4 साल की उम्र से एक्टिंग, कान फेस्टिवल में सम्मान और श्रीदेवी की आवाज: जानिए कुमारी नाज की अनकही कहानी बाल कलाकार 'बेबी नाज' के रूप में कान फिल्म फेस्टिवल में अंतरराष्ट्रीय सम्मान पाने वाली कुमारी नाज ने बाद में भोजपुरी सिनेमा में राज किया और श्रीदेवी की शुरुआती हिंदी फिल्मों को अपनी आवाज दी। भारतीय हिंदी सिनेमा का इतिहास ऐसे कई प्रतिभाशाली कलाकारों से भरा पड़ा है, जिन्होंने अपनी अद्भुत अभिनय क्षमता और आवाज के दम पर दर्शकों के दिलों में एक खास जगह बनाई। इन्हीं कलाकारों में एक प्रमुख नाम कुमारी नाज का भी शामिल है। बचपन में 'बेबी नाज' के नाम से अपनी पहचान बनाने वाली इस बाल कलाकार ने बेहद कम उम्र में ही अपनी मासूमियत और संजीदा अभिनय से देश और दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया था। आगे चलकर उन्होंने हिंदी फिल्मों में विभिन्न सहायक किरदार निभाए, भोजपुरी सिनेमा में एक प्रमुख अभिनेत्री के रूप में अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई और जब अभिनय के अवसर सीमित होने लगे तो उन्होंने अपनी आवाज के जरिए एक नया इतिहास रचा। वही कुमारी नाज थीं, जिन्होंने हिंदी सिनेमा की सुपरस्टार श्रीदेवी की शुरुआती सुपरहिट फिल्मों में अपनी आवाज देकर उनके किरदारों में जान फूंकी थी। बचपन का संघर्ष और चार साल की उम्र में कैमरे के सामने पहला कदम कुमारी नाज का असली नाम सलमा बेग था और उनका जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई शहर में हुआ था। उनके पिता मिर्जा दाऊद बेग एक लेखक थे, लेकिन उस समय परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद तंग और चुनौतीपूर्ण थी। घर के माली हालात ठीक न होने के कारण बहुत छोटी उम्र में ही परिवार को आर्थिक सहयोग देने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। महज चार साल की बाल उम्र में, जहां बच्चों का समय खेल-कूद और पढ़ाई-लिखाई में बीतता है, सलमा बेग को कैमरे की रोशनी और शूटिंग सेट के माहौल के बीच कदम रखना पड़ा। यही वह दौर था जब उन्होंने अपनी मासूमियत के बल पर अभिनय की दुनिया में काम करना शुरू किया और बाद में उन्हें 'बेबी नाज' का नाम मिला। 'बूट पॉलिश' से मिली अंतरराष्ट्रीय ख्याति और कान फिल्म फेस्टिवल में सम्मान बाल कलाकार के रूप में काम करते हुए बेबी नाज ने कई फिल्मों में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई, लेकिन साल 1954 में रिलीज हुई फिल्म 'बूट पॉलिश' ने उनके करियर को एक ऐतिहासिक मोड़ दिया। इस फिल्म में उन्होंने अनाथ बच्ची 'बेलू' का बेहद मार्मिक और भावनात्मक किरदार निभाया था। उनके इस अभिनय को दर्शकों और समीक्षकों द्वारा खूब सराहा गया। 'बूट पॉलिश' की सफलता केवल भारत तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि इसे साल 1955 के प्रतिष्ठित कान फिल्म फेस्टिवल में मुख्य प्रतियोगिता श्रेणी के लिए चुना गया था। फ्रांस के कान शहर में आयोजित इस समारोह में बाल कलाकार कुमारी नाज को उनकी बेहतरीन अभिनय क्षमता के लिए विशेष सम्मान देकर सम्मानित किया गया। इस सफलता के बाद वे अपने समय की सबसे लोकप्रिय और व्यस्त बाल कलाकारों की सूची में शामिल हो गईं। इसके बाद उन्होंने 'देवदास', 'मुसाफिर', 'लाजवंती', 'दो फूल' और 'कागज के फूल' जैसी कई क्लासिक हिंदी फिल्मों में यादगार भूमिकाएं निभाईं। 'सच्चा झूठा' में राजेश खन्ना की बहन और भोजपुरी सिनेमा में बड़ा नाम उम्र बढ़ने के साथ-साथ कुमारी नाज ने बाल कलाकार की छवि से बाहर निकलकर वयस्क किरदारों की ओर रुख किया। हिंदी फिल्मों में उन्हें कई महत्वपूर्ण सहायक भूमिकाएं निभाने के अवसर मिले। साल 1970 में प्रदर्शित हुई प्रसिद्ध फिल्म 'सच्चा झूठा' में उन्होंने सुपरस्टार राजेश खन्ना की दिव्यांग बहन का किरदार निभाया, जिसे दर्शकों ने काफी पसंद किया। इसके अलावा वे 'बहू बेगम', 'कटी पतंग' और 'हाथी मेरे साथी' जैसी कई बड़ी फिल्मों का भी हिस्सा रहीं। हालांकि, हिंदी सिनेमा के दर्शकों के मन में 'बेबी नाज' की बाल छवि इतनी गहराई से बसी हुई थी कि उससे पूरी तरह बाहर निकलकर मुख्य अभिनेत्री के रूप में स्थापित होना उनके लिए काफी चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा था। इसी दौर में उन्होंने क्षेत्रीय सिनेमा का रुख किया और भोजपुरी फिल्मों में अपनी किस्मत आजमाई। साल 1963 में आई भोजपुरी फिल्म 'बिदेसिया' से उन्हें इस नए