15 अगस्त 1947 को जन्मीं राखी गुलजार का सिनेमाई सफर, शर्मीली से मिला स्टारडम और पद्म श्री तक की पूरी कहानी 15 अगस्त 1947 को जन्मीं मशहूर अभिनेत्री राखी गुलजार ने 16 साल की उम्र में पहली शादी टूटने के बाद सिनेमा में अपनी पहचान बनाई और राष्ट्रीय पुरस्कार व पद्म श्री हासिल किया. 15 अगस्त का दिन भारत के स्वतंत्रता दिवस के रूप में दर्ज है, लेकिन यही तारीख हिंदी सिनेमा की एक बेहद प्रभावशाली और लोकप्रिय अदाकारा के जन्म का भी साक्षी है. वर्ष 1947 में पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में स्थित राणाघाट में जन्मीं राखी गुलजार ने पर्दे पर अपनी मासूमियत, सौंदर्य और बेहतरीन अभिनय कौशल के बल पर कई दशकों तक दर्शकों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी. भारतीय सिनेमा में उन्होंने एक मुख्य नायिका के रूप में करियर की शुरुआत की और बाद के दौर में मां एवं अन्य सशक्त चरित्र भूमिकाओं को भी उतनी ही शिद्दत से जीवंत किया. हालांकि, उनका फिल्मी सफर जितना चमकीला और सफल रहा, व्यक्तिगत जीवन में उन्हें उतने ही उतार-चढ़ाव और कठिन दौर का सामना करना पड़ा. शुरुआती विवाह, अलगाव और बंगाली सिनेमा से अभिनय की शुरुआत राखी का व्यक्तिगत जीवन काफी कम उम्र में ही एक बड़े मोड़ से गुजरा. महज 16 साल की उम्र में उनका विवाह बंगाली फिल्म निर्देशक अजय विश्वास के साथ कर दिया गया था. हालांकि, यह वैवाहिक रिश्ता ज्यादा समय तक नहीं टिक सका और लगभग दो वर्ष के भीतर ही दोनों एक-दूसरे से अलग हो गए. कम उम्र में शादी टूटने के इस बड़े झटके से खुद को संभालते हुए राखी ने अपनी पूरी ऊर्जा और ध्यान करियर के निर्माण में लगा दिया. इसके बाद उन्होंने कला जगत की ओर रुख किया और वर्ष 1967 में आई बंगाली फिल्म बधू बरण से अपने अभिनय सफर का आधिकारिक आगाज किया. हिंदी सिनेमा में पदार्पण और शर्मीली से मिला बड़ा ब्रेक बंगाली सिनेमा में कदम रखने के कुछ ही समय बाद राखी के लिए हिंदी फिल्म उद्योग के दरवाजे खुल गए. वर्ष 1970 में उन्हें प्रसिद्ध अभिनेता धर्मेंद्र के साथ फिल्म जीवन मृत्यु में काम करने का अवसर मिला. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल साबित हुई और इसने हिंदी फिल्मों में उनके लिए एक मजबूत आधार तैयार कर दिया. इसके बाद 1970 के पूरे दशक में उनके पास एक से बढ़कर एक फिल्मों के प्रस्ताव आने लगे. वर्ष 1971 में प्रदर्शित हुई फिल्म शर्मीली उनके करियर का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट बनी. इस फिल्म में उन्होंने दोहरे किरदार यानी डबल रोल को इतने बेहतरीन ढंग से निभाया कि वह हर घर में पहचानी जाने लगीं. शर्मीली की बड़ी सफलता के बाद लाल पत्थर, पारस, दाग, कभी-कभी, त्रिशूल, कसमें वादे, मुकद्दर का सिकंदर और काला पत्थर जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों ने राखी को उस दौर की शीर्ष अभिनेत्रियों की कतार में ला खड़ा किया. विशेष रूप से अभिनेता शशि कपूर के साथ उनकी ऑन-स्क्रीन जोड़ी को दर्शकों ने बेहद पसंद किया और दोनों ने साथ मिलकर कई यादगार फिल्में दीं. गुलजार से विवाह, बेटी मेघना का जन्म और निजी रिश्तों में खिंचाव करियर की ऊंचाइयों को छूने के दौरान राखी के जीवन में प्रसिद्ध गीतकार, कवि और निर्देशक गुलजार का आगमन हुआ. दोनों के बीच का परिचय धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदला और वर्ष 1973 में उन्होंने विवाह कर लिया. शादी के बाद वह राखी गुलजार के नाम से जानी जाने लगीं. इसी वर्ष 1973 में उनकी बेटी मेघना गुलजार का जन्म हुआ, जिन्होंने आगे चलकर भारतीय फिल्म निर्देशन के क्षेत्र में एक अलग पहचान बनाई. हालांकि, यह शादीशुदा जिंदगी लंबे समय तक सुचारू रूप से नहीं चल सकी. शादी के बाद राखी ने कुछ समय के लिए अभिनय से दूरी बनाई