिक रंग न दिया जाए। उन्होंने वहां मौजूद कार्यकर्ताओं की ओर इशारा करते हुए कहा कि उनके सभी भाई लोग आए हुए हैं। हालांकि, जब संवाददाताओं ने उनसे उनके भाई तेजस्वी यादव के साथ उपजी नाराजगी और तल्खी के बारे में सवाल दागा, तो उन्होंने उस पर कोई भी जवाब नहीं दिया और चुप्पी साधे रखी।\n\nसोशल मीडिया पर पिता के बुलावे और बेटी के फर्ज का किया था जिक्र\nपटना की धरती पर कदम रखने से ठीक पहले रोहिणी आचार्य ने सार्वजनिक मंच पर अपनी भावनाएं साझा की थीं। उन्होंने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा था कि उनके लिए उनके पिता, उनकी खुशी और उनके आशीर्वाद से बढ़कर दुनिया में कुछ भी नहीं है। उन्होंने भावुक अंदाज में आगे कहा था कि पिता के बुलावे से बड़ा कोई दूसरा हुक्म नहीं हो सकता, इसलिए वह एक बेटी होने का अपना कर्तव्य निभाने के लिए बहुत जल्द अपने पिता के पास आ रही हैं।\n\nविवादों के बाद बनाई थी परिवार और चुनावी सियासत से दूरी\nरोहिणी आचार्य का यह पटना दौरा पिछले राजनीतिक घटनाक्रमों के लिहाज से काफी अहम माना जा रहा है। पिछले वर्ष नवंबर 2025 के दौरान रोहिणी ने अचानक सार्वजनिक तौर पर अपने परिवार और सक्रिय राजनीति दोनों से ही पूरी तरह किनारा करने का ऐलान कर दिया था। उस वक्त परिवार के भीतर उपजे गहरे आंतरिक मतभेदों के बाद वह पटना छोड़कर सिंगापुर रवाना हो गई थीं। उस समय उन्होंने सोशल मीडिया पर स्पष्ट लिखा था कि वह राजनीति छोड़ रही हैं और खुद को परिवार से पूरी तरह अलग कर रही हैं। लंबे समय के अलगाव के बाद पिता के सीधे बुलावे पर उनका यह पटना आगमन पारिवारिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का केंद्र बना हुआ है।\n\nइसका आप पर असर\nबिहार के प्रमुख राजनीतिक परिवार में हुई इस भावनात्मक मुलाकात के संकेत राज्य के सियासी और सामाजिक परिदृश्य पर असर डालते हैं।\n\n• भारत में: राष्ट्रीय स्तर पर विपक्षी गठबंधन और राजद की आंतरिक एकजुटता पर नजर रखने वाले राजनीतिक विश्लेषकों को परिवार के भीतर सुलह का संकेत मिला है। इससे पार्टी के कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच आंतरिक खींचतान को लेकर फैली असमंजस की स्थिति कम होने की संभावना है।\n• बिहार में: राज्य की राजनीति में लालू परिवार के भीतर चल रही दूरियां कार्यकर्ताओं के मनोबल को लगातार प्रभावित कर रही थीं। रोहिणी आचार्य की पटना वापसी से राजद के जमीनी संगठन और महिला समर्थकों में सकारात्मक संदेश जाएगा।\n• कार्यकर्ताओं पर प्रभाव: पार्टी समर्थकों को लंबे समय से तेजस्वी और रोहिणी के बीच मतभेदों के चलते असहज स्थिति का सामना करना पड़ रहा था। इस पारिवारिक मुलाकात से पार्टी के भीतर गुटबाजी की चर्चाओं पर कुछ हद तक विराम लग सकता है।\n• पारिवारिक समीकरण: सार्वजनिक दूरी के बाद माता-पिता से मुलाकात दर्शाती है कि आगामी दिनों में पारिवारिक मतभेद सुलझने की दिशा में कदम बढ़ सकते हैं। इससे आने वाले राजनीतिक घटनाक्रमों में रोहिणी की भागीदारी को लेकर कयास दोबारा तेज होंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nरोहिणी आचार्य का अचानक सिंगापुर से पटना लौटना और हवाई अड्डे पर पूरे परिवार का पहुंचना एक लंबे समय से चले आ रहे पारिवारिक व राजनीतिक तनाव के बाद हुआ है।\n\n• पिता का सीधा बुलावा: रोहिणी आचार्य ने खुद स्पष्ट किया कि उनके पिता लालू प्रसाद ने उन्हें व्यक्तिगत तौर पर बुलाया था, जिसे वह टाल नहीं सकीं। उन्होंने कहा कि पिता का बुलावा उनके लिए सर्वोच्च आदेश था और वह एक बेटी का फर्ज निभाने आई हैं।\n• नवंबर 2025 का पुराना विवाद: नवंबर 2025 में तेजस्वी यादव के साथ हुए गहरे मतभेदों के बाद रोहिणी ने सार्वजनिक रूप से परिवार और राजनीति से खुद को अलग करने का ऐलान कर दिया था। उस कड़वाहट के बाद वह पटना छोड़कर सिंगापुर चली गई थीं और परिवार से दूरी बना ली थी।\n• भावनात्मक सुलह की पहल: लंबे अलगाव के बाद माता-पिता ने खुद पहल करते हुए हवाई अड्डे पर जाकर उनका स्वागत किया, जिससे पुरानी दूरियों को पाटने का प्रयास साफ झलकता है। हालांकि तेजस्वी यादव के साथ उनके समीकरणों में सुधार हुआ है या नहीं, इस पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. रोहिणी आचार्य सिंगापुर से पटना कब और क्यों लौटीं?\nरोहिणी आचार्य अपने पिता लालू प्रसाद के व्यक्तिगत बुलावे पर उनसे और अपनी मां राबड़ी देवी से मिलने के लिए पटना लौटी हैं।\n\n2. पटना एयरपोर्ट पर रोहिणी आचार्य का स्वागत किसने किया?\nएयरपोर्ट पर राजद प्रमुख लालू प्रसाद, राबड़ी देवी, उनकी बड़ी बहन मीसा भारती और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता उनका स्वागत करने पहुंचे।\n\n3. रोहिणी आचार्य ने अपनी इस यात्रा को लेकर क्या कहा?\nरोहिणी ने इसे पूरी तरह निजी दौरा बताया और कहा कि वह केवल अपने माता-पिता से मिलने आई हैं, इसलिए इसे राजनीति से न जोड़ा जाए।\n\n4. क्या रोहिणी आचार्य ने तेजस्वी यादव से जुड़े सवालों पर कोई टिप्पणी की?\nनहीं, जब पत्रकारों ने तेजस्वी यादव से नाराजगी दूर होने के बारे में पूछा तो रोहिणी आचार्य ने कोई जवाब नहीं दिया।\n\n5. रोहिणी आचार्य ने परिवार और राजनीति से दूरी कब बनाई थी?\nरोहिणी ने पिछले साल नवंबर 2025 में पारिवारिक विवाद के बाद राजनीति छोड़ने और परिवार से अलग होने की घोषणा की थी।",
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  "category": "बिहार",
  "publishedAt": "2026-10-01",
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