फिल्म सहिया के सेंसर विवाद पर बॉम्बे हाईकोर्ट सख्त, प्रमाणन बोर्ड को 27 अक्टूबर तक निर्णय लेने की समयसीमा तय बॉम्बे हाईकोर्ट ने फिल्म सहिया के प्रमाणन में हो रहे विलंब पर केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को 27 अक्टूबर तक अंतिम फैसला देने का कड़ा निर्देश जारी किया है। अदालत इस मामले में अगली सुनवाई 2 नवंबर को करेगी। फिल्म सहिया के सेंसर प्रमाणन को लेकर चल रहे कानूनी विवाद में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि वह 27 अक्टूबर तक फिल्म के प्रमाणन पर अपना अंतिम निर्णय सुनाए। फिल्म के निर्माता और निर्देशक संजय शर्मा द्वारा दायर याचिका पर बुधवार को हुई सुनवाई में प्रमाणन प्रक्रिया में बेवजह हो रही देरी का आरोप लगाया गया था। हाईकोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलों का संज्ञान लेने के बाद इस मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर के लिए सूचीबद्ध की है, जिससे सिनेमा निर्माताओं को समय पर न्याय मिलने की उम्मीद बंधी है। अदालत में वरिष्ठ वकीलों की जिरह और तारीखों पर सवाल बुधवार को हुई अदालती कार्यवाही के दौरान फिल्म निर्माता संजय शर्मा का पक्ष रखने के लिए वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित हुए। उनके साथ अधिवक्ता एसएम हैदर, अब्दुल तल्हा, मोहम्मद शाज और सुरभि ने भी अदालत के समक्ष कानूनी दलीलें पेश कीं। वकीलों ने मुख्य रूप से प्रमाणन प्रक्रिया में महीनों से खिंच रहे विलंब का मसला प्रमुखता से उठाया। याचिकाकर्ता की तरफ से पीठ को बताया गया कि फिल्म प्रमाणन के लिए मई महीने में ही विधिवत अर्जी दे दी गई थी, लेकिन लंबा समय बीत जाने के बाद भी प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया, जिससे फिल्म की पूर्व निर्धारित रिलीज बुरी तरह प्रभावित हो रही है। सुनवाई के दौरान प्रमाणन बोर्ड की तरफ से पेश वकील ने पीठ को जानकारी दी कि आगामी 23 अक्टूबर को सहिया के लिए रिवाइजिंग कमेटी का गठन किया जाएगा। इस पर संजय शर्मा के वकीलों ने तत्काल आपत्ति दर्ज कराई। उनका तर्क था कि सिर्फ समिति बनाने की तारीख बता देना पर्याप्त नहीं है क्योंकि इससे प्रमाणन के अंतिम फैसले की कोई निश्चित मियाद तय नहीं होती। बोर्ड की तरफ से यह बिल्कुल स्पष्ट नहीं किया गया था कि यह समिति फिल्म की स्क्रीनिंग कब करेगी और अपना आधिकारिक फैसला कब तक सुनाएगी। मई से शुरू हुआ कानूनी सफर और बोर्ड का इनकार निर्माता पक्ष ने अदालत के सामने पूरे घटनाक्रम का ब्यौरा रखते हुए बताया कि फिल्म के सेंसर प्रमाणन के लिए 30 मई 2026 को औपचारिक आवेदन जमा किया गया था। इस अर्जी के बाद नियमानुसार स्क्रीनिंग और पुनरीक्षण का लंबा सिलसिला चला। जुलाई महीने में फिल्म की पहली स्क्रीनिंग आयोजित की गई, जिसके बाद अगस्त में सहिया को पुनरीक्षण समिति के समक्ष पेश किया गया था। पूरी समीक्षा के उपरांत 27 अगस्त को बोर्ड ने फिल्म को प्रमाणपत्र जारी करने से साफ मना कर दिया। प्रमाणन से इनकार किए जाने के इसी आदेश को चुनौती देते हुए निर्माता संजय शर्मा ने बॉम्बे हाईकोर्ट की शरण ली। सेंसर बोर्ड की जांच प्रक्रिया के दौरान फिल्म में दिखाए गए दृश्यों पर हिंसा