18वीं सदी के सूफी कलाम से निकला था माधुरी दीक्षित का आइकॉनिक डांस नंबर 'मेरा पिया घर आया', नुसरत की कव्वाली से मिली थी प्रेरणा माधुरी दीक्षित का 1995 की फिल्म 'याराना' का सुपरहिट गीत 'मेरा पिया घर आया' दरअसल 18वीं सदी के सूफी संत बाबा बुल्ले शाह की एक क्लासिक पंजाबी रचना पर आधारित था। सिनेमा जगत में अक्सर चर्चित उपन्यासों और किताबों पर फिल्में बनती रही हैं, लेकिन कई बार कालजयी कविताएं भी सिल्वर स्क्रीन पर पहुंचकर इतिहास रच देती हैं। हिंदी सिनेमा के कई ऐसे सदाबहार गीत हैं, जिनकी जड़ें सदियों पुरानी साहित्यिक और सूफी धरोहरों से जुड़ी हैं। ऐसा ही एक अविस्मरणीय उदाहरण अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के सबसे लोकप्रिय और ऊर्जावान डांस ट्रैक्स में शुमार एक गीत का है, जो मूल रूप से सदियों पुरानी पंजाबी सूफी रचना से प्रेरित होकर बड़े पर्दे पर छाया था। 18वीं सदी के बाबा बुल्ले शाह का कलाम यह बहुचर्चित गीत 'याराना' फिल्म का प्रसिद्ध ट्रैक 'मेरा पिया घर आया' है। इस रचना की मूल पृष्ठभूमि 18वीं शताब्दी के महान सूफी कवि बाबा बुल्ले शाह के कलाम में मौजूद है। बाबा बुल्ले शाह ने इस सूफी कविता की रचना की थी, जिसमें आध्यात्मिक प्रेम और विरह के बाद प्रियतम के आगमन का भावुक उल्लास समाहित था। कई पीढ़ियों तक यह सूफी कलाम शास्त्रीय और लोक परंपराओं का हिस्सा बना रहा। नुसरत फतेह अली खान की कव्वाली और इसकी लोकप्रियता इस ऐतिहासिक सूफी रचना को व्यापक वैश्विक पहचान दिलाने में महान संगीतकार और गायक नुसरत फतेह अली खान का असाधारण योगदान रहा। उन्होंने इस सूफी कलाम के मर्म को पहचानते हुए इसे एक बेहद प्रभावशाली कव्वाली के रूप में गाया। उनकी पुरकशिश आवाज में प्रस्तुत इस कव्वाली को संगीत प्रेमियों के बीच जबरदस्त मकबूलियत मिली। इसके बाद इस रचना को सबरी ब्रदर्स, ममता जोशी और राहत फतेह अली खान जैसे कई प्रमुख कलाकारों ने भी अपनी अनूठी शैलियों में पेश किया। साल 1995 में 'याराना' में हुआ बॉलीवुड रूपांतरण कव्वाली की इसी जबरदस्त लोकप्रियता को ध्यान में रखते हुए हिंदी फिल्म इंडस्ट्री के फिल्मकारों ने इसे मुख्यधारा के सिनेमाई संगीत में ढालने की योजना बनाई। साल 1995 में निर्देशक डेविड धवन अपनी रोमांटिक थ्रिलर फिल्म 'याराना' लेकर आए, जिसमें ऋषि कपूर, माधुरी दीक्षित और राज बब्बर ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। फिल्म के संगीत पक्ष को मजबूती देने के लिए मेकर्स ने बाबा बुल्ले शाह की इसी लोकप्रिय रचना को एक कमर्शियल डांस नंबर का रूप दिया। माधुरी दीक्षित का डांस और कविता कृष्णमूर्ति का सम्मान फिल्म में इस रीक्रिएटेड गीत का संगीत संगीतकार अनु मलिक ने तैयार किया, जबकि इसके बोलों को अपनी आवाज मशहूर गायिका कविता कृष्णमूर्ति ने दी। पर्दे पर पीले रंग के पारंपरिक लहंगे में माधुरी दीक्षित के एनर्जेटिक डांस परफॉर्मेंस ने इस गाने को सिनेमा इतिहास के सबसे यादगार डांस नंबर्स में शामिल कर दिया। इस गीत की विशाल सफलता के चलते गायिका कविता कृष्णमूर्ति को प्रतिष्ठित फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में बेस्ट फीमेल प्लेबैक सिंगर के पुरस्कार से नवाजा गया। इसका आप पर असर यह किस्सा दर्शाता है कि सदियों पुराना शास्त्रीय और सूफी संगीत आज भी आधुनिक मनोरंजन जगत को समृद्ध बनाने की अपार क्षमता रखता है। • संगीत प्रेमियों के लिए: यह जानकारी श्रोताओं को लोकप्रिय फिल्मी गानों की ऐतिहासिक और साहित्यिक जड़ों को जानने का मौका देती है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि किस तरह पारंपरिक सूफी कलाम सिनेमाई संगीत का हिस्सा