अभिषेक पाठक ने दृश्यम 3 को रीमेक के ठप्पे से बचाने के लिए तैयार की बिल्कुल नई पटकथा अजय देवगन की दृश्यम 3 को बड़े पर्दे पर उतारने के लिए निर्देशक अभिषेक पाठक ने पुरानी कड़ियों की बारीकियों को जोड़ते हुए एक स्वतंत्र और मौलिक स्क्रिप्ट तैयार की। सिनेमाघरों में अजय देवगन की मुख्य भूमिका वाली सस्पेंस थ्रिलर 'दृश्यम: द कन्क्लूजन' को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है। इस जबरदस्त चर्चा और सफलता के बीच फिल्म के निर्देशक अभिषेक पाठक ने इस फ्रेंचाइजी के तीसरे अध्याय को लिखने और निर्देशित करने के अपने सफर पर विस्तार से बात की है। निर्देशक के अनुसार इस तीसरे भाग को पर्दे पर लाना एक बेहद कठिन और पेचीदा काम था। उनकी सबसे बड़ी कोशिश यह थी कि इस नई फिल्म पर किसी भी तरह से रीमेक का ठप्पा न लगे, और इसी वजह से उन्होंने पूरी पटकथा को एकदम नए और मौलिक अंदाज में तैयार किया। कहानी की परतें और पुरानी कड़ियों का गहरा अध्ययन अभिषेक पाठक ने साझा किया कि 'दृश्यम 3' का ताना-बाना कई जटिल परतों के साथ बुना गया है। इस कथानक को पूरी तरह बेदाग और असरदार बनाने के मकसद से उन्हें पिछली दोनों फिल्मों को बार-बार देखना पड़ा। लेखन प्रक्रिया के दौरान टीम का पूरा ध्यान इस बात पर टिका था कि हर दृश्य और हर संवाद कहानी की मुख्य दिशा को आगे बढ़ाए और उसका कोई न कोई ठोस मतलब निकले। अजय देवगन के सधे हुए अभिनय और कसी हुई निर्देशन शैली ने मिलकर इस थ्रिलर को दर्शकों के लिए सांस रोक देने वाला अनुभव बना दिया है। पुराने दृश्यों और संवादों से तार जोड़ने की चुनौती निर्देशक ने बताया कि 'दृश्यम: द कन्क्लूजन' की पटकथा पर काम करते समय वे पिछली फिल्मों के छोटे से छोटे संवाद या दृश्य को बार-बार खंगालते थे। उनका मकसद यह समझना था कि अतीत की उन छोटी घटनाओं को इस नई कहानी से कैसे स्वाभाविक रूप से जोड़ा जाए। पाठक इस हकीकत से पूरी तरह वाकिफ थे कि दर्शक 'दृश्यम' और 'दृश्यम 2' की घटनाओं को अच्छी तरह जानते हैं, इसलिए किसी भी स्तर पर तालमेल में चूक की कोई गुंजाइश नहीं थी। रीमेक की छवि से बाहर निकलने का फैसला अभिषेक पाठक की सोच थी कि दर्शकों को पुरानी घटनाओं का जुड़ाव महसूस हो, लेकिन साथ ही फिल्म पूरी तरह ताज़ा लगे। उन्होंने साफ किया कि वे इस बार किसी भी हाल में रीमेक का लेबल नहीं चाहते थे। उनका मानना था कि जब पहले से मौजूद किसी कहानी को दोबारा बनाया जाता है, तो लोग अक्सर हिंदी रूपांतरण में की गई भारी रचनात्मक मेहनत को अनदेखा कर देते हैं। इसी वजह से उन्होंने इस आखिरी कड़ी को अपने दम पर नए सिरे से गढ़ने का फैसला किया। स्क्रीनप्ले पर लंबी बहस और अप्रत्याशित मोड़ निर्देशक ने जोर देकर कहा कि वे इस थ्रिलर को पूरी तरह अपनी रचनात्मक शैली में आगे बढ़ाना चाहते थे। कहानी को धारदार बनाए रखने के लिए टीम के भीतर पटकथा के हर पहलू पर लगातार तीखी बहस होती थी। जब भी कोई मोड़ पहले से अनुमान लगाने लायक लगता था, तो उसे तुरंत खारिज कर दिया जाता था ताकि सस्पेंस बना रहे। इसी सख्त प्रक्रिया ने कहानी को उलझावदार लेकिन दर्शकों के लिए पूरी तरह मनोरंजक बनाए रखा। दर्शकों और समीक्षकों की तरफ से मिल रही सकारात्मक प्रतिक्रिया इस बात का प्रमाण है कि अभिषेक पाठक का यह प्रयोग