के महिमामंडन और असामाजिक कृत्यों को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए आपत्तियां उठाई गई थीं। हालांकि निर्माता का कहना है कि किसी भी दृश्य को संदर्भ से काटकर देखने के बजाय पूरी कहानी के मूल भाव के परिप्रेक्ष्य में परखा जाना चाहिए। अब हाईकोर्ट के ताजा निर्देश के बाद बोर्ड को हर हाल में 27 अक्टूबर तक अपना अंतिम आदेश जारी करना होगा। हिंसा का विरोध और मानवीय संवेदनाओं की कहानी फिल्म के विषय को लेकर निर्देशक संजय शर्मा का कहना है कि सहिया किसी भी रूप में हिंसा का महिमामंडन या समर्थन करने वाली रचना नहीं है। उनका स्पष्ट रुख है कि यह मूल रूप से प्रेम और इंसानी जज्बातों की दास्तान है। फिल्म के माध्यम से यह संवेदनशील यथार्थ पर्दे पर उतारने का प्रयास किया गया है कि किस तरह हिंसा, खौफ और अनिश्चितता के माहौल में आम नागरिकों की जिंदगी और उनके आपसी रिश्ते बिखरने लगते हैं। उनका जोर इस बात पर है कि यह विशुद्ध रूप से एक लव स्टोरी है, जिसका उद्देश्य खून खराबे को बढ़ावा देना कतई नहीं है। सहिया की पृष्ठभूमि झारखंड के सामाजिक और प्राकृतिक परिवेश पर आधारित है। फिल्म का कथानक एक नवविवाहित जोड़े के जीवन के इर्द गिर्द घूमता है, जिनका वैवाहिक जीवन भय, संदेह और हिंसा के तनावपूर्ण दौर में फंस जाता है। इसमें दिखाया गया है कि जटिल संघर्ष भरे हालात में सामान्य लोगों के सपनों, उनके दैनिक संघर्षों और आत्मीय रिश्तों पर क्या प्रभाव पड़ता है। इस फीचर फिल्म की शूटिंग झारखंड के प्रसिद्ध हिल स्टेशन नेतरहाट के अलावा आसपास के घने जंगलों और वास्तविक प्राकृतिक स्थलों पर की गई है। अभिनय के मोर्चे पर फिल्म में नीरज काबी, शांतनु माहेश्वरी, रिंकू राजगुरु और इश्तियाक खान जैसे मंझे हुए कलाकार मुख्य भूमिकाएं निभा रहे हैं। 27 अक्टूबर पर टिकी निगाहें और अगली सुनवाई अदालत द्वारा समयसीमा तय किए जाने के आदेश को फिल्म निर्देशक ने बेहद महत्वपूर्ण कदम करार दिया है। संजय शर्मा ने उम्मीद जताई कि अब सेंसर बोर्ड फिल्म के कथानक की गहराई और उसके मानवीय संदेश को केंद्र में रखकर एक निष्पक्ष और पारदर्शी फैसला लेगा। उन्होंने रेखांकित किया कि इस सिनेमाई परियोजना से जुड़े सभी कलाकारों और तकनीकी विशेषज्ञों ने महीनों पसीना बहाया है, और यह उनका जायज हक है कि उनकी मेहनत दर्शकों तक पहुंचे। सिनेमा उद्योग की नजरें अब 27 अक्टूबर को आने वाले बोर्ड के अंतिम फैसले पर टिकी हुई हैं। बोर्ड को इस तय तारीख तक अपना विधिवत आदेश सार्वजनिक करना होगा, जिसके बाद बॉम्बे हाईकोर्ट 2 नवंबर को मामले की अगली कानूनी स्थिति की समीक्षा करेगा। इसका आप पर असर फिल्म सहिया को लेकर बॉम्बे हाईकोर्ट के इस कड़े निर्देश से सिनेमा निर्माताओं के लिए नियामक समयसीमा और कानूनी अधिकारों के पालन का रास्ता साफ हुआ है। • सिनेमा निर्माताओं के लिए: नियामक संस्थाओं द्वारा प्रमाणन में की जाने वाली अनावश्यक देरी पर कानूनी अंकुश लगेगा। इससे पूर्व निर्धारित रिलीज डेट और वित्तीय योजना में होने वाले नुकसान से बचा जा सकेगा। • कलाकारों और तकनीशियनों के लिए: महीनों की रचनात्मक मेहनत को प्रशासनिक उलझनों के कारण अनिश्चितकाल तक लटके रहने से सुरक्षा मिलेगी। समय