# गोविंदा की दो मशहूर अभिनेत्रियों ने बयां किया नब्बे के दशक का दौर, एक दिन में छह सेट पर करती थीं काम

> करिश्मा कपूर और रवीना टंडन ने नब्बे के दशक के अपने व्यस्त शूटिंग रूटीन को याद करते हुए बताया कि कैसे वे लगातार काम करती थीं और एक ही दिन में छह अलग-अलग फिल्मों के सेट पर पहुंचती थीं.

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-09-23 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/govinda-ki-do-mashahura-abhinetriyon-ne-bayan-kiya-nabbe-ke-dashaka-ka-daura-eka-dina-men-chhaha-seta-para-karati-thin-kama-37326 · **Language:** Hindi
**Tags:** करिश्मा कपूर, रवीना टंडन, गोविंदा, बॉलीवुड, हिंदी सिनेमा, फिल्म सिटी

नब्बे के दशक में हिंदी सिनेमा के पर्दे पर अपनी अदाकारी से दर्शकों का दिल जीतने वाली करिश्मा कपूर और रवीना टंडन ने उस दौर के अपने बेहद व्यस्त दिनचर्या से जुड़े दिलचस्प किस्से साझा किए हैं. दोनों अभिनेत्रियों ने बताया कि उस समय काम का दबाव इतना ज्यादा रहता था कि वे लगभग बिना रुके लगातार शूटिंग करती रहती थीं. सफर के दौरान रास्ते में ही पोशाक बदलना, एक लोकेशन से सीधे दूसरी लोकेशन के लिए दौड़ना और तुरंत कैमरे के सामने खड़े हो जाना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का सामान्य हिस्सा बन चुका था.

## फिल्म सिटी में सुबह से देर रात तक की भागदौड़
करिश्मा कपूर के अनुसार, उस दौर में ज्यादातर फिल्मों की शूटिंग फिल्म सिटी में ही रखी जाती थी. दोनों अभिनेत्रियों का दिन सुबह सात बजे से शुरू हो जाता था. अक्सर ऐसा होता था कि स्टूडियो परिसर में अलग-अलग फिल्मों के सेट पर जाते वक्त दोनों एक-दूसरे को आते-जाते देखती थीं. एक स्टूडियो से निकलकर तुरंत दूसरे फ्लोर पर जाना और नई यूनिट के साथ काम शुरू करना उस वक्त की आम दिनचर्या थी.

रवीना टंडन ने इस काम के दबाव पर मजाकिया टिप्पणी करते हुए कहा कि उस दशक में शायद वे दोनों ही ऐसी अभिनेत्रियां थीं, जो चौबीस घंटे के भीतर छत्तीस घंटे जितना काम निपटा लेती थीं. एक दिन के भीतर उन्हें करीब छह अलग-अलग प्रोडक्शन हाउस के सेट पर पहुंचना होता था. किसी सेट पर महज डेढ़ घंटे का काम होता था, तो कहीं दो घंटे और किसी अन्य सेट पर तीन से चार घंटे तक का समय बिताना पड़ता था.

## एक जैसे किरदारों की वजह से भूल जाती थीं रोल
अत्यधिक व्यस्तता का असर यह होता था कि अभिनेत्रियों को कई बार यह भी ध्यान नहीं रहता था कि वे किस फिल्म का कौन सा दृश्य फिल्मा रही हैं. करिश्मा कपूर ने उदाहरण देते हुए बताया कि अगर किसी कहानी में उनका किरदार किसी अमीर और बिगड़ी हुई लड़की का होता था, तो वही स्वभाव उन्हें एक ही समय में छह अलग-अलग फिल्मों के सेट पर कैमरे के सामने दोहराना पड़ता था.

रवीना टंडन ने भी इस बात की पुष्टि की कि अत्यधिक प्रोजेक्ट्स में एक साथ काम करने की वजह से एक वक्त ऐसा आ गया था जब उन्हें अपने निभाए जा रहे किरदारों के नाम और संदर्भ तक याद नहीं रहते थे. कई फिल्मों में एक जैसे खांचे में ढले रोल होने के कारण स्थिति ऐसी बन जाती थी कि सेट पर पहुंचकर निर्देशक और क्रू जो निर्देश देते थे, वे बिना ज्यादा सोचे बस उसी के अनुसार अभिनय कर देती थीं.

## गोविंदा के साथ सुपरहिट ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री
अपने करियर में करिश्मा कपूर और रवीना टंडन दोनों ने ही कई सफल और यादगार फिल्मों में मुख्य भूमिकाएं निभाई हैं. नब्बे के दशक में इन दोनों अभिनेत्रियों की जोड़ी अभिनेता गोविंदा के साथ दर्शकों के बीच जबरदस्त लोकप्रिय मानी जाती थी. दोनों ने अपने सुनहरे दौर में गोविंदा के साथ कई बड़ी फिल्मों में काम किया और बॉक्स ऑफिस पर कई कामयाब प्रस्तुतियां दीं. आज भी जब वे उस दौर को मुड़कर देखती हैं, तो वह कड़ी मेहनत और व्यस्त दिनचर्या उनकी सुनहरी यादों में एक खास मुकाम रखती है.

