श्रीलंका में भारतीय राजनयिक मिशनों की सुरक्षा संभालेंगे बीएसएफ कमांडो, देश के प्रमुख केंद्रों में दी गई खास ट्रेनिंग कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग और जाफना के वाणिज्य दूतावास की सुरक्षा के लिए सीमा सुरक्षा बल के विशेष कमांडो तैनात किए जा रहे हैं, जिन्हें वीवीआईपी सुरक्षा और आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक निगरानी का गहन प्रशिक्षण दिया गया है। पड़ोसी देश श्रीलंका में भारतीय राजनयिक ठिकानों और वहां मौजूद भारतीय नागरिकों की हिफाजत के लिए सीमा सुरक्षा बल यानी बीएसएफ के विशेष कमांडो दस्ते को तैनात करने की पूरी तैयारी कर ली गई है। यह कदम ऐसे देश में उठाया जा रहा है, जिसने दशकों तक लिट्टे (एलटीटीई) के भारी संघर्ष और उथल-पुथल का दौर देखा है। अब उसी धरती पर भारतीय तिरंगे की गरिमा और राजनयिक संपत्तियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सीमा सुरक्षा बल के इन जांबाज जवानों के मजबूत कंधों पर होगी। इस महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी को संभालने से पहले जवानों को बेहद कड़े और आधुनिक सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत तैयार किया जा रहा है। छावला में 28 दिनों का गहन प्री-इंडक्शन प्रशिक्षण विदेशी जमीन पर तैनाती से पहले इन कमांडोज को दी जा रही ट्रेनिंग केवल नियमित सुरक्षा अभ्यासों तक सीमित नहीं है। इन जवानों को हर उस विधा में पारंगत बनाया जा रहा है, जिसमें भारत के अलग-अलग सुरक्षा बलों की विशेषज्ञता है। इसी रणनीति के तहत बीएसएफ के जवानों का प्री-इंडक्शन प्रशिक्षण केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल यानी सीआईएसएफ के साथ पूरा कराया गया है। यह खास प्रशिक्षण सत्र राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के छावला स्थित बीएसएफ की 25वीं बटालियन में आयोजित किया गया, जिसकी शुरुआत 28 सितंबर 2026 को हुई थी। कुल 28 दिनों तक चले इस सघन प्रशिक्षण शिविर के दौरान कमांडोज को वीवीआईपी सुरक्षा के पैंतरे और एक्सेस कंट्रोल सुरक्षा की तकनीकी बारीकियों का कड़ा अभ्यास कराया गया। नोएडा और विमानन सुरक्षा केंद्रों में अत्याधुनिक उपकरणों का प्रशिक्षण सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार इन कमांडोज की तैयारी का दायरा केवल छावला केंद्र तक ही सीमित नहीं रखा गया है। मिशन की संवेदनशीलता को देखते हुए जवानों को स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप (एसएसजी) नोएडा और एविएशन सिक्योरिटी ग्रुप (एएसजी) के केंद्रों में भी भेजा गया। इन उच्चस्तरीय केंद्रों में कमांडो दस्ते को संदिग्ध व्यक्तियों की प्रोफाइलिंग, उन्नत इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा उपकरणों के संचालन और जटिल तकनीकी प्रणालियों के सटीक इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया गया। इस व्यापक अभ्यास का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विदेश में भारतीय परिसरों की सुरक्षा संभालते समय जवानों के सामने आने वाली किसी भी अप्रत्याशित चुनौती या सुरक्षा संकट का त्वरित और पेशेवर तरीके से सामना किया जा सके। कोलंबो और जाफना में संभालेंगे सुरक्षा की कमान प्रशिक्षण पूरा होने के बाद बीएसएफ के इन विशेष कमांडोज को श्रीलंका के दो प्रमुख भारतीय राजनयिक केंद्रों में तैनात किया जाएगा। इनमें कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग (एचसीआई) और जाफना में स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास (सीजीआई) शामिल हैं। इन दोनों संवेदनशील परिसरों और वहां तैनात भारतीय अधिकारियों तथा कर्मचारियों की संपूर्ण सुरक्षा का जिम्मा अब पूरी तरह बीएसएफ के हाथों में रहेगा। उच्च तकनीक, त्वरित जवाबी कार्रवाई