बचपन के अकेलेपन से लेकर सफलता के शिखर तक, जानिए फ्रेंडशिप डे पर करण जौहर ने क्यों बताया दोस्तों को अपनी असली दौलत फ्रेंडशिप डे के अवसर पर फिल्म निर्माता करण जौहर ने अपने बचपन के अकेलेपन, वजन और मुहासों से जुड़ी हीन भावना तथा अपने जीवन में दोस्तों के योगदान पर एक भावुक पोस्ट साझा की। बॉलीवुड के मशहूर फिल्म निर्देशक करण जौहर ने फ्रेंडशिप डे के खास मौके पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर एक बेहद भावुक संदेश साझा किया है। इस पोस्ट के जरिए उन्होंने अपने जीवन के उन संघर्षों और पुराने दिनों की यादों को उजागर किया, जब वे बचपन में अकेलेपन और हीन भावना से जूझ रहे थे। उन्होंने स्पष्ट किया कि जीवन में हासिल की गई शोहरत और धन-दौलत से कहीं अधिक कीमती वे दोस्त हैं, जिन्होंने हर कठिन परिस्थिति में उनका मार्गदर्शन किया और उनके साथ खड़े रहे। बचपन का एकाकीपन और खिड़की से दिखता गली क्रिकेट अपनी पुरानी स्मृतियों को खंगालते हुए करण जौहर ने बताया कि जब वे महज 7 साल के थे, तब उनका जीवन काफी अकेला था। वे अपने घर की खिड़की के पास बैठकर बाहर सड़क पर अन्य बच्चों को गली क्रिकेट खेलते हुए देखा करते थे। उस उम्र में वे कभी उन खेलों में शामिल नहीं हो पाए और मन ही मन हमेशा इस बात पर विचार करते रहते थे कि उनका कोई पक्का मित्र क्यों नहीं है। उस दौर की तन्हाई ने उनके बाल मन पर गहरा प्रभाव डाला था और वे लगातार अपने लिए सच्चे साथियों की कमी महसूस करते रहते थे। फरजाना मंचेरजी का आगमन और 47 वर्षों का अटूट विश्वास करण जौहर के जीवन का पहला सुखद मोड़ तब आया जब उनकी मुलाकात फरजाना मंचेरजी से हुई। फरजाना ही उनकी पहली सच्ची दोस्त बनीं, जिन्होंने उन्हें अकेलेपन के अंधेरे से बाहर निकाला और खुद पर विश्वास करना सिखाया। उन्होंने इस बात का उल्लेख किया कि इस पहली मुलाकात के 47 साल बीत जाने के बाद भी फरजाना आज भी उनके जीवन का बेहद खास और अभिन्न हिस्सा बनी हुई हैं। उस दोस्ती ने करण को जीवन को देखने का एक नया नजरिया दिया और उन्हें मानसिक संबल प्रदान किया। स्कूल का नया सेक्शन, अपूर्व मेहता और धर्मा प्रोडक्शंस की नींव स्कूली शिक्षा के दौरान जब करण का सेक्शन बदला, तो वे एक बार फिर खुद को अलग-थलग और अकेला महसूस करने लगे थे। ऐसे मुश्किल वक्त में उनकी कक्षा के साथी अपूर्व मेहता ने आगे बढ़कर दोस्ती का हाथ बढ़ाया। वही अपूर्व मेहता आज न केवल करण के सबसे करीबी दोस्त हैं, बल्कि मनोरंजन उद्योग की जानी-मानी कंपनी धर्मा प्रोडक्शंस के सीईओ के रूप में भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रहे हैं। अपूर्व ने न केवल उन्हें अन्य साथियों के साथ जोड़ा, बल्कि यह भी समझाया कि जब व्यक्ति खुद को स्वीकार करना सीख जाता है, तभी जमाना भी उसे सहर्ष अपनाता है। शारीरिक झिझक पर जीत और दोस्ती को बताया सच्चा निवेश करण जौहर ने अपनी इस