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  "type": "article",
  "title": "सिंटा में अंदरूनी टकराव गहराया, उपासना सिंह और नगमा ने वरिष्ठ कलाकारों के अपमान पर उठाए तीखे सवाल",
  "summary": "सिंटा में आठ सदस्यों के इस्तीफे के बाद विवाद तेज हो गया है, जहां उपासना सिंह और नगमा ने बैठकों में वरिष्ठ कलाकारों की उपेक्षा और कथित अपमानजनक रवैये पर नाराजगी जताई है।",
  "content": "सिने एंड टीवी आर्टिस्ट्स एसोसिएशन यानी सिंटा के भीतर छिड़ा अंदरूनी कलह अब खुलकर सार्वजनिक मंच पर आ चुका है। संगठन के तौर-तरीकों, लीडरशिप शैली और कामकाज को लेकर सदस्यों के बीच गहरा मतभेद पैदा हो गया है। हाल ही में चुनी गई नई एग्जीक्यूटिव कमेटी की सदस्य नगमा और संगठन की पूर्व पदाधिकारी उपासना सिंह ने वरिष्ठ कलाकारों के साथ हुए बर्ताव को लेकर बेहद तीखे सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि संगठन की बैठकों के दौरान कई जाने-माने कलाकारों को असहज और अपमानजनक परिस्थितियों का सामना करना पड़ा है।\n\nवरिष्ठ कलाकारों की उपेक्षा और वोटिंग पर विवाद\nसिंटा की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए उपासना सिंह ने कुछ बेहद हैरान करने वाले वाकयों का जिक्र किया है। उन्होंने बताया कि बैठकों के दौरान मुकेश ऋषि, दीपक पाराशर और विकास वर्मा जैसे कलाकारों को खासा असहज महसूस कराया गया। एक घटना का ब्यौरा देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि अभिनेता मुकेश ऋषि मुंबई के भारी ट्रैफिक में फंसने के कारण बैठक में करीब आधे घंटे देरी से पहुंचे थे। वहां पहुंचने पर उन्हें सूचित किया गया कि देरी की वजह से अब वे मतदान प्रक्रिया में हिस्सा नहीं ले सकते।\n\nइस अनुचित फैसले से मुकेश ऋषि बुरी तरह क्षुब्ध हो गए और उन्होंने वार्षिक आम सभा के दौरान माइक हाथ में लेकर अपनी नाराजगी सार्वजनिक तौर पर व्यक्त की। मुकेश ऋषि ने उस वक्त बेहद आहत होकर सवाल किया था कि उनके साथ इस स्तर की बदसलूकी कैसे की जा सकती है। उपासना सिंह के मुताबिक इतने वरिष्ठ और सम्मानित कलाकार के साथ ऐसा कठोर रवैया अपनाना पूरी तरह से गैर-वाजिब था।\n\nदीपक पाराशर का योगदान और प्रेस कॉन्फ्रेंस की घटना\nउपासना सिंह ने अभिनेता दीपक पाराशर से जुड़े एक अन्य कटु अनुभव का खुलासा भी किया। उन्होंने बताया कि हेमा मालिनी से संबंधित सिंटा की एक महत्वपूर्ण प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की गई थी। उस दौरान दीपक पाराशर एसोसिएशन में ट्रेजरर पद की अहम जिम्मेदारी संभाल रहे थे। आरोप है कि उस प्रेस कॉन्फ्रेंस में दीपक पाराशर दरवाजा खटखटाते रह गए, मगर उन्हें अंदर दाखिल होने की अनुमति नहीं दी गई। इस घटना से वे अंदर तक आहत हुए और उन्होंने व्यक्तिगत रूप से यह बात साझा की कि ऐसा माहौल बेहद अपमानजनक और दुखदायी है।\n\nउपासना ने दीपक पाराशर के संगठन के प्रति समर्पण की जमकर सराहना की। उन्होंने याद दिलाया कि दीपक पाराशर सिंटा की बैठकों में शामिल होने वाले तमाम साथियों के लिए खुद अपने हाथों से भोजन तैयार करते थे। लगभग ढाई साल के लंबे अरसे तक वे सुबह पांच बजे उठते थे ताकि एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक के लिए खाना बनाकर सभी को प्रेमपूर्वक खिला सकें। उपासना का कहना है कि किसी भी मसले पर वैचारिक असहमति हो सकती है, लेकिन एक वरिष्ठ साथी के लंबे योगदान और उम्र का सम्मान हर हाल में किया जाना चाहिए था।