# बागबान के दर्द भरे गीत ने जब सिनेमाघरों में दर्शकों को रुला दिया

> फिल्म बागबान के गीत 'मैं यहां तू वहां' में अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी के किरदार की जुदाई का दर्द आज 23 साल बाद भी लोगों को भावुक कर देता है।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-10-05 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/baghban-ke-darda-bhare-gita-ne-jaba-sinemagharon-men-darshakon-ko-rula-diya-42962 · **Language:** Hindi
**Tags:** बागबान, अमिताभ बच्चन, हेमा मालिनी, मैं यहां तू वहां, रवि चोपड़ा, आदेश श्रीवास्तव, बॉलीवुड गाने

सिनेमा के इतिहास में कुछ गीत ऐसे होते हैं जो समय की सीमाओं को पार कर दशकों बाद भी दर्शकों के दिलों में वही पुराना दर्द जगा देते हैं। 23 साल पहले रिलीज हुई पारिवारिक ड्रामा फिल्म बागबान का एक खास गीत आज भी जब बजता है, तो अपनों से दूर रह रहे लोगों की आंखें नम हो जाती हैं। बड़े पर्दे पर जब यह गाना पहली बार रिलीज हुआ था, तब सिनेमाघरों में बैठे अनगिनत दर्शक किरदारों के अलगाव और दर्द को देखकर फूट-फूटकर रो पड़े थे। इस गीत की सबसे बड़ी खूबी यह रही कि इसमें खुद मुख्य अभिनेता अमिताभ बच्चन ने अपनी आवाज देकर किरदारों के दर्द को सीधे दर्शकों के दिलों तक पहुंचाया था।

## टेलीफोन बूथ से बयां हुआ दो दिलों की जुदाई का दर्द
फिल्म में इस गीत को बेहद भावुक और मार्मिक तरीके से फिल्माया गया था। एक साधारण से टेलीफोन बूथ के भीतर खड़े होकर अमिताभ बच्चन का किरदार अपनी पत्नी से बात करते हुए अपने जज्बात व्यक्त करता है। फोन के दूसरी तरफ हेमा मालिनी का किरदार भी अपने आंसू नहीं रोक पाता और दोनों की सिसकियों के बीच यह गीत आगे बढ़ता है। चार दशक साथ बिताने के बाद अचानक आई यह दूरी दोनों किरदारों के लिए असहनीय हो जाती है, जिसे पर्दे पर देखते हुए दर्शक खुद को उनके दर्द से अलग नहीं रख पाते। आज भी जो लोग कामकाज या मजबूरियों के चलते अपने जीवनसाथी से दूर रहते हैं, उनके लिए इस गाने के बोल दिल को छू लेने वाले साबित होते हैं।

## अमिताभ बच्चन और अलका याग्निक की जुगलबंदी ने बनाया अमर
इस यादगार गीत के बोल हैं 'मैं यहां तू वहां', जिसे संगीतकार आदेश श्रीवास्तव ने एक बेहद धीमी और दिल को छू लेने वाली धुन में पिरोया था। गीत के बोल समीर अनजान और बीआर चोपड़ा ने मिलकर तैयार किए थे, जिनमें शुरुआती दो मुखड़े बीआर चोपड़ा की कलम से निकले थे। अमिताभ बच्चन ने जहां इस गीत में अपनी भारी और गंभीर आवाज में खुद गायकी की, वहीं हेमा मालिनी के हिस्से के सुर मशहूर गायिका अलका याग्निक ने साधे थे। दोनों कलाकारों की गायकी और अदाकारी के संगम ने इस गाने को एक अमर रचना बना दिया, जिसने उस दौर में हर संवेदनशील दर्शक को झकझोर कर रख दिया था।

## चार बेटों के बीच बंट गए थे 40 साल पुराने रिश्ते
साल 2003 में रिलीज हुई फिल्म बागबान का निर्देशन रवि चोपड़ा ने किया था, जो इसके सह-लेखक और निर्माता भी थे। फिल्म की मूल कहानी राज और पूजा नाम के एक बुजुर्ग दंपति के इर्द-गिर्द घूमती है, जिनकी शादी को 40 साल बीत चुके होते हैं। राज की नौकरी से सेवानिवृत्ति के बाद उनके चार बेटे, जिनके किरदार अमन वर्मा, समीर सोनी, साहिल चड्ढा और नासिर खान ने निभाए थे, अपने माता-पिता की जिम्मेदारी उठाने से कतराने लगते हैं। अपने आराम और खर्चों के चलते वे योजना बनाते हैं कि मां और पिता को अलग-अलग बेटों के घरों में रहना होगा। इसी जबरन अलगाव की त्रासदी से वह दर्द पैदा होता है, जो पूरी फिल्म और खासकर इस गीत की आत्मा बनकर दर्शकों के सामने आया था।