पोस्ट में ईमानदारी से स्वीकार किया कि वे एक समय अपने बढ़ते वजन, चेहरे के मुंहासों और अत्यधिक संकोची स्वभाव के कारण गहरी हीन भावना से पीड़ित थे। इन तमाम शारीरिक और मानसिक झिझकों से उबारने में उनके दोस्तों की भूमिका निर्णायक रही। उन्होंने अपने सभी मित्रों का आभार जताते हुए कहा कि संसार में रुपया और प्रसिद्धि अपनी जगह महत्व रखते हैं, लेकिन इंसान का सबसे बड़ा और स्थाई निवेश सच्चे दोस्त बनाना ही है। उन्होंने उन सभी लोगों का शुक्रिया अदा किया जो हर सुख-दुख में उनके साथ मजबूती से खड़े रहे। इसका आप पर असर पाठकों के लिए: करण जौहर का यह संस्मरण सिखाता है कि बाहरी सफलता, धन और शोहरत के मुकाबले जीवन में सच्चे दोस्तों का संबल और आत्म-स्वीकृति ही मानसिक स्वास्थ्य की असली बुनियाद है। सवाल-जवाब 1. करण जौहर ने फ्रेंडशिप डे पर इंस्टाग्राम पर क्या साझा किया? करण जौहर ने फ्रेंडशिप डे पर अपने बचपन के अकेलेपन, शारीरिक झिझकों और अपने जीवन में दोस्तों के अतुलनीय योगदान को याद करते हुए एक भावुक पोस्ट साझा की। 2. 7 साल की उम्र में करण जौहर कैसा महसूस करते थे? 7 साल की उम्र में करण खुद को अकेला महसूस करते थे और अपने घर की खिड़की से दूसरे बच्चों को गली क्रिकेट खेलते हुए देखा करते थे। 3. करण जौहर की पहली दोस्त कौन बनीं और उनकी दोस्ती कितने साल पुरानी है? करण जौहर की पहली दोस्त फरजाना मंचेरजी बनीं, जिन्होंने उन्हें अकेलेपन से निकाला। उनकी यह दोस्ती 47 साल बाद भी उतनी ही मजबूत है। 4. अपूर्व मेहता कौन हैं और उन्होंने करण जौहर की कैसे मदद की? अपूर्व मेहता करण जौहर के स्कूली दोस्त और वर्तमान में धर्मा प्रोडक्शंस के सीईओ हैं। उन्होंने स्कूल में करण का आत्मविश्वास बढ़ाया और उन्हें आत्म-स्वीकृति सिखाई। 5. करण जौहर बचपन में किन बातों को लेकर हीन भावना से जूझ रहे थे? करण जौहर अपने बढ़ते वजन, चेहरे के मुंहासों और अत्यधिक संकोची स्वभाव के कारण हीन भावना से जूझ रहे थे। प्रेरणा और सबक • अकेलेपन से घबराएं नहीं: बचपन की कठिनाइयां और अकेलापन स्थाई नहीं होते; सही समय पर सही इंसान से जुड़ना जीवन की दिशा बदल सकता है। • आत्म-स्वीकृति ही सबसे बड़ी ताकत है: जब आप अपने रंग-रूप, वजन और कमियों को स्वीकार करते हैं, तभी दुनिया भी आपको सम्मान देती है। • सच्चे संबंधों में निवेश करें: पैसा और शोहरत आते-जाते रहते हैं, लेकिन संकट के समय सच्चे दोस्त ही आपका सबसे बड़ा संबल बनते हैं। • पुराने दोस्तों का आभार व्यक्त करें: सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद भी उन लोगों को कभी न भूलें जिन्होंने शुरुआती दौर में आपका साथ दिया था। https://trendkia.com/bollywood/bachapana-ke-akelepana-se-lekara-saphalata-ke-shikhara-taka-janie-friendship-day-para-karan-johar-ne-kyon-bataya-doston-ko-apani-a-13074 TrendKia — Har trend, sabse pehle.