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  "type": "article",
  "title": "एनरिक इग्लेसियस के कॉन्सर्ट में आया वो फोन कॉल, जिसने पलट दी विद्या बालन की किस्मत",
  "summary": "विद्या बालन ने खुलासा किया कि कैसे परिणीता के लिए बार-बार रिजेक्शन झेलने के बाद, एनरिक इग्लेसियस के एक कॉन्सर्ट में आए एक फोन कॉल ने उनकी किस्मत पलट दी और उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया।",
  "content": "'परिणीता', 'द डर्टी पिक्चर' और 'भूल भुलैया' जैसी फिल्मों से अपनी अलग पहचान बनाने वाली विद्या बालन आज भले ही बॉलीवुड की सबसे भरोसेमंद अदाकाराओं में गिनी जाती हों, लेकिन यहां तक का उनका सफर बिल्कुल आसान नहीं रहा। इंडस्ट्री में एंट्री से पहले उन्हें कदम-कदम पर रिजेक्शन झेलना पड़ा था, और एक ऐसा भी दौर आया जब उन्होंने लगभग हार मान ली थी। मगर ठीक उसी मोड़ पर आया एक फोन कॉल, जिसने रातों-रात उनकी पूरी जिंदगी बदल दी। यही वजह है कि यह किस्सा आज भी फैंस के बीच बार-बार याद किया जाता है।\n\nजब उम्मीद टूटने लगी थी\nसिमी ग्रेवाल के चैट शो 'रेंडेव्यू विद सिमी ग्रेवाल' में विद्या बालन ने अपने संघर्ष के उन दिनों को याद किया, जब वे 'परिणीता' फिल्म के लिए लगातार ऑडिशन देती आ रही थीं। बार-बार के इन टेस्ट ने उन्हें इतना थका दिया था कि उन्हें लगने लगा था कि यह फिल्म भी उनके हाथ से निकल जाएगी। हर नए ऑडिशन के बाद इंतजार और अनिश्चितता उनके अंदर एक गहरी बेचैनी भरती जा रही थी। मन ही मन उन्होंने उम्मीद लगभग छोड़ दी थी और यह मान लिया था कि उन्हें इस रोल के लिए रिजेक्ट कर दिया गया है।\n\nकॉन्सर्ट में फोन बंद करके बैठी थीं विद्या\nविद्या ने बताया कि जिस दिन उनकी किस्मत ने करवट ली, वे उस दिन गायक एनरिक इग्लेसियस के एक कॉन्सर्ट में मौजूद थीं। उस वक्त वे मानसिक तौर पर इतनी उलझी हुई थीं कि उन्होंने अपना फोन ही बंद कर दिया था, ताकि कोई उन्हें परेशान न करे। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। कॉन्सर्ट में उनके साथ उनका एक दोस्त भी मौजूद था, जो फिल्म के डायरेक्टर प्रदीप सरकार के साथ काम करता था। तभी अचानक उसी दोस्त के फोन पर प्रदीप सरकार, जिन्हें विद्या 'दादा' कहकर बुलाती हैं, की कॉल आ गई।\n\n'दादा' के फोन ने पहुंचाई असली खबर\nविद्या बालन ने बताया, \"दादा ने मेरे दोस्त से पूछा कि विद्या कहां है, क्या वो तुम्हारे साथ कॉन्सर्ट में है? दोस्त ने हां कहा, इसके बाद मैंने फोन अपने हाथ में लिया।\" दादा ने विद्या को बताया कि फिल्म के प्रोड्यूसर विधु विनोद चोपड़ा उनसे बात करना चाहते हैं। यह सुनते ही विद्या को लगा कि हमेशा की तरह इस बार भी उन्हें रिजेक्शन की ही खबर मिलने वाली है। लेकिन जैसे ही फोन विधु विनोद चोपड़ा के हाथ में गया, उन्होंने कुछ ऐसा कहा जिसने विद्या की पूरी दुनिया ही बदल दी। चोपड़ा ने कहा, \"विद्या बालन, तुम ही मेरी परिणीता हो। मुझे तुम पर पूरा भरोसा है और मुझे यकीन है कि तुम हमारे इस भरोसे को कभी टूटने नहीं दोगी।