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  "title": "चेन्नई में श्रीदेवी की 2.7 एकड़ जमीन पर बढ़ा विवाद, सुप्रीम कोर्ट ने बोनी, जाह्नवी और खुशी कपूर को नोटिस देकर स्टेटस को बनाए रखने का दिया आदेश",
  "summary": "चेन्नई के ईस्ट कोस्ट रोड पर स्थित श्रीदेवी के परिवार की 2.7 एकड़ जमीन के मालिकाना हक को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्टेटस को का आदेश जारी किया है। अदालत ने बोनी कपूर और उनकी बेटियों को नोटिस जारी करते हुए मामले में मध्यस्थता का सुझाव दिया है।",
  "content": "तमिलनाडु की राजधानी चेन्नई में स्थित दिवंगत अभिनेत्री श्रीदेवी की करोड़ों रुपये मूल्य की 2.7 एकड़ प्राइम प्रॉपर्टी को लेकर दशकों पुराना कानूनी विवाद अब देश की सर्वोच्च अदालत में पहुंच गया है। ईस्ट कोस्ट रोड पर स्थित इस बेशकीमती जमीन के मालिकाना हक पर जारी खींचतान के बीच सुप्रीम कोर्ट ने फिल्म निर्माता बोनी कपूर और उनकी दोनों बेटियों, जाह्नवी कपूर तथा खुशी कपूर को नोटिस जारी किया है। इसके साथ ही अदालत ने विवादित संपत्ति पर यथास्थिति बनाए रखने का स्पष्ट निर्देश दिया है। मद्रास हाईकोर्ट के पूर्व के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों के बीच विवाद को सुलझाने के लिए मध्यस्थता का रास्ता अपनाने का सुझाव भी दिया है।\n\nसुप्रीम कोर्ट का निर्देश और विवाद में मध्यस्थता का सुझाव\nसुप्रीम कोर्ट में इस संवेदनशील मामले की सुनवाई जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस अरुण पल्ली की पीठ द्वारा की गई। पीठ ने मामले के कानूनी और व्यावहारिक पहलुओं पर विचार करने के बाद कपूर परिवार को अपना रुख स्पष्ट करने के लिए नोटिस जारी किया। इसके अलावा, अदालत ने ईस्ट कोस्ट रोड पर स्थित 2.7 एकड़ जमीन की मौजूदा स्थिति में किसी भी तरह के बदलाव पर रोक लगाते हुए स्टेटस को बनाए रखने के आदेश दिए।\n\nशीर्ष अदालत ने विवाद के लंबे इतिहास और पारिवारिक पहलुओं को ध्यान में रखते हुए दोनों पक्षों को आपसी बातचीत से समाधान तलाशने की सलाह दी है। इसके लिए पीठ ने किसी सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज को मध्यस्थ नियुक्त करने का विचार रखा है, ताकि अदालत के बाहर एक सर्वमान्य समझौता हो सके। सुप्रीम कोर्ट ने इस मध्यस्थता प्रक्रिया की प्रगति रिपोर्ट की समीक्षा करने के उद्देश्य से मामले की अगली सुनवाई की तिथि 18 दिसंबर तय की है।\n\n36 वर्ष पुराने जमीन सौदे का पूरा पृष्ठभूमि\nइस पूरे कानूनी मामले की जड़ें वर्ष 1988 में हुए एक संपत्ति सौदे से जुड़ी हुई हैं। याचिकाकर्ता एम. सी. शिवकामी और उनके भाई ने अदालत का दरवाजा खटखटाते हुए दावा किया है कि इस 2.7 एकड़ जमीन पर उनका भी वैध उत्तराधिकार बनता है। दरअसल, यह विवाद जमीन के मूल मालिक एम. सी. चंद्रशेखरन के कानूनी वारिसों से जुड़ा हुआ है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि वे चंद्रशेखरन की पहली पत्नी की संतानें हैं और 1988 में जब यह भूखंड श्रीदेवी के परिवार को बेचा गया था, तब उनके कानूनी हिस्से और अधिकारों की अनदेखी की गई थी।\n\nयह स्पष्ट करना आवश्यक है कि याचिकाकर्ता श्रीदेवी के किसी व्यक्तिगत संबंधी या पूर्व पति नहीं हैं, बल्कि मूल विक्रेता एम. सी. चंद्रशेखरन के बच्चे हैं। इसी दावे के आधार पर उन्होंने बोनी कपूर, जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की। इससे पहले मद्रास हाईकोर्ट ने कपूर परिवार के हक में फैसला सुनाते हुए याचिकाकर्ता की अर्जी को खारिज कर दिया था। हाईकोर्ट के इसी आदेश को अब याचिकाकर्ताओं ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसके बाद विवाद एक बार फिर राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गया है।\n\nहाईकोर्ट के रुख पर याचिकाकर्ताओं की आपत्तियां\nसुप्रीम कोर्ट में याचिकाकर्ताओं की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता राजू रामचंद्रन और बालकृष्ण श्रीनिवासन ने प्रमुखता से अपनी दलीलें रखीं। वकीलों ने अदालत को बताया कि शुरुआती दौर में निचली अदालत यानी ट्रायल कोर्ट ने मामले की गंभीरता, प्रथम दृष्टया साक्ष्यों और समय-सीमा की वैधता को स्वीकार करते हुए याचिका पर सुनवाई की अनुमति प्रदान की थी। उनका तर्क था कि केस में ऐसे पर्याप्त तथ्य मौजूद थे जिन पर विस्तृत सुनवाई की आवश्यकता थी।