## इसका आप पर असर
पारिवारिक रिश्तों और माता-पिता के सम्मान पर आधारित यह फिल्म आज भी समाज में बुजुर्गों की देखभाल को लेकर एक जरूरी संदेश देती है।

- **पारिवारिक मूल्यों पर असर:** यह कहानी संयुक्त परिवारों में बुजुर्ग माता-पिता के प्रति बच्चों की जिम्मेदारियों को रेखांकित करती है। दर्शक इससे प्रेरणा लेकर अपने घर के बड़े-बुजुर्गों के साथ समय बिताने और उनके अकेलेपन को समझने का प्रयास कर सकते हैं।
- **रिश्तों की संवेदनशीलता:** जीवनसाथी के बीच दशकों पुराने जुड़ाव और जुदाई के दर्द को समझकर लोग अपने निजी रिश्तों को अधिक महत्व देना सीखते हैं। कठिन परिस्थितियों में भी एक-दूसरे का भावनात्मक संबल बने रहने की सीख मिलती है।
- **बुजुर्गों की वित्तीय सुरक्षा:** रिटायरमेंट के बाद आत्मनिर्भर रहने का महत्व इस कहानी से साफ झलकता है। कामकाजी लोगों को अपने भविष्य की वित्तीय योजनाएं पहले से सुरक्षित रखने की प्रेरणा मिलती है।
- **संगीत प्रेमियों के लिए:** पुराने सदाबहार और भावुक गीतों की कद्र करने वाले संगीत प्रेमियों को यह याद दिलाता है कि सादगी भरे बोल कितना गहरा असर छोड़ सकते हैं। डिजिटल दौर में भी यह गीत पुरानी यादों को ताजा करने का जरिया बना हुआ है।

## ऐसा क्यों हुआ
फिल्म बागबान का यह गीत और कहानी एक ऐसे सामाजिक विषय को सामने लाने के उद्देश्य से रचे गए थे, जो आम परिवारों की अनकही हकीकत बयां करता है। बुजुर्ग दंपति की जुदाई के दर्द को संगीत के माध्यम से पर्दे पर सबसे प्रभावी ढंग से उतारा गया।

- **कहानी की मांग:** फिल्म की पटकथा में माता-पिता को उनके चार बेटों द्वारा जबरन अलग-अलग रखने का फैसला कराया गया था। इस अप्रत्याशित जुदाई के गहरे सदमे को व्यक्त करने के लिए एक भावुक और असरदार गीत की आवश्यकता थी।
- **निर्माताओं का दृष्टिकोण:** रवि चोपड़ा और बीआर चोपड़ा ऐसे पारिवारिक मुद्दों को पर्दे पर दिखाना चाहते थे जिनसे आम भारतीय दर्शक सीधे जुड़ सकें। गीत के बोल और टेलीफोन बूथ का दृश्य विशेष रूप से उसी अकेलेपन को उजागर करने के लिए तैयार किया गया था।
- **कलाकारों का समर्पण:** अमिताभ बच्चन ने दृश्य की संवेदनशीलता को देखते हुए खुद अपनी आवाज में इसे गाना चुना। उनकी भारी आवाज और स्वाभाविक अभिनय ने पात्र के भीतर दबे आंसुओं को पर्दे पर जीवंत कर दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. बागबान फिल्म का कौन सा गाना आज भी लोगों को भावुक कर देता है?
फिल्म बागबान का गीत 'मैं यहां तू वहां' अपने भावुक बोलों और जुदाई के दर्द के कारण आज भी दर्शकों को रुला देता है।

### 2. इस गीत को किसने गाया था?
इस गीत में अमिताभ बच्चन ने अपनी खुद की आवाज दी थी, जबकि हेमा मालिनी के लिए पार्श्व गायन अलका याग्निक ने किया था।

### 3. गीत के बोल किसने लिखे थे और संगीत किसने दिया था?
इसके बोल समीर अनजान और बीआर चोपड़ा ने लिखे थे, जिनमें शुरुआती दो मुखड़े बीआर चोपड़ा के थे, और संगीत आदेश श्रीवास्तव ने तैयार किया था।

### 4. फिल्म बागबान किस वर्ष रिलीज हुई थी और इसके निर्देशक कौन थे?
यह पारिवारिक फिल्म वर्ष 2003 में रिलीज हुई थी और इसका निर्देशन रवि चोपड़ा ने किया था।

### 5. फिल्म में अमिताभ बच्चन और हेमा मालिनी के बेटों के किरदार किन अभिनेताओं ने निभाए थे?
फिल्म में उनके चार बेटों के किरदार अमन वर्मा, समीर सोनी, साहिल चड्ढा और नासिर खान ने निभाए थे।

---
_TrendKia — Har trend, sabse pehle.. Machine-readable view; canonical HTML at the URL above._