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  "type": "article",
  "title": "संयुक्त राष्ट्र में भारत की पाकिस्तान को दो टूक, सिंधु जल संधि और पीओके पर दिया कड़ा संदेश",
  "summary": "संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि पी. हरिश ने पाकिस्तान को आड़े हाथों लेते हुए स्पष्ट किया है कि आतंकवाद और आपसी विश्वास एक साथ नहीं चल सकते। इसके साथ ही पीओके में प्राकृतिक संसाधनों की लूट और स्थानीय लोगों के अधिकारों का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया।",
  "content": "संयुक्त राष्ट्र में भारत ने एक बार फिर पाकिस्तान की पोल खोलते हुए उसे बेहद कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। वैश्विक मंच पर भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए स्थायी प्रतिनिधि पी. हरिश ने यह बिलकुल साफ कर दिया कि सीमा पार से आतंकवाद को प्रायोजित करने वाले देश के साथ किसी भी तरह के आपसी भरोसे या सहयोग की उम्मीद नहीं की जा सकती। उन्होंने अपने संबोधन में बिना सीधे तौर पर नाम लिए पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में चल रहे भारी विरोध प्रदर्शनों, आजादी की उठती मांगों और प्राकृतिक संसाधनों की लूट का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया। भारत का यह कड़ा कूटनीतिक रुख ऐसे समय में सामने आया है, जब पाकिस्तान 65 साल पुरानी सिंधु जल संधि को लेकर अंतरराष्ट्रीय बिरादरी के सामने आंसू बहा रहा है। वहीं, भारत ने दो टूक शब्दों में यह तय कर दिया है कि जब तक पाकिस्तान अपने यहां पल रहे आतंकी ढांचे को खत्म नहीं करता, तब तक पानी के बंटवारे पर कोई भी बातचीत संभव नहीं है।\n\n \n\nआतंकवाद और आपसी विश्वास एक साथ असंभव\n\nसिंधु जल समझौते पर भारत का नया और कड़ा रुख संयुक्त राष्ट्र में भी मजबूती से गूंजा। पी. हरिश ने बेहद सख्त लहजे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के सामने कहा कि \"आतंकवाद और भरोसा साथ-साथ नहीं चल सकते।\" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब कोई पड़ोसी देश लगातार सीमा पार से आतंकी गतिविधियों को हवा देता है और आतंकियों को पनाह देता है, तो उसके साथ आपसी विश्वास और सहयोग कायम करना पूरी तरह से नामुमकिन हो जाता है। भारत ने स्पष्ट किया है कि भविष्य में किसी भी नए जल समझौते पर या वर्तमान संधि पर विचार-विमर्श तभी किया जाएगा, जब पाकिस्तान अपनी जमीन से पनपने वाले आतंकवाद के खिलाफ कोई ठोस, निर्णायक और विश्वसनीय कार्रवाई करेगा। पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकी हमले के कड़े जवाब के तौर पर भारत ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया था। इसी सैन्य और रणनीतिक कार्रवाई के साथ ही भारत ने एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए सिंधु जल संधि को उसके मौजूदा स्वरूप में पूरी तरह रद्द करने का भी ऐलान कर दिया था। अब पाकिस्तान इस संधि को फिर से बहाल करने के लिए दुनिया भर में छटपटा रहा है और भारत के रुख का विरोध कर रहा है, लेकिन नई दिल्ली अपनी शर्तों पर पूरी तरह से अडिग है।\n\n \n\nपीओके में संसाधनों की लूट और सुलगता कश्मीर\n\nसंयुक्त राष्ट्र के मंच से भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) की जमीनी हकीकत भी पूरी दुनिया के सामने बेनकाब कर दी। इस पूरे इलाके में लंबे समय से आजादी और अपने बुनियादी अधिकारों की मांग को लेकर भारी बवाल चल रहा है, और लोग लगातार सड़कों पर उतर रहे हैं। पाकिस्तान की सरकार और सेना इन आवाजों को बलपूर्वक तथा क्रूरता से दबाने की कोशिश कर रही है। भारत ने इस स्थिति पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिन देशों या क्षेत्रों में तेल, गैस, खनिज और अन्य बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधन मौजूद हैं, वहां के स्थानीय लोगों को उस प्राकृतिक संपदा का उचित हिस्सा अनिवार्य रूप से मिलना चाहिए। अगर स्थानीय नागरिकों को सुनियोजित तरीके से उनके हकों से वंचित रखा जाता है, तो वहां भयानक आंतरिक अस्थिरता और सुरक्षा का बड़ा संकट पैदा होता है। भारत ने अपने इस बयान से साफ कर दिया कि पीओके में जो हिंसक अशांति फैली हुई है, उसकी मूल वजह पाकिस्तान द्वारा वहां के संसाधनों का अंधाधुंध दोहन और स्थानीय निवासियों का अमानवीय दमन है।