चित्तौड़गढ़ किले की संकरी दीवार पर वहीदा रहमान के खतरनाक डांस से तैयार हुआ गाइड फिल्म का कालजयी गीत 1965 की प्रसिद्ध फिल्म गाइड के मशहूर गीत 'आज फिर जीने की तमन्ना है' की शूटिंग के दौरान वहीदा रहमान ने चित्तौड़गढ़ किले की एक संकरी और खतरनाक दीवार पर डांस किया था। एक तरफ सैकड़ों फीट गहरी खाई के बावजूद अभिनेत्री ने बिना किसी हिचकिचाहट के शूटिंग पूरी की। हिंदी सिनेमा के इतिहास में साल 1965 में रिलीज हुई फिल्म 'गाइड' एक ऐसी अमर रचना मानी जाती है, जिसने संगीत, भावनात्मक गहराई और मानवीय रिश्तों के ताने-बाने को पर्दे पर नए आयाम दिए। इस क्लासिक फिल्म के गानों ने छह दशकों से श्रोताओं के दिलों में अपनी जगह बनाए रखी है। 'तेरे मेरे सपने' की रूमानी मिठास, 'दिन ढल जाए' में झलकता तन्हाई का दर्द और 'गाता रहे मेरा दिल' का खूबसूरत अहसास आज भी लोगों को बांधे रखता है। हालांकि, फिल्म का सबसे यादगार और प्रेरणादायक गीत 'आज फिर जीने की तमन्ना है' माना जाता है, जिसमें बंदिशों से परे जाकर आजादी से सांस लेने की चाहत दिखाई देती है। पर्दे पर खिलखिलाती वहीदा रहमान की सादगी और उमंग से सजा यह गीत जितना मनमोहक लगता है, इसकी शूटिंग के पीछे का घटनाक्रम उतना ही जोखिम भरा था। चित्तौड़गढ़ किले की एक संकरी दीवार पर जान जोखिम में डालकर इस गाने का फिल्मांकन किया गया था। चित्तौड़गढ़ किले की संकरी दीवार पर जानलेवा शूटिंग का अनुभव इस कालजयी गीत का फिल्मांकन राजस्थान के ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ के किले में हुआ था। एक साक्षात्कार के दौरान इस गाने की शूटिंग से जुड़े चौकाने वाले अनुभवों को साझा करते हुए वरिष्ठ अभिनेत्री वहीदा रहमान ने बताया था कि निर्देशक विजय आनंद गाने के एक खास दृश्य को किले की एक अत्यंत संकरी दीवार पर शूट करना चाहते थे। उस लोकेशन की बनावट इतनी खतरनाक थी कि दीवार के एक ओर सैकड़ों फीट गहरी सीधी खाई थी, जबकि दूसरी तरफ बेहद ढलानदार और जानलेवा रास्ता था। विजय आनंद की इच्छा थी कि वहीदा रहमान उस संकरी दीवार के ऊपर पूरी तरह से तनावमुक्त और बेफिक्र होकर नृत्य करें, ताकि 'रोजी' के किरदार के अंदर जागृत हुई आजादी की खुशी पर्दे पर जीवंत नजर आ सके। उस खतरनाक लोकेशन पर थोड़ी सी भी चूक जीवन के लिए भारी पड़ सकती थी। यदि शूटिंग के दौरान अभिनेत्री का संतुलन बिगड़ता या पैर जरा सा भी फिसलता, तो कोई बहुत बड़ा हादसा हो सकता था। इस अभूतपूर्व जोखिम को देखते हुए शूटिंग क्रू के सदस्य और स्वयं मुख्य अभिनेता देव आनंद भी बुरी तरह घबराए हुए थे। हर किसी के मन में अनहोनी का डर बना हुआ था। इसके बावजूद वहीदा रहमान ने मन में किसी भी प्रकार का भय या झिझक लाए बिना, पूर्ण समर्पण और साहस के साथ उस पतली दीवार पर अपना नृत्य पूरा किया। उनके इसी अद्वितीय हौसले ने पर्दे पर रोजी की आजादी की नई उड़ान को हमेशा के लिए यादगार बना दिया। जब दर्शक इस गाने को देखते हैं, तो वहीदा रहमान के चेहरे की मुस्कान और सहज भाव देखकर इस बात का अंदाजा लगाना मुश्किल हो जाता है कि इसके पीछे कितना बड़ा खतरा छिपा हुआ था। सचिन देव बर्मन, लता मंगेशकर और शैलेंद्र का संगीतमय जादू 'आज फिर जीने की तमन्ना है' केवल दृश्य के स्तर पर ही नहीं, बल्कि संगीतमय रचना के मामले में भी भारतीय सिनेमा का एक अनमोल रत्न है। इस सुरीले गीत को सुर कोकिला लता मंगेशकर ने अपनी जादुई आवाज से सजाया था। इसका कालजयी संगीत महान संगीतकार सचिन देव बर्मन ने तैयार किया था, जबकि इसके विचारोत्तेजक और भावुक बोल प्रसिद्ध गीतकार शैलेंद्र ने लिखे थे। यह गीत फिल्म की मुख्य नायिका रोजी के मन की उस स्थिति को दर्शाता है, जहां वह समाज की बंदिशों और पुरानी पाबंदियों को तोड़कर अपने तरीके से जीवन जीने का संकल्प लेती है। एस.