25 साल की हुई 'दिल चाहता है', जानिए कैसे तीन दोस्तों की इस कहानी ने बदल दिया हिंदी सिनेमा का रुख फरहान अख्तर के निर्देशन में बनी कालजयी फिल्म 'दिल चाहता है' ने अपने प्रदर्शन के 25 साल पूरे कर लिए हैं। इस खास अवसर पर सिनेमैटोग्राफर रवि के. चंद्रन ने फिल्म से जुड़ी पुरानी यादें साझा की हैं। साल 2001 में बड़े पर्दे पर आई फिल्म 'दिल चाहता है' ने अपने प्रदर्शन के 25 साल पूरे कर लिए हैं। इस मुकाम पर पहुंचकर यह समझना बेहद दिलचस्प है कि तीन युवा दोस्तों की इस साधारण सी दिखने वाली कहानी ने किस तरह भारतीय सिनेमा के स्वरूप को हमेशा के लिए बदल दिया। निर्देशक के रूप में अपनी पहली ही फिल्म से तहलका मचाने वाले फरहान अख्तर की इस रचना ने न केवल बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त सफलता हासिल की, बल्कि यह भारतीय युवाओं की सांस्कृतिक चेतना का एक अभिन्न हिस्सा भी बन गई। सिनेमैटोग्राफर रवि के. चंद्रन की पुरानी यादें फिल्म के 25 साल पूरे होने के खास मौके पर इसके सिनेमैटोग्राफर रवि के. चंद्रन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने फिल्म का मूल पोस्टर जारी करते हुए उस दौर की यादों को ताजा किया। रवि के. चंद्रन के मुताबिक यह फिल्म उनके करियर और व्यक्तिगत जीवन दोनों के लिए एक बड़ा माइलस्टोन साबित हुई। उन्होंने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर काम करते समय उन्हें सिंक साउंड, गैफर तकनीक और ग्रिप सिस्टम जैसी आधुनिक तकनीकों के साथ पहली बार प्रयोग करने का मौका मिला था। रवि के. चंद्रन ने स्वीकार किया कि शूटिंग के समय किसी को यह अंदाजा नहीं था कि यह फिल्म आगे चलकर एक कल्ट क्लासिक का रूप ले लेगी। उन्होंने अपने संदेश में लिखा, "25 साल बाद भी यह फिल्म मेरे दिल के बेहद करीब है। मुझे इस बात का गर्व है कि जब हिंदी सिनेमा का नया अध्याय लिखा जा रहा था, तब मैं वहां मौजूद था।" उन्होंने निर्देशक फरहान अख्तर के साथ-साथ निर्माता रितेश सिधवानी और प्रोडक्शन हाउस एक्सेल एंटरटेनमेंट का भी धन्यवाद किया, जिन्होंने उन पर भरोसा जताया। गोवा ट्रिप, तीन दोस्त और नया स्टाइल स्टेटमेंट 'दिल चाहता है' की कहानी मुख्य रूप से तीन कॉलेज दोस्तों, यानी आकाश, समीर और सिद्धार्थ के इर्द-गिर्द घूमती है। इन किरदारों को आमिर खान, सैफ अली खान और अक्षय खन्ना ने स्क्रीन पर जीवंत किया था। फिल्म में प्रीति जिंटा ने भी एक मुख्य भूमिका निभाई थी। तीन दोस्तों का गोवा जाना और वहां उनके बीच के रिश्तों में आने वाले उतार-चढ़ाव को जिस सहजता से दिखाया गया, उसने उस दौर के युवाओं को गहराई से प्रभावित किया। फिल्म से जुड़ा एक रोचक तथ्य यह भी है कि इसकी कहानी का विचार फरहान अख्तर को उनके लॉस एंजिल्स के सफर के दौरान आया था। फिल्म की सिनेमैटोग्राफी के अलावा इसके किरदारों के लुक ने भी देश भर में तहलका मचा दिया था। आमिर