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  "type": "article",
  "title": "सुपौल में ब्रांडेड कंपनियों के नाम पर नकली गुलाब जल बनाने का भंडाफोड़, एक व्यक्ति गिरफ्तार",
  "summary": "बिहार के सुपौल में पटना कॉपीराइट विभाग और पुलिस ने छापा मारकर डाबर और पतंजलि के नाम पर तैयार किया जा रहा हजारों बोतल नकली गुलाब जल और भारी मात्रा में रैपर जब्त किए हैं।",
  "content": "बिहार के सुपौल जिले के राघोपुर थाना अंतर्गत एक रिहायशी इलाके में नामी कंपनियों के लेबल लगाकर नकली गुलाब जल तैयार करने के गोरखधंधे पर प्रशासन ने कड़ा शिकंजा कसा है। देवीपुर पंचायत स्थित जहलीपट्टी वार्ड 8 में गुरुवार को पटना से आई कॉपीराइट विभाग की टीम और स्थानीय पुलिस ने मिलकर एक मकान पर औचक दबिश दी। इस संयुक्त कार्रवाई के दौरान भारी तादाद में कथित तौर पर नकली गुलाब जल, नामी ब्रांडों के लेबल और पैकिंग का सामान बरामद किया गया। अधिकारियों ने मौके से इस अवैध निर्माण और पैकेजिंग से जुड़े 42 वर्षीय आरोपी ब्रह्मदेव साह को हिरासत में ले लिया है, जो शुभलाल साह का पुत्र बताया गया है।\n\nब्रांडेड कंपनियों के नाम पर हजारों बोतलों का जखीरा जब्त\nछापेमारी दल जब मौके पर पहुंचा तो वहां बड़े पैमाने पर चल रही पैकेजिंग देखकर दंग रह गया। मकान के भीतर से प्रसिद्ध ब्रांड डाबर और पतंजलि के लेबल लगी तैयार बोतलों का भारी स्टॉक मिला। जांच में 100 एमएल वाली डाबर गुलाब जल की 1,775 बोतलें और पतंजलि के नाम से भरी 100 एमएल की 1,825 बोतलें पाई गईं। तैयार उत्पाद के अलावा मौके से 1,184 खाली बोतलें भी बरामद की गईं, जिन्हें भरा जाना बाकी था। इसके अतिरिक्त पैकेजिंग के लिए तैयार किए गए प्रिंटेड लेबल्स में पतंजलि ब्रांड वाले 748 शीट रैपर और डाबर के नाम वाले 7,425 शीट रैपर जब्त किए गए। कार्रवाई के दौरान एक बाल्टी में रखा खुला गुलाब जल और उसे बनाने में इस्तेमाल होने वाला एक बोतल केमिकल भी टीम के हाथ लगा।\n\nपटना कॉपीराइट विभाग को मिली शिकायत पर हुई कार्रवाई\nप्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार यह पूरी कार्रवाई एक ठोस सूचना के बाद अमल में लाई गई है। कॉपीराइट विभाग पटना को अजय पंडित की तरफ से इस संबंध में एक औपचारिक शिकायत प्राप्त हुई थी। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि जहलीपट्टी इलाके में बड़े ब्रांडों के ट्रेडमार्क और लेबल की नकल कर अवैध रूप से कॉस्मेटिक उत्पादों की पैकेजिंग की जा रही है। इस शिकायत की प्राथमिक पड़ताल के बाद पटना से टीम सुपौल पहुंची और राघोपुर थाना पुलिस के साथ मिलकर चिह्नित ठिकाने पर योजनाबद्ध तरीके से रेड की गई। बरामद सारी सामग्री को सील कर स्थानीय पुलिस के हवाले कर दिया गया है।\n\nवितरण नेटवर्क और केमिकल की गुणवत्ता पर जांच केंद्रित\nकॉपीराइट विभाग के अधिकारियों का कहना है कि बरामद सामग्री से साफ पता चलता है कि नामी कंपनियों की साख का फायदा उठाकर नकली माल बाजार में खपाने की तैयारी थी। हालांकि, बाल्टी में रखे तरल और बोतलों में भरे गुलाब जल की वास्तविक गुणवत्ता तथा उसमें मिलाए गए केमिकल की पुष्टि प्रयोगशाला जांच के बाद ही हो सकेगी। राघोपुर थानाध्यक्ष अमित कुमार राय ने स्पष्ट किया कि कॉपीराइट विभाग की ओर से मिली तहरीर और जब्त सामान के आधार पर कानूनी प्रावधानों के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब इस बिंदु पर तफ्तीश कर रही है कि यह अवैध धंधा कितने समय से संचालित था, इसमें कौन-कौन से सहयोगी शामिल हैं और यह नकली उत्पाद किन-किन बाजारों और खुदरा दुकानों तक पहुंचाया जा रहा था।