# अनुराग कश्यप की फिल्म के बाद नवाजुद्दीन सिद्दीकी को मिले थे 200 ऑफर, ब्लैंक चेक तक ठुकराए

> नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने खुलासा किया कि 'गैंग्स ऑफ वासेपुर 2' की कामयाबी के बाद निर्माताओं ने उन्हें मुंहमांगी रकम और खाली चेक ऑफर किए थे, लेकिन उन्होंने करीब 200 कमजोर स्क्रिप्ट्स ठुकरा दीं।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/anurag-kashyap-ki-philma-ke-bada-nawazuddin-siddiqui-ko-mile-the-200-phara-blainka-cheka-taka-thukarae-34995 · **Language:** Hindi
**Tags:** नवाजुद्दीन सिद्दीकी, गैंग्स ऑफ वासेपुर 2, अनुराग कश्यप, बॉलीवुड, मनोज बाजपेयी, हुमा कुरैशी

भारतीय सिनेमा के मंझे हुए कलाकार नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने अपने करियर के उस निर्णायक मोड़ का ब्योरा साझा किया है, जिसने उनकी पूरी जिंदगी बदल दी थी। पारंपरिक फिल्मी हीरो की तयशुदा छवि में फिट न बैठने के बावजूद नवाजुद्दीन ने केवल अपनी अदाकारी के दम पर दर्शकों और आलोचकों का दिल जीता। एक हालिया साक्षात्कार में जब उनसे सवाल किया गया कि उन्हें पहली बार एक सच्चे स्टार होने का एहसास कब हुआ, तो उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के साल 2012 में आई फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर 2' का नाम लिया।

## फैज़ल खान के किरदार से रातों-रात बदली तकदीर
साल 2012 में अनुराग कश्यप के निर्देशन में 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के दोनों भाग सिनेमाघरों में रिलीज हुए थे। इस कल्ट फिल्म ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ-साथ मनोज बाजपेयी और हुमा कुरैशी को भी हिंदी सिनेमा में एक मजबूत पहचान दिलाई। फिल्म में 'फैज़ल खान' के रूप में नवाजुद्दीन के अभिनय ने दर्शकों पर ऐसा जादू चलाया कि उनके लिए बॉलीवुड के तमाम दरवाजे अचानक खुल गए। नवाजुद्दीन के अनुसार, इस एक किरदार की अपार लोकप्रियता ने उनके संघर्ष के दिनों को एक झटके में सुनहरे दौर में बदल दिया।

## निर्माताओं ने थमा दिए थे ब्लैंक चेक
'गैंग्स ऑफ वासेपुर' की ऐतिहासिक सफलता के तुरंत बाद नवाजुद्दीन सिद्दीकी के पास नई फिल्मों के प्रस्तावों का तांता लग गया। अभिनेता ने बताया कि फिल्म आने के बाद उन्हें लगभग 200 फिल्मों की स्क्रिप्ट्स की पेशकश की गई थी। उस दौरान फिल्म निर्माताओं के बीच उन्हें साइन करने की होड़ मची हुई थी। मेकर्स उन्हें मुंहमांगी फीस देने को तैयार थे और यहां तक कि कई निर्माताओं ने तो उन्हें खाली चेक तक थमा दिए थे ताकि वह अपनी मनपसंद रकम उसमें खुद भर सकें। निर्माता अभिनेता की खाली तारीखों के हिसाब से अपनी शूटिंग का शेड्यूल तय करने के लिए भी राजी थे।

## 200 पटकथाओं में से एक भी नहीं की साइन
अक्सर देखा जाता है कि बड़ी कामयाबी मिलते ही कलाकार बिना सोचे-समझे हर प्रोजेक्ट स्वीकार कर लेते हैं, लेकिन नवाजुद्दीन ने असाधारण संयम का परिचय दिया। उन्होंने अपनी प्राथमिकताओं और कला से कोई समझौता नहीं किया। नवाजुद्दीन ने उन 200 स्क्रिप्ट्स में से एक भी फिल्म साइन नहीं की, क्योंकि उन्हें किसी भी कहानी में वह दम और गहराई नजर नहीं आई जो वह तलाश रहे थे। उन्होंने जल्दबाजी में काम करने के बजाय एक असरदार और मजबूत किरदार के लिए इंतजार करना ही उचित समझा।

