अमेकिरी विमानन एजेंसी के सुरक्षा ऑडिट से पहले डीजीसीए पर बढ़ा दबाव, भारत के लिए कैटेगरी 1 रेटिंग बचाना बना अहम अमेरिकी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन की टीम 16 से 20 नवंबर तक भारत के नागरिक उड्डयन तंत्र का व्यापक सुरक्षा ऑडिट करेगी। घरेलू एयरलाइंस की जांच में कमियां मिलने और एआई 171 हादसे की अंतिम रिपोर्ट आने से पहले भारत के लिए अपनी कैटेगरी 1 रेटिंग बनाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है। भारत के नागरिक उड्डयन क्षेत्र के लिए आगामी नवंबर का महीना सुरक्षा और नियामक मानकों की कसौटी पर बेहद महत्वपूर्ण साबित होने जा रहा है। अमेरिकी उड्डयन नियामक फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) का एक पांच सदस्यीय दल 16 नवंबर से 20 नवंबर के बीच भारत के आधिकारिक दौरे पर आ रहा है। इस पांच दिवसीय समीक्षा के दौरान अमेरिकी टीम भारत की नागरिक उड्डयन नियामक संस्था डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) के सुरक्षा तंत्र, निगरानी व्यवस्था और प्रशासनिक कामकाज का गहराई से मूल्यांकन करेगी। वर्तमान में भारत अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा आकलन (IASA) कार्यक्रम के तहत शीर्ष दर्जा हासिल करते हुए कैटेगरी 1 में शामिल है। यह आगामी मूल्यांकन तय करेगा कि भारत अपनी इस वैश्विक साख और शीर्ष श्रेणी को आगे भी बरकरार रख पाता है या नहीं। घरेलू एयरलाइंस के ऑडिट में उजागर हुईं कमियां अमेरिकी टीम के आगमन से ठीक पहले भारतीय विमानन नियामक डीजीसीए द्वारा देश की चार प्रमुख एयरलाइंस का किया गया आंतरिक सुरक्षा ऑडिट सरकार के लिए चिंता का विषय बन गया है। अगस्त के महीने में आयोजित इस व्यापक ऑडिट के दौरान एयरलाइंस के परिचालन और रखरखाव संबंधी व्यवस्था में कई गंभीर कमियां दर्ज की गई थीं। यद्यपि डीजीसीए ने इन जांच निष्कर्षों का विस्तृत ब्योरा आधिकारिक रूप से सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन इस ऑडिट ने विमानन तंत्र की अंदरूनी खामियों की ओर इशारा किया है। नियमों के मुताबिक, जिन विमानन कंपनियों की जांच में यह गड़बड़ियां पाई गई हैं, उन्हें डीजीसीए द्वारा जारी फाइंडिंग्स पर अपना औपचारिक जवाब दाखिल करना होगा। एयरलाइंस से जवाब प्राप्त होने के बाद नियामक संस्था उनकी विस्तृत समीक्षा करेगी। यदि एयरलाइंस की ओर से दी गई सफाई असंतोषजनक पाई जाती है या सुरक्षा मानकों का उल्लंघन बना रहता है, तो डीजीसीए संबंधित कंपनियों के खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई भी कर सकता है। ऐसे में नवंबर में अमेरिकी दल के पहुंचने से पहले डीजीसीए के समक्ष सबसे प्राथमिक चुनौती अपने ऑडिट में उजागर हुई सभी कमियों का पारदर्शी ढंग से समाधान करना और देश की विमानन सुरक्षा संरचना को पूरी तरह चुस्त-दुरुस्त साबित करना है। तैयारी का सीमित समय और पायलटों की जांच का नया खाका अंतरराष्ट्रीय ऑडिट की तारीखें नजदीक होने के कारण भारत सरकार के पास तैयारियों को पूरा करने के लिए केवल दो महीने का समय बचा है। इस स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने आश्वस्त किया है कि अमेरिकी उड्डयन एजेंसी के मूल्यांकन की शुरुआत से पहले सभी अनिवार्य व्यवस्थाएं और मानक सुधार समय पर पूरे कर लिए जाएंगे। सरकार को एक साथ कई मोर्चों पर काम करना पड़ रहा है, जिसमें एयरलाइंस की सुरक्षा कमियों को दूर करना, मानक परिचालन प्रक्रियाओं में सुधार लाना और पायलटों के नियमित स्वास्थ्य व दक्षता परीक्षण तंत्र को सुदृढ़ करना शामिल है। पायलटों की नियमित जांच व्यवस्था में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव भी प्रस्तावित किया जा रहा है। वर्तमान में लागू व्यवस्था के अंतर्गत देश के केवल 10 