# फिल्म सेट पर फूट-फूटकर रोने लगते थे निर्देशक, माधुरी दीक्षित ने साझा की पुरानी शूटिंग की अनूठी दास्तान

> माधुरी दीक्षित ने एक निर्देशक की अत्यधिक भावुक कार्यशैली का मजेदार संस्मरण सुनाया, जो सीन समझाते समय टेबल के नीचे छिपकर और ट्रॉली शॉट के दौरान रो पड़ते थे।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-10-10 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/film-set-par-phoot-phootkar-rone-lagte-the-nirdeshak-madhuri-dixit-ne-sajha-ki-purani-shooting-ki-anoothi-dastan-46097 · **Language:** Hindi
**Tags:** माधुरी दीक्षित, सोनाली बेंद्रे, कोण होणार करोडपती, बॉलीवुड, फिल्मी किस्से, मनोरंजन

फिल्म उद्योग में अभिनेताओं को कई तरह के निर्देशकों के साथ काम करने का अनुभव मिलता है, लेकिन कुछ संस्मरण जीवनभर के लिए यादगार बन जाते हैं। बॉलीवुड अभिनेत्री माधुरी दीक्षित ने अपने लंबे सिनेमाई सफर से जुड़ा एक अनोखा और गुदगुदाने वाला अनुभव साझा किया है। उन्होंने एक ऐसे फिल्म निर्देशक की यादें ताजा कीं, जो शूटिंग के समय इतने ज्यादा भावुक हो जाते थे कि सेट पर ही उनके आंसू बहने लगते थे। माधुरी के अनुसार, दृश्यों की बारीकियां समझाते हुए वह निर्देशक कई बार अचानक रोने लगते थे और शॉट के बीच में उनकी सिसकियां गूंजने लगती थीं। यह मजेदार चर्चा 'कौन बनेगा करोड़पति' के मराठी संस्करण 'कोण होणार करोडपती' के मंच पर सामने आई, जहां माधुरी बतौर प्रस्तोता मौजूद थीं।

## सोनाली बेंद्रे के सवाल पर सामने आया पुराना किस्सा
कार्यक्रम के दौरान साथी अभिनेत्री सोनाली बेंद्रे ने माधुरी दीक्षित से एक सीधा सवाल पूछा कि क्या उन्हें अपने फिल्मी करियर में किसी चुनी हुई फिल्म को लेकर कभी कोई पछतावा महसूस हुआ है। इस सवाल का जवाब देते हुए माधुरी ने सीधे तौर पर किसी फिल्म का नाम लेने के बजाय उस अत्यधिक संवेदनशील निर्देशक का जिक्र छेड़ दिया। उन्होंने बताया कि उस निर्देशक का हद से ज्यादा भावुक रवैया पूरी यूनिट और खुद उनके लिए शूटिंग के दौरान बहुत बड़ी मुश्किल खड़ी कर देता था। मराठी भाषा में अपनी बात रखते हुए माधुरी ने समझाया कि वह फिल्मकार कहानी के हर छोटे और बड़े दृश्य को एक ही तरह के तीव्र आवेग और भावुकता के साथ फिल्माना चाहता था, जिससे संतुलन बनाना कठिन हो जाता था।

## सीन समझाते हुए टेबल के नीचे बैठकर रोना
माधुरी दीक्षित ने शूटिंग के दिनों की कार्यप्रणाली का ब्योरा देते हुए बताया कि वह अक्सर उस निर्देशक को समझाने की कोशिश करती थीं कि किसी भी दृश्य में भावनाओं का उभार धीरे-धीरे और सहज गति से होना चाहिए। हालांकि, निर्देशक अपनी ही जिद पर अड़े रहते थे और उनका मानना था कि शुरुआत से ही तीव्र भावनाएं दिखनी चाहिए। बहस और बातचीत के बीच स्थिति तब अजीब हो जाती थी जब सीन समझाते-समझते निर्देशक अचानक सामने से गायब हो जाते थे। बाद में पता चलता था कि वे इतने गहरे संवेग में चले जाते थे कि सेट पर रखी मेज के नीचे जाकर छिप जाते थे और वहीं बैठकर रोने लगते थे।

## चलती ट्रॉली पर गूंज उठीं निर्देशक की सिसकियां
शूटिंग के दौरान पेश आए एक और वाकये को याद करते हुए अभिनेत्री ने बताया कि एक दिन एक महत्वपूर्ण ट्रॉली शॉट फिल्माया जा रहा था। माधुरी कैमरे के सामने पूरे समर्पण के साथ अपना गंभीर और भावुक संवाद बोल रही थीं। उसी दौरान अचानक उनके कानों में रोने और सुबकने की तेज आवाजें आने लगीं। अभिनेत्री का ध्यान पूरी तरह भटक गया और वे सोचने लगीं कि फ्रेम के पीछे अचानक क्या गड़बड़ हो गई है। जब उन्होंने कैमरे से नजरें हटाकर पीछे मुड़कर देखा, तो वही निर्देशक खुद कैमरा ट्रॉली पर बैठे-बैठे आंसू बहा रहे थे। सेट का यह मजेदार और अजीबोगरीब किस्सा सुनकर सोनाली बेंद्रे अपनी हंसी नहीं रोक सकीं और उन्होंने इस पर गहरा आश्चर्य भी जताया।

