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  "type": "article",
  "title": "23 साल की सरकारी सेवा छोड़ टॉलीवुड के स्टार बने वडलामणि श्रीनिवास: 3 गाड़ियों और 10 नौकरों का रुतबा त्यागकर बनाई 70 फिल्मों में पहचान",
  "summary": "आईएएस अधिकारी के रूप में 23 साल तक प्रशासनिक सेवा देने के बाद वडलामणि सत्य साईं श्रीनिवास ने नौकरी छोड़कर अभिनय की दुनिया चुनी। आज वे 70 से अधिक फिल्मों में काम कर चुके हैं और सालाना 1 करोड़ रुपये से ज्यादा कमाते हैं।",
  "content": "भारतीय प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ पद पर आसीन रहना और समाज में प्रशासनिक पावर के साथ लग्जरी जीवन जीना हर किसी का सपना होता है। लेकिन आंध्र प्रदेश में विशाखापत्तनम के ज्वाइंट कलेक्टर रह चुके वडलामणि सत्य साईं श्रीनिवास ने अपनी 23 साल की लंबी सरकारी नौकरी, 3 आधिकारिक गाड़ियों का काफिला और 10 घरेलू नौकरों की सरकारी सुविधा छोड़कर कैमरे के सामने अभिनय करने का साहसिक कदम उठाया। पहले ही प्रयास में UPSC परीक्षा उत्तीर्ण करके आईएएस बनने वाले वडलामणि श्रीनिवास आज तेलुगु सिनेमा (टॉलीवुड) के सबसे लोकप्रिय और व्यस्त चरित्र अभिनेताओं में गिने जाते हैं। वे अब तक 70 से अधिक फिल्मों में अपनी बहुमुखी अदाकारी का प्रदर्शन कर चुके हैं और एक दिन की शूटिंग के लिए 50,000 से 60,000 रुपये तक चार्ज करते हैं, जिससे उनकी सालाना कमाई 1 करोड़ रुपये से अधिक हो चुकी है।\n\nनंदांपुडी गाँव से सिविल सेवा के शीर्ष पद तक का सफर\nवडलामणि सत्य साईं श्रीनिवास का जन्म आंध्र प्रदेश के पूर्वी गोदावरी जिले में स्थित नंदांपुडी गांव के एक साधारण किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई के बाद अमलापुरम से गणित विषय में BSc की स्नातक डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने अपनी शैक्षणिक रुचि को आगे बढ़ाते हुए उस्मानिया विश्वविद्यालय से प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति और पुरातत्व में MA किया और बाद में सोशल हिस्ट्री विषय में PhD की उपाधि भी प्राप्त की। अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की और पहले ही अटेंप्ट में UPSC तथा APPSC की कठिन परीक्षाएं सफलतापूर्वक पास कर लीं।\n\n \nप्रशासनिक करियर की शुरुआत में उन्होंने डिप्टी कलेक्टर के रूप में पदभार ग्रहण किया। अपनी मेहनत और कुशल कार्यप्रणाली के दम पर वे पदोन्नत होते हुए विशाखापत्तनम में ज्वाइंट कलेक्टर जैसे अत्यंत प्रतिष्ठित और शक्तिशाली पद तक पहुंचे। एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी के रूप में उनका जीवन पूरी तरह से सुविधाओं से भरा हुआ था। उनके, उनकी पत्नी और उनकी बेटी के लिए अलग-अलग 3 सरकारी वाहन उपलब्ध थे और उनके आधिकारिक आवास पर 10 कर्मचारियों की तैनाती थी।