प्रतिशत पायलटों की ही यादृच्छिक या नियमित आधार पर गहन जांच की जाती है। सरकार अब इस दायरे को विस्तारित करके 100 प्रतिशत पायलटों को इसके तहत लाने पर गंभीरता से विचार कर रही है। नागरिक उड्डयन मंत्री के अनुसार, देश के प्रत्येक पायलट की वर्ष में कम से कम एक बार अनिवार्य जांच होनी चाहिए। इस नए प्रस्ताव पर विमानन क्षेत्र के सभी हितधारकों के साथ चर्चा का दौर जारी है और जल्द ही इस संबंध में नए नियम अधिसूचित किए जा सकते हैं। अहमदाबाद एआई 171 दुर्घटना की अंतिम जांच रिपोर्ट पर नजरें सुरक्षा ऑडिट से ठीक पहले अहमदाबाद में हुए भीषण एआई 171 विमान हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट भी सामने आने की उम्मीद है। 12 जून 2025 को अहमदाबाद हवाई अड्डे से उड़ान भरने के तुरंत बाद एयर इंडिया का बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (AAIB) की शुरुआती जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ था कि टेकऑफ के चंद सेकंड बाद ही विमान के दोनों इंजनों के फ्यूल कंट्रोल स्विच स्वतः 'रन' की स्थिति से हटकर 'कटऑफ' की स्थिति में चले गए थे। इस अचानक बदलाव के कारण दोनों इंजनों का थ्रस्ट पूरी तरह खत्म हो गया था, जिससे यह हादसा हुआ। वर्तमान में इस हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट अपने अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को सूचित किया है कि इस विस्तृत रिपोर्ट का अंतिम मसौदा अक्टूबर के प्रथम सप्ताह में एक सीलबंद लिफाफे में अदालत को सौंपा जाएगा। शीर्ष अदालत में इस संवेदनशील मामले पर अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 13 अक्टूबर को निर्धारित की गई है। इस जांच के निष्कर्ष अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय विमानन सुरक्षा की छवि को गहराई से प्रभावित कर सकते हैं। डीजीसीए के पिछले ऑडिट रिकॉर्ड और खामियों का वर्गीकरण यदि डीजीसीए के पिछले सालाना सुरक्षा ऑडिट के रिकॉर्ड पर नजर डालें, तो कुल 263 सुरक्षा खामियां दर्ज की गई थीं। नियामक की वर्गीकरण प्रणाली के अनुसार, इनमें से 19 कमियां 'लेवल 1' श्रेणी की पाई गई थीं। डीजीसीए के मानकों में लेवल 1 की खामियों को अत्यंत गंभीर माना जाता है, जिनमें तत्काल सुधारात्मक कदम उठाना अनिवार्य होता है। इसके विपरीत, लेवल 2 की कमियां अपेक्षाकृत कम जोखिम वाली होती हैं और उन्हें दूर करने के लिए एक निश्चित समयसीमा तय की जाती है। विभिन्न विमानन कंपनियों के बेड़े की जांच के दौरान अलग-अलग एयरलाइंस में क्रमशः 57, 51, 41, 23 और 14 सुरक्षा खामियां दर्ज की गई थीं। उस समय डीजीसीए ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा था कि बड़े बेड़े और अधिक उड़ानों का संचालन करने वाली एयरलाइंस में खामियों की संख्या अधिक होना उनके विशाल परिचालन आकार से जुड़ा हो सकता है। हालांकि, अमेरिकी उड्डयन एजेंसी इन सभी आंकड़ों का सूक्ष्मता से विश्लेषण करेगी। कैटेगरी 1 दर्जा बरकरार रहने का महत्व और कैटेगरी 2 के जोखिम अमेरिकी नियामक एफएए द्वारा भारत को दी जाने वाली सुरक्षा श्रेणी सीधे तौर पर भारत और अमेरिका के बीच हवाई उड़ानों के विस्तार को निर्धारित करती है। यदि भारत अपनी कैटेगरी 1 रेटिंग को बरकरार रखने में सफल रहता है, तो भारतीय विमानन कंपनियों को अमेरिका के नए शहरों के लिए सीधी उड़ानें शुरू करने और अपने अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का विस्तार करने की पूर्ण स्वतंत्रता रहेगी। इसके अलावा, अमेरिकी एयरलाइंस के साथ कोडशेयर समझौतों को भी सुचारू रूप से आगे बढ़ाया जा सकेगा। इसके विपरीत, यदि मूल्यांकन में कमियां पाई जाती हैं और भारत को डिमोट करके कैटेगरी 2 में डाल दिया जाता है, तो भारतीय एयरलाइंस पर अमेरिका के लिए नई