\n\nपूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे के रवैये पर गंभीर सवाल\nसंगठन के माहौल पर चर्चा करते हुए उपासना सिंह ने पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे के व्यवहार की कड़ी आलोचना की। उन्होंने आरोप लगाया कि दोनों अभिनेत्रियां खुद को बड़ा स्टार मानकर बाकी सदस्यों से दूरी बनाए रखती थीं। हालात इस हद तक पहुंच गए थे कि वे सामान्य सदस्यों के साथ एक ही लिफ्ट साझा करने से भी कतराती थीं।\n\nइसके अलावा उन्होंने सिंटा के कर्मचारी विकास वर्मा के साथ हुए बर्ताव का ब्योरा दिया। आरोप के मुताबिक विकास वर्मा को महज इस वजह से उपेक्षित और नीचा दिखाया गया क्योंकि उन्हें अंग्रेजी भाषा नहीं आती थी। उपासना ने बताया कि विकास हमेशा दूसरे कलाकारों की सहायता के लिए तत्पर रहते हैं और जरूरतमंद लोगों के कल्याण के लिए काम करते हैं। इसके बावजूद बार-बार होने वाले अपमान के चलते उन्हें कई दफा रोते हुए बाहर निकलना पड़ा।\n\nकठपुतली कहे जाने पर अभिनेत्री नगमा का पलटवार\nदूसरी तरफ नई एग्जीक्यूटिव कमेटी की सदस्य नगमा ने पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे की तरफ से कथित तौर पर दिए गए कठपुतली वाले बयान पर करारा जवाब दिया है। नगमा ने दो टूक शब्दों में कहा कि कमेटी का कोई भी सदस्य किसी अन्य व्यक्ति के इशारों पर काम नहीं कर रहा है और हर किसी की अपनी स्वतंत्र सोच और निर्णय क्षमता है।\n\nअपने लंबे करियर का हवाला देते हुए नगमा ने कहा कि उन्होंने इंडस्ट्री में सलमान खान, शाहरुख खान, संजय दत्त, अक्षय कुमार और जैकी श्रॉफ जैसे दिग्गज अभिनेताओं के साथ काम किया है और वे इस फिल्म जगत की बारीकियों को बेहद करीब से समझती हैं। उन्होंने कहा कि किसी को कठपुतली बताना या यह कहना कि कोई किसी के इशारे पर नाच रहा है, बेहद ओछी और अपमानजनक बात है। उन्होंने जोर देकर कहा कि कमेटी के लोगों के पास अपना विवेक है और किसी को भी दूसरों को नीचा दिखाने का अधिकार नहीं है। नगमा ने स्पष्ट किया कि वे किसी की निजी लड़ाई का हिस्सा बनने नहीं आईं, बल्कि जरूरतमंद कलाकारों के हित में संस्था को पारदर्शी ढंग से चलाने के उद्देश्य से जुड़ी हैं।\n\nइस्तीफों की झड़ी और नेतृत्व की सफाई\nसिंटा में टकराव का यह दौर उस वक्त चरम पर पहुंच गया जब एग्जीक्यूटिव कमेटी के आठ सदस्यों ने सामूहिक रूप से अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। इन त्यागपत्र देने वालों में मुकेश ऋषि, दीपक पाराशर और विकास वर्मा जैसे प्रमुख नाम शामिल थे। इन सभी सदस्यों ने फैसले लेने की मनमानी प्रक्रिया और महत्वपूर्ण मामलों में सलाह-मशविरा न किए जाने को अपने इस्तीफे का मुख्य आधार बताया था।\n\nहालांकि दूसरी तरफ पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे ने अपने ऊपर लगाए जा रहे इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज किया है। दोनों पदाधिकारियों ने संस्था के प्रशासनिक कामकाज, संगठनात्मक फैसलों और वित्तीय मामलों पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए अपना पक्ष मजबूती से सामने रखा है।\n\nइसका आप पर असर\nसिनेमा और टीवी कलाकारों के सबसे बड़े संगठन में छिड़े इस विवाद से इंडस्ट्री से जुड़े कलाकारों और कामगारों के कामकाज पर सीधा असर पड़ सकता है।\n\n• कलाकारों के कल्याण पर असर: सिंटा की प्राथमिक जिम्मेदारी टीवी और फिल्मों के संघर्षरत कलाकारों के हितों की सुरक्षा करना है। प्रशासनिक कलह के चलते पेंशन, मेडिकल सहायता और विवाद निपटारे जैसी कल्याणकारी योजनाओं के निर्णयों में देरी हो सकती है।\n• पारदर्शिता और चुनाव प्रक्रिया: वरिष्ठ कलाकारों द्वारा वोटिंग से रोके जाने के मुद्दे ने संगठन के चुनाव नियमों पर बहस छेड़ दी है। आगे चलकर सदस्यों के मतदान अधिकारों और बैठक नियमों में कड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।