\n\nसंयोग से मिला पहला मौका और अभिनय के प्रति जागा जुनून\nबचपन के दिनों से ही वडलामणि श्रीनिवास को साहित्य, कला और भारतीय सिनेमा से गहरा लगाव था। हालांकि, उन्होंने कभी भी व्यावसायिक रूप से एक पूर्णकालिक अभिनेता बनने की योजना नहीं बनाई थी। विशाखापत्तनम में ज्वाइंट कलेक्टर के पद पर तैनात रहने के दौरान उनकी किस्मत ने एक नया मोड़ लिया। उनके पारिवारिक मित्र और जाने-माने फिल्म निर्देशक कल्याण कृष्ण ने उन्हें अपनी तेलुगु फिल्म 'रा रंडोई वेडुका चुद्दाम' में एक छोटी सी भूमिका निभाने का प्रस्ताव दिया।\n\nश्रीनिवास ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया और कैमरे के सामने अपनी पहली भूमिका निभाई। इस पहली फिल्म के लिए उन्हें 10,000 रुपये का पारिश्रमिक मिला था। हालांकि यह एक छोटा सा रोल था, लेकिन इसने उनके भीतर छुपे हुए कलाकार को बाहर ला दिया। इसके तुरंत बाद प्रसिद्ध निर्देशक मारुति ने उनकी अभिनय प्रतिभा से प्रभावित होकर उन्हें अपनी फिल्म 'महानुभावुडु' में एक महत्वपूर्ण चरित्र भूमिका का अवसर दिया।\n\nप्रशासनिक जिम्मेदारी के साथ समानांतर शुरुआत और पूर्ण इस्तीफा\nशुरुआती दौर में श्रीनिवास ने अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारियों और अभिनय के प्रति अपने शौक के बीच संतुलन बनाए रखा। उन्होंने विशाखापत्तनम में प्रशासनिक कार्य संभालने के साथ-साथ फिल्मों की शूटिंग के लिए समय निकाला। उन्होंने 'गीता गोविंदम', 'प्रतिरोजू पांडगे', 'एफ-2', 'वी', 'मंची रोजुलोचई' और 'खुशी' जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्मों में सशक्त सह-कलाकार की भूमिकाएं निभाईं।\n\nफिल्मों की भारी सफलता और दर्शकों तथा निर्देशकों से लगातार मिली सराहना के बाद उन्होंने एक बड़ा और जोखिम भरा निर्णय लिया। उन्होंने अपनी 23 साल की सुरक्षित और प्रतिष्ठित सरकारी सेवा से त्यागपत्र दे दिया और पूरी तरह से अभिनय जगत को अपना करियर बना लिया। प्रशासनिक सेवा छोड़ने के बाद उन्होंने तेजी से काम किया और बहुत ही कम समय में 70 से अधिक फिल्मों में अपनी अभिनय क्षमता का लोहा मनवाया।\n\nआईएएस बैकग्राउंड का सच: क्या प्रशासनिक पहचान से मिलते हैं रोल?\nबिना किसी फिल्मी पृष्ठभूमि के इतनी तेजी से सफलता हासिल करने पर फिल्म उद्योग में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हाल ही में दिए गए एक साक्षात्कार में वडलामणि श्रीनिवास ने इन बातों पर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल किसी निर्देशक या निर्माता की प्रशासनिक मदद करने से फिल्मों में रोल नहीं मिलते।\n\nउन्होंने कहा कि तिरुपति मंदिर की यात्रा का प्रबंधन करवाना या शूटिंग की अनुमति के लिए पुलिस अधिकारियों से बात करवा देना केवल व्यक्तिगत संबंध और दोस्ती बना सकता है, लेकिन इससे कोई आपको अपनी फिल्म में अभिनय का अवसर नहीं देगा। हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि एक पूर्व आईएएस अधिकारी होने के कारण उन्हें फिल्म उद्योग में आसानी से पहुंच मिली। बड़े निर्देशकों और निर्माताओं से मुलाकात करना उनके लिए सुलभ हो गया, जिससे उन्हें अपनी अभिनय प्रतिभा साबित करने का मंच जल्दी प्राप्त हो गया।