# गुरदासपुर में पिता की 10वीं बरसी पर बेटे ने बुक किया सिनेमा हॉल, 200 से अधिक श्रद्धालुओं को दिखाई 'हनुमान अंश'

> गुरदासपुर के कलानौर में पूर्व सरपंच की याद में उनके बेटे ने पूरा मूवी थियेटर आरक्षित कर श्रद्धालुओं को भक्ति फिल्म दिखाई, जहां भजन कीर्तन और लंगर का भी आयोजन हुआ।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-09-19 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/gurdaspur-men-pita-ki-10vin-barasi-para-bete-ne-buka-kiya-sinema-hola-200-se-adhika-shraddhaluon-ko-dikhai-hanuman-ansh-34427 · **Language:** Hindi
**Tags:** हनुमान अंश, गुरदासपुर, कलानौर, सुरिंदर विज, नरेंद्र विज, धार्मिक आयोजन, लंगर

पंजाब के गुरदासपुर जिले में स्थित ऐतिहासिक कस्बे कलानौर के पास पंचायत जैलदारां के पूर्व सरपंच स्वर्गीय सुरिंदर विज के स्मरणोत्सव को उनके परिवार ने बेहद अनूठे तरीके से मनाया। सामान्य तौर पर लोग अपने पुरखों के वार्षिक श्राद्ध या बरसी पर केवल पारिवारिक पूजा अर्चना अथवा लंगर का आयोजन करते हैं। इसके विपरीत, उनके समाजसेवी पुत्र नरेंद्र विज निती सारा ने अपने पिता के महापरिनिर्वाण के दसवें वर्ष को यादगार बनाने के उद्देश्य से पूरे सिनेमा हॉल को आरक्षित कर दिया। इस विशिष्ट आयोजन में दो सौ से ज्यादा श्रद्धालु एकत्र हुए, जिन्हें भक्ति प्रधान चलचित्र 'हनुमान अंश' का विशेष प्रदर्शन दिखाया गया।

## सिनेमाघर के भीतर गूंजे भजन और सीता राम के जयकारे
थियेटर परिसर में प्रवेश करते ही वातावरण किसी सामान्य फिल्म शो जैसा नहीं, बल्कि आध्यात्मिक धाम जैसा प्रतीत हो रहा था। बड़े पर्दे पर चलचित्र की कथा चलने के समानांतर ही सभागार में निरंतर प्रभु स्मरण और भजन गायन चलता रहा। उपस्थित जनसमूह ने एक स्वर में भक्ति भाव से परिपूर्ण होकर 'सीता-राम, सीता-राम' का संकीर्तन किया, जिससे संपूर्ण हॉल गूंजायमान हो गया। संगीतमय भजन मंडलियों ने भक्ति संगीत की सुमधुर प्रस्तुतियां दीं, जिसने दर्शकों को गहरे आध्यात्मिक आनंद से सराबोर कर दिया।

इस आध्यात्मिक सम्मलेन में कई प्रमुख साधु संतों और धार्मिक हस्तियों ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इनमें मुख्य रूप से छोटे देवा कलानौर और बाबा रमा शामिल हुए। आयोजन समिति की ओर से पधारे हुए राम भक्तों को पारंपरिक मर्यादा के अनुरूप सिरोपा भेंट करके सम्मानित किया गया। इसके साथ ही वहां एकत्र हुई पूरी संगत के लिए सुव्यवस्थित लंगर और प्रसाद वितरण का भी व्यापक प्रबंध किया गया था।

## पिता की स्मृति में लंबे समय से जारी है परोपकार की परंपरा
कार्यक्रम के दौरान उपस्थित गणमान्य वक्ताओं ने स्वर्गीय सुरिंदर विज के ग्राम विकास और जनसेवा के कार्यों को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। सभा को संबोधित करते हुए अशोक कोहली ने उनके द्वारा समाज कल्याण में दिए गए उल्लेखनीय योगदान और जीवन मूल्यों का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने रेखांकित किया कि किस प्रकार स्वर्गीय विज ने अपने सार्वजनिक जीवन में सदैव जरूरतमंदों की सेवा को सर्वोपरि रखा और गांव के विकास के लिए निष्ठापूर्वक कार्य किया।

