# अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय की पहली साथ वाली फिल्म का किस्सा, 9 हिट गानों के बावजूद बॉक्स ऑफिस पर डूबी थी 'ढाई अक्षर प्रेम के'

> साल 2000 में आई निर्देशक राज कंवर की रोमांटिक ड्रामा 'ढाई अक्षर प्रेम के' में अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय पहली बार पर्दे पर साथ दिखे थे, लेकिन जतिन-ललित के 9 हिट गानों के बावजूद फिल्म दर्शकों को प्रभावित करने में नाकाम रही।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-09-30 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/abhishek-bachchan-aura-aishwarya-rai-ki-pahali-satha-vali-philma-ka-kissa-9-hita-ganon-ke-bavajuda-boksa-phisa-para-dubi-thi-dhaai-40764 · **Language:** Hindi
**Tags:** अभिषेक बच्चन, ऐश्वर्या राय, ढाई अक्षर प्रेम के, राज कंवर, जतिन ललित, बॉलीवुड फिल्में

बॉलीवुड में जब भी ऐश्वर्या राय बच्चन और अभिषेक बच्चन की जोड़ी की चर्चा होती है, तो सिनेप्रेमियों के जेहन में 'गुरु', 'सरकार राज', 'सरकार' और 'उमराव जान' जैसी फिल्में तुरंत उभर आती हैं। मणिरत्नम की फिल्म 'गुरु' के सेट से ही दोनों की असल जिंदगी की प्रेम कहानी की शुरुआत मानी जाती है, जिसे लेकर आज भी दर्शक बेहद दिलचस्पी दिखाते हैं। इसके बावजूद बहुत कम सिनेमा प्रेमी इस बात से वाकिफ हैं कि बड़े पर्दे पर दोनों की पहली मुलाकात इस चर्चित फिल्म से काफी पहले ही हो चुकी थी। करीब 26 साल पहले रिलीज हुई फिल्म 'ढाई अक्षर प्रेम के' में यह जोड़ी पहली बार सिल्वर स्क्रीन पर एक साथ नजर आई थी, जहां दोनों के बीच केवल एक सामान्य और पेशेवर दोस्ती की शुरुआत हुई थी, जबकि उस वक्त प्यार जैसा कोई पहलू मौजूद नहीं था।

## साल 2000 में बड़े अरमानों के साथ रिलीज हुआ था यह रोमांटिक ड्रामा
फिल्म 'ढाई अक्षर प्रेम के' साल 2000 में सिनेमाघरों में प्रदर्शित की गई थी। इस फिल्म की कमान जाने-माने फिल्म निर्देशक राज कंवर के हाथों में थी। राज कंवर के निर्देशन और अभिषेक तथा ऐश्वर्या की बिल्कुल नई जोड़ी के कारण दर्शकों के साथ-साथ पूरी फिल्म इंडस्ट्री को इस प्रोजेक्ट से बेपनाह उम्मीदें थीं। हर किसी को लग रहा था कि यह नया फिल्मी सफर बॉक्स ऑफिस पर एक नया रिकॉर्ड कायम करेगा। हालांकि, सिनेमाघरों में पहुंचने के बाद इस रोमांटिक ड्रामा का जो अंजाम देखने को मिला, वह फिल्म के निर्माताओं और प्रशंसकों दोनों के लिए किसी गहरे सदमे जैसा साबित हुआ। उम्मीदों के भारी बोझ तले दबी यह कहानी टिकट खिड़की पर दर्शकों को बांध कर रखने में पूरी तरह विफल रही।

## साहिबा और करण की अनूठी मजबूरी से शुरू हुई थी दर्दभरी दास्तान
कहानी का ताना-बाना साहिबा नाम की एक युवती के इर्द-गिर्द बुना गया था, जिसका किरदार ऐश्वर्या राय ने निभाया था। साहिबा का परिवार उसकी रजामंदी के बगैर जबरन उसका विवाह किसी और से तय कर देता है। इस घुटन और दबाव से तंग आकर वह अपने घर की चौखट लांघकर भाग निकलने का फैसला करती है। सफर के दौरान उसकी राह में भारतीय सेना के एक जांबाज अफसर करण ग्रेवाल की एंट्री होती है, जिसे अभिषेक बच्चन ने पर्दे पर साकार किया था। करण एक नेक इंसान की तरह साहिबा की हिफाजत करता है और तमाम मुश्किलों के बीच उसे सुरक्षित उसके परिवार तक पहुंचाने की जिम्मेदारी निभाता है।