पर फैसला आने से उनका काम तय समय पर जनता के सामने आ सकेगा। • दर्शकों के लिए: यथार्थवादी और संवेदनशील विषयों पर आधारित क्षेत्रीय कहानियों को बड़े पर्दे पर देखने का अवसर सुनिश्चित होगा। सेंसर विवादों के सुलझने से नई फिल्मों की रिलीज में रुकावटें कम होंगी। • कानूनी प्रक्रिया के लिए: अदालत का यह सख्त रुख स्पष्ट करता है कि सरकारी बोर्ड अनिश्चितकाल के लिए प्रक्रियाएं नहीं टाल सकते। इससे प्रशासनिक जवाबदेही और पारदर्शिता को मजबूती मिलेगी। ऐसा क्यों हुआ फिल्म सहिया के प्रमाणन को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब सेंसर बोर्ड ने फिल्म में हिंसा के महिमामंडन का आरोप लगाकर प्रमाणपत्र देने से मना कर दिया और निर्माता को अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ा। • प्रमाणन से इनकार: सेंसर बोर्ड की समिति ने 27 अगस्त को सहिया को प्रमाणपत्र देने से साफ इनकार कर दिया था। बोर्ड का मुख्य आक्षेप था कि फिल्म में असामाजिक गतिविधियों और हिंसा को महिमामंडित किया गया है। • मई से खिंचती प्रक्रिया: फिल्म के निर्माता ने 30 मई 2026 को आवेदन किया था लेकिन महीनों तक स्क्रीनिंग और समीक्षा में समय बीतता रहा। इस लंबी देरी के चलते फिल्म की रिलीज अधर में लटक गई। • निर्माता का पक्ष: निर्देशक संजय शर्मा का तर्क है कि यह कहानी हिंसा की नहीं बल्कि प्रेम और मानवीय पीड़ा की है। उनका कहना है कि दृश्यों को संदर्भ से अलग करके आपत्तिजनक ठहराया गया है। • अदालत की सख्ती: बोर्ड द्वारा 23 अक्टूबर को रिवाइजिंग कमेटी बनाने की बात कहने पर अदालत ने अनिश्चितता खत्म करने के लिए 27 अक्टूबर की अंतिम समयसीमा तय कर दी। सवाल-जवाब 1. बॉम्बे हाईकोर्ट ने सेंसर बोर्ड को क्या निर्देश दिया है? अदालत ने केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड को 27 अक्टूबर तक फिल्म सहिया के प्रमाणन पर अपना अंतिम फैसला सुनाने का कड़ा निर्देश दिया है। 2. फिल्म के निर्देशक कौन हैं और उन्होंने अदालत में क्या आरोप लगाया? फिल्म के निर्माता-निर्देशक संजय शर्मा हैं और उन्होंने आरोप लगाया कि सेंसर बोर्ड प्रमाणन जारी करने में जानबूझकर अनावश्यक देरी कर रहा है। 3. अदालत में फिल्म निर्माता की तरफ से मुख्य वकील कौन थे? संजय शर्मा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए, जिनके साथ एसएम हैदर और अन्य वकील शामिल थे। 4. सेंसर बोर्ड ने फिल्म को प्रमाणपत्र देने से कब इनकार किया था? फिल्म के लिए 30 मई 2026 को आवेदन किया गया था और विभिन्न समीक्षाओं के बाद 27 अगस्त को बोर्ड ने प्रमाणपत्र देने से इनकार कर दिया था। 5. सहिया फिल्म में मुख्य रूप से कौन से कलाकार अभिनय कर रहे हैं? फिल्म में नीरज काबी, शांतनु माहेश्वरी, रिंकू राजगुरु और इश्तियाक खान मुख्य भूमिकाओं में नजर आएंगे। 6. इस मामले की अगली सुनवाई बॉम्बे हाईकोर्ट में कब होगी? बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस कानूनी मामले की अगली सुनवाई 2 नवंबर को तय की है। https://trendkia.com/bollywood/bombay-high-court-ne-sahiya-vivada-men-cbfc-ko-di-27-october-taka-antima-phaisale-ki-samayasima-47907 TrendKia — Har trend, sabse pehle.