बनकर अमर हो जाते हैं। • कला और संस्कृति पर प्रभाव: प्राचीन लोक और सूफी रचनाएं समय बीतने के बाद भी अपनी ताजगी नहीं खोती हैं। आधुनिक संगीतकार इन समृद्ध सांस्कृतिक विरासतों से प्रेरणा लेकर नई पीढ़ी के लिए यादगार संगीत तैयार कर सकते हैं। • मूल रचनाकारों का सम्मान: सिनेमा में ऐतिहासिक रचनाओं के उपयोग से पुरानी सूफी धरोहर और बाबा बुल्ले शाह जैसे संतों के साहित्यिक योगदान को नई पहचान मिलती है। इससे आने वाली पीढ़ी भी अपनी सांस्कृतिक और भाषाई जड़ों से जुड़ पाती है। • डांस और परफॉर्मेंस की विरासत: माधुरी दीक्षित जैसी अभिनेत्रियों द्वारा इन गीतों पर की गई परफॉर्मेंस दशकों बाद भी नए कलाकारों के लिए संदर्भ और प्रेरणा बनी रहती है। यह साबित करता है कि सशक्त अभिनय और नृत्य किसी भी क्लासिक रचना को अमर बना सकता है। ऐसा क्यों हुआ हिंदी सिनेमा में सदियों पुरानी कविताओं को गानों का रूप देने का मुख्य कारण उनकी पहले से स्थापित भावनात्मक अपील और लोकप्रिय धुनों की ताकत रही है। 'मेरा पिया घर आया' के बॉलीवुड रूपांतरण के पीछे भी एक स्पष्ट सांस्कृतिक और सांगीतिक पृष्ठभूमि थी। • सूफी कलाम की लोकप्रियता: 18वीं सदी में बाबा बुल्ले शाह द्वारा रचित यह कलाम पहले से ही आध्यात्मिक और संगीत प्रेमियों के बीच रचा-बसा हुआ था। इसकी पंक्तियों में मौजूद लय और भावना ने इसे हर दौर में प्रासंगिक बनाए रखा। • नुसरत फतेह अली खान का प्रभाव: नुसरत फतेह अली खान द्वारा गाई गई कव्वाली ने इस सूफी रचना को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहद लोकप्रिय बना दिया था। इस अपार लोकप्रियता को देखकर फिल्म निर्माताओं को लगा कि यह धुन फिल्मी पर्दे पर भी जबरदस्त हिट साबित होगी। • फिल्म याराना की जरूरत: 1995 में आई फिल्म 'याराना' के लिए निर्देशक डेविड धवन और संगीतकार अनु मलिक को एक ऐसे हाई-एनर्जी डांस ट्रैक की तलाश थी जो फिल्म को व्यापक पहचान दिला सके। इसी के चलते इस लोकप्रिय रचना को नए वाद्ययंत्रों और माधुरी दीक्षित के डांस के साथ पेश किया गया। सवाल-जवाब 1. माधुरी दीक्षित का सुपरहिट गाना 'मेरा पिया घर आया' किस फिल्म का है? यह गाना साल 1995 में रिलीज हुई रोमांटिक थ्रिलर फिल्म 'याराना' का है, जिसका निर्देशन डेविड धवन ने किया था। 2. यह गाना मूल रूप से किसकी रचना पर आधारित था? यह गीत मूल रूप से 18वीं शताब्दी के प्रसिद्ध सूफी कवि बाबा बुल्ले शाह द्वारा लिखी गई एक पंजाबी सूफी कविता पर आधारित है। 3. इस रचना को कव्वाली के रूप में सबसे पहले किसने लोकप्रिय बनाया? महान गायक और संगीतकार नुसरत फतेह अली खान ने इस रचना को पहली बार कव्वाली के रूप में गाकर दुनियाभर में बेहद लोकप्रिय बनाया था। 4. फिल्म 'याराना' में इस गाने को किसने संगीतबद्ध किया और किसने गाया? फिल्म में इस गाने को संगीतकार अनु मलिक ने कंपोज किया था और इसे मशहूर पार्श्व गायिका कविता कृष्णमूर्ति ने गाया था। 5. इस गाने के लिए किस गायिका को फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था? गायिका कविता कृष्णमूर्ति को 'मेरा पिया घर आया' गाने के लिए सर्वश्रेष्ठ महिला पार्श्व गायिका का फिल्मफेयर अवॉर्ड दिया गया था। 6. नुसरत फतेह अली खान के अलावा किन प्रमुख कलाकारों ने इस रचना को गाया है? नुसरत फतेह अली खान के बाद सबरी ब्रदर्स, ममता जोशी और राहत फतेह अली खान जैसे कलाकारों ने भी इसे अपने अंदाज में प्रस्तुत किया है। https://trendkia.com/bollywood/18th-century-sufi-kalam-se-nikla-tha-madhuri-dixit-ka-iconic-dance-number-mera-piya-ghar-aaya-nusrat-ki-qawwali-se-mili-thi-prerna-35851 TrendKia — Har trend, sabse pehle.