अदालत में जब आतंकी अजमल कसाब ने खुद को बताया था नाबालिग, वकील उज्ज्वल निकम ने ऐसे तोड़ा था झूठ राजकुमार राव की फिल्म 'प्रहार' की चर्चा के बीच 26/11 मुंबई हमले के दोषी अजमल कसाब और सरकारी वकील उज्ज्वल निकम की अदालती बहस फिर चर्चा में है, जहां उम्र के फर्जी दावे की कलई खुली थी। मुंबई में 26 नवंबर 2008 को हुए आतंकी हमले के मुख्य गुनहगार अजमल कसाब को कानून के शिकंजे में कसने वाले सरकारी वकील उज्ज्वल निकम की अदालती लड़ाई अब सिल्वर स्क्रीन पर दिखने वाली है। अविनाश अरुण के निर्देशन में बनी फिल्म 'प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम' को लेकर दर्शकों में भारी उत्सुकता है। इस कानूनी संघर्ष का सबसे चर्चित पहलू वह मोड़ था, जब फांसी के फंदे से बचने के लिए आतंकी ने खुद के अवयस्क होने का पैंतरा चला था। अदालत के भीतर चली इस तीखी कानूनी तकरार का सच जानना बेहद दिलचस्प है। फांसी टालने के लिए रचा गया था उम्र का झूठा दांव अप्रैल 2009 में जब मामले की नियमित अदालती सुनवाई शुरू हुई, तब बचाव पक्ष के वकील अब्बास काजमी ने एक अर्जी लगाकर सबको चौंका दिया। कसाब की तरफ से अदालत में यह दलील रखी गई कि वारदात के वक्त उसकी उम्र महज 17 वर्ष थी और वह एक नाबालिग था। याचिका के जरिए यह गुहार लगाई गई कि इस पूरे मुकदमे को नियमित अदालत से हटाकर जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया जाए। यदि कानूनन उसका यह तर्क मान लिया जाता, तो भारतीय दंड संहिता के कड़े प्रावधानों के बावजूद उसे मृत्युदंड नहीं दिया जा सकता था। नाबालिग साबित होने पर कानून के तहत उसकी अधिकतम सजा सिर्फ तीन साल के लिए बाल सुधार गृह यानी जुवेनाइल रिमांड होम तक ही सीमित रह जाती। फॉरेंसिक साक्ष्यों और मेडिकल परीक्षण ने खोला भेद अभियोजन पक्ष की कमान संभाल रहे विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने इस चाल को तुरंत भांप लिया। उन्होंने अदालत में पुरजोर दलील दी कि यह अर्जी केवल मामले को अटकाने और मौत की सजा से बचने की सोची-समझी साजिश है। निकम की पुरजोर अपील पर अदालत ने फॉरेंसिक जांच कराने का फैसला किया। इसके बाद सर जेजे अस्पताल के चार विशेषज्ञ चिकित्सकों का एक पैनल बनाया गया, जिसकी अगुवाई डॉ. नंदा कुमार कर रहे थे। डॉक्टरों की इस विशेष टीम ने आरोपी का गहन मेडिकल परीक्षण किया। मेडिकल टीम द्वारा किए गए बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट और जबड़े व दांतों के एक्स-रे परीक्षण ने वैज्ञानिक रूप से यह साफ कर दिया कि 26 नवंबर 2008 की खौफनाक रात को कसाब की उम्र कम से कम 19 साल 6 महीने हो चुकी थी। पुराने बयानों और जेल रिकॉर्ड ने बढ़ाई मुश्किलें मेडिकल रिपोर्ट के साथ-साथ खुद आरोपी के पूर्व में दर्ज कराए गए बयानों ने भी बचाव पक्ष के तर्कों की हवा निकाल दी। सुनवाई के दौरान आर्थर रोड जेल की उस समय की जेल अधीक्षक स्वाति साठे ने गवाही पेश की। उन्होंने अदालत को बताया कि जब आरोपी को जेल में दाखिल किया गया था, तब उसने खुद अपनी उम्र 21 