डी. बर्मन के संगीत और लता मंगेशकर की गायकी ने शैलेंद्र के शब्दों में एक नई रूह फूंक दी थी, जिससे यह गीत हर युग में प्रासंगिक बना रहा। आर.के. नारायण के उपन्यास से लेकर फिल्मफेयर अवॉर्ड्स तक का सफर विजय आनंद के कुशल निर्देशन में बनी फिल्म 'गाइड' की नींव विख्यात साहित्यकार आर.के. नारायण के प्रसिद्ध उपन्यास पर रखी गई थी। फिल्म में देव आनंद ने 'राजू' नामक गाइड का किरदार निभाया था, जबकि वहीदा रहमान ने 'रोजी' का मुख्य रोल अदा किया था। देव आनंद और वहीदा रहमान की पर्दे पर केमिस्ट्री, विजय आनंद की निर्देशकीय दृष्टि और एस.डी. बर्मन की संगीत साधना ने मिलकर इस फिल्म को एक मील का पत्थर साबित किया। फिल्मफेयर अवॉर्ड्स में भी 'गाइड' ने विभिन्न श्रेणियों में बड़ी सफलता अर्जित की थी और कई पुरस्कार अपने नाम किए थे। फिल्म में प्रेम, मानवीय संबंध, छल, अकेलापन और आत्म-खोज जैसे जटिल विषयों को अत्यंत संवेदनशीलता के साथ पिरोया गया था। यह फिल्म भारतीय सिनेमा की उन चुनिंदा रचनाओं में शामिल है, जिनकी चमक समय बीतने के साथ धुंधली होने के बजाय और अधिक प्रखर होती गई है। आज छह दशक बीत जाने के बाद भी चित्तौड़गढ़ किले की उस दीवार पर फिल्माया गया आजादी का यह उत्सव दर्शकों को रोमांचित करता है और वहीदा रहमान के अद्भुत अभिनय तथा साहस की याद दिलाता है। इसका आप पर असर सिनेमा प्रेमियों और दर्शकों के लिए: • कला का सम्मान: यह घटना दर्शाती है कि क्लासिक फिल्मों के कालजयी दृश्यों को गढ़ने के लिए कलाकारों ने बिना बॉडी डबल या स्टंट तकनीकों के कितना बड़ा वास्तविक जोखिम उठाया था। • पर्यटन प्रेरणा: चित्तौड़गढ़ किले का दौरा करने वाले पर्यटक अब इस ऐतिहासिक स्थल को भारतीय सिनेमा के एक सबसे साहसिक और प्रतिष्ठित गीत की शूटिंग लोकेशन के रूप में भी देख सकते हैं। सवाल-जवाब 1. 'आज फिर जीने की तमन्ना है' गाना किस फिल्म का है? यह गाना 1965 में रिलीज हुई क्लासिक हिंदी फिल्म 'गाइड' का है। 2. इस गाने की शूटिंग किस स्थान पर हुई थी? इस गाने का फिल्मांकन राजस्थान के ऐतिहासिक चित्तौड़गढ़ के किले में हुआ था। 3. शूटिंग के दौरान वहीदा रहमान के लिए क्या खतरा था? उन्हें किले की एक बेहद संकरी दीवार पर नाचना था, जिसके एक ओर सैकड़ों फीट गहरी खाई और दूसरी ओर जानलेवा ढलान थी। 4. इस गीत के गायक, संगीतकार और गीतकार कौन हैं? इसे लता मंगेशकर ने गाया था, इसका संगीत सचिन देव बर्मन ने तैयार किया था और इसके बोल शैलेंद्र ने लिखे थे। 5. फिल्म 'गाइड' का निर्देशन किसने किया था और यह किस पुस्तक पर आधारित है? इसका निर्देशन विजय आनंद ने किया था और यह आर.के. नारायण के प्रसिद्ध उपन्यास पर आधारित थी। प्रेरणा और सबक प्रेरणा और सीख: • अतुलनीय समर्पण: अपने काम के प्रति सच्ची निष्ठा और समर्पण कठिन से कठिन परिस्थिति में भी उत्कृष्टता दिलाता है। • डर पर विजय: वहीदा रहमान ने जोखिम से भरे माहौल में भी अपने डर को हावी नहीं होने दिया और स्क्रीन पर पूर्ण सहजता दिखाई। • सहजता और दृढ़ता: अत्यधिक दबाव या खतरे के क्षणों में मानसिक शांति बनाए रखना ही वास्तविक सफलता की कुंजी है। https://trendkia.com/bollywood/chittorgarh-kile-ki-snkari-divara-para-waheeda-rehman-ke-khataranaka-dansa-se-taiyara-hua-guide-philma-ka-kalajayi-gita-22484 TrendKia — Har trend, sabse pehle.