\n\nयाचिकाकर्ताओं के वकीलों ने मद्रास हाईकोर्ट की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि हाईकोर्ट ने प्रारंभिक स्तर पर ही दस्तावेजों का अत्यधिक गहन परीक्षण शुरू कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि हाईकोर्ट ने मामले की औपचारिक सुनवाई से पहले ही एक प्रकार का मिनी-ट्रायल चला दिया और शुरुआती चरण में ही यह तय करने का प्रयास किया कि याचिकाकर्ता वैध उत्तराधिकारी हैं या नहीं। वकीलों का कहना था कि प्रक्रियागत स्तर पर यह तरीका उचित नहीं था और इसने याचिकाकर्ताओं के अधिकारों को प्रभावित किया।\n\nकपूर परिवार का पक्ष और मियाद कानून का तर्क\nदूसरी तरफ, बोनी कपूर, जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर का प्रतिनिधित्व कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत के सामने अपना मजबूत पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि यह जमीन 19 अप्रैल 1988 को कानूनी प्रक्रिया के तहत खरीदी गई थी। वर्ष 2018 में अभिनेत्री श्रीदेवी के आकस्मिक निधन के बाद, परिवार ने संपत्ति के नियमित म्यूटेशन यानी दाखिल-खारिज के लिए वर्ष 2023 में आवेदन किया था।\n\nअभिषेक मनु सिंघवी ने समय-सीमा कानून यानी मियाद का हवाला देते हुए तर्क दिया कि याचिकाकर्ता वर्ष 1995 और 1999 में ही बालिग हो चुके थे। इसके बावजूद, उन्होंने तीन दशक से भी अधिक समय तक शांत रहने के बाद वर्ष 2025 में जाकर यह मुकदमा दायर किया। बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि 36 साल से भी अधिक पुराने सौदे को इतने लंबे समय के अंतराल के बाद अदालत में चुनौती देना कानूनन समय-सीमा से पूरी तरह बाहर है और इसे स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।\n\nइसका आप पर असर\nयह मामला संपत्ति खरीदारों और अचल जायदाद के निवेशकों के लिए महत्वपूर्ण सबक प्रस्तुत करता है।\n\n• भारत भर में: पुरानी संपत्ति खरीदते समय मूल मालिकों और उनके सभी कानूनी वारिसों के अनापत्ति प्रमाणपत्र एवं वंशावली जांचना बेहद जरूरी है। इस तरह की गहन जांच से दशकों बाद होने वाले अप्रत्याशित कानूनी विवादों से बचा जा सकता है।\n• चेन्नई में: ईसीआर (ईस्ट कोस्ट रोड) जैसे प्रमुख स्थानों पर अचल संपत्ति खरीदने वालों को दाखिल-खारिज और राजस्व रिकॉर्ड अद्यतन रखने चाहिए। उत्तराधिकार संबंधी दावों का समय रहते समाधान न करने से मामला अदालतों में लंबे समय के लिए लटक सकता है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nयह कानूनी विवाद वर्ष 1988 में हुए एक जमीन सौदे से उपजा है, जिसमें मूल मालिक के वारिसों ने अपने अधिकारों की अनदेखी का आरोप लगाया है।\n\n• विवादित सौदे की शुरुआत: 19 अप्रैल 1988 को श्रीदेवी के परिवार ने चेन्नई के ईसीआर पर 2.7 एकड़ जमीन खरीदी थी।\n• वारिसों का दावा: मूल मालिक एम. सी. चंद्रशेखरन की पहली पत्नी के बच्चों ने आरोप लगाया कि बिक्री के समय उनके कानूनी हिस्से को शामिल नहीं किया गया था।\n• दाखिल-खारिज की प्रक्रिया: वर्ष 2018 में श्रीदेवी के निधन के बाद 2023 में जब कपूर परिवार ने म्यूटेशन के लिए आवेदन किया, तो विवाद दोबारा सामने आया।\n• अदालती फैसला और अपील: मद्रास हाईकोर्ट द्वारा याचिका खारिज करने के बाद मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अब स्टेटस को और मध्यस्थता का सुझाव दिया गया है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सुप्रीम कोर्ट ने श्रीदेवी की चेन्नई संपत्ति मामले में क्या आदेश दिया है?\nसुप्रीम कोर्ट ने बोनी कपूर, जाह्नवी कपूर और खुशी कपूर को नोटिस जारी करते हुए ईस्ट कोस्ट रोड पर स्थित 2.7 एकड़ जमीन पर यथास्थिति (स्टेटस को) बनाए रखने का आदेश दिया है।\n\n2. कपूर परिवार के खिलाफ मामला किसने दर्ज कराया है?\nयह मामला जमीन के मूल मालिक एम. सी. चंद्रशेखरन की पहली पत्नी की संतानों एम. सी. शिवकामी और उनके भाई द्वारा दायर किया गया है।\n\n3. कपूर परिवार के वकील का मुख्य तर्क क्या है?\nवरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने तर्क दिया कि जमीन 1988 में खरीदी गई थी और 1995 व 1999 में बालिग हुए याचिकाकर्ताओं द्वारा 2025 में केस दायर करना मियाद कानून के तहत समय-सीमा से बाहर है।\n\n4. सुप्रीम कोर्ट ने इस विवाद को सुलझाने के लिए क्या सुझाव दिया है?\nसुप्रीम कोर्ट ने एक सेवानिवृत्त हाईकोर्ट जज के माध्यम से मध्यस्थता द्वारा मामले को सुलझाने का सुझाव दिया है और अगली सुनवाई 18 दिसंबर तय की है।",
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  "category": "बॉलीवुड",
  "publishedAt": "2026-09-16",
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