साल लिखवाई थी। इतना ही नहीं, हमले के तुरंत बाद 27 नवंबर 2008 को नायर अस्पताल में उपचार करते वक्त डॉ. राघवन के सामने भी उसने स्वयं को 21 वर्ष का ही बताया था। इसके अलावा सबसे पुख्ता दस्तावेज न्यायिक मजिस्ट्रेट के समक्ष धारा 164 के तहत दर्ज कराया गया उसका इकबालिया बयान बना, जिसमें उसने बालिग होने की बात स्वीकारते हुए अपनी उम्र 21 साल दर्ज कराई थी। विशेष जज ने खारिज की फरीदकोट से कागजात मंगाने की मांग इन अकाट्य सरकारी और चिकित्सकीय दस्तावेजों के सामने आने पर बचाव पक्ष पूरी तरह बैकफुट पर आ गया। कसाब के वकीलों ने पाकिस्तान स्थित उसके गांव फरीदकोट से जन्म प्रमाण पत्र मंगाने की मांग रखी, लेकिन विशेष न्यायाधीश एमएल तहिलयानी ने इस मांग को सिरे से ठुकरा दिया। अदालत ने मेडिकल रिपोर्ट और पुराने रिकॉर्ड्स को अंतिम और निर्णायक मानते हुए अवयस्क होने की दलील पूरी तरह खारिज कर दी। अदालती कार्यवाही के दौरान आरोपी आंसू बहाकर और मासूमियत का नाटक करके सहानुभूति बटोरने की कोशिश करता था, लेकिन वैज्ञानिक साक्ष्यों के आगे उसकी एक न चली। बाद में अगस्त 2012 में देश की शीर्ष अदालत के न्यायमूर्ति आफताब आलम और न्यायमूर्ति सीके प्रसाद की पीठ ने भी इस फॉरेंसिक परीक्षण को सही ठहराते हुए उसकी मृत्युदंड की सजा को अंतिम रूप से बरकरार रखा था। 16 अक्टूबर को सिनेमाघरों में आ रही है फिल्म कानून और न्याय की इस ऐतिहासिक दास्तान को अब दर्शक सिनेमाघरों में देख सकेंगे। 16 अक्टूबर को रिलीज होने जा रही इस बायोग्राफिकल फिल्म में अभिनेता राजकुमार राव वकील उज्ज्वल निकम के मुख्य किरदार में हैं। उनके साथ सिकंदर खेर बचाव पक्ष के वकील और आशीष विद्यार्थी न्यायाधीश की अहम भूमिका निभाते दिखाई देंगे। ट्रेलर रिलीज होने के बाद से ही इस अदालती दास्तान को देखने के लिए दर्शकों का उत्साह चरम पर है। इसका आप पर असर यह अदालती घटनाक्रम भारतीय न्याय प्रणाली में वैज्ञानिक फॉरेंसिक साक्ष्यों की निर्णायक भूमिका और गंभीर मामलों में कानूनी प्रक्रिया की मजबूती को स्पष्ट करता है। • कानूनी जवाबदेही: कानून के जानकारों और छात्रों के लिए यह मिसाल है कि जुवेनाइल एक्ट के दुरुपयोग को वैज्ञानिक तरीकों से कैसे रोका जा सकता है। यह दर्शाता है कि फॉरेंसिक जांच गंभीर अपराधों में आरोपियों को कानूनी खामियों का गलत लाभ उठाने से रोकती है। • फिल्म दर्शकों के लिए: सिनेमा प्रेमियों को 16 अक्टूबर को रिलीज हो रही फिल्म 'प्रहार' के जरिए देश के सबसे बड़े आतंकी मुकदमे की इनसाइड कहानी देखने को मिलेगी। दर्शक पर्दे पर राजकुमार राव और अन्य कलाकारों के जरिए वास्तविक अदालती दांव-पेंचों को समझ सकेंगे। • नागरिक जागरूकता: आम नागरिकों के लिए यह जानकारी दर्शाती है कि सुरक्षा एजेंसियां और न्यायपालिका किस तरह दस्तावेजी सबूतों को संभालती हैं। आपातकालीन स्वास्थ्य रिकॉर्ड और जेल प्रविष्टियां भी कोर्ट में अकाट्य साक्ष्य बन सकती हैं। • फॉरेंसिक साक्ष्य की अहमियत: जांच एजेंसियों के लिए बोन ऑसिफिकेशन और मेडिकल रिकॉर्ड्स उम्र