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  "title": "तटीय संपत्तियों से आर्थिक तरक्की को नई रफ्तार देगा भारत, जानिए पीएम नरेंद्र मोदी के सप्तधारा विजन में क्यों खास है नीली अर्थव्यवस्था",
  "summary": "15 अगस्त को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'विकसित भारत' के निर्माण के लिए सात-सूत्रीय 'सप्तधारा' विजन प्रस्तुत किया, जिसमें सतत आर्थिक विकास के लिए नीली अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण स्तंभ माना गया है।",
  "content": "भारत की आर्थिक और रणनीतिक क्षमताओं को सशक्त बनाते हुए वर्ष 2047 तक 'विकसित भारत' का लक्ष्य हासिल करने के लिए एक विस्तृत रूपरेखा सामने रखी गई है। 15 अगस्त के अवसर पर 80वें स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश की प्रगति को नई दिशा देने के लिए 'सप्तधारा' नाम से सात-सूत्रीय विकास विजन की घोषणा की। इस व्यापक फ्रेमवर्क में विनिर्माण, कृषि तथा खाद्य प्रसंस्करण, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार, गति शक्ति, रक्षा क्षेत्र, ग्रीन और ब्लू इकोनॉमी के साथ-साथ सॉफ्ट पावर को देश की भावी उन्नति का मुख्य आधार स्वीकार किया गया है। इस विजन का प्राथमिक उद्देश्य भारत के विशाल प्राकृतिक संसाधनों, पर्यावरणीय संपदा और तटीय इलाकों की क्षमता का पूर्ण दोहन करते हुए आर्थिक गतिविधियों को पर्यावरण की सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और समुद्री अवसरों से जोड़ना है।\n\nसमुद्री पारिस्थितिकी और सतत विकास का नया ढांचा\nनीली अर्थव्यवस्था यानी 'ब्लू इकोनॉमी' की अवधारणा मूल रूप से समुद्र और तटीय क्षेत्रों में मौजूद प्राकृतिक संसाधनों के जिम्मेदार और सतत उपयोग पर आधारित है। इसका मुख्य लक्ष्य तटीय पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए आर्थिक वृद्धि को बढ़ावा देना तथा करोड़ों लोगों की आजीविका के साधनों को समृद्ध बनाना है। यदि सरल शब्दों में समझा जाए, तो यह समुद्री व्यापार, जल परिवहन और तटीय गतिविधियों को इस तरह संचालित करने का दृष्टिकोण है, जिससे पर्यावरण और जीव-जंतुओं को नुकसान पहुंचाए बिना दीर्घकालिक वित्तीय लाभ अर्जित किए जा सकें।\n\nमत्स्य पालन से लेकर ऊर्जा उत्पादन तक फैले प्रमुख क्षेत्र\nब्लू इकोनॉमी केवल पारंपरिक रूप से मछली पकड़ने या समुद्री तटों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके अंतर्गत स्थापित और उभरते हुए कई आधुनिक क्षेत्र शामिल हैं\n\n• मत्स्य पालन एवं एक्वाकल्चर: इसके तहत वैज्ञानिक तरीकों से मछली पालन, समुद्री जीवों का संवर्धन और सी-फूड प्रसंस्करण उद्योगों को आधुनिक बनाना शामिल है।\n• समुद्री परिवहन तथा बंदरगाह विकास: वर्तमान में संपूर्ण वैश्विक व्यापार का 80% से अधिक हिस्सा समुद्री मार्गों और जहाजों के माध्यम से संचालित होता है। इस प्रणाली को पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए हरित बंदरगाहों का निर्माण और कुशल जहाजरानी नेटवर्क का विस्तार इसका मुख्य घटक है।\n• समुद्री पर्यटन: तटीय क्षेत्रों में इको-टूरिज्म, क्रूज पर्यटन और वॉटर स्पोर्ट्स जैसी गतिविधियों को बढ़ावा देकर स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जाता है।\n• नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन: समुद्र की लहरों, ज्वार-भाटा प्रणाली और तटीय पवन ऊर्जा की मदद से स्वच्छ और प्रदूषण-मुक्त बिजली का निर्माण करना।\n• गहरे समुद्र में खनन और बायो-टेक्नोलॉजी: महासागर की गहराई में मौजूद पॉलीमेटेलिक नोड्यूल्स जैसे बहुमूल्य खनिजों का निष्कर्षण करना और समुद्री जीवों के तत्वों से जीवनरक्षक दवाएं एवं औद्योगिक सामग्री तैयार करना।