उड़ानें शुरू करने पर तत्काल रोक लग जाएगी। साथ ही, मौजूदा कोडशेयर व्यवस्थाएं भी निलंबित या प्रभावित हो सकती हैं। यद्यपि भारत से अमेरिका के लिए वर्तमान में चल रही उड़ानें जारी रहेंगी, लेकिन अमेरिकी नियामक एफएए द्वारा भारतीय विमानों और परिचालन तंत्र की निगरानी व निरीक्षण बहुत अधिक बढ़ा दिया जाएगा, जिससे अंतरराष्ट्रीय साख को झटका लगेगा। सुरक्षा मानकों पर खरा उतरने की अंतिम परीक्षा नवंबर की समयसीमा से पहले नियामक और एयरलाइंस दोनों के लिए हर छोटी से छोटी सुरक्षा कमी का पारदर्शी हिसाब पूरा करना अनिवार्य हो गया है। एक तरफ जहां डीजीसीए को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अपनी निगरानी क्षमता और नियामक दृढ़ता साबित करनी है, वहीं दूसरी तरफ एयरलाइंस को ऑडिट में पाई गई कमियों का त्वरित निस्तारण करना है। इसके साथ ही, 100 प्रतिशत पायलट जांच का नया नियम लागू करना और एआई 171 हादसे की पारदर्शी रिपोर्ट पेश करना इस पूरी प्रक्रिया के अहम पड़ाव हैं। अमेरिकी नियामक की यह पांच दिवसीय यात्रा केवल एक औपचारिक निरीक्षण नहीं होगी, बल्कि यह तय करेगी कि भारतीय विमानन उद्योग वैश्विक सुरक्षा मानकों पर कितना खरा उतरता है। इसका आप पर असर भारत की एविएशन रेटिंग का सीधा असर हवाई यात्रियों के किराए, नई अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और यात्रा सुविधाओं पर पड़ेगा। • भारत में यात्रियों के लिए: यदि रेटिंग कैटेगरी 1 बनी रहती है, तो एयरलाइंस अमेरिका के लिए नई सीधी उड़ानें शुरू कर सकेंगी। इससे अमेरिका जाने वाले यात्रियों को अधिक विकल्प और कम किराए का लाभ मिल सकता है। • कैटेगरी 2 में डिमोशन होने पर: रेटिंग घटने की स्थिति में भारतीय एयरलाइंस अमेरिका के नए रूट पर उड़ानें नहीं चला पाएंगी। इसका परिणाम यह होगा कि मौजूदा उड़ानों पर टिकट की कीमतें बढ़ सकती हैं। • कोडशेयर पार्टनरशिप पर प्रभाव: कैटेगरी 1 बरकरार रहने से भारतीय और विदेशी एयरलाइंस के बीच टिकटों की कनेक्टिंग सुविधा बनी रहेगी। रेटिंग गिरने से कोडशेयर उड़ानें प्रभावित होंगी और यात्रियों को कनेक्टिंग फ्लाइट में असुविधा होगी। • फ्लाइट सुरक्षा और भरोसा: नियामक की सख्त निगरानी और 100 प्रतिशत पायलट जांच से उड़ानों की सुरक्षा मजबूत होगी। इससे हवाई यात्रा करने वाले यात्रियों का सुरक्षा के प्रति विश्वास और गहरा होगा। सवाल-जवाब 1. अमेरिकी एफएए की टीम भारत कब आ रही है और ऑडिट का समय क्या है? एफएए की पांच सदस्यीय टीम 16 नवंबर से 20 नवंबर तक भारत का दौरा करेगी। इस दौरान वे डीजीसीए के सुरक्षा तंत्र और कामकाज की पांच दिवसीय समीक्षा करेंगे। 2. भारत के लिए कैटेगरी 1 रेटिंग बरकरार रखना क्यों जरूरी है? कैटेगरी 1 रेटिंग रहने पर ही भारतीय एयरलाइंस अमेरिका के लिए नई उड़ानें शुरू कर सकती हैं और कोडशेयर समझौते कर सकती हैं। रेटिंग घटने पर नई उड़ानों पर रोक लग जाएगी। 3. पायलटों की जांच व्यवस्था में क्या बड़ा बदलाव प्रस्तावित है? वर्तमान में केवल 10 प्रतिशत पायलटों की जांच की जाती है। सरकार इसे बढ़ाकर 100 प्रतिशत करने की योजना बना रही है ताकि हर पायलट की साल में कम से कम एक बार जांच हो सके। 4. अहमदाबाद एआई 171 हादसे की जांच रिपोर्ट कब सौंपी जाएगी? केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया है कि सीलबंद लिफाफे में जांच की अंतिम रिपोर्ट अक्टूबर के पहले सप्ताह में सौंपी जाएगी। सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर 13 अक्टूबर को सुनवाई है। 5. डीजीसीए के पिछले ऑडिट में कितनी खामियां पाई गई थीं? डीजीसीए के पिछले सालाना ऑडिट में कुल 263 फाइंडिंग्स दर्ज की गई थीं, जिनमें 19 गंभीर लेवल 1 कैटेगरी की खामियां शामिल थीं। 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