हनुमान अंश के डायरेक्टर विशाल चतुर्वेदी ने बॉलीवुड पर साधा निशाना, बोले- सफलता के बाद आ रहे हैं फोन फिल्म हनुमान अंश के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने बॉलीवुड के दोहरे रवैये पर खुलकर बात की है। उनका कहना है कि सफलता मिलने के बाद कई बड़ी हस्तियों के बधाई संदेश आ रहे हैं, लेकिन बुरे वक्त में किसी ने मदद नहीं की थी। नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी महिमा पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ इन दिनों सिनेमाघरों में तहलका मचा रही है। रिलीज के चौथे हफ्ते में भी इस फिल्म का बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन जारी है और दर्शक बड़ी संख्या में इसे देखने पहुंच रहे हैं। आम लोगों से लेकर कई फिल्मी हस्तियों तक हर तरफ से इस प्रोजेक्ट की तारीफ हो रही है। इस बंपर सफलता के बीच फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने फिल्म इंडस्ट्री के दोहरे चरित्र और मुश्किल दौर में मिले असहयोग को लेकर तीखे खुलासे किए हैं। विशाल का साफ कहना है कि जिन लोगों ने जरूरत के वक्त मुंह मोड़ लिया था, वे अब सफलता मिलने पर बधाई देने के लिए आगे आ रहे हैं और वह ऐसे लोगों का नाम तक लेना पसंद नहीं करते। थिएटर मालिकों और स्क्रीन आवंटन का कड़ा संघर्ष एक हालिया इंटरव्यू के दौरान निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने विस्तार से बताया कि कैसे उनकी फिल्म को शुरुआती दिनों में सिनेमाघरों में टिके रहने के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा था। उन्होंने खुलकर साझा किया कि बड़ी और महंगी फिल्मों के आने के कारण थिएटर मालिकों ने उनकी फिल्म के शोज अचानक बहुत कम कर दिए थे। स्थिति यह हो गई थी कि कुल शोज की संख्या 250 से भारी कटौती के बाद सीधे 25 पर सिमट कर रह गई थी। पीवीआर और सिनेपोलिस जैसे प्रतिष्ठित और प्राइम लोकेशंस वाले मल्टीप्लेक्स भी इस फिल्म को स्क्रीन देने से कतराते नजर आए थे। विशाल का मानना है कि इस फिल्म को किसी बड़े स्टार के स्टारडम ने नहीं, बल्कि सिनेमाघरों में आ रही आम जनता के भारी समर्थन और मजबूत वर्ड ऑफ माउथ ने आगे बढ़ाया है। सफलता के बाद बदल गया इंडस्ट्री का रुख जब निर्देशक से यह पूछा गया कि क्या रिलीज से पहले उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के भीतर से किसी प्रकार का समर्थन प्राप्त हुआ था, तो उन्होंने इंडस्ट्री के बदलते रवैये की पोल खोल दी। उन्होंने बताया कि जैसे ही फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई करनी शुरू की, इंडस्ट्री के तमाम जाने-माने लोगों के फोन कॉल्स आने लगे। हालांकि उन्होंने साफ किया कि वह किसी का नाम नहीं लेंगे, लेकिन फिल्ममेकर मधुर भंडारकर ने उन्हें खुद फोन कर बधाई दी थी, जबकि उन्होंने मधुर से कभी किसी तरह की मदद नहीं मांगी थी। बाकी लोगों के बारे में उनका कहना था कि जब वह संकट के समय मदद की गुहार लगाने गए थे, तब किसी ने उनका साथ नहीं दिया था। अब जब फिल्म हिट हो चुकी है, तो महज औपचारिकता निभाने वाले इन लोगों का जिक्र करने का कोई मतलब नहीं है। सिनेमा जगत में फैले भ्रम और दो तरह के लोग अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए विशाल ने फिल्म इंडस्ट्री के भीतर मौजूद कार्य संस्कृति और लोगों की मानसिकता पर भी करारा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री के अधिकांश लोगों को खुद इस बात का कोई अंदाजा नहीं होता कि आखिर बॉक्स ऑफिस पर कौन-सी शैली या कहानी सफल होगी, इसके बावजूद वे दूसरों को ज्ञान बांटने में सबसे आगे रहते हैं। उनके अनुसार यह पूरी इंडस्ट्री