## लंबे संघर्ष ने सिखाया था इंतजार का हुनर
अपनी इस रणनीति पर बात करते हुए नवाजुद्दीन ने कहा, 
> "मुझे इंतजार करने की आदत थी।"
 उन्होंने स्पष्ट किया कि वह कई वर्षों से अच्छे काम की तलाश में धैर्य रखे हुए थे, इसलिए उन्होंने सोचा कि खराब प्रोजेक्ट्स चुनने से कहीं बेहतर होगा कि वह दो-तीन साल और अच्छी पटकथा की प्रतीक्षा कर लें। अभिनेता ने आगे कहा कि ईश्वर की ऐसी कृपा रही कि उन्हें बहुत लंबा इंतजार नहीं करना पड़ा और जल्द ही बेहतरीन काम मिलने लगा। पिछले 14 वर्षों में उन्होंने विविध और चुनौतीपूर्ण भूमिकाएं निभाकर सिनेमा जगत में अपना एक विशिष्ट मुकाम बना लिया है।

## इसका आप पर असर
यह किस्सा दिखाता है कि कैसे पेशेवर जिंदगी में तात्कालिक आर्थिक लाभ के बजाय काम की गुणवत्ता चुनना लंबे समय में करियर को मजबूत बनाता है।

- **कलाकारों और युवाओं के लिए:** सफलता मिलते ही जल्दबाजी में हर प्रोजेक्ट पकड़ने के बजाय अपने काम के स्तर को बनाए रखना जरूरी है। यह दृष्टिकोण किसी भी क्षेत्र में आपकी दीर्घकालिक पहचान और ब्रांड वैल्यू को सुरक्षित रखता है।
- **मनोरंजन उद्योग में:** बॉक्स ऑफिस की मांग के बीच भी दमदार पटकथा को प्राथमिकता देने वाले अभिनेता हमेशा अलग नजर आते हैं। इससे फिल्म निर्माताओं को भी समझ आता है कि केवल बड़े पैसे से प्रतिभा को नहीं खरीदा जा सकता।
- **करियर में संयम का महत्व:** संघर्ष के दौर में सीखी गई धैर्य की आदत आगे चलकर सही निर्णय लेने में मदद करती है। किसी भी क्षेत्र में दबाव में आकर गलत समझौते करने से बचना ही सफलता की असली कुंजी है।
- **दर्शकों के नजरिए से:** जब कोई अभिनेता केवल चुनिंदा और मजबूत स्क्रिप्ट चुनता है, तो दर्शकों का उस पर भरोसा बढ़ता है। इससे दर्शकों को पर्दे पर हमेशा स्तरीय और यादगार अभिनय देखने को मिलता है।

## ऐसा क्यों हुआ
नवाजुद्दीन सिद्दीकी का यह फैसला उनके पुराने संघर्ष और कला के प्रति समर्पण की सीधी वजह से सामने आया था।

- **गैंग्स ऑफ वासेपुर 2 की ऐतिहासिक लोकप्रियता:** साल 2012 में रिलीज हुई इस फिल्म में फैज़ल खान के किरदार ने नवाजुद्दीन को रातों-रात चर्चा के केंद्र में ला खड़ा किया था। इस जबरदस्त लोकप्रियता के कारण निर्माताओं में उन्हें अपनी फिल्मों में लेने की होड़ मच गई थी।
- **स्क्रिप्ट्स में दम न होना:** निर्माताओं ने उन्हें लगभग 200 फिल्मों की पटकथाएं भेजीं और खाली चेक तक ऑफर किए। लेकिन अभिनेता के अनुसार, उनमें से किसी भी कहानी में पर्याप्त गहराई और दम नहीं था, जिसके चलते उन्होंने सभी ऑफर ठुकरा दिए।
- **संघर्ष से मिली धैर्य की सीख:** नवाजुद्दीन ने कई सालों तक पहचान पाने के लिए इंतजार किया था, इसलिए उन्हें आगे भी इंतजार करने में कोई झिझक नहीं थी। उन्होंने खराब फिल्में करने के बजाय दो-तीन साल और प्रतीक्षा करने का मन बना लिया था।