## इसका आप पर असर
फिल्म उद्योग से जुड़े इस संस्मरण का आम दर्शकों और प्रशंसकों के लिए मनोरंजन और कलात्मक समझ के स्तर पर महत्व है।

- **सिनेमा प्रेमियों के लिए:** यह किस्सा दिखाता है कि पर्दे पर दिखने वाले गंभीर दृश्यों के पीछे सेट पर कई बार हास्यास्पद और अप्रत्याशित घटनाएं घटती हैं। दर्शक समझ सकते हैं कि किसी दृश्य को रचने में अभिनेताओं और निर्देशकों के बीच कितना भावनात्मक तालमेल जरूरी होता है।
- **कला क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए:** यह संस्मरण निर्देशन और अभिनय के बीच संतुलन बनाने की व्यावहारिक चुनौती को उजागर करता है। पेशेवर कार्यस्थल पर भावनाओं को नियंत्रित रखना रचनात्मक प्रक्रिया के लिए बेहद अहम होता है।
- **टेलीविजन दर्शकों के लिए:** मराठी रियलिटी शो के जरिए वरिष्ठ कलाकारों के ऐसे अनसुने अनुभव सामने आ रहे हैं। इससे दर्शकों को 90 के दशक के हिंदी सिनेमा के पर्दे के पीछे के माहौल की झलक मिलती है।
- **प्रशंसकों के लिए:** माधुरी दीक्षित के करियर के इस अनूठे पहलू से उनकी सहज अभिनय क्षमता और धैर्य का पता चलता है। कठिन परिस्थितियों में भी शॉट पूरा करने का उनका पेशेवर रवैया प्रेरणा देता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह किस्सा तब सामने आया जब एक टेलीविजन क्विज शो के दौरान दो साथी अभिनेत्रियों के बीच पेशेवर जीवन और पुरानी फिल्मों के चयन को लेकर सहज बातचीत शुरू हुई।

- **सोनाली बेंद्रे का सवाल:** शो के दौरान सह-कलाकार सोनाली बेंद्रे ने माधुरी दीक्षित से पूछा था कि क्या उन्हें कभी अपने किसी सिनेमाई प्रोजेक्ट को लेकर पछतावा महसूस हुआ। इस सीधे सवाल ने माधुरी को अपने अतीत के अनुभवों को टटोलने के लिए प्रेरित किया।
- **निर्देशक की अति-संवेदनशीलता:** अतीत में हुई उस घटना की मूल वजह फिल्म निर्देशक का अत्यधिक भावुक स्वभाव था, जो हर दृश्य में चरम भावनाएं देखना चाहता था। इसी मानसिक बनावट के कारण वह सीन के दौरान मेज के नीचे जाकर या ट्रॉली पर ही रोने लगता था।
- **रचनात्मक दृष्टिकोण में मतभेद:** माधुरी का मानना था कि दृश्य में भावनाओं का उभार धीरे-धीरे होना चाहिए, जबकि निर्देशक शुरुआत से ही भारी भावनाएं चाहते थे। इसी वैचारिक अंतर ने सेट के माहौल को चुनौतीपूर्ण और यादगार बना दिया।

## सवाल-जवाब

### 1. माधुरी दीक्षित ने यह मजेदार किस्सा किस मंच पर सुनाया?
माधुरी दीक्षित ने यह किस्सा मराठी क्विज शो 'कोण होणार करोडपती' के मंच पर साझा किया, जिसकी वे मेजबानी कर रही थीं।

### 2. सोनाली बेंद्रे ने माधुरी दीक्षित से क्या सवाल पूछा था?
सोनाली बेंद्रे ने उनसे पूछा था कि क्या उन्हें कभी अपने करियर में चुनी हुई किसी फिल्म को लेकर पछतावा हुआ है।

### 3. दृश्य समझाते समय निर्देशक अचानक कहाँ चले जाते थे?
निर्देशक अत्यधिक भावुक होकर सेट पर मौजूद टेबल के नीचे बैठ जाते थे और वहीं रोने लगते थे।

### 4. ट्रॉली शॉट के दौरान क्या अप्रत्याशित घटना घटी थी?
शॉट के बीच माधुरी को सिसकियों की आवाज आई और मुड़कर देखने पर निर्देशक खुद कैमरा ट्रॉली पर बैठे रो रहे थे।

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