\n\n₹10,000 की पहली फीस से सालाना ₹1 करोड़ से अधिक की कमाई\nअपनी आर्थिक यात्रा के बारे में बताते हुए श्रीनिवास ने अपनी फीस की प्रगति की पूरी जानकारी दी। अपनी पहली फिल्म 'रा रंडोई वेडुका चुद्दाम' के लिए मात्र 10,000 रुपये पाने वाले श्रीनिवास की फीस 'शैलजा रेड्डी अल्लुडु' तक पहुंचते-पहुंचते 30,000 रुपये प्रतिदिन हो गई थी। वर्तमान में वे एक दिन की शूटिंग के लिए 50,000 रुपये से 60,000 रुपये तक फीस लेते हैं।\n\nवे अब अभिनय के जरिए सालाना 1 करोड़ रुपये से अधिक की आय अर्जित कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि 3 सरकारी गाड़ियों और 10 नौकरों वाले आलीशान रुतबे को छोड़कर एक स्वतंत्र और अनिश्चित जीवनशैली को अपनाना शुरुआत में थोड़ा कठिन जरूर था, लेकिन फिल्म उद्योग के सकारात्मक और सहयोगात्मक माहौल ने इस बदलाव को बेहद आसान और संतोषजनक बना दिया।\n\nप्रमुख ब्लॉकबस्टर फिल्में और 100 फिल्मों के मील के पत्थर की ओर कदम\nअपने करियर में श्रीनिवास ने सकारात्मक भूमिकाओं के साथ-साथ नकारात्मक किरदार भी निभाए हैं। साल 2023 में नंदामुरी बालकृष्ण की सुपरहिट फिल्म 'भगवंत केसरी' में वे अहम भूमिका में नजर आए, जबकि फिल्म 'पेदाकापू 1' में उन्होंने अपने ग्रे-शेड वाले किरदार से सभी को हैरान कर दिया। इसके अलावा वे राम चरण की फिल्म 'गेम चेंजर', वेंकटेश की 'संक्रमाति वस्तुनम' और बालकृष्ण की 'डाकू महाराज' में भी नजर आ चुके हैं।\n\nवर्तमान समय में वे सुपरस्टार प्रभास और निर्देशक मारुति की बहुप्रतीक्षित नई फिल्म तथा 'ना सामी रंगा' सहित 25 से अधिक बड़े प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहे हैं। वे जल्द ही 'वाराणसी' और 'कोहीनूर' जैसी फिल्मों में भी दिखाई देंगे। इन नए प्रोजेक्ट्स के साथ वे बहुत जल्द 100 फिल्मों में काम करने का शतक पूरा करने वाले हैं।\n\nइसका आप पर असर\nवडलामणि श्रीनिवास का करियर बदलाव यह दिखाता है कि 23 साल की उच्च प्रशासनिक सेवा के बाद भी नई कलात्मक राह चुनी जा सकती है।\n\n• भारत भर में प्रशासनिक उम्मीदवारों के लिए: UPSC परीक्षा को पहले प्रयास में पास करना और उच्च पद तक पहुंचना यह सिद्ध करता है कि मजबूत शैक्षणिक आधार किसी भी क्षेत्र में सफलता की कुंजी है। यह युवाओं को सिविल सेवा की तैयारी के साथ-साथ अपनी रचनात्मक प्रतिभा को जीवित रखने की प्रेरणा देता है।\n• आंध्र प्रदेश और तेलंगाना के युवाओं के लिए: तेलुगु राज्यों में सरकारी नौकरी का अत्यधिक सामाजिक रुतबा होने के बावजूद, अपनी व्यक्तिगत इच्छा और प्रतिभा के लिए सुरक्षित करियर छोड़ना एक बड़ा साहसिक कदम है। यह पेशेवर बदलाव की सोच को नया नजरिया देता है।\n• करियर बदलने वाले पेशेवरों के लिए: किसी भी उम्र या अनुभव के बाद नए क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए सही दृष्टिकोण और समर्पण आवश्यक है। प्रशासनिक कौशल नए उद्योग में पहुंच आसान बना सकता है, लेकिन टिकने के लिए निरंतर काम ही मायने रखता है।