भ्रमित लोगों से भरी पड़ी है। उन्होंने यहाँ दो तरह के लोगों का जिक्र किया, जिसमें एक वे हैं जो वाकई पूरी लगन और ईमानदारी के साथ सिनेमा बनाना चाहते हैं, और दूसरे वे हैं जिनका फिल्मों से कोई गहरा लगाव नहीं होता बल्कि वे केवल टाइमपास करने के लिए इस क्षेत्र में हाथ आजमाने आ जाते हैं। छोटे बजट से शुरू होकर ब्लॉकबस्टर बनने का सफर नीम करोली बाबा पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ आज हर सिनेप्रेमी की जुबान पर है और इसका बॉक्स ऑफिस का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। इस फिल्म को बनाने में लगभग 2 करोड़ रुपये की सीमित लागत आई थी और ओपनिंग डे पर इसने महज 10 लाख रुपये का बेहद मामूली कारोबार किया था। पहले दो हफ्तों तक बॉक्स ऑफिस पर सुस्त रहने के बाद, इसे दर्शकों से जो पॉजिटिव वर्ड ऑफ माउथ मिला, उसने इतिहास रच दिया और यह साल 2026 की एक बड़ी ब्लॉकबस्टर मूवी बन गई। रिलीज के 28 दिनों के भीतर ही ‘हनुमान अंश’ ने भारतीय बॉक्स ऑफिस पर कुल 72.88 करोड़ रुपये का शानदार बिजनेस कर लिया है। नीम करोली बाबा के आध्यात्मिक जीवन की झलक उत्तर प्रदेश के अकबरपुर गांव में लगभग 1900 के आसपास जन्मे नीम करोली बाबा एक महान आध्यात्मिक संत होने के साथ-साथ भगवान हनुमान के परम भक्त भी थे। उन्होंने 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में अपनी देह त्याग दी थी, लेकिन उनके विचार और आशीर्वाद आज भी देश-दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं का मार्गदर्शन कर रहे हैं। सिल्वर स्क्रीन पर आई फिल्म ‘हनुमान अंश’ इसी महान आस्था और भक्ति भाव को पूरी भव्यता और दिव्यता के साथ दर्शकों के सामने पेश करती है, जिसे लोग बेहद पसंद कर रहे हैं। इसका आप पर असर इस खबर का फिल्म निर्माताओं, छोटे बजट की फिल्मों और सिनेमा प्रेमियों के दैनिक जीवन व मनोरंजन उद्योग पर सीधा असर पड़ता है। • भारतीय फिल्म उद्योग में: छोटे बैनर और सीमित बजट वाले निर्देशकों को बड़े मल्टीप्लेक्स में स्क्रीन पाने के लिए कड़ा संघर्ष करना पड़ता है। इससे यह स्पष्ट होता है कि बिना बड़े स्टार्स के भी मजबूत वर्ड ऑफ माउथ किसी फिल्म को सफलता दिला सकता है। • दर्शकों के लिए: दर्शकों को यह संदेश मिलता है कि वे अच्छी सामग्री वाली फिल्मों का समर्थन करके उन्हें बड़े बजट की फिल्मों के बीच भी हिट बना सकते हैं। सवाल-जवाब 1. फिल्म हनुमान अंश के निर्देशक कौन हैं? इस फिल्म के निर्देशक विशाल चतुर्वेदी हैं। 2. हनुमान अंश फिल्म का बजट कितना था? यह फिल्म लगभग 2 करोड़ रुपये के सीमित बजट में बनाई गई थी। 3. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अब तक कितनी कमाई की है? फिल्म ने रिलीज के 28 दिनों में भारतीय बॉक्स ऑफिस पर 72.88 करोड़ रुपये का बिजनेस कर लिया है। 4. फिल्म की कहानी किस पर आधारित है? यह फिल्म महान आध्यात्मिक संत नीम करोली बाबा के जीवन और उनकी महिमा पर आधारित है। प्रेरणा और सबक विशाल चतुर्वेदी और फिल्म हनुमान अंश की सफलता संघर्षरत कलाकारों और रचनाकारों के लिए कई अहम सबक देती है। • दृढ़ संकल्प रखें: शुरुआती झटकों और कम स्क्रीन मिलने के बावजूद अपने प्रोजेक्ट पर भरोसा बनाए रखना सफलता की कुंजी है। • गुणवत्ता पर ध्यान दें: सीमित बजट में भी यदि सामग्री मजबूत और प्रामाणिक हो, तो दर्शक उसे स्वीकार करते हैं। • जनता के समर्थन पर भरोसा: इंडस्ट्री के समर्थन के अभाव के बावजूद आम दर्शकों की ताकत पर विश्वास रखकर आगे बढ़ना चाहिए। https://trendkia.com/bollywood/hanuman-ansh-director-vishal-chaturvedi-slams-bollywood-hypocrisy-27434 TrendKia — Har trend, sabse pehle.