## गलतफहमी का जाल और नकली पति-पत्नी का नाटक
कहानी में मुख्य नाटकीय मोड़ तब आता है जब साहिबा के परिजन एक बहुत बड़ी गलतफहमी का शिकार हो जाते हैं। वे करण को ही साहिबा का असली पति मान बैठते हैं। घर के हालात और दबाव ऐसा मोड़ ले लेते हैं कि सच सामने लाने की जगह करण और साहिबा को कुछ वक्त के लिए सबके सामने पति-पत्नी होने का झूठा ढोंग करना पड़ता है। इस बनावटी और मजबूर रिश्ते की आड़ में रहते हुए दोनों के बीच धीरे-धीरे जज्बात बदलने लगते हैं। दोनों एक-दूसरे के करीब आने लगते हैं और उनके दिलों में एकतरफा मोहब्बत का एहसास करवट लेने लगता है। यही भावनात्मक द्वंद्व इस प्रेम कहानी का मुख्य केंद्र बिंदु बनता है।

## जतिन-ललित का संगीत और 9 गानों की सजी हुई महफिल
राज कंवर के निर्देशन में सजी इस फिल्म का सबसे मजबूत और यादगार पहलू इसका संगीत था। इस पूरे प्रोजेक्ट को 9 बेहद कर्णप्रिय रोमांटिक ट्रैक्स से सजाया गया था। संगीतकार जोड़ी जतिन-ललित ने इन धुनों को तैयार किया था, जिन्होंने अपनी मधुर धुनों से उस दौर के चार्टबस्टर्स पर राज किया था। इन गानों में अनुराधा पौडवाल और बाबुल सुप्रियो जैसे दिग्गज गायकों ने अपनी आवाज का जादू बिखेरा था। इनके अलावा मशहूर गायक केके ने भी अनुराधा पौडवाल के साथ मिलकर कई रोमांटिक नगमों को अपनी आवाज देकर सदाबहार बना दिया।

## गानों की जबर्दस्त लोकप्रियता भी नहीं टाल सकी फिल्म की विफलता
फिल्म के भीतर ऐश्वर्या राय और अभिषेक बच्चन पर कई भावुक और रोमांटिक गाने फिल्माए गए थे। इनमें 'दो लफ्जों', 'ओ रे रब्बा', 'कोई ताजा हवा' और 'कोई माही बड़ा सोणा है' जैसे गीतों ने संगीत प्रेमियों के दिलों में अपनी खास जगह बनाई। इन ट्रैक्स को श्रोताओं की ओर से बेहद शानदार और सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली और ये गाने आज भी पुराने गानों के शौकीनों के बीच काफी लोकप्रिय बने हुए हैं। मगर संगीत की इस जबर्दस्त कामयाबी के विपरीत, जब कहानी और पटकथा की बात आई तो फिल्म दर्शकों को बांधने में बुरी तरह नाकाम रही और अंततः इसे बेहद कमजोर और खराब फिल्म करार दिया गया।

## इसका आप पर असर
सिनेमा प्रेमियों और दर्शकों के लिए इस तरह के पुराने फिल्मी विश्लेषण पर्दे के पीछे की रचनात्मक हकीकत को समझने का मौका देते हैं।

