बंबई हाई कोर्ट का प्रीति जिंटा को बड़ा सहारा: 275 वेबसाइटों से डीपफेक हटाने का कड़ा आदेश बंबई उच्च न्यायालय ने बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा की प्रतिष्ठा की रक्षा करते हुए इंटरनेट से उनके सभी डीपफेक और फर्जी कंटेंट को तुरंत हटाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कहा कि किसी की निजता और मौलिक अधिकारों का हनन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बंबई उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए बॉलीवुड अभिनेत्री प्रीति जिंटा को डीपफेक और फर्जी ऑनलाइन सामग्री के खिलाफ बड़ी राहत दी है। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि इंटरनेट पर मौजूद प्रीति जिंटा से जुड़ी तमाम छेड़छाड़ की गई तस्वीरें, वीडियो और अन्य अनधिकृत एआई कंटेंट को तत्काल प्रभाव से हटा दिया जाए। न्यायमूर्ति माधव जामदार की एकल पीठ ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए टिप्पणी की कि ऐसी सामग्री का दुरुपयोग सीधे तौर पर व्यक्ति के मौलिक अधिकारों पर हमला है। इंटरनेट प्लेटफॉर्म्स की जिम्मेदारी पर सवाल अदालत ने केवल सामग्री हटाने का आदेश नहीं दिया, बल्कि ऑनलाइन मंचों और मध्यस्थों को आईटी नियमों के तहत उनके दायित्वों के बारे में भी कड़ी चेतावनी दी। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि जिस तरह से इन प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल गलत इरादों के लिए हो रहा है, वह बेहद चिंताजनक है। न्यायमूर्ति माधव जामदार ने स्पष्ट किया कि यदि मध्यस्थ समय रहते ऐसे कंटेंट पर लगाम लगाना शुरू कर दें, तो अपराधी खुद ब खुद हतोत्साहित होंगे। अन्यथा, ये प्लेटफॉर्म्स भी नागरिकों के मौलिक अधिकारों के उल्लंघन में बराबर के भागीदार माने जाएंगे। 275 वेबसाइटों पर फैला था फर्जी कंटेंट प्रीति जिंटा ने अपनी याचिका में एआई तकनीक के बढ़ते दुरुपयोग को रेखांकित किया था। अभिनेत्री का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता वेंकटेश धोंड ने अदालत को विस्तार से बताया कि वर्तमान में लगभग 275 अलग-अलग वेबसाइट्स पर एआई द्वारा निर्मित आपत्तिजनक तस्वीरें और वीडियो उपलब्ध हैं, जिनमें जिंटा की छवियों का बिना किसी अनुमति के इस्तेमाल किया गया है। याचिका में यह तर्क दिया गया कि ऐसी सामग्री न केवल उनके व्यक्तित्व अधिकारों और प्रचार अधिकारों का हनन करती है, बल्कि यह अनैतिक भी है। प्रतिष्ठा और करियर की सुरक्षा अदालत ने प्रीति जिंटा के पिछले 25 वर्षों से अधिक के फिल्मी करियर और उनकी मेहनत से बनाई गई साख का विशेष संज्ञान लिया। पीठ ने कहा कि किसी अभिनेत्री के चेहरे और हाव-भाव का कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का इस्तेमाल करके गलत तरीके से उपयोग करना उनकी प्रतिष्ठा को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। न्यायालय ने यह स्पष्ट किया कि इस प्रकार के डिजिटल उल्लंघन न केवल व्यक्तिगत निजता का मामला हैं, बल्कि इन्हें कानूनी रूप से भी गंभीरता से लिया जाना चाहिए। अदालत का यह आदेश डीपफेक के दौर में किसी सेलिब्रिटी के अधिकारों की रक्षा के लिए एक कड़ा संदेश माना जा रहा है। इसका आप पर असर भारत में: यह आदेश इंटरनेट पर मौजूद फर्जी और डीपफेक सामग्री को हटाने के लिए कानूनी आधार मजबूत करता है, जिससे कोई भी व्यक्ति अपने अधिकारों के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकता है। मुंबई में: स्थानीय नागरिकों और मशहूर हस्तियों को अपनी निजता सुरक्षित रखने और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को जवाबदेह बनाने का एक मजबूत कानूनी कानूनी उदाहरण मिला है। सवाल-जवाब 1. बंबई हाई कोर्ट ने क्या आदेश दिया है? अदालत ने प्रीति जिंटा से जुड़ी सभी डीपफेक तस्वीरों, वीडियो और फर्जी सामग्री को तुरंत प्रभाव से हटाने का आदेश दिया है। 2. यह कंटेंट कितनी वेबसाइटों पर मौजूद था? अभिनेत्री के वकीलों के अनुसार, लगभग 275 वेबसाइटों पर यह एआई से तैयार आपत्तिजनक सामग्री मौजूद थी। 3. अदालत ने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स के बारे में क्या कहा? कोर्ट ने कहा कि अगर मध्यस्थ समय पर कार्रवाई नहीं करते हैं, तो वे भी नागरिकों के मौलिक अधिकारों के हनन में भागीदार माने जाएंगे। 4. याचिका में किन अधिकारों का हवाला दिया गया? याचिका में प्रीति जिंटा के व्यक्तित्व अधिकारों, प्रचार अधिकारों और नैतिक अधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया गया था। https://trendkia.com/bollywood/bombay-high-court-ka-preity-zinta-ko-bara-sahara-275-vebasaiton-se-deepfake-hatane-ka-kara-adesha-5857 TrendKia — Har trend, sabse pehle.