## इसका आप पर असर
यह किस्सा दर्शाता है कि नब्बे के दशक में सिनेमाई जगत का कार्यप्रणाली और कलाकारों की कार्यशैली किस कदर चुनौतीपूर्ण हुआ करती थी.

- **सिनेमा प्रेमियों के लिए:** दर्शकों को यह जानने का अवसर मिलता है कि उस दौर की रंगीन और मनोरंजक फिल्मों के निर्माण के पीछे कलाकारों को कैसी कठिन भागदौड़ का सामना करना पड़ता था. आज की आधुनिक और सुनियोजित फिल्म निर्माण प्रक्रिया के मुकाबले उस समय एक दिन में छह सेट बदलना बेहद असामान्य था.
- **मनोरंजन उद्योग के लिए:** यह तुलना वर्तमान दौर में अभिनेताओं द्वारा एक समय में एक ही प्रोजेक्ट पर ध्यान केंद्रित करने की कार्यसंस्कृति को रेखांकित करती है. पहले के मुकाबले अब समय प्रबंधन और शेड्यूलिंग में काफी व्यवस्थित बदलाव आ चुका है.
- **गोविंदा के प्रशंसकों के लिए:** उन सुपरहिट फिल्मों की पृष्ठभूमि की याद ताजा होती है जिन्होंने उस पूरे दशक में कॉमेडी और संगीत का नया पैमाना तय किया था. यह समझ आता है कि पर्दे पर दिखने वाली सहज केमिस्ट्री के पीछे कितना भारी श्रम छुपा था.
- **नौजवान कलाकारों के लिए:** करियर के शुरुआती दौर में निरंतर समर्पण और बिना रुके काम करने के संकल्प की मिसाल मिलती है. अत्यधिक व्यस्तता के बीच भी अपने काम को बखूबी अंजाम देने की क्षमता इस अनुभव से झलकती है.

## ऐसा क्यों हुआ
करिश्मा कपूर और रवीना टंडन ने नब्बे के दशक के अपने शुरुआती करियर के अनुभवों को याद करते हुए उस दौर की कार्यसंस्कृति और भारी कार्यभार पर खुलकर बात की.

- **अत्यधिक मांग और प्रोजेक्ट्स की भरमार:** उस दौर में शीर्ष अभिनेत्रियों की मांग बहुत अधिक थी और वे एक साथ दर्जनों फिल्मों के अनुबंध पर काम कर रही थीं. निर्माताओं की तारीखों के तालमेल के कारण एक ही दिन को कई अलग-अलग फिल्मों के बीच बांटना पड़ता था.
- **फिल्म सिटी में केंद्रित शूटिंग:** अधिकांश मुख्यधारा की फिल्मों का निर्माण मुंबई के फिल्म सिटी स्टूडियो में ही होता था. एक ही परिसर में कई सेट मौजूद होने की वजह से अभिनेत्रियों के लिए एक फ्लोर से दूसरे फ्लोर पर दौड़ना मुमकिन हो पाता था.
- **टाइपकास्ट और तय फार्मूले की फिल्में:** व्यावसायिक सिनेमा में उस समय किरदारों के ढांचे तय हुआ करते थे और एक जैसी कहानियों का चलन था. इसी वजह से अभिनेत्रियों को कई सेटों पर एक जैसे रूढ़िवादी किरदार निभाने पड़ते थे जिससे भूमिकाओं में अंतर करना मुश्किल हो जाता था.

## सवाल-जवाब

### 1. रवीना टंडन और करिश्मा कपूर ने नब्बे के दशक में कितने घंटे काम करने की बात कही?
रवीना टंडन ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वे दोनों चौबीस घंटे के भीतर छत्तीस घंटे जितना काम करती थीं.

### 2. एक दिन में अभिनेत्रियां कितने अलग-अलग सेटों पर शूटिंग के लिए जाती थीं?
उन्होंने बताया कि उन्हें एक ही दिन में करीब छह अलग-अलग प्रोडक्शन के सेट पर जाना पड़ता था.

### 3. करिश्मा कपूर के अनुसार उनका दिन कितने बजे शुरू होता था?
करिश्मा कपूर ने बताया कि वे सुबह करीब सात बजे से काम शुरू कर देती थीं.

### 4. अभिनेत्रियां अपने किरदारों को क्यों भूल जाती थीं?
एक साथ कई फिल्मों पर काम करने और कई सेटों पर एक जैसे रोल निभाने की वजह से वे किरदार भूल जाती थीं.

### 5. नब्बे के दशक में दोनों अभिनेत्रियों की जोड़ी किस अभिनेता के साथ सुपरहिट मानी जाती थी?
दोनों अभिनेत्रियों की जोड़ी अभिनेता गोविंदा के साथ काफी हिट मानी जाती थी और उन्होंने उनके साथ कई फिल्में कीं.

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