- **दर्शकों के लिए:** यह कहानी दिखाती है कि केवल बड़े सितारे या सुपरहिट संगीत किसी फिल्म की बॉक्स ऑफिस सफलता की गारंटी नहीं दे सकते। किसी भी फिल्म को टिकाऊ बनाने के लिए दमदार पटकथा और सटीक कहानी कहना सबसे जरूरी शर्त होती है।
- **संगीत प्रेमियों के लिए:** फिल्म भले ही विफल रही हो, लेकिन इसके 9 गाने आज भी पुराने हिट गानों की प्लेलिस्ट में अपनी जगह बनाए हुए हैं। जो लोग पुराने मेलोडियस बॉलीवुड संगीत को पसंद करते हैं, उनके लिए जतिन-ललित का यह एल्बम आज भी सुनने लायक है।
- **फिल्म निर्माण के नजरिए से:** यह उदाहरण स्पष्ट करता है कि भारी प्रचार और बड़े नाम कमजोर कथानक को नहीं बचा सकते। दर्शकों की कसौटी पर खरा उतरने के लिए भावनात्मक जुड़ाव होना अनिवार्य है।
- **फिल्मी इतिहास के संदर्भ में:** अभिषेक और ऐश्वर्या के प्रशंसक अक्सर इस जोड़ी की शुरुआत 'गुरु' से मानते हैं। यह जानकारी उनके करियर की शुरुआती यात्रा को समझने में नया दृष्टिकोण देती है।

## ऐसा क्यों हुआ
'ढाई अक्षर प्रेम के' को लेकर रिलीज से पहले काफी उम्मीदें थीं, लेकिन सिनेमाघरों में आते ही यह दर्शकों की कसौटी पर खरी नहीं उतर सकी। फिल्म के नाकाम होने के पीछे मुख्य रूप से कमजोर प्रस्तुति और घिसे-पिटे ड्रामा का बड़ा हाथ रहा।

- **कमजोर कथानक:** जबरन शादी से भागने और झूठे रिश्ते का ढोंग करने वाला प्लॉट दर्शकों को नया या प्रभावशाली नहीं लगा। इस तरह की बनावटी गलतफहमियों पर आधारित कहानियां उस दौर में भी दर्शकों के दिलों को छूने में नाकाम रहीं।
- **संगीत बनाम पटकथा:** फिल्म के 9 गानों को जतिन-ललित ने बेहद खूबसूरत धुनों से सजाया था, जिससे एल्बम तो लोकप्रिय हो गया लेकिन मूल फिल्म की पटकथा में गहराई नहीं थी। संगीत की सफलता फिल्म के नाटकीय खालीपन को ढक नहीं सकी।
- **अत्यधिक अपेक्षाएं:** राज कंवर जैसे स्थापित निर्देशक और इस नई जोड़ी से दर्शकों ने बेहद सशक्त सिनेमा की उम्मीद की थी। जब अंतिम परिणाम उम्मीदों के विपरीत बेहद सतही निकला, तो दर्शकों ने इसे पूरी तरह नकार दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. ऐश्वर्या राय और अभिषेक बच्चन ने पहली बार किस फिल्म में एक साथ काम किया था?
दोनों ने पहली बार साल 2000 में आई फिल्म 'ढाई अक्षर प्रेम के' में एक साथ स्क्रीन साझा किया था।

### 2. फिल्म 'ढाई अक्षर प्रेम के' का निर्देशन किसने किया था?
इस फिल्म का निर्देशन जाने-माने फिल्म निर्देशक राज कंवर ने किया था।

### 3. फिल्म में अभिषेक बच्चन और ऐश्वर्या राय के किरदारों के क्या नाम थे?
फिल्म में ऐश्वर्या राय ने साहिबा और अभिषेक बच्चन ने सेना के अधिकारी करण ग्रेवाल का किरदार निभाया था।

### 4. फिल्म 'ढाई अक्षर प्रेम के' में कुल कितने गाने थे और उनका संगीत किसने दिया था?
इस फिल्म में कुल 9 गाने थे, जिनका संगीत मशहूर संगीतकार जोड़ी जतिन-ललित ने तैयार किया था।

### 5. किन प्रमुख गायकों ने इस फिल्म के रोमांटिक गीतों को अपनी आवाज दी थी?
इन गानों को अनुराधा पौडवाल, बाबुल सुप्रियो और केके जैसे गायकों ने अपनी आवाज दी थी।

### 6. क्या इस फिल्म के सेट पर ही ऐश्वर्या और अभिषेक के बीच प्रेम संबंध शुरू हुआ था?
नहीं, इस फिल्म के सेट पर वे केवल सह-कलाकार थे और उनके बीच सामान्य दोस्ती की शुरुआत हुई थी।

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