# ऑडिशन में बिमल रॉय के सामने जब केष्टो मुखर्जी ने निकाली कुत्ते की आवाज, फिर ऐसे बने हिंदी सिनेमा के सबसे चहेते कॉमेडियन

> कोलकाता के रंगमंच से निकलकर मुंबई में संघर्ष करने वाले केष्टो मुखर्जी ने अपनी अनूठी कला से बिमल रॉय को प्रभावित किया था. शराबी की अपनी स्वाभाविक एक्टिंग से 90 से अधिक फिल्मों में छाप छोड़ने वाले इस दिग्गज कलाकार की पूरी जीवनयात्रा पढ़ें.

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-08-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/dishana-men-bimal-roy-ke-samane-jaba-keshto-mukherjee-ne-nikali-kutte-ki-avaja-phira-aise-bane-hindi-sinema-ke-sabase-chahete-kome-14440 · **Language:** Hindi
**Tags:** केष्टो मुखर्जी, बिमल रॉय, हिंदी सिनेमा, बॉलीवुड कॉमेडी, फिल्मफेयर अवॉर्ड, खूबसूरत फिल्म

हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे महान कलाकार हुए हैं जिन्होंने मुख्य भूमिका न निभाते हुए भी दर्शकों के दिलों पर अपनी अमिट छाप छोड़ी. इन्हीं दिग्गज कलाकारों में एक प्रमुख नाम केष्टो मुखर्जी का आता है. पर्दे पर अपनी मासूम अभिव्यक्ति, अनोखे हावभाव और शराबी की स्वाभाविक अदाकारी के दम पर उन्होंने दर्शकों को दशकों तक हंसाया. लेकिन जिस मुकाम को उन्होंने हासिल किया, उसके पीछे वर्षों का कठिन संघर्ष, बेहिसाब इंतजार और कला के प्रति अटूट निष्ठा छिपी थी. अपनी पहली पहचान बनाने के लिए उन्हें अनेक दरवाजे खटखटाने पड़े थे और एक बार तो एक मशहूर निर्देशक के सामने काम पाने के लिए बेहद अजीब परीक्षा से गुजरना पड़ा था.

 

## कोलकाता के रंगमंच से मुंबई के कठिन संघर्ष तक का सफर
 केष्टो मुखर्जी का जन्म 7 अगस्त 1925 को कोलकाता के एक साधारण परिवार में हुआ था. बचपन से ही उनके मन में अभिनय के प्रति गहरा लगाव था. वे अपने स्कूल तथा आसपास के मोहल्ले में आयोजित होने वाले नाटकों में बढ़-चढ़कर हिस्सा लेते थे. रंगमंच पर लगातार काम करने से उनकी अभिनय क्षमता में निखार आता गया. इसी दौर में उनकी मुलाकात प्रसिद्ध फिल्मकार ऋत्विक घटक से हुई. ऋत्विक घटक ने केष्टो मुखर्जी की प्रतिभा को पहचाना और अपनी बंगाली फिल्म **नागरिक** में उन्हें काम करने का अवसर दिया. हालांकि इस फिल्म की शूटिंग वर्ष 1952 में पूरी हो चुकी थी, लेकिन किसी कारणवश यह कई वर्षों बाद 1977 में प्रदर्शित हो सकी.

 इसके पश्चात केष्टो मुखर्जी ने **अजांत्रिक** तथा **बारी ठेके पालिये** जैसी अन्य बंगाली फिल्मों में भी अपने अभिनय का प्रदर्शन किया. इन फिल्मों के माध्यम से उन्हें कलात्मक पहचान और प्रशंसा तो मिली, लेकिन उनकी आर्थिक स्थिति में कोई विशेष सुधार नहीं हो सका. आर्थिक तंगी और बड़े अवसरों की कमी के कारण उन्होंने कोलकाता छोड़ने का फैसला किया और अपने सपनों को नया आयाम देने के लिए मुंबई का रुख किया. मुंबई पहुंचने के बाद उनका संघर्ष और भी चुनौतीपूर्ण हो गया. वे काम पाने की उम्मीद में प्रतिदिन विभिन्न फिल्म स्टूडियो के चक्कर लगाया करते थे.

 

## जब बिमल रॉय के सामने पेश की अनूठी कला
 काम की तलाश के इसी कठिन दौर में केष्टो मुखर्जी मशहूर निर्देशक बिमल रॉय से मिलने पहुंचे. बिमल रॉय उस समय अपनी एक फिल्म की शूटिंग में बेहद व्यस्त थे. काफी समय तक इंतजार करने के बाद जब केष्टो मुखर्जी की उनसे मुलाकात हुई, तो निर्देशक ने स्पष्ट कहा कि फिलहाल उनके पास कोई काम उपलब्ध नहीं है और वे बाद में आएं. इतना सुनने के बाद भी केष्टो मुखर्जी हताश होकर वहां से हटे नहीं और चुपचाप वहीं खड़े रहे.

 केष्टो मुखर्जी को लगातार खड़ा देखकर बिमल रॉय ने उनसे एक अजीब सवाल पूछा कि क्या वे कुत्ते की आवाज निकाल सकते हैं. केष्टो मुखर्जी कुछ क्षणों के लिए शांत रहे, लेकिन अगले ही पल उन्होंने पूरी एकाग्रता के साथ कुत्ते के भौंकने की बेहद असली आवाज निकालना शुरू कर दिया. वहां मौजूद तमाम लोग उनकी यह कला देखकर दंग रह गए. बिमल रॉय उनकी इस हाजिरजवाबी और अभिनय क्षमता से बेहद प्रभावित हुए और उन्होंने तुरंत केष्टो मुखर्जी को काम देने का मन बना लिया. मुंबई में इसके बाद उन्हें निर्देशक ऋषिकेश मुखर्जी की फिल्म **मुसाफिर** में काम मिला, जिससे उन्हें पहली बार हिंदी सिनेमा जगत में व्यापक पहचान हासिल हुई.