\n• मनोरंजन उद्योग के महत्वाकांक्षी कलाकारों के लिए: बिना किसी गॉडफादर या फिल्मी पृष्ठभूमि के भी 70 से अधिक फिल्मों में जगह बनाई जा सकती है। शुरुआती कम फीस से शुरुआत करके सही भूमिकाओं के जरिए अपनी वित्तीय स्थिति को कई गुना बढ़ाया जा सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. वडलामणि श्रीनिवास कौन हैं और वे क्यों चर्चा में हैं?\nवडलामणि सत्य साईं श्रीनिवास पूर्व आईएएस अधिकारी और विशाखापत्तनम के ज्वाइंट कलेक्टर रह चुके हैं, जिन्होंने 23 साल की सरकारी नौकरी छोड़कर टॉलीवुड में 70 से अधिक फिल्मों में काम किया है।\n\n2. वडलामणि श्रीनिवास की शैक्षणिक योग्यता क्या है?\nउन्होंने अमलापुरम से मैथ्स में BSc, उस्मानिया विश्वविद्यालय से प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति में MA और सोशल हिस्ट्री विषय में PhD की डिग्री हासिल की है।\n\n3. उन्होंने आईएएस परीक्षा किस प्रयास में पास की थी?\nवडलामणि श्रीनिवास ने अपने पहले ही प्रयास (First Attempt) में UPSC और APPSC की परीक्षाएं पास करके सिविल सेवा में प्रवेश किया था।\n\n4. उनकी पहली फिल्म कौन सी थी और उन्हें कितनी फीस मिली थी?\nउनकी पहली फिल्म निर्देशक कल्याण कृष्ण की 'रा रंडोई वेडुका चुद्दाम' थी, जिसके लिए उन्हें 10,000 रुपये की पहली फीस मिली थी।\n\n5. वर्तमान में वडलामणि श्रीनिवास फिल्मों से कितना कमाते हैं?\nवे वर्तमान में एक दिन की शूटिंग का 50,000 से 60,000 रुपये चार्ज करते हैं और फिल्मों से उनकी सालाना कमाई 1 करोड़ रुपये से अधिक है।\n\n6. सरकारी नौकरी छोड़ते समय उनके पास क्या प्रशासनिक सुविधाएं थीं?\nइस्तीफा देते समय उनके, उनकी पत्नी और बेटी के लिए 3 अलग-अलग सरकारी वाहन उपलब्ध थे और उनके आवास पर 10 नौकर-चाकर तैनात थे।\n\nप्रेरणा और सबक\nआईएएस की पावरफुल नौकरी छोड़कर 70 फिल्मों के सफल अभिनेता बनने वाले वडलामणि श्रीनिवास की यात्रा से हर व्यक्ति 4 महत्वपूर्ण सबक सीख सकता है।\n\n• अकादमिक मजबूती जीवन भर काम आती है: गणित में BSc, इतिहास में MA और पीएचडी करने के बाद यूपीएससी पास करना यह साबित करता है कि अनुशासित पढ़ाई व्यक्ति के आत्मविश्वास को हर क्षेत्र में मजबूत बनाती है।\n• शुरुआत छोटी हो तो भी कदम आगे बढ़ाएं: पहली फिल्म में केवल 10,000 रुपये मिलने के बावजूद उन्होंने काम सीखा। आज वे 50,000 से 60,000 रुपये प्रतिदिन फीस लेते हैं, जो यह सिखाता है कि लगन से वित्तीय विकास संभव है।\n• आरामदायक स्थिति से बाहर निकलने का साहस: 3 सरकारी गाड़ियाँ और 10 नौकरों का आरामदायक रुतबा छोड़कर अनिश्चितता से भरे अभिनय क्षेत्र को चुनना दिखाता है कि जुनून के लिए कम्फर्ट ज़ोन छोड़ना पड़ता है।\n• नेटवर्किंग का सही उपयोग करें: पूर्व प्रशासनिक पहचान का उपयोग उन्होंने केवल बड़े निर्देशकों से मिलने के लिए किया, लेकिन काम अपनी मेहनत और अभिनय क्षमता के दम पर ही हासिल किया।",
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  "category": "बॉलीवुड",
  "publishedAt": "2026-09-02",
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