फिल्म दो बूंद पानी का वह गीत, जिसमें सिमी गरेवाल के दर्द को आवाज देती हैं आशा भोसले साल 1971 में आई फिल्म दो बूंद पानी का गाना 'जा रे पवनिया पिया के देस जा' विरह और इंतजार की दास्तां बयां करता है, जिसे कैफी आजमी और बालकवि बैरागी ने लिखा था। हिंदी सिनेमा के इतिहास में जुदाई के अहसास को हमेशा बेहद संवेदनशीलता के साथ पर्दे पर उतारा गया है। जब कोई प्रेमी या प्रेमिका अपने साथी से दूर होता है, तो उसका इंतजार और तड़प अलग ही रूप ले लेते हैं। कभी कोई दिल की बात चांद से कहता है, तो कभी हवा को अपना हमदर्द मानकर संदेश भेजता है। ऐसे ही तमाम भावनात्मक गीतों के बीच एक ऐसा नगमा भी मौजूद है, जो हवा के रास्ते अपने पिया तक संदेश पहुंचाने की अनूठी दास्तां कहता है। निर्देशक ख्वाजा अहमद अब्बास की साल 1971 में रिलीज हुई फिल्म ‘दो बूंद पानी’ का लोकप्रिय गाना ‘जा रे पवनिया पिया के देस जा’ इसी विरह और बेबसी का प्रतीक है। पार्श्व गायिका आशा भोसले की सुरीली आवाज में सजा यह गीत उस विवाहिता के मन की बात कहता है, जो अपनों से दूर है और जिससे सीधे संवाद का कोई जरिया नहीं बचा है। ऐसे में वह बहती हुई हवा यानी पवन को अपना दूत बनाती है और उसे अपने पति के पास पहुंचने का अनुरोध करती है। राजस्थान के तपते रेगिस्तान और पानी की किल्लत की पृष्ठभूमि पर बनी इस फिल्म की कहानी काफी गहरी है। इसमें दिखाया गया है कि कैसे एक तरफ सूखी और प्यासी धरा है, तो दूसरी तरफ नवविवाहिता का तड़पता हुआ दिल है। सिमी गरेवाल ने फिल्म में ‘गौरी’ नाम की एक ग्रामीण महिला का किरदार निभाया है, जिसका पति (किरण कुमार) शादी के तुरंत बाद गांव में पानी की व्यवस्था के लिए राजस्थान नहर के निर्माण कार्य में मजदूरी करने चला जाता है। यही पृष्ठभूमि इस पूरे गीत को और अधिक प्रासंगिक बना देती है। इस बेहतरीन गीत के बोल कैफी आजमी और बालकवि बैरागी ने मिलकर रचे थे, जबकि इसे संगीतबद्ध जयदेव ने किया था। आशा भोसले की आवाज का ठहराव और दर्द इस रचना को और भी असरदार बनाता है। सिमी गरेवाल के अभिनय ने इस दृश्य में जान फूंक दी, जहां उनके चेहरे पर पति के लौटने की आस और आंखों में अकेलापन साफ झलकता है। लोक संगीत की मिठास और ग्रामीण परिवेश की खुशबू इस फिल्म के संगीत को हमेशा के लिए अमर कर देती है। इसका आप पर असर इस पुरानी cinematic रचना के जरिए संगीत प्रेमियों को भारतीय सिनेमा के स्वर्ण युग की उन गहराइयों को समझने का अवसर मिलता है, जहां साधारण धुनें भी जीवन के बड़े संघर्षों को बयां कर देती थीं। • संस्कृति प्रेमियों के लिए: यह गीत भारतीय लोक संगीत और पारंपरिक रचनाओं के तालमेल को गहराई से महसूस कराता है। • कला और संगीत के छात्रों के लिए: इससे पुरानी रचनाओं में शब्दों और स्वर के सटीक तालमेल को सीखने का मौका मिलता है। सवाल-जवाब 1. फिल्म दो बूंद पानी कब रिलीज हुई थी? फिल्म दो बूंद पानी साल 1971 में रिलीज हुई थी। 2. जा रे पवनिया गीत को किसने गाया है? इस गीत को पार्श्व गायिका आशा भोसले ने अपनी आवाज दी है। 3. इस गीत के बोल किसने लिखे थे? इस गीत के बोल कैफी आजमी और बालकवि बैरागी ने लिखे थे। 4. फिल्म में मुख्य भूमिका किसने निभाई थी? फिल्म में सिमी गरेवाल ने गौरी नाम की ग्रामीण महिला का किरदार निभाया था। https://trendkia.com/bollywood/film-do-boodh-pani-ka-vah-geet-jisme-simi-garewal-ke-dard-ko-aawaz-deti-hain-asha-bhosle-27986 TrendKia — Har trend, sabse pehle.