उद्योग में बहुत बड़ी पहचान और सफलता मिली। इसके बाद उन्होंने 'सैंया से नेहा लगाइबे' और 'अईल बसंत बहार' जैसी चर्चित भोजपुरी फिल्मों में मुख्य अभिनेत्री की भूमिकाएं निभाईं और देखते ही देखते भोजपुरी सिनेमा की सबसे सफल और लोकप्रिय अभिनेत्रियों में गिनी जाने लगीं। डबिंग आर्टिस्ट के रूप में नया सफर और श्रीदेवी की शुरुआती फिल्मों को दी आवाज कुमारी नाज के करियर में एक बेहद महत्वपूर्ण और दिलचस्प मोड़ तब आया जब फिल्मों में अभिनय के प्रस्ताव धीरे-धीरे कम होने लगे। ऐसे कठिन समय में उन्होंने निराश होने के बजाय अपनी आवाज को ही अपना नया हुनर और जरिया बनाया। वे एक डबिंग आर्टिस्ट के रूप में काम करने लगीं और जल्द ही उनकी आवाज हिंदी सिनेमा की एक बड़ी पहचान बन गई। जब दक्षिण भारतीय फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री श्रीदेवी ने हिंदी सिनेमा में अपना कदम जमाना शुरू किया, तब उनकी शुरुआती हिंदी फिल्मों के लिए डबिंग की जिम्मेदारी कुमारी नाज को ही सौंपी गई। विभिन्न विवरणों के अनुसार, श्रीदेवी की ब्लॉकबस्टर फिल्मों जैसे 'हिम्मतवाला', 'मवाली' और 'तोहफा' में जो हिंदी आवाज दर्शकों को सुनाई देती थी, वह वास्तव में कुमारी नाज की ही थी। बड़े परदे पर भले ही श्रीदेवी का आकर्षण और अभिनय दिखाई देता था, लेकिन उन संवादों के पीछे छिपी भावनाएं और आवाज कुमारी नाज की मेहनत का नतीजा थीं। निजी जिंदगी, कपूर परिवार से जुड़ाव और 51 वर्ष की उम्र में निधन कुमारी नाज की व्यक्तिगत जिंदगी की बात करें तो उन्होंने अपने सह-कलाकार और अभिनेता सुबीराज के साथ विवाह किया था। दोनों कलाकारों की मुलाकात फिल्म 'देखा प्यार तुम्हारा' की शूटिंग के दौरान हुई थी, जहां से उनके बीच प्यार की शुरुआत हुई और बाद में दोनों परिणय सूत्र में बंध गए। इस शादी से उनके दो बच्चे हुए। उल्लेखनीय है कि अभिनेता सुबीराज हिंदी सिनेमा के प्रसिद्ध कपूर परिवार से संबंध रखते थे। जीवन के अंतिम वर्षों में कुमारी नाज गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रही थीं। 19 अक्टूबर 1995 को महज 51 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया। उनके निधन का मुख्य कारण लिवर की गंभीर बीमारी को बताया जाता है। हालांकि आज कुमारी नाज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन भारतीय सिनेमा में बाल कलाकार से लेकर डबिंग की दुनिया तक उनका योगदान हमेशा याद किया जाएगा। इसका आप पर असर फिल्म प्रेमियों के लिए: यह लेख भारतीय सिनेमा के उस दौर की याद दिलाता है जब बाल कलाकार अपनी अदाकारी से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाते थे। सिनेमा इतिहास की समझ: दर्शकों को यह जानने का अवसर मिलता है कि परदे के पीछे डबिंग कलाकारों का योगदान कितना महत्वपूर्ण होता है। सवाल-जवाब 1. कुमारी नाज का असली नाम क्या था और उनका जन्म कब हुआ था? कुमारी नाज का असली नाम सलमा बेग था और उनका जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था। 2. कुमारी नाज को अंतरराष्ट्रीय पहचान किस फिल्म से मिली? उन्हें 1954 की फिल्म बूट पॉलिश में बेलू के किरदार से अंतरराष्ट्रीय पहचान मिली, जिसे 1955 के कान फिल्म फेस्टिवल में सम्मानित किया गया था। 3. कुमारी नाज ने किस मशहूर फिल्म में राजेश खन्ना की बहन का किरदार निभाया था? उन्होंने 1970 की सुपरहिट फिल्म सच्चा झूठा में राजेश खन्ना की बहन की भूमिका निभाई थी। 4. कुमारी नाज ने श्रीदेवी की किन शुरुआती हिंदी फिल्मों के लिए डबिंग की थी? उन्होंने श्रीदेवी की शुरुआती हिंदी फिल्मों जैसे हिम्मतवाला, मवाली और तोहफा के लिए अपनी आवाज दी थी। 5. कुमारी नाज का निधन कब और किस वजह से हुआ था? कुमारी नाज का निधन 19 अक्टूबर 1995 को 51 वर्ष की उम्र में गंभीर लिवर की बीमारी के कारण हुआ था। प्रेरणा और सबक संघर्ष से सफलता: बचपन की आर्थिक तंगहाली के बावजूद चार साल की उम्र से मेहनत कर अपनी पहचान बनाई। बदलाव को अपनाना: जब मुख्य अभिनय के मौके कम हुए तो भोजपुरी सिनेमा और डबिंग क्षेत्र में नया मुकाम हासिल किया। हुनर की विविधता: अभिनय के साथ अपनी आवाज को ताकत बनाकर सुपरस्टार श्रीदेवी की शुरुआती फिल्मों को यादगार बनाया। https://trendkia.com/bollywood/4-sala-ki-umra-se-acting-cannes-phestivala-men-sammana-aura-sridevi-ki-avaja-janie-kumari-naaz-ki-anakahi-kahani-18588 TrendKia — Har trend, sabse pehle.