\n\nपारंपरिक समुद्री अर्थव्यवस्था से नीली अर्थव्यवस्था का अंतर\nपारंपरिक रूप से प्रचलित 'समुद्री अर्थव्यवस्था' में मुख्य रूप से समुद्र से मिलने वाले संसाधनों के अधिकतम दोहन और वित्तीय लाभ पर ही ध्यान केंद्रित किया जाता था। इस पुरानी व्यवस्था में अत्यधिक मछली पकड़ने या तेल रिसाव जैसे गंभीर पर्यावरणीय दुष्प्रभावों को अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता था। इसके विपरीत, नीली अर्थव्यवस्था पूरी तरह से सततता के सिद्धांत पर कार्य करती है। इसका स्पष्ट नियम है कि मानव समाज समुद्र से केवल उतना ही संसाधन प्राप्त करे जितने को समुद्र प्राकृतिक रूप से पुनः भर सके। इसके साथ ही, महासागरों में प्लास्टिक, रासायनिक कचरा या अन्य प्रदूषक पदार्थ फेंकने पर पूर्ण विराम लगाना इसका अनिवार्य नियम है।\n\nभारत की रणनीतिक भौगोलिक स्थिति और अपार संभावनाएं\nभारत के आर्थिक परिदृश्य में नीली अर्थव्यवस्था का महत्व अत्यंत व्यापक है, क्योंकि देश के पास समुद्री संसाधनों का अपार भंडार मौजूद है\n\n• विशाल समुद्री तटरेखा: भारत के पास लगभग 7516 किलोमीटर लंबी सुरम्य समुद्री तटरेखा है, जो देश के 9 तटीय राज्यों से होकर गुजरती है।\n• एक्सक्लूसिव इकोनॉमिक ज़ोन: भारत का विशेष आर्थिक क्षेत्र 20 लाख वर्ग किलोमीटर से भी अधिक क्षेत्रफल में फैला हुआ है, जो विविध संसाधनों से समृद्ध है।\n• रोजगार और आजीविका: देश की करोड़ों की आबादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर अपनी रोजी-रोटी और रोजगार के लिए समुद्री गतिविधियों पर निर्भर है।\n• डीप ओशन मिशन: भारत सरकार ने गहरे समुद्र के रहस्यमयी क्षेत्रों, खनिजों और जैविक संपदा की खोज के लिए अपना महत्वाकांक्षी 'डीप ओशन मिशन' संचालित किया है।\n\nजिस प्रकार जमीन पर पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ विकास को बढ़ावा देने के लिए 'ग्रीन इकोनॉमी' का मॉडल अपनाया जाता है, ठीक उसी तर्ज पर महासागरों के संरक्षण और तटीय संपत्तियों के सही इस्तेमाल के लिए नीली अर्थव्यवस्था कार्य करती है।\n\nइसका आप पर असर\nभारत में: तटीय क्षेत्रों में रहने वाले करोड़ों लोगों के लिए रोजगार और स्वच्छ ऊर्जा के नए अवसर पैदा होंगे।\n\nतटीय राज्यों में: 9 तटीय राज्यों में हरित बंदरगाहों, सी-फूड प्रोसेसिंग और समुद्री पर्यटन के विस्तार से स्थानीय व्यापार को मजबूती मिलेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. ब्लू इकोनॉमी या नीली अर्थव्यवस्था का क्या अर्थ है?\nब्लू इकोनॉमी का अर्थ समुद्र और तटीय संसाधनों का ऐसा टिकाऊ उपयोग है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना आर्थिक विकास और रोजगार को बढ़ावा मिले।\n\n2. पीएम नरेंद्र मोदी ने सप्तधारा विजन की घोषणा कब की?\nप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को 80वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर लाल किले से 'सप्तधारा' विकास विजन की घोषणा की।\n\n3. भारत के पास कितनी लंबी समुद्री तटरेखा उपलब्ध है?\nभारत के पास लगभग 7516 किलोमीटर लंबी विस्तृत समुद्री तटरेखा है, जो देश के 9 तटीय राज्यों में फैली हुई है।\n\n4. पारंपरिक समुद्री अर्थव्यवस्था से नीली अर्थव्यवस्था किस तरह अलग है?\nपारंपरिक अर्थव्यवस्था में केवल संसाधनों के दोहन और मुनाफे पर जोर होता था, जबकि नीली अर्थव्यवस्था में समुद्र की सुरक्षा और सततता को प्राथमिकता दी जाती है।",
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  "category": "बिहार",
  "publishedAt": "2026-08-15",
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