# दीपिका पादुकोण का सुपरहिट गरबा ट्रैक क्यों आज भी है नवरात्रि पंडालों की पहली पसंद

> संजय लीला भंसाली की फिल्म का क्लासिक डांस नंबर रिलीज के वर्षों बाद भी हर डांडिया नाइट में उत्साह भर देता है। इसमें पारंपरिक गुजराती संगीत और बॉलीवुड के भव्य अंदाज का अनूठा संगम देखने को मिलता है।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-10-18 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/deepika-padukone-ka-suparahita-garaba-traika-kyon-aja-bhi-hai-navratri-pndalon-ki-pahali-pasnda-49163 · **Language:** Hindi
**Tags:** दीपिका पादुकोण, गरबा संगीत, नवरात्रि उत्सव, संजय लीला भंसाली, रणवीर सिंह, बॉलीवुड डांस

नवरात्रि के पावन उत्सव के दौरान जब देश भर के गरबा और डांडिया पंडाल रोशनी से जगमगाते हैं, तब संगीत की धुन पर कदम खुद-ब-खुद थिरकने लगते हैं। बॉलीवुड ने उत्सवों के लिए कई यादगार रचनाएं दी हैं, मगर कुछ गीत ऐसे होते हैं जो समय के साथ फीके पड़ने के बजाय और भी लोकप्रिय हो जाते हैं। फिल्म निर्माण और संगीत संयोजन की दृष्टि से जब भी उत्सव आधारित नृत्यों का जिक्र होता है, तो पारंपरिक वाद्यों और आधुनिक ऑर्केस्ट्रा का तालमेल सबसे अधिक प्रभाव छोड़ता है।

## फिल्म राम-लीला का वह क्लासिक संगीत
साल 2013 के दौरान निर्देशक संजय लीला भंसाली अपनी महत्वाकांक्षी फिल्म ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’ लेकर पर्दे पर आए थे। इस फिल्म का गीत ‘नगाड़े संग ढोल बाजे’ पूरी तरह से गरबा के पारंपरिक उत्सव और प्रेम की ऊर्जा को केंद्र में रखकर रचा गया था। दृश्य में दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की जीवंत मौजूदगी ने इस पूरे नृत्य क्रम को एक अलग ही ऊंचाई दी। पारंपरिक गरबा के घेरे, तेजी से बदलते ताल और दोनों कलाकारों के तालमेल ने इस गीत को उत्सव का पर्याय बना दिया।

## संगीतकार, गायक और रचनाकारों की अनूठी जुगलबंदी
इस पूरे संगीत ट्रैक को खास बनाने में कई कलाकारों का अहम योगदान रहा है। फिल्म निर्देशक संजय लीला भंसाली ने खुद इसका संगीत तैयार किया था, जिसमें गुजराती लोक वाद्यों की थाप को भव्य स्तर पर उभारा गया। वहीं इसके अर्थपूर्ण और ऊर्जावान बोल सिद्धार्थ और गरिमा की जोड़ी ने लिखे। गायन के मोर्चे पर श्रेया घोषाल और उस्मान मीर की आवाज ने इस गीत में जान फूंक दी। उस्मान मीर की बुलंद तान और श्रेया घोषाल के सुरों ने लोक गायकी और सुगम संगीत का दुर्लभ संतुलन प्रस्तुत किया।

## लाल चनिया-चोली और तेज बीट्स का सम्मोहन
स्क्रीन पर दीपिका पादुकोण का लाल रंग की चनिया-चोली वाला पारंपरिक लुक दर्शकों के दिल में उतर गया। भारी-भरकम पारंपरिक परिधान के बावजूद जिस गति, भाव-भंगिमा और संतुलन के साथ उन्होंने डांडिया के जटिल स्टेप्स किए, उसने इसे एक तकनीकी मिसाल बना दिया। ढोल और नगाड़ों की बढ़ती रफ्तार के साथ तेज होते बीट्स हर आयु वर्ग के नर्तकों को आकर्षित करते हैं। यही कारण है कि अपनी रिलीज के इतने साल बीत जाने के बाद भी हर डांडिया नाइट में इस गीत की मांग सबसे शीर्ष पर बनी रहती है।