खान की खास 'मक्खी दाढ़ी' (सोल पैच) और तीनों मुख्य अभिनेताओं के हेयरस्टाइल उस समय के युवाओं के बीच सबसे बड़ा फैशन ट्रेंड बन गए थे। सैलूनों में युवा इसी तरह की दाढ़ी और बाल कटवाने की मांग करने लगे थे। जावेद अख्तर के बोल और शंकर-एहसान-लॉय का कालजयी संगीत किसी भी कल्ट फिल्म की सफलता में उसके संगीत का बहुत बड़ा योगदान होता है, और 'दिल चाहता है' इस मामले में एक मिसाल है। फिल्म के गीतों की रचना मशहूर संगीतकार तिकड़ी शंकर-एहसान-लॉय ने की थी। वहीं, इन गानों के खूबसूरत बोल फरहान अख्तर के पिता और दिग्गज गीतकार जावेद अख्तर ने लिखे थे। फिल्म के टाइटल ट्रैक 'दिल चाहता है' से लेकर 'जाने क्यों लोग प्यार करते हैं' जैसे गाने आज ढाई दशक बीत जाने के बाद भी उतने ही तरोताजा महसूस होते हैं। इन गानों ने फिल्म के मिजाज को पूरी तरह से बदला और भारतीय युवाओं की आवाज बन गए। फिल्म की 25वीं वर्षगांठ पर फरहान अख्तर और उनकी बहन जोया अख्तर ने भी सोशल मीडिया पर अपनी खुशी व्यक्त की और इस यादगार सफर को याद किया। इसका आप पर असर • दर्शकों और प्रशंसकों के लिए: यह फिल्म यह दर्शाती है कि कैसे सच्ची दोस्ती और नए दौर की सोच पर बनी कहानियां समय की कसौटी पर खरी उतरती हैं। • युवा फिल्ममेकर्स के लिए: 'दिल चाहता है' की सफलता यह साबित करती है कि नए और लीक से हटकर विचारों पर दांव लगाना सिनेमा में बड़ा बदलाव ला सकता है। सवाल-जवाब 1. फिल्म 'दिल चाहता है' कब रिलीज़ हुई थी? यह फिल्म वर्ष 2001 में सिनेमाघरों में प्रदर्शित हुई थी और अब इसके 25 साल पूरे हो चुके हैं। 2. 'दिल चाहता है' के निर्देशक और लेखक कौन हैं? इस फिल्म का लेखन और निर्देशन फरहान अख्तर ने किया था, जो उनकी बतौर निर्देशक पहली फिल्म थी। 3. फिल्म में मुख्य भूमिकाओं में कौन-कौन से कलाकार शामिल थे? फिल्म में आमिर खान, सैफ अली खान, अक्षय खन्ना और प्रीति जिंटा मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। 4. फिल्म का संगीत किसने तैयार किया था? फिल्म का मशहूर संगीत शंकर-एहसान-लॉय की संगीतकार तिकड़ी ने तैयार किया था और इसके बोल जावेद अख्तर ने लिखे थे। प्रेरणा और सबक 'दिल चाहता है' के सफर से मिलने वाली मुख्य सीख: • नया नज़रिया अपनाने का साहस: पहली ही फिल्म में लीक से हटकर कहानी और तकनीक पर भरोसा करके एक कालजयी रचना बनाई जा सकती है। • व्यक्तिगत अनुभवों से प्रेरणा: अपने व्यक्तिगत अनुभवों और यात्राओं से मिले विचारों को कला में ढालने से कहानी अधिक प्रामाणिक बनती है। • तकनीकी उत्कृष्टता का महत्व: सिंक साउंड जैसी नई तकनीकों के इस्तेमाल ने हिंदी सिनेमा में निर्माण के मानकों को हमेशा के लिए ऊंचा कर दिया। https://trendkia.com/bollywood/25-sala-ki-hui-dil-chahta-hai-janie-kaise-tina-doston-ki-isa-kahani-ne-badala-diya-hindi-sinema-ka-rukha-15633 TrendKia — Har trend, sabse pehle.