\n\n \n\nजम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न और अविभाज्य अंग\n\nभारत ने संयुक्त राष्ट्र में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर अपनी चिर-परिचित, ऐतिहासिक और मजबूत स्थिति को एक बार फिर से दोहराया। भारतीय प्रतिनिधि ने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की कि जम्मू-कश्मीर हमेशा से भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा था, आज भी है, और भविष्य में भी रहेगा। पाकिस्तान लगातार इस संवैधानिक और कानूनी सच्चाई को नजरअंदाज करते हुए वैश्विक मंचों पर झूठ और प्रोपेगेंडा फैलाने की कोशिश करता रहता है। भारत ने मंच से बिल्कुल साफ कर दिया कि जम्मू-कश्मीर को लेकर अगर कोई असली और एकमात्र मुद्दा बचा है, तो वह केवल पाकिस्तान द्वारा भारतीय क्षेत्र पर किया गया अवैध और अलोकतांत्रिक कब्जा है, जिसे हर हाल में खत्म होना चाहिए।\n\n \n\nदूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने घर को सुधारे पाकिस्तान\n\nअपने बेहद तीखे बयान के आखिरी हिस्से में भारत ने पाकिस्तान को एक सख्त और व्यावहारिक नसीहत भी दी। भारत ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय मंचों पर दूसरों पर बेबुनियाद आरोप लगाने और बेवजह उंगली उठाने के बजाय, पाकिस्तान को अपनी गंभीर आंतरिक समस्याओं को सुलझाने पर ध्यान देना चाहिए। आज के समय में पाकिस्तान भयानक राजनीतिक अस्थिरता, अब तक के सबसे बड़े आर्थिक संकट और अपने ही कब्जे वाले क्षेत्रों में जनता के भारी विद्रोह का सामना कर रहा है। ऐसे हालात में भारत की यह स्पष्ट सलाह पाकिस्तान के लिए एक आईने की तरह है, जो उसे यह बताती है कि वह कश्मीर का झूठा राग अलापने के बजाय पहले अपने घर में लगी आग को बुझाने पर काम करे।\n\nइसका आप पर असर\n• भारत में: यह कड़ा रुख दर्शाता है कि भारत सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कोई समझौता नहीं करेगी, जिससे सीमा पर रहने वाले नागरिकों को अधिक सुरक्षित महसूस होगा।\n• कूटनीतिक असर: सिंधु जल समझौते के रद्द होने से भविष्य में पानी के बंटवारे को लेकर भारत का पलड़ा भारी रहेगा, जिसका सीधा लाभ उत्तरी राज्यों के किसानों को मिल सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. संयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व किसने किया?\nसंयुक्त राष्ट्र में भारत का प्रतिनिधित्व स्थायी प्रतिनिधि पी. हरिश ने किया।\n\n2. भारत ने सिंधु जल संधि के बारे में क्या कहा?\nभारत ने स्पष्ट किया कि जब तक पाकिस्तान आतंकवाद पर ठोस कार्रवाई नहीं करता, तब तक विश्वास और जल समझौते पर बातचीत एक साथ नहीं चल सकते।\n\n3. पीओके को लेकर भारत ने यूएन में क्या मुद्दा उठाया?\nभारत ने कहा कि पीओके में प्राकृतिक संसाधनों का भारी दोहन हो रहा है, जिससे स्थानीय लोगों को उनका हक नहीं मिल रहा और इसी वजह से वहां आंतरिक अस्थिरता फैली है।\n\n4. ऑपरेशन सिंदूर क्या था?\nऑपरेशन सिंदूर पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में भारत द्वारा की गई एक कड़ी कार्रवाई थी, जिसके बाद सिंधु जल समझौते को मौजूदा स्वरूप में रद्द कर दिया गया था।",
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  "category": "बिहार",
  "publishedAt": "2026-07-23",
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