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  "type": "article",
  "title": "गरीबी से जूझते बचपन के बाद सरोज खान कैसे बनीं बॉलीवुड की दिग्गज कोरियोग्राफर",
  "summary": "बचपन में गरीबी, महज 13 साल की उम्र में खुद से 30 साल बड़े मास्टर सोहनलाल से शादी और बैकग्राउंड डांसर के तौर पर दोबारा शुरुआत के बाद सरोज खान बॉलीवुड की सबसे बड़ी कोरियोग्राफर बनीं। 3 जुलाई 2020 को उनका निधन हो गया था।",
  "content": "सरोज खान की जिंदगी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं रही। महज तीन साल की उम्र में कैमरे के सामने आ चुकीं यह लड़की आगे चलकर हिंदी सिनेमा की सबसे बड़ी कोरियोग्राफर बनी। गरीबी, बचपन में ही रुका करियर और कम उम्र में शादी जैसी मुश्किलों को पार करते हुए सरोज खान ने वह मुकाम हासिल किया, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है।\n\nबचपन में ही झेलनी पड़ी तंगहाली\nघर के आर्थिक हालात इतने खराब थे कि सरोज खान को महज 3 साल की उम्र में ही बाल कलाकार के तौर पर काम करना पड़ा। जैसे ही वे थोड़ी बड़ी हुईं, उन्हें काम मिलना बंद हो गया और इंडस्ट्री से बाहर का रास्ता देखना पड़ा। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने फिल्मों में बैकग्राउंड डांसर के तौर पर दोबारा शुरुआत की और कैमरे के पीछे रहते हुए हर स्टेप को बहुत बारीकी से सीखा। यही मेहनत आगे चलकर उनके करियर की नींव बनी।\n\n13 साल की उम्र में शादी, रिश्ता नहीं टिका\nसरोज खान का निजी जीवन भी उतार-चढ़ाव से भरा रहा। सिर्फ 13 साल की उम्र में उन्होंने अपने से 30 साल बड़े मास्टर सोहनलाल से शादी कर ली थी, जो उस वक्त पहले से शादीशुदा थे। यह रिश्ता ज्यादा दिन नहीं चल पाया। इसके बाद उन्होंने सरदार रोशन खान से दूसरी शादी की।\n\nकोरियोग्राफर के तौर पर शुरुआत और डांस की नई परिभाषा\nसाल 1974 में आई फिल्म गीता मेरा नाम से सरोज खान ने कोरियोग्राफर के तौर पर अपना सफर शुरू किया। उन्होंने बॉलीवुड में डांस देखने और समझने का नजरिया ही बदल दिया। उनके लिए डांस सिर्फ हाथ-पैर हिलाने की कला नहीं थी, बल्कि चेहरे के भाव से कहानी कहने का जरिया था। उन्होंने एक से बढ़कर एक आइकॉनिक गाने कोरियोग्राफ किए, जो आज भी याद किए जाते हैं। मिस्टर इंडिया का हवा हवाई, तेजाब का एक दो तीन, बेटा का धक धक करने लगा और देवदास का डोला रे डोला जैसे गानों ने उन्हें इंडस्ट्री का सबसे बड़ा नाम बना दिया। वे हर एक्ट्रेस के हुनर को बारीकी से पहचानकर उसे स्क्रीन पर जादू की तरह उतार देती थीं। श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित जैसी सुपरस्टार्स के करियर को निखारने में सरोज खान का बहुत बड़ा योगदान रहा।\n\n40 साल का करियर, अवॉर्ड्स और टीवी पर सख्त जज\nसरोज खान ने अपने 40 साल से लंबे शानदार करियर में सैकड़ों फिल्मों के गाने कोरियोग्राफ किए और कई नेशनल और फिल्मफेयर अवॉर्ड्स अपने नाम किए। उन्होंने नच बलिए और झलक दिखला जा जैसे टीवी रियलिटी शो में जज बनकर भी खूब सुर्खियां बटोरीं, जहां फैंस उनके सीधे और कड़क अंदाज को बेहद पसंद करते थे।\n\n3 जुलाई 2020 को थम गया सफर\n3 जुलाई 2020 को इस महान कलाकार ने दुनिया को अलविदा कह दिया। सरोज खान भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका काम और उनकी विरासत हमेशा बॉलीवुड की शान बनी रहेगी।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. सरोज खान का निधन कब हुआ था?\nसरोज खान का निधन 3 जुलाई 2020 को हुआ था।\n\n2. सरोज खान ने करियर की शुरुआत किस उम्र में की थी?\nउन्होंने महज 3 साल की उम्र में बाल कलाकार के तौर पर काम करना शुरू किया था।\n\n3. सरोज खान की पहली शादी किससे हुई थी?\n13 साल की उम्र में उनकी शादी मास्टर सोहनलाल से हुई थी, जो उनसे 30 साल बड़े और पहले से शादीशुदा थे।\n\n4. उनकी दूसरी शादी किससे हुई?\nउन्होंने सरदार रोशन खान से दूसरी शादी की थी।\n\n5. बतौर कोरियोग्राफर उनकी पहली फिल्म कौन सी थी?\nसाल 1974 में आई फिल्म गीता मेरा नाम से उन्होंने कोरियोग्राफर के तौर पर शुरुआत की थी।\n\n6. सरोज खान के मशहूर कोरियोग्राफ किए गाने कौन-कौन से हैं?\nहवा हवाई, एक दो तीन, धक धक करने लगा और डोला रे डोला जैसे गाने उनकी पहचान बने।\n\n7. सरोज खान ने किन टीवी शो में जज के तौर पर काम किया?\nउन्होंने नच बलिए और झलक दिखला जा में जज के तौर पर काम किया था।\n\n8. किन एक्ट्रेसेस के करियर को सरोज खान ने खासतौर पर निखारा?\nश्रीदेवी और माधुरी दीक्षित जैसी सुपरस्टार्स के करियर को निखारने में उनका बड़ा हाथ रहा।\n\nप्रेरणा और सबक\nसरोज खान की जिंदगी हमें कई अहम सबक सिखाती है।\n\n• दोबारा शुरुआत करने का हौसला: काम छिनने के बाद भी उन्होंने बैकग्राउंड डांसर के तौर पर नए सिरे से शुरुआत की, बड़े मुकाम तक पहुंचने के लिए छोटे कदम से शुरुआत करने से न घबराएं।\n• हर मौके को सीखने का जरिया बनाएं: कैमरे के पीछे रहते हुए भी उन्होंने हर स्टेप बारीकी से सीखा, जो आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।\n• अपने हुनर में नयापन लाएं: उन्होंने डांस को सिर्फ हरकत नहीं, बल्कि भाव और कहानी कहने का माध्यम बनाकर पूरी परिभाषा ही बदल दी।\n• दूसरों की खूबी पहचानना भी एक हुनर है: श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित जैसी एक्ट्रेसेस के हुनर को पहचानकर उसे निखारने में उनका बड़ा योगदान रहा।\n• निजी मुश्किलों के बावजूद डटे रहना: कम उम्र में शादी और टूटे रिश्ते जैसी चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने करियर पर फोकस बनाए रखा।",
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  "category": "बॉलीवुड",
  "publishedAt": "2026-07-02",
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    "बॉलीवुड कोरियोग्राफर",
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