गणेश चतुर्थी पर भाग्यश्री का खास संदेश, गोमय गणेश की मूर्ति से घर पर करें विसर्जन और बनाएं खाद अभिनेत्री भाग्यश्री ने गणेश चतुर्थी के पावन अवसर पर प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों से होने वाले जल प्रदूषण पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने लोगों से गोबर और प्राकृतिक मिट्टी से निर्मित गोमय गणेश स्थापित करने की अपील की, जिनका घर में विसर्जन कर प्राकृतिक खाद बनाई जा सकती है। देशभर में गणेश चतुर्थी के पर्व की तैयारियां जोरों पर हैं। इस पावन अवसर पर लोकप्रिय बॉलीवुड अभिनेत्री और फिल्म 'मैंने प्यार किया' फेम भाग्यश्री ने देशवासियों और अपने प्रशंसकों के नाम एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय संदेश जारी किया है। सोशल मीडिया पर एक विशेष अपील करते हुए उन्होंने लोगों से आग्रह किया है कि वे इस बार अपनी आस्था को प्रकृति के प्रति जिम्मेदारी से जोड़ें। अभिनेत्री का कहना है कि त्योहारों की खुशी इस तरह मनाई जानी चाहिए जिससे हमारी पौराणिक परंपराएं भी गरिमा के साथ पूरी हों और हमारे पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे। प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्तियों से नदियों को पहुंच रहा नुकसान भाग्यश्री ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम अकाउंट पर एक पोस्ट साझा कर पारंपरिक विसर्जन से प्रकृति पर पड़ने वाले दुष्प्रभावों के प्रति गहरी चिंता प्रकट की। उन्होंने आंकड़े रेखांकित करते हुए बताया कि आज भी लगभग 90 प्रतिशत लोग अपने घरों में प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) से बनी गणपति की मूर्तियां स्थापित करते हैं। ये मूर्तियां विसर्जन के बाद हमारी पवित्र नदियों, तालाबों और समुद्रों को गंभीर रूप से प्रदूषित करती हैं और लंबे समय तक पानी में नहीं घुलतीं। अभिनेत्री ने कहा कि भगवान श्री गणेश का स्वागत करते समय हमें इस बात पर भी गंभीरता से ध्यान देना चाहिए कि उत्सव समाप्त होने के बाद हमारी नदियाँ, जल स्रोत और मिट्टी प्रदूषित न हों। कृत्रिम रंगों और रसायनों से बनी मूर्तियां जल जीवन और पर्यावरण संतुलन के लिए बड़ा खतरा उत्पन्न करती हैं। गोमय गणेश: घर पर विसर्जन का आसान और इको-फ्रेंडली विकल्प जल प्रदूषण की इस गंभीर समस्या का एक प्रभावी समाधान पेश करते हुए भाग्यश्री ने लोगों को 'गोमय गणेश' की मूर्ति अपने घर लाने का सुझाव दिया है। गोमय गणेश की ये खास मूर्तियां देसी गाय के गोबर और प्राकृतिक मिट्टी के मिश्रण से तैयार की जाती हैं। रासायनिक मूर्तियों के विपरीत, ये मूर्तियां जल में शीघ्र घुलनशील और पर्यावरण के अनुकूल होती हैं। भाग्यश्री ने बताया कि गोमय गणेश की पूजा के बाद श्रद्धालुओं को मूर्ति विसर्जन के लिए नदियों या जनसमूह वाले जलाशयों तक जाने की आवश्यकता नहीं होती। इन मूर्तियों को घर के बगीचे या गमले में ही जल अर्पित करके बेहद सम्मानपूर्वक विसर्जित किया जा सकता है। इससे सार्वजनिक जलस्रोतों को साफ रखने में मदद मिलती है। विसर्जन के बाद पौधों के लिए बनेगी प्राकृतिक खाद गोमय गणेश के पीछे के सांस्कृतिक और वैज्ञानिक तर्क को समझाते हुए भाग्यश्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति में गाय को अत्यंत पवित्र माना गया है और उससे प्राप्त होने वाली हर वस्तु प्रकृति और