 

## शराबी के किरदार बने पहचान और 90 से अधिक फिल्मों का सफर
 केष्टो मुखर्जी के अभिनय करियर को सबसे बड़ा मोड़ तब मिला जब निर्देशक असित सेन ने उन्हें अपनी फिल्म **मां और ममता** में एक शराबी का किरदार निभाने का मौका दिया. उन्होंने इस भूमिका को इतनी सहजता और वास्तविकता के साथ निभाया कि यह उनकी स्थायी पहचान बन गई. इसके बाद हिंदी सिनेमा में जब भी किसी शराबी के किरदार की आवश्यकता होती, तो निर्माताओं और निर्देशकों के दिमाग में सबसे पहला नाम केष्टो मुखर्जी का ही आता था.

 हालांकि वे केवल एक ही तरह की भूमिकाओं तक सीमित नहीं रहे. तीन दशक से भी लंबे अपने करियर में उन्होंने करीब 90 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. उन्होंने **पड़ोसन**, **बॉम्बे टू गोवा**, **शोले**, **चुपके चुपके**, **खूबसूरत**, **गोलमाल**, **पिया का घर**, **ज़ंजीर** और **नसीब** जैसी कई सदाबहार फिल्मों में अपनी विभिन्न हास्य भूमिकाओं से दर्शकों का भरपूर मनोरंजन किया.

 

## अभिनय का सच, पुरस्कार और अंतिम दिन
 पर्दे पर शराबी के रूप में उनका अभिनय इतना सटीक और स्वाभाविक होता था कि आम दर्शक यह मानने लगे थे कि वे शूटिंग से पहले सचमुच शराब का सेवन करते होंगे. हालांकि इस धारणा का खंडन उनके बेटे बबलू मुखर्जी ने एक साक्षात्कार के दौरान किया. बबलू मुखर्जी ने बताया कि उनके पिता अपने किरदारों के लिए कभी शराब नहीं पीते थे. वे रोजाना की जिंदगी में आम लोगों के उठने-बैठने, बोलने और चलने-फिरने के तरीकों को बहुत ध्यान से देखते थे और उसी निरीक्षण से अपनी एक्टिंग के हावभाव सीखते थे.

 उनकी उत्कृष्ट कॉमिक टाइमिंग के लिए उन्हें कई बार फिल्मफेयर पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ हास्य अभिनेता की श्रेणी में नामांकित किया गया. आखिरकार वर्ष 1981 में रिलीज हुई फिल्म **खूबसूरत** में बेहतरीन प्रदर्शन के लिए उन्हें बेस्ट परफॉर्मेंस इन अ कॉमिक रोल का प्रतिष्ठित फिल्मफेयर पुरस्कार प्रदान किया गया. इसके कुछ ही समय बाद, फरवरी 1982 में वे एक भयानक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गए. गंभीर रूप से घायल होने के बाद उनका लंबा इलाज चला, लेकिन स्वास्थ्य में सुधार न हो सका. अंततः मार्च 1982 में महज 56 वर्ष की आयु में इस महान कलाकार का निधन हो गया.

## इसका आप पर असर
**सिनेमा प्रेमियों के लिए:** यह कहानी दिखाती है कि छोटी भूमिकाएं निभाने वाले कलाकार भी अपनी मेहनत और निष्ठा से सिनेमा के इतिहास में अमर हो सकते हैं.

## सवाल-जवाब

### 1. केष्टो मुखर्जी का जन्म कब और कहां हुआ था?
केष्टो मुखर्जी का जन्म 7 अगस्त 1925 को कोलकाता में एक साधारण परिवार में हुआ था.

### 2. बिमल रॉय ने ऑडिशन के दौरान केष्टो मुखर्जी से क्या करने को कहा था?
बिमल रॉय ने केष्टो मुखर्जी से कुत्ते की आवाज निकालने के लिए कहा था, जिसे उन्होंने तुरंत बेहद सटीक ढंग से निकालकर दिखाया था.

### 3. क्या केष्टो मुखर्जी शराबी की एक्टिंग के लिए सचमुच शराब पीते थे?
नहीं, उनके बेटे बबलू मुखर्जी ने इंटरव्यू में स्पष्ट किया था कि उनके पिता अभिनय के लिए शराब नहीं पीते थे, बल्कि आम लोगों के हावभाव देखकर सीखते थे.

### 4. केष्टो मुखर्जी को किस फिल्म के लिए बेस्ट कॉमिक रोल का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था?
वर्ष 1981 में फिल्म खूबसूरत के लिए उन्हें बेस्ट परफॉर्मेंस इन अ कॉमिक रोल का फिल्मफेयर पुरस्कार मिला था.

### 5. केष्टो मुखर्जी का निधन कब और कैसे हुआ था?
फरवरी 1982 में सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल होने के बाद इलाज के दौरान मार्च 1982 में 56 वर्ष की उम्र में उनका निधन हो गया था.

## प्रेरणा और सबक
**केष्टो मुखर्जी के जीवन से प्रेरणादायक सीख:**

- **धैर्य और दृढ़ता:** काम न मिलने और इनकार के बावजूद मैदान छोड़कर न भागना ही सफलता की पहली शर्त है.
- **अपनी कला में निपुणता:** किसी भी काम या प्रतिभा को छोटा न समझें, अवसर कभी भी और किसी भी रूप में आ सकता है.
- **सत्यनिष्ठा और अवलोकन:** व्यसन का सहारा लिए बिना केवल समाज के गहन अवलोकन और अभ्यास से अपने कौशल को निखारा जा सकता है.

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