सफल रहा है। इसका आप पर असर फिल्म के मौलिक कथानक और फ्रेंचाइजी की पुरानी कड़ियों से इसके जुड़ाव के चलते दर्शकों को थियेटर में एक नया सिनेमाई अनुभव मिल रहा है। • सिनेमा प्रेमियों के लिए: दर्शकों को बिना किसी पूर्व-अनुमानित कहानी के बिल्कुल नया सस्पेंस देखने को मिल रहा है। इसका सीधा मतलब है कि जो लोग साउथ वर्जन देख चुके थे, उन्हें भी इस बार कहानी में नए झटके और सरप्राइज मिलेंगे। • फ्रेंचाइजी के प्रशंसकों के लिए: पिछली दोनों फिल्मों के कथानक और संवादों का संदर्भ समझने से इस फिल्म को देखना अधिक दिलचस्प हो जाता है। अगर आप थियेटर जाने की योजना बना रहे हैं, तो पुरानी फिल्मों के घटनाक्रम को दोबारा याद करना बेहतर रहेगा। • फिल्म निर्माण जगत के लिए: स्थापित फ्रेंचाइजी को बिना रीमेक के आगे बढ़ाना लेखकों और निर्देशकों को मौलिक प्रयोग करने की प्रेरणा देता है। इससे बड़े बजट की फिल्मों में मूल पटकथा लेखन के महत्व को नई मान्यता मिलती है। • टिकट बुकिंग पर प्रभाव: सकारात्मक समीक्षाओं और मौलिक कहानी की चर्चा से सप्ताहांत पर सिनेमाघरों में भीड़ बढ़ सकती है। टिकट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए दर्शकों को पहले से बुकिंग करने की सलाह दी जाती है। ऐसा क्यों हुआ अभिषेक पाठक ने रीमेक पर निर्भर रहने के बजाय एक स्वतंत्र और मौलिक स्क्रिप्ट तैयार करने का फैसला किया ताकि दर्शकों की पूर्व धारणाओं को तोड़ा जा सके। • रीमेक का ठप्पा हटाने की चाह: निर्देशक का मानना था कि रूपांतरित फिल्मों में हिंदी टीम के रचनात्मक परिश्रम को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। इसी सोच के चलते उन्होंने कहानी को पूरी तरह अपने नजरिए से नए सिरे से गढ़ने का निर्णय लिया। • पिछली कड़ियों की गहरी समझ: दर्शक पहले से ही दोनों शुरुआती फिल्मों की हर बारीकी और किरदार से भली-भांति परिचित थे। इस निरंतरता को बनाए रखने के लिए पुरानी फिल्मों के दृश्यों और संवादों को दोबारा देखकर कथानक को बुना गया। • पूर्वानुमान से बचने की कोशिश: पटकथा पर चर्चा के दौरान उन सभी मोड़ों को हटा दिया गया जिन्हें दर्शक आसानी से भांप सकते थे। इस कड़े दृष्टिकोण ने कहानी के रहस्य और गंभीरता को अंत तक बनाए रखने में मदद की। सवाल-जवाब 1. दृश्यम 3 के निर्देशक कौन हैं? इस फिल्म का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है। 2. फिल्म में मुख्य भूमिका किसने निभाई है? फिल्म में मुख्य भूमिका बॉलीवुड अभिनेता अजय देवगन ने निभाई है। 3. अभिषेक पाठक ने दृश्यम 3 के लिए नई स्क्रिप्ट क्यों लिखी? वे फिल्म पर रीमेक का ठप्पा नहीं चाहते थे और कहानी को अपना मौलिक रूप देना चाहते थे। 4. स्क्रिप्ट लिखते समय निर्देशक को पुरानी फिल्में क्यों देखनी पड़ीं? ताकि पुरानी कड़ियों के संवादों और दृश्यों को नई कहानी से सहजता के साथ जोड़ा जा सके। 5. स्क्रीनप्ले पर काम करते समय टीम किस बात का खास ख्याल रख रही थी? टीम यह सुनिश्चित कर रही थी कि कोई भी मोड़ आसानी से अंदाजा लगाने लायक न हो और सस्पेंस बना रहे। https://trendkia.com/bollywood/abhishek-pathak-ne-drishyam-3-ko-rimeka-ke-thappe-se-bachane-ke-lie-taiyara-ki-bilkula-nai-patakatha-42391 TrendKia — Har trend, sabse pehle.