## सवाल-जवाब

### 1. नवाजुद्दीन सिद्दीकी को पहली बार असली स्टार होने का एहसास किस फिल्म से हुआ?
नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने बताया कि साल 2012 में रिलीज हुई फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर 2' ने उन्हें पहली बार एक असली स्टार होने का अहसास कराया।

### 2. 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने कौन सा किरदार निभाया था?
अनुराग कश्यप के निर्देशन में बनी इस फिल्म में नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने 'फैज़ल खान' का यादगार किरदार निभाया था।

### 3. फिल्म की रिलीज के बाद नवाजुद्दीन सिद्दीकी को कितने प्रोजेक्ट्स के ऑफर मिले थे?
नवाजुद्दीन सिद्दीकी के अनुसार, 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' की सफलता के बाद उन्हें लगभग 200 फिल्मों की पटकथाएं ऑफर हुई थीं।

### 4. निर्माताओं ने नवाजुद्दीन सिद्दीकी को साइन करने के लिए क्या पेशकश की थी?
निर्माता उन्हें मुंहमांगी फीस देने को तैयार थे, कई मेकर्स ने ब्लैंक चेक तक दे दिए थे और वे अभिनेता की खाली तारीखों के मुताबिक शेड्यूल बदलने को राजी थे।

### 5. नवाजुद्दीन सिद्दीकी ने उन 200 स्क्रिप्ट्स को क्यों ठुकरा दिया?
अभिनेता ने बताया कि उन्हें उन 200 स्क्रिप्ट्स में से किसी की भी कहानी दमदार नहीं लगी, इसलिए उन्होंने कमजोर प्रोजेक्ट साइन करने के बजाय इंतजार करना बेहतर समझा।

### 6. 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' से किन अन्य कलाकारों को बड़ी पहचान मिली थी?
साल 2012 में आई इस फिल्म से नवाजुद्दीन सिद्दीकी के साथ-साथ मनोज बाजपेयी और हुमा कुरैशी को भी व्यापक पहचान हासिल हुई थी।

## प्रेरणा और सबक
नवाजुद्दीन सिद्दीकी के करियर का यह प्रसंग सिखाता है कि पेशेवर जीवन में धैर्य और आत्मसम्मान से बड़ा कोई धन नहीं होता।

- **काम की गुणवत्ता से समझौता न करें:** हाथ में खाली चेक होने के बावजूद 200 कमजोर प्रस्तावों को ठुकरा देना दिखाता है कि अपने काम की गरिमा को पैसों से ऊपर रखना चाहिए।
- **धैर्य को अपनी ताकत बनाएं:** जीवन में लंबे समय तक संघर्ष करने के बाद मिली सफलता में बहकने के बजाय संयम बनाए रखना ही लंबी पारी की बुनियाद है।
- **भीड़ से अलग राह चुनने का साहस रखें:** जब बाकी लोग मौके भुनाने की होड़ में हों, तब सही अवसर का इंतजार करने का साहस दिखाना आपको दूसरों से अलग बनाता है।
- **अपनी मेहनत और हुनर पर विश्वास रखें:** पारंपरिक रूप-रंग या तयशुदा पैमानों पर फिट न बैठने के बावजूद अपने कौशल के दम पर शीर्ष मुकाम हासिल किया जा सकता है।

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