\n\nइसका आप पर असर\nब्रांडेड सौंदर्य और त्वचा उत्पादों की नकल कर तैयार किए जा रहे अवैध माल के पकड़े जाने से सीधे तौर पर उपभोक्ताओं की सेहत और बाजार की विश्वसनीयता जुड़ी है।\n\n• भारत में: देश भर के उपभोक्ताओं को खुले बाजार या असत्यापित खुदरा दुकानों से स्किनकेयर उत्पाद खरीदते समय सील और पैकेजिंग की बारीकी से जांच करनी चाहिए। संदिग्ध या असामान्य रूप से सस्ते उत्पादों की सूचना तत्काल कंपनी के हेल्पलाइन नंबर या उपभोक्ता फोरम पर दी जा सकती है।\n• सुपौल में: स्थानीय खुदरा दुकानदारों और ग्राहकों को हाल ही में खरीदे गए डाबर या पतंजलि गुलाब जल के बैच और बिल का मिलान करना चाहिए। यदि किसी उत्पाद की गंध या पैकेजिंग असामान्य लगे, तो उसका उपयोग तुरंत रोककर स्थानीय पुलिस या प्रशासन को सूचित करना जरूरी है।\n• त्वचा की सुरक्षा: अनियंत्रित रसायनों और खुले पानी से बने नकली गुलाब जल के इस्तेमाल से त्वचा पर एलर्जी या संक्रमण का गंभीर जोखिम रहता है। किसी भी प्रकार की जलन या रैशेज होने पर उत्पाद का उपयोग बंद करके फौरन त्वचा रोग विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए।\n• खुदरा कारोबारियों पर: अनधिकृत वेंडरों से बिना पक्के बिल के सामान खरीदने वाले दुकानदारों के खिलाफ भी कॉपीराइट और धोखाधड़ी के तहत कार्रवाई हो सकती है। सभी व्यापारियों को केवल अधिकृत डिस्ट्रीब्यूटरों से ही स्टॉक की खरीद सुनिश्चित करनी चाहिए।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह कार्रवाई नामी ब्रांडों की बौद्धिक संपदा की सुरक्षा और उपभोक्ताओं को ठगने वाले अवैध नेटवर्क की रोकथाम के उद्देश्य से की गई।\n\n• सीधी वजह: अजय पंडित नामक व्यक्ति द्वारा पटना स्थित कॉपीराइट विभाग को दी गई विशिष्ट शिकायत के बाद यह कार्रवाई शुरू हुई। शिकायत में जहलीपट्टी में चल रही अवैध पैकेजिंग की सटीक जानकारी दी गई थी।\n• मुनाफे का तरीका: ब्रांडेड कॉस्मेटिक उत्पादों की भारी बाजार मांग का अनुचित लाभ उठाने के लिए खाली बोतलों में स्थानीय केमिकल युक्त तरल भरकर महंगे ब्रांडों के रैपर चिपकाए जा रहे थे। इस तरह बेहद कम लागत में माल तैयार कर बाजार में खपाया जाना था।\n• जांच का दायरा: पुलिस और तकनीकी टीम अब जब्त किए गए तरल की रासायनिक जांच करा रही है ताकि उसमें मौजूद तत्वों का पता लगाया जा सके। साथ ही यह पता लगाया जा रहा है कि रैपर कहां छपवाए गए थे और तैयार माल किन-किन जिलों के बाजारों तक पहुंचाया जा रहा था।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. छापेमारी किस स्थान पर की गई?\nयह कार्रवाई बिहार के सुपौल जिले के राघोपुर थाना अंतर्गत देवीपुर पंचायत स्थित जहलीपट्टी वार्ड 8 में की गई।\n\n2. मौके से किसे गिरफ्तार किया गया है?\nपुलिस ने जहलीपट्टी निवासी शुभलाल साह के 42 वर्षीय पुत्र ब्रह्मदेव साह को मौके से गिरफ्तार किया है।\n\n3. कार्रवाई में किन कंपनियों के नाम का माल पकड़ा गया?\nछापेमारी में डाबर और पतंजलि ब्रांड के नाम से तैयार की गई गुलाब जल की बोतलें और रैपर बरामद किए गए हैं।\n\n4. कितनी तैयार बोतलें जब्त की गईं?\n100 एमएल की डाबर गुलाब जल की 1,775 बोतलें और पतंजलि गुलाब जल की 1,825 बोतलें जब्त की गई हैं।\n\n5. क्या खाली बोतलें और रैपर भी बरामद हुए हैं?\nहां, 1,184 खाली बोतलें, पतंजलि के 748 शीट रैपर और डाबर के 7,425 शीट रैपर बरामद किए गए हैं।\n\n6. मामले में आगे क्या कानूनी कदम उठाए जा रहे हैं?\nराघोपुर पुलिस ने जब्त सामग्री को कब्जे में लेकर मामला दर्ज किया है और आपूर्ति नेटवर्क का पता लगाने के लिए जांच कर रही है।",
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  "category": "बिहार",
  "publishedAt": "2026-09-24",
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