और वीवीआईपी प्रोटोकॉल में प्रशिक्षित ये जवान श्रीलंका में भारत के सामरिक और राजनयिक हितों की रक्षा सुनिश्चित करेंगे। इसका आप पर असर श्रीलंका में भारतीय राजनयिक केंद्रों की सुरक्षा बीएसएफ के विशेष कमांडो दस्ते को सौंपे जाने से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर राजनयिक संपत्तियों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी। • राजनयिक सुरक्षा: कोलंबो और जाफना में स्थित भारतीय मिशनों को कड़े एक्सेस कंट्रोल और उन्नत निगरानी के दायरे में लाया जाएगा। इससे वहां तैनात भारतीय अधिकारियों और कर्मचारियों को सुरक्षित कार्य वातावरण मिलेगा। • प्रवासियों के लिए लाभ: श्रीलंका में रहने वाले या यात्रा करने वाले भारतीय नागरिकों को वीजा और वाणिज्य दूतावास सेवाओं के दौरान सुरक्षित माहौल उपलब्ध रहेगा। किसी भी सुरक्षा चुनौती के समय प्रशिक्षित कमांडो दस्ते की मौजूदगी त्वरित सहायता सुनिश्चित करेगी। • सुरक्षा बलों का अनुभव: सीमा सुरक्षा बल के जवानों को अंतरराष्ट्रीय राजनयिक सुरक्षा का प्रत्यक्ष अनुभव मिलेगा। यह अंतर-बल समन्वय भविष्य के विदेशी सुरक्षा अभियानों के लिए उपयोगी साबित होगा। • राजनयिक रिश्ते: दोनों देशों के बीच औपचारिक संवाद और राजनयिक गतिविधियां बिना किसी व्यवधान के जारी रह सकेंगी। सुरक्षित राजनयिक परिसर द्विपक्षीय संबंधों में स्थिरता और निरंतरता बनाए रखने में मदद करते हैं। ऐसा क्यों हुआ श्रीलंका में भारतीय राजनयिक मिशनों की सुरक्षा व्यवस्था को आधुनिक और अभेद्य बनाने के उद्देश्य से सीमा सुरक्षा बल के कमांडोज को प्रशिक्षित कर तैनात किया जा रहा है। • रणनीतिक सुरक्षा की जरूरत: कोलंबो उच्चायोग और जाफना वाणिज्य दूतावास भारत के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण राजनयिक प्रतिष्ठान हैं। इनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करने के लिए पेशेवर और आधुनिक हथियारों से लैस बल की आवश्यकता महसूस की गई। • विशिष्ट प्रशिक्षण का दायरा: वीवीआईपी सुरक्षा, संदिग्धों की पहचान और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के उपयोग में विशेषज्ञता हासिल करने के लिए जवानों को सीआईएसएफ, एसएसजी नोएडा और विमानन सुरक्षा केंद्रों में 28 दिनों का प्रशिक्षण दिया गया। • ऐतिहासिक संवेदनशीलता: श्रीलंका दशकों तक आंतरिक संघर्ष और एलटीटीई की गतिविधियों का केंद्र रहा है। इस पृष्ठभूमि को ध्यान में रखते हुए विदेशी जमीन पर भारतीय हितों की रक्षा के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। सवाल-जवाब 1. बीएसएफ कमांडोज को श्रीलंका में कहां तैनात किया जा रहा है? कमांडोज को कोलंबो स्थित भारतीय उच्चायोग और जाफना स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास में तैनात किया जा रहा है। 2. कमांडोज का प्री-इंडक्शन प्रशिक्षण कब और कहां शुरू हुआ था? यह प्रशिक्षण 28 सितंबर 2026 को दिल्ली के छावला स्थित बीएसएफ की 25वीं बटालियन में शुरू हुआ था। 3. यह विशेष प्रशिक्षण कितने दिनों तक चला? यह विशेष प्री-इंडक्शन प्रशिक्षण कार्यक्रम कुल 28 दिनों तक चला। 4. छावला के अलावा जवानों को और कहां प्रशिक्षण दिया गया? जवानों को स्पेशल सिक्योरिटी ग्रुप (एसएसजी) नोएडा और एविएशन सिक्योरिटी ग्रुप (एएसजी) में भी प्रशिक्षित किया गया। 5. प्रशिक्षण के दौरान किन मुख्य विषयों पर ध्यान दिया गया? प्रशिक्षण में वीवीआईपी सुरक्षा, एक्सेस कंट्रोल, प्रोफाइलिंग और उन्नत इलेक्ट्रॉनिक सुरक्षा उपकरणों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। https://trendkia.com/bihar/sri-lanka-men-bharatiya-rajanayika-mishanon-ki-suraksha-snbhalenge-bsf-kamando-desha-ke-pramukha-kendron-men-di-gai-khasa-treninga-57846 TrendKia — Har trend, sabse pehle.