\n• कामकाजी माहौल और प्रोटोकॉल: अंग्रेजी भाषा न जानने पर भेदभाव और वरिष्ठों की उपेक्षा के आरोपों के बाद प्रशासनिक ढांचे में सुधार की मांग उठेगी। इससे क्षेत्रीय और हिंदी भाषी कलाकारों की आवाज़ संगठन में और अधिक मुखर होगी।\n• संगठन की साख पर प्रभाव: आठ सदस्यों के इस्तीफे और सार्वजनिक आरोपों से संगठन की आपसी साख पर असर पड़ा है। आने वाले समय में नई कमेटी को सदस्यों का भरोसा दोबारा जीतने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे।\n\nऐसा क्यों हुआ\nसिंटा में यह अंदरूनी टकराव संगठन के प्रशासनिक रवैये, पद के दुरुपयोग के आरोपों और वरिष्ठ कलाकारों की अनदेखी के चलते गहराया है।\n\n• निर्णय प्रक्रिया में असंतोष: विवाद का मुख्य कारण अहम प्रशासनिक फैसलों में चुनिंदा सदस्यों द्वारा दूसरों को नजरअंदाज करना रहा। आठ एग्जीक्यूटिव कमेटी सदस्यों ने बिना सलाह-मशविरा किए फैसले लेने की कार्यशैली के विरोध में अपने पदों से इस्तीफा दिया था।\n• वरिष्ठ कलाकारों की उपेक्षा: ट्रैफिक की वजह से देरी पर मुकेश ऋषि को वोट देने से रोकना और दीपक पाराशर को प्रेस कॉन्फ्रेंस से बाहर रखने जैसे वाकयों ने असंतोष को भड़काया। इन अपमानजनक घटनाओं के कारण सदस्यों के बीच का मनमुटाव खुलकर सामने आ गया।\n• कठपुतली वाले बयान से बढ़ा तनाव: नई एग्जीक्यूटिव कमेटी के सदस्यों को कथित रूप से कठपुतली करार दिए जाने पर नाराजगी और भड़क गई। नगमा जैसी प्रमुख अभिनेत्रियों ने इसे अपने आत्मसम्मान और स्वतंत्र सोच पर हमला मानते हुए सार्वजनिक रूप से पलटवार किया।\n• नेतृत्व द्वारा आरोपों का खंडन: पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे द्वारा वित्तीय और संगठनात्मक आरोपों को सिरे से खारिज किए जाने के बाद दोनों पक्षों के बीच सुलह के रास्ते बंद होते दिखे। इसके चलते विवाद सुलझने के बजाय और अधिक गहराता चला गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सिंटा विवाद में उपासना सिंह ने क्या आरोप लगाए हैं?\nउपासना सिंह ने आरोप लगाया है कि सिंटा की बैठकों में मुकेश ऋषि, दीपक पाराशर और विकास वर्मा जैसे कलाकारों के साथ उपेक्षा और अपमानजनक बर्ताव किया गया।\n\n2. मुकेश ऋषि को वोट डालने से क्यों रोका गया था?\nमुंबई के भारी ट्रैफिक के कारण मुकेश ऋषि बैठक में लगभग आधे घंटे की देरी से पहुंचे थे, जिसके बाद उन्हें मतदान करने की अनुमति नहीं दी गई।\n\n3. दीपक पाराशर के साथ प्रेस कॉन्फ्रेंस में क्या घटना घटी थी?\nहेमा मालिनी से जुड़ी एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान तत्कालीन ट्रेजरर दीपक पाराशर के खटखटाने के बावजूद उन्हें कथित तौर पर कमरे के अंदर दाखिल नहीं होने दिया गया।\n\n4. कठपुतली वाले बयान पर नगमा ने क्या प्रतिक्रिया दी?\nनगमा ने कहा कि नई कमेटी के सदस्य किसी के इशारे पर काम करने वाली कठपुतली नहीं हैं और उनके पास अपना दिमाग और लंबा कार्यानुभव है।\n\n5. सिंटा से कितने एग्जीक्यूटिव कमेटी सदस्यों ने इस्तीफा दिया था?\nफैसले लेने के तौर-तरीकों और सलाह न लिए जाने से नाराज होकर आठ एग्जीक्यूटिव कमेटी सदस्यों ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया था।\n\n6. पूनम ढिल्लों और पद्मिनी कोल्हापुरे का इस विवाद पर क्या रुख है?\nदोनों अभिनेत्रियों ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को पूरी तरह खारिज किया है और कामकाज तथा वित्तीय मामलों पर अपनी सफाई दी है।",
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  "category": "बॉलीवुड",
  "publishedAt": "2026-10-02",
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