विवाद सुलझाने में केंद्रीय हथियार बने। यह प्रक्रिया रेखांकित करती है कि वैज्ञानिक जांच के सामने झूठे दावे ज्यादा देर नहीं टिक पाते। ऐसा क्यों हुआ आतंकी कसाब ने फांसी से बचने और सजा को कम करवाने के मकसद से मुकदमे के शुरुआती दौर में अवयस्क होने का कानूनी दावा पेश किया था। • कठोर सजा से बचने की कोशिश: भारतीय कानून के अनुसार 18 वर्ष से कम उम्र के आरोपी को मौत की सजा नहीं दी जा सकती। इसी प्रावधान का फायदा उठाकर केवल 3 साल के सुधार गृह की सजा पाकर बचने की योजना बनाई गई थी। • सरकारी वकील का कड़ा रुख: विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने इस अर्जी को समय बिताने का पैंतरा बताया और फॉरेंसिक जांच की मांग की। अदालत ने इस मांग को स्वीकार करते हुए डॉक्टरों के बोर्ड को जांच का जिम्मा दिया। • वैज्ञानिक जांच और पुराने साक्ष्य: सर जेजे अस्पताल के डॉक्टरों ने ऑसिफिकेशन टेस्ट और एक्स-रे के आधार पर उम्र 19 वर्ष 6 महीने साबित की। इसके अलावा जेल दाखिले, नायर अस्पताल के पर्चे और मजिस्ट्रेट के सामने दिए 164 के बयान में उसने खुद को 21 साल का बताया था। • सर्वोच्च अदालत की मुहर: विशेष अदालत द्वारा खारिज किए जाने के बाद यह मामला शीर्ष अदालत तक पहुंचा। अगस्त 2012 में सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की पीठ ने भी मेडिकल रिपोर्ट को स्वीकार कर कसाब की मौत की सजा बरकरार रखी। सवाल-जवाब 1. अदालत में अजमल कसाब ने अपनी उम्र को लेकर क्या दावा किया था? अजमल कसाब ने दावा किया था कि 26/11 हमले के समय वह महज 17 साल का था और एक नाबालिग था। 2. कसाब के नाबालिग साबित होने पर क्या सजा हो सकती थी? भारतीय कानून के तहत उसे फांसी नहीं दी जा सकती थी और उसकी सजा जुवेनाइल रिमांड होम में अधिकतम 3 साल तक ही सीमित रहती। 3. कसाब की उम्र की जांच किस अस्पताल के डॉक्टरों ने की थी? सर जेजे अस्पताल के चार डॉक्टरों की टीम ने डॉ. नंदा कुमार की अगुवाई में बोन ऑसिफिकेशन टेस्ट और एक्स-रे के जरिए जांच की थी। 4. मेडिकल जांच में कसाब की उम्र कितनी पाई गई? फॉरेंसिक और ऑसिफिकेशन जांच में सामने आया कि 26 नवंबर 2008 की रात कसाब की उम्र कम से कम 19 साल 6 महीने थी। 5. जेल और अस्पताल के रिकॉर्ड में कसाब की उम्र क्या दर्ज थी? आर्थर रोड जेल दाखिले के वक्त और नायर अस्पताल के इलाज के दौरान कसाब ने खुद अपनी उम्र 21 साल बताई थी। 6. फिल्म 'प्रहार' किस तारीख को रिलीज हो रही है? निर्देशक अविनाश अरुण की फिल्म 'प्रहार: द अनटोल्ड स्टोरी ऑफ उज्ज्वल निकम' 16 अक्टूबर को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है। 7. फिल्म 'प्रहार' में सरकारी वकील उज्ज्वल निकम का किरदार कौन निभा रहा है? फिल्म में अभिनेता राजकुमार राव सरकारी वकील उज्ज्वल निकम की भूमिका निभा रहे हैं। https://trendkia.com/bollywood/adalata-men-jaba-atnki-ajmal-kasab-ne-khuda-ko-bataya-tha-nabaliga-vakila-ujjwal-nikam-ne-aise-tora-tha-jhutha-43453 TrendKia — Har trend, sabse pehle.