\"\n\n'परिणीता' ने विद्या को बना दिया स्टार\nशरतचंद्र चट्टोपाध्याय के मशहूर उपन्यास पर बनी फिल्म 'परिणीता' 10 जून 2005 को रिलीज हुई थी। यह डायरेक्टर प्रदीप सरकार की पहली फिल्म थी। इस फिल्म में विद्या बालन के साथ सैफ अली खान और संजय दत्त मुख्य किरदारों में नजर आए थे, जबकि दीया मिर्जा और राइमा सेन ने भी इसमें अहम भूमिकाएं निभाईं थीं। इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई की और साथ ही आलोचकों का दिल भी जीत लिया। यही फिल्म आगे चलकर विद्या बालन को रातों-रात बॉलीवुड की एक चमकती हुई सितारा बना गई। आज भी यह किस्सा स्ट्रगल से स्टारडम तक के सफर की सबसे भावुक मिसालों में गिना जाता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. विद्या बालन को उनकी पहली फिल्म कौन सी मिली थी?\nउन्हें अपनी पहली फिल्म 'परिणीता' मिली थी।\n\n2. 'परिणीता' कब रिलीज हुई थी?\nयह फिल्म 10 जून 2005 को रिलीज हुई थी।\n\n3. 'परिणीता' के डायरेक्टर कौन थे?\nप्रदीप सरकार इस फिल्म के डायरेक्टर थे और यह उनकी पहली फिल्म थी।\n\n4. 'परिणीता' के प्रोड्यूसर कौन थे?\nफिल्म के प्रोड्यूसर विधु विनोद चोपड़ा थे।\n\n5. विद्या बालन को अपने सिलेक्शन की खबर कैसे मिली थी?\nएनरिक इग्लेसियस के कॉन्सर्ट में उनके दोस्त के फोन पर प्रदीप सरकार (दादा) की कॉल आई, जिसके बाद विधु विनोद चोपड़ा ने खुद उनसे बात की और सिलेक्शन की खबर दी।\n\n6. 'परिणीता' में विद्या बालन के साथ और कौन-कौन कलाकार थे?\nफिल्म में सैफ अली खान और संजय दत्त मुख्य किरदारों में थे, जबकि दीया मिर्जा और राइमा सेन ने भी अहम भूमिकाएं निभाईं।\n\n7. 'परिणीता' फिल्म किस उपन्यास पर आधारित है?\nयह फिल्म शरतचंद्र चट्टोपाध्याय के मशहूर उपन्यास पर आधारित है।\n\n8. विद्या बालन ने यह किस्सा कहां शेयर किया?\nउन्होंने यह किस्सा सिमी ग्रेवाल के चैट शो 'रेंडेव्यू विद सिमी ग्रेवाल' में साझा किया।\n\nप्रेरणा और सबक\nप्रेरणा और सीख:\n\n• बार-बार रिजेक्शन मिलने के बावजूद विद्या बालन ने ऑडिशन देना नहीं छोड़ा, यही धैर्य आगे चलकर उनके काम आया।\n• जब उम्मीद टूटने लगे, तब भी हार मानने के बजाय अपने काम में डटे रहना असली मौका मिलने तक जरूरी होता है।\n• सबसे बड़ा मौका अक्सर सबसे अनचाहे पल में आता है, इसलिए हर हाल में तैयार रहना जरूरी है।\n• विधु विनोद चोपड़ा का जताया गया भरोसा दिखाता है कि सही वक्त पर मिला एक भरोसा किसी का पूरा करियर बदल सकता है।",
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  "category": "बॉलीवुड",
  "publishedAt": "2026-07-05",
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