नरेंद्र विज ने अपने वक्तव्य में स्पष्ट किया कि परिवार कई वर्षों से अपने पूज्य पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए निरंतर जनकल्याणकारी उपक्रमों में संलग्न है। परिवार द्वारा समय समय पर स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन, चिकित्सा सहायता वितरण और निर्धन स्कूली विद्यार्थियों को पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराने जैसे पुनीत कार्य किए जाते रहे हैं। इतना ही नहीं, कोरोना वैश्विक संकट के कठिन दौर में भी बेसहारा और प्रभावित परिवारों तक आवश्यक राशन व राहत पहुंचाने का काम निरंतर किया गया। नरेंद्र विज का कहना था कि वे पिता के इस स्मृति दिवस को केवल औपचारिक रस्म अदायगी तक सीमित नहीं रखना चाहते थे, बल्कि इसे युवा पीढ़ी और समाज के आध्यात्मिक जागरण से जोड़ना चाहते थे।

## युवा पीढ़ी को सनातन विरासत से जोड़ने की सार्थक पहल
सिनेमाघर में चलचित्र देखने आए विभिन्न प्रभु भक्तों ने इस नवाचार की मुक्तकंठ से सराहना की। उपस्थित श्रद्धालुओं का कहना था कि आधुनिक भागदौड़ और तकनीकी चकाचौंध के इस युग में बालकों व युवाओं को अपनी सनातन संस्कृति तथा पारंपरिक संस्कारों से जोड़े रखना परम आवश्यक हो चुका है। बुजुर्गों के संस्मरण पर ऐसी धर्मनिष्ठ व प्रेरक फिल्मों का दर्शन नई पीढ़ी को अपनी गौरवशाली जड़ों और नैतिक मर्यादाओं से परिचित कराने का अत्यंत प्रभावी माध्यम सिद्ध होता है।

इस स्मृति समारोह में जनक राज खुल्लर, सोनी महाजन, अंकुश सोही और राजकुमार सहित क्षेत्र के अनेक गणमान्य नागरिकों व भक्तों ने पूरे उत्साह के साथ प्रतिभाग किया। सामूहिक कीर्तन, लंगर सेवा और 'हनुमान अंश' के इस सामूहिक प्रदर्शन ने पूरे आयोजन को सामाजिक समरसता और श्रद्धा का एक अनुपम उदाहरण बना दिया।

## इसका आप पर असर
यह समाचार दर्शाता है कि पारिवारिक स्मरणोत्सवों को किस प्रकार सामाजिक सेवा और सांस्कृतिक जागरूकता के प्रेरक माध्यम में बदला जा सकता है।

- **भारत में:** यह पहल देश भर के लोगों को पारंपरिक श्राद्ध व बरसी के अवसरों पर केवल औपचारिक अनुष्ठान करने के बजाय रचनात्मक सामाजिक कार्य करने की प्रेरणा देती है। लोग अपने पूर्वजों की याद में समाजोपयोगी आयोजन, स्वास्थ्य शिविर अथवा सांस्कृतिक जागरूकता अभियान चलाने पर विचार कर सकते हैं।
- **गुरदासपुर में:** स्थानीय निवासियों और युवाओं के लिए यह सामूहिक जुड़ाव और आध्यात्मिक चर्चा का एक सशक्त अवसर बना। इससे क्षेत्र में सामुदायिक लंगर, बुजुर्गों के सम्मान और भावी पीढ़ी को नैतिक मूल्यों से रूबरू कराने की स्वस्थ परंपरा को बल मिला है।
- **परिवारों के लिए:** यह आयोजन अभिभावकों को बच्चों के साथ सार्थक और प्रेरक समय बिताने का नया दृष्टिकोण प्रदान करता है। परिवार पारंपरिक अवसरों को नई पीढ़ी के साथ संवाद स्थापित करने के माध्यम के रूप में उपयोग कर सकते हैं।
- **सिनेमा संस्कृति पर प्रभाव:** सिनेमाघरों का उपयोग केवल व्यावसायिक मनोरंजन तक सीमित न रहकर आध्यात्मिक और सामाजिक आयोजनों के लिए भी संभव दिखाई देता है। इससे सिनेमा प्रबंधकों और दर्शकों के बीच एक सकारात्मक सामाजिक संवाद विकसित होता है।

