सुल्तानपुर में गोमती का जलस्तर बढ़ने से सीताकुंड घाट डूबा, नाविकों के पास सुरक्षा किट का अभाव सुल्तानपुर में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से प्रसिद्ध सीताकुंड घाट जलमग्न हो गया है और घाट पर आने वाले लोगों के लिए स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। इन दिनों मानसून के मौसम में उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर शहर से होकर बहने वाली गोमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे शहर के प्रमुख घाटों पर पानी का फैलाव होने लगा है। नदी के किनारे बने घाटों पर आमतौर पर श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिलती है, लेकिन जलस्तर में अचानक हुई बढ़ोतरी के कारण अब वहां आने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। शहर के बीच से गुजरने वाली इस नदी के बढ़ते पानी ने स्थानीय प्रशासन और नागरिकों की चिंता बढ़ा दी है। सीताकुंड घाट पर बढ़ा खतरा बीते कुछ दिनों पहले लगातार चार से पांच दिनों तक हुई भारी बारिश के कारण गोमती नदी के जलस्तर में भारी उछाल आया है। इसके परिणामस्वरूप प्रसिद्ध सीताकुंड घाट पूरी तरह से जलमग्न हो चुका है। हालांकि पिछले दिन नदी का जलस्तर 84.73 मीटर तक पहुंचने के बाद स्थिर जरूर हो गया है, लेकिन इतने पानी पर भी सीताकुंड घाट पूरी तरह डूब गया है। मौजूदा समय में यह घाट खतरे के निशान की तरह दिखाई दे रहा है। इस स्थिति को लेकर नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी लालचंद्र सरोज ने जानकारी दी है कि प्रशासन द्वारा यहां सुरक्षा सुविधाओं को और अधिक मजबूत किया जाएगा। नाविकों के पास सुरक्षा उपकरणों की कमी मौके पर स्थिति का जायजा लेने पर सामने आया कि सीताकुंड घाट के पास गोमती नदी में नाव चलाने वाले नाविकों के पास किसी भी प्रकार की सेफ्टी किट या लाइफ जैकेट मौजूद नहीं हैं। स्थानीय निवासी अभिषेक कुमार ने इस बात की पुष्टि की है कि प्रशासन की तरफ से सुरक्षा किट उपलब्ध कराए जाने के बावजूद नाविक उन्हें अपने पास नहीं रखते हैं। इस गंभीर लापरवाही पर प्रशासनिक अधिकारियों की भी कोई खास नजर नहीं पड़ रही है, जो भविष्य में किसी बड़े हादसे को सीधा न्योता देने जैसा है और इस मामले पर प्रशासन की खामोशी कई सवाल खड़े करती है। श्रद्धालुओं की संख्या घटी और खेल गतिविधियां प्रभावित स्थानीय नागरिक राज मिश्रा ने बातचीत के दौरान बताया कि सीताकुंड घाट पर जलभराव होने के कारण वहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में भारी गिरावट दर्ज की गई है। इसके अलावा घाट के पास ही बने कबड्डी ग्राउंड में पानी भर जाने से स्थानीय कबड्डी खिलाड़ियों को भी काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मैदान में पानी भरने से न केवल खिलाड़ियों के रोजाना के अभ्यास पर बुरा असर पड़ रहा है, बल्कि पूरा खेल मैदान भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है। इलाके के लोगों की मुख्य मांग है कि प्रशासन तुरंत सीताकुंड घाट पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करते हुए बैरिकेडिंग करवाए और वहां जल पुलिस की तैनाती भी सुनिश्चित करे। वहीं दूसरी ओर सीताकुंड के ही रहने वाले तेजस पांडेय ने भी यह मांग दोहराई है कि घाट पर सुरक्षा के लिहाज से बेहतर और ठोस कदम उठाए जाने चाहिए। इसका आप पर असर भारत में: - उत्तर प्रदेश में: सुल्तानपुर और आसपास के जिलों में मानसून के दौरान नदियों के बढ़ते जलस्तर से निचले इलाकों और घाटों पर आने वाले लोगों को जलभराव और सुरक्षा संबंधी जोखिमों का सामना करना पड़ता है। सवाल-जवाब 1. सुल्तानपुर में कौन सी नदी का जलस्तर बढ़ रहा है? सुल्तानपुर में गोमती नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। 2. बढ़ते जलस्तर से कौन सा घाट जलमग्न हुआ है? गोमती नदी का पानी बढ़ने से प्रसिद्ध सीताकुंड घाट पूरी तरह जलमग्न हो गया है। 3. नाविकों के संबंध में क्या लापरवाही सामने आई है? घाट पर नाव चलाने वाले नाविकों के पास किसी भी प्रकार की सेफ्टी किट या लाइफ जैकेट उपलब्ध नहीं है। 4. स्थानीय खिलाड़ियों को किस समस्या का सामना करना पड़ रहा है? घाट के पास बने कबड्डी ग्राउंड में पानी भर जाने से खिलाड़ियों का अभ्यास प्रभावित हुआ है और मैदान क्षतिग्रस्त हो गया है। https://trendkia.com/bihar/sulatanapura-men-gomati-ka-jalastara-barhane-se-sitakunda-ghata-duba-navikon-ke-pasa-suraksha-kita-ka-abhava-20034 TrendKia — Har trend, sabse pehle.