## इसका आप पर असर
त्योहारी सीजन में लोकप्रिय बॉलीवुड संगीत उत्सव के आयोजनों और लोगों के उत्सव अनुभव को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

- **संगीत चयन पर असर:** गरबा आयोजकों और डीजे के लिए ऐसे सदाबहार गाने प्लेलिस्ट की प्रमुख जरूरत बने रहते हैं। कार्यक्रम के चरम समय पर ऊर्जा बनाए रखने के लिए इस तरह के ट्रैक अनिवार्य रूप से बजाए जाते हैं।
- **पारंपरिक परिधान का चलन:** बड़े पर्दे पर दिखाए गए लाल चनिया-चोली जैसे लुक्स आज भी डांडिया परिधानों के लिए लोकप्रिय प्रेरणा बने हुए हैं। स्थानीय बाजारों और बुटीक में त्योहारों के दौरान ऐसे क्लासिक डिजाइनों की मांग लगातार बनी रहती है।
- **डांस शैलियों पर प्रभाव:** विभिन्न नृत्य कक्षाओं और कार्यशालाओं में गरबा सीखने वाले लोग इन लोकप्रिय बॉलीवुड स्टेप्स का अभ्यास करते हैं। इससे युवा पीढ़ी को पारंपरिक लोक नृत्य सीखने का एक सहज माध्यम मिलता है।
- **सांस्कृतिक जुड़ाव:** इस तरह के गीत आधुनिक पीढ़ी को पारंपरिक गुजराती लोक संगीत और वाद्ययंत्रों से जोड़ने में मदद करते हैं। बड़े शहरों में आयोजित होने वाले उत्सवों में यह सामूहिक उत्साह को नई दिशा देता है।

## ऐसा क्यों हुआ
त्योहारों के दौरान कुछ खास फिल्मी गीतों की लोकप्रियता साल दर साल बनी रहने के पीछे उनकी अनूठी संगीतमय बनावट और प्रस्तुति होती है।

- **लोक संगीत और आधुनिक धुन का संतुलन:** पारंपरिक गुजराती वाद्यों और नगाड़ों की थाप को बड़े पैमाने पर ऑर्केस्ट्रा के साथ जोड़ा गया था। इस संयोजन ने इसे केवल एक फिल्मी गीत न रखकर असली लोक उत्सव जैसा ऊर्जावान बना दिया।
- **कुशल गायकी और सटीक बोल:** उस्मान मीर की प्रामाणिक लोक आवाज और श्रेया घोषाल के सुरों ने गीत के भावनात्मक स्तर को बहुत ऊंचा उठाया। सिद्धार्थ-गरिमा के बोलों ने उत्सव के रंग और उत्साह को पूरी स्पष्टता से व्यक्त किया।
- **संजय लीला भंसाली का विजुअल निर्देशन:** भव्य सेट, सैकड़ों नर्तकों की मौजूदगी और लाल परिधान में सजे कलाकारों के नृत्य ने इसे दृश्यात्मक रूप से अविस्मरणीय बना दिया। यह दृश्य प्रभाव दर्शकों के दिमाग में उत्सव के प्रतीक के रूप में हमेशा के लिए दर्ज हो गया।

## सवाल-जवाब

### 1. ‘नगाड़े संग ढोल बाजे’ गीत किस फिल्म का हिस्सा है?
यह गीत निर्देशक संजय लीला भंसाली की साल 2013 में आई फिल्म ‘गोलियों की रासलीला राम-लीला’ का हिस्सा है।

### 2. इस लोकप्रिय गरबा गीत को किन गायकों ने अपनी आवाज दी है?
इसे मशहूर गायिका श्रेया घोषाल और लोक गायक उस्मान मीर ने गाया है।

### 3. इस गीत का संगीत किसने तैयार किया और इसके बोल किसने लिखे हैं?
इसका संगीत खुद संजय लीला भंसाली ने तैयार किया था, जबकि इसके बोल सिद्धार्थ और गरिमा ने लिखे हैं।

### 4. पर्दे पर यह गीत किन प्रमुख कलाकारों पर फिल्माया गया था?
यह गीत मुख्य रूप से दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह पर फिल्माया गया था, जिसमें दीपिका पारंपरिक लाल चनिया-चोली में नजर आई थीं।

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