थी, लेकिन वह दोबारा फिल्मों में सक्रिय होना चाहती थीं. वहीं गुलजार की मंशा थी कि वह विवाह के पश्चात पारिवारिक जीवन पर ध्यान दें और फिल्मों से दूर रहें. इस वैचारिक मतभेद के कारण दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगीं. फिल्म आंधी की कश्मीर में शूटिंग के दौरान घटी एक घटना के बाद दोनों के रिश्ते में विवाद और अधिक गहरा हो गया, जिसके बाद वे व्यावहारिक रूप से एक-दूसरे से अलग रहने लगे. मां के चरित्र किरदारों में सफलता, राष्ट्रीय पुरस्कार और पद्म श्री सम्मान नायिका के रूप में कई सफल वर्ष बिताने के बाद राखी ने बिना किसी हिचकिचाहट के सिनेमा में मां और सशक्त महिलाओं की सहायक भूमिकाओं को स्वीकार किया. 80 और 90 के दशक में उन्होंने राम लखन, बाजीगर, खलनायक, करण अर्जुन, बॉर्डर, सोल्जर और एक रिश्ता जैसी बड़ी फिल्मों में अपनी दमदार अदाकारी से दर्शकों को भावुक भी किया और प्रभावित भी किया. उनके अभिनय कौशल को उद्योग में लगातार सराहना मिली. वर्ष 1990 में फिल्म राम लखन के लिए उन्हें फिल्मफेयर का सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री पुरस्कार प्रदान किया गया. इससे पूर्व उन्हें तपस्या और दाग फिल्मों के लिए भी फिल्मफेयर पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका था. वर्ष 2003 में आई बंगाली फिल्म शुभ मुहूर्त में उनके उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री के राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से नवाजा गया. इसी वर्ष 2003 में भारत सरकार ने कला के क्षेत्र में उनके बहुमूल्य योगदान को स्वीकार करते हुए उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्म श्री से सम्मानित किया. सवाल-जवाब 1. राखी गुलजार का जन्म कब और कहां हुआ था? राखी गुलजार का जन्म 15 अगस्त 1947 को पश्चिम बंगाल के नदिया जिले के राणाघाट में हुआ था. 2. राखी ने हिंदी फिल्मों में किस वर्ष और किस फिल्म से डेब्यू किया था? उन्होंने 1970 में फिल्म 'जीवन मृत्यु' से हिंदी सिनेमा में अपना कदम रखा था, जिसमें उनके साथ धर्मेंद्र थे. 3. राखी के करियर में 'शर्मीली' फिल्म क्यों खास मानी जाती है? 1971 में आई 'शर्मीली' में राखी ने दोहरा किरदार (डबल रोल) निभाया था, जिससे उन्हें व्यापक पहचान और स्टारडम मिला. 4. राखी की गुलजार से शादी कब हुई और उनकी बेटी कौन हैं? राखी की शादी 1973 में गीतकार और निर्देशक गुलजार से हुई थी और उनकी बेटी मेघना गुलजार हैं, जो एक प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक हैं. 5. राखी गुलजार को कौन से प्रमुख राष्ट्रीय और नागरिक सम्मान प्राप्त हुए हैं? उन्हें 2003 में बंगाली फिल्म 'शुभ मुहूर्त' के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और उसी वर्ष 2003 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया. प्रेरणा और सबक प्रेरणा और महत्वपूर्ण सबक: • कठिन परिस्थितियों से संभलना: महज 16 साल की उम्र में विवाह टूटने के बावजूद राखी ने हार नहीं मानी और अपनी पूरी शक्ति करियर निर्माण में लगाई. • भूमिकाओं में विविधता और बदलाव: मुख्य अभिनेत्री के रूप में सफलता के बाद उन्होंने गरिमा के साथ मां और चरित्र किरदारों को चुना. • निरंतरता और लगन: 1967 में बंगाली फिल्मों से सफर शुरू करके दशकों तक अपने अभिनय कौशल में गुणवत्ता बनाए रखी. • उत्कृष्टता का राष्ट्रीय सम्मान: निजी जिंदगी की चुनौतियों के बाद भी कला के प्रति समर्पण के कारण राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और पद्म श्री प्राप्त किया. https://trendkia.com/bollywood/15-agasta-1947-ko-janmin-rakhee-gulzar-ka-sinemai-saphara-sharmilee-se-mila-staradama-aura-padma-shri-taka-ki-puri-kahani-16767 TrendKia — Har trend, sabse pehle.