मानव के लिए लाभकारी होती है। जब गोमय गणेश का विसर्जन गमले में किया जाता है, तो मूर्ति की मिट्टी और गोबर पूरी तरह घुलकर पौधों के लिए एक उच्च गुणवत्ता वाली जैविक खाद बन जाते हैं। प्रदूषण फैलाने के बजाय यह मूर्ति पौधों को पोषण प्रदान करती है। भाग्यश्री की इस पर्यावरण-हितैषी पहल की सोशल मीडिया पर प्रशंसकों द्वारा खूब सराहना की जा रही है, और कई बप्पा भक्त इस बार इको-फ्रेंडली गणेश स्थापित करने का संकल्प ले रहे हैं। इसका आप पर असर इस पहल से आम नागरिकों और गणेश भक्तों पर सीधा और सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा: • पर्यावरण संरक्षण: नदियों और तालाबों में रसायन युक्त पीओपी मूर्तियों का विसर्जन रुकने से जल प्रदूषण में भारी कमी आएगी। • सुगम विसर्जन: गोमय गणेश की मूर्तियों का विसर्जन घर पर ही गमले या गार्डन में संभव है, जिससे विसर्जन स्थलों की भीड़ और अव्यवस्था से राहत मिलेगी। • पौधों के लिए पोषण: विसर्जित मूर्ति जल में घुलकर गोबर और मिट्टी के रूप में आपके घर के पौधों के लिए बेहतरीन प्राकृतिक खाद बन जाएगी। • लागत व समय की बचत: बाहर जाकर विसर्जन करने में लगने वाले समय, यात्रा और ईंधन के खर्च में बचत होगी। ऐसा क्यों हुआ गणेश उत्सव के दौरान जल प्रदूषण की बढ़ती समस्या और पर्यावरण संरक्षण की आवश्यकता के कारण यह अपील की गई है। • पीओपी का बढ़ता प्रयोग: वर्तमान में करीब 90 प्रतिशत लोग पीओपी की मूर्तियों का उपयोग करते हैं, जो पानी में आसानी से नष्ट नहीं होतीं। • जलाशयों को नुकसान: कृत्रिम रंगों और पीओपी से बनी मूर्तियां नदियों और समुद्रों के पानी को दूषित कर जलीय जीवों को नुकसान पहुंचाती हैं। • सांस्कृतिक व प्राकृतिक संतुलन: परंपराओं को पर्यावरण के अनुकूल बनाकर त्यौहार मनाने के उद्देश्य से भाग्यश्री ने गोमय गणेश का विकल्प सुझाया है। सवाल-जवाब 1. भाग्यश्री ने गणेश चतुर्थी पर लोगों से क्या अपील की है? उन्होंने लोगों से प्लास्टर ऑफ पेरिस (PoP) की जगह 'गोमय गणेश' की इको-फ्रेंडली मूर्तियां घर लाने की अपील की है। 2. गोमय गणेश की मूर्तियां किस सामग्री से बनाई जाती हैं? ये मूर्तियां देसी गाय के गोबर और प्राकृतिक मिट्टी के मिश्रण से तैयार की जाती हैं। 3. गोमय गणेश का विसर्जन कैसे किया जाता है? गोमय गणेश का विसर्जन घर के गमले या बगीचे में पानी डालकर आसानी से किया जा सकता है। 4. गोमय गणेश विसर्जन का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है? विसर्जन के बाद यह मिट्टी और पानी में पूरी तरह घुलकर पौधों के लिए बेहतरीन प्राकृतिक खाद का काम करता है। प्रेरणा और सबक भाग्यश्री का यह संदेश हमें त्यौहारों को पर्यावरण-अनुकूल तरीके से मनाने की प्रेरणा देता है: • परंपरा और प्रकृति का मेल: धार्मिक आस्था को प्रकृति को नुकसान पहुंचाए बिना भी पूरी निष्ठा से निभाया जा सकता है। • सकारात्मक बदलाव की पहल: एक छोटी सी सोच और बदलाव के जरिए हम अपने जलस्रोतों को गंभीर प्रदूषण से बचा सकते हैं। • शून्य-अपशिष्ट उत्सव: त्योहार की सामग्री को बर्बादी के बजाय प्राकृतिक खाद के रूप में पुनर्चक्रित किया जा सकता है। https://trendkia.com/bollywood/ganesha-chaturthi-para-bhagyashree-ka-khasa-sndesha-gomaya-ganesha-ki-murti-se-ghara-para-karen-visarjana-aura-banaen-khada-31882 TrendKia — Har trend, sabse pehle.