## ऐसा क्यों हुआ
यह विशेष आयोजन पूर्व ग्राम सरपंच की 10वीं बरसी को सामाजिक व सांस्कृतिक उद्देश्य से जोड़ने के पारिवारिक संकल्प के फलस्वरूप संपन्न हुआ। आयोजक अपने पिता के परोपकारी स्वभाव को एक जीवंत श्रद्धांजलि देना चाहते थे।

- **प्रेरक उद्देश्य:** आयोजक नरेंद्र विज अपने पिता स्वर्गीय सुरिंदर विज के जनसेवा के मूल्यों को जीवित रखने के लिए केवल पारिवारिक रस्मों तक सीमित नहीं रहना चाहते थे। उन्होंने समाज के लोगों और प्रभु भक्तों को एक साझा मंच पर एकत्रित करने का निर्णय लिया।
- **सांस्कृतिक जुड़ाव की आवश्यकता:** नई पीढ़ी को अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने की चिंता ने इस नवाचार को जन्म दिया। आयोजकों का मानना था कि भक्ति फिल्म का सामूहिक प्रदर्शन युवाओं में नैतिक व सांस्कृतिक चेतना जगाने का सशक्त माध्यम बनेगा।
- **निरंतर समाजसेवा की पृष्ठभूमि:** परिवार पिछले एक दशक से लगातार चिकित्सा शिविर, छात्र सहायता और राहत वितरण जैसे सामाजिक कार्य करता आ रहा है। इसी सेवा परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस बार सिनेमाघर में भक्तिमय सत्संग, लंगर और फिल्म प्रदर्शन का संयुक्त रूप दिया गया।

## सवाल-जवाब

### 1. गुरदासपुर के कलानौर में सिनेमाघर क्यों बुक किया गया था?
दिवंगत पूर्व सरपंच सुरिंदर विज की 10वीं बरसी पर उनके बेटे नरेंद्र विज ने 200 से अधिक श्रद्धालुओं को 'हनुमान अंश' फिल्म दिखाने के लिए पूरा थियेटर आरक्षित किया था।

### 2. फिल्म स्क्रीनिंग के दौरान सिनेमाघर में क्या विशेष गतिविधियां हुईं?
थियेटर में चलचित्र चलने के साथ-साथ भजन मंडलियों ने भक्ति संगीत पेश किया, सीता-राम का सामूहिक संकीर्तन हुआ और श्रद्धालुओं को सिरोपा देकर सम्मानित किया गया।

### 3. स्वर्गीय सुरिंदर विज की याद में परिवार अन्य कौन से सेवा कार्य करता है?
परिवार उनके स्मरण में निशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित करता है, निर्धन विद्यार्थियों को अध्ययन सामग्री बांटता है और कोरोना काल जैसी विपदाओं में राहत कार्य चला चुका है।

### 4. इस धार्मिक आयोजन में कौन से संत और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे?
आयोजन में छोटे देवा कलानौर, बाबा रमा, अशोक कोहली, जनक राज खुल्लर, सोनी महाजन, अंकुश सोही और राजकुमार सहित अनेक भक्त सम्मिलित हुए।

## प्रेरणा और सबक
यह घटनाक्रम यह प्रेरणा देता है कि पूर्वजों की स्मृति को केवल व्यक्तिगत दुख में न बदलकर समाज कल्याण और लोक जागरण का साधन बनाया जा सकता है।

- **रचनात्मक श्रद्धांजलि:** पारंपरिक रीति रिवाजों में नए विचार जोड़कर उन्हें अधिक सामाजिक और प्रेरणादायक बनाया जा सकता है।
- **सार्थक जनकल्याण:** पूर्वजों के सम्मान का सबसे श्रेष्ठ उपाय उनके द्वारा शुरू की गई परोपकार और सेवा की भावना को निरंतर आगे बढ़ाना है।
- **सामूहिक सद्भाव:** साझा सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से पूरे समुदाय और विभिन्न पीढ़ियों को आपसी सद्भाव के सूत्र में पिरोया जा सकता है।
- **संस्कारों का प्रसार:** आधुनिक मनोरंजन के संसाधनों का सदुपयोग कर भावी पीढ़ी में नैतिक मूल्यों और सांस्कृतिक पहचान को सुदृढ़ किया जा सकता है।

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