# हीरो बनने आए सुभाष घई फ्लॉप हो गए, फिर डायरेक्शन में ऐसे चमके कि बन गए बॉलीवुड के 'शोमैन'

> सुभाष घई हिंदी फिल्मों में हीरो बनने आए थे, लेकिन शुरुआती फिल्मों में छोटे रोल के बाद यह सपना अधूरा रह गया. इसके बाद उन्होंने डायरेक्शन की राह पकड़ी और कर्ज, राम लखन, खलनायक, ताल जैसी कई सुपरहिट फिल्में बनाईं.

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-09-06 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/hiro-banane-ae-subhash-ghai-phlopa-ho-gae-phira-dayarekshana-men-aise-chamake-ki-bana-gae-bollywood-ke-shomaina-28515 · **Language:** Hindi
**Tags:** सुभाष घई, राजेश खन्ना, आराधना, बॉलीवुड डायरेक्टर, खलनायक, राम लखन, ताल

सुभाष घई को आज हिंदी सिनेमा का दिग्गज डायरेक्टर माना जाता है, जिन्होंने दिलीप कुमार, राजेश खन्ना और जैकी श्रॉफ जैसे सितारों के साथ एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर बनाईं. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वह फिल्मी दुनिया में डायरेक्टर नहीं, बल्कि हीरो बनने के इरादे से आए थे और शुरुआत में उन्हें इसी मोर्चे पर मुंह की खानी पड़ी.

## हीरो बनने आए, मिले सिर्फ छोटे रोल
हाल ही में एक इंटरव्यू में सुभाष घई ने खुद बताया कि वह हिंदी सिनेमा में एक्टर बनने के मकसद से दाखिल हुए थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था. आराधना, दो बच्चे दस हाथ और धमाकेदार जैसी शुरुआती फिल्मों में उन्हें छोटे मोटे किरदार ही मिल पाए और बतौर हीरो उनकी पारी आगे नहीं बढ़ पाई. फिल्म दर फिल्म उनकी भूमिकाएं छोटी ही रहीं, जिससे साफ हो गया कि इंडस्ट्री उन्हें बतौर एक्टर स्वीकार करने को तैयार नहीं है.

## राजेश खन्ना आगे निकल गए, सुभाष घई पीछे रह गए
इंटरव्यू में उनसे पूछा गया कि वह इंडस्ट्री में हीरो बनने आए थे और राजेश खन्ना के साथ भी काम कर चुके थे, तो फिर राजेश खन्ना सुपरस्टार कैसे बन गए जबकि वह खुद इस मुकाम से चूक गए. इसके जवाब में सुभाष घई ने कहा, "यही तो संघर्ष होता है. जब आपके को-स्टार और साथी कलाकार आगे बढ़ जाते हैं." इस एक वाक्य में उन्होंने इंडस्ट्री के उस संघर्ष को समेट दिया, जिसमें साथ शुरुआत करने वाले कलाकारों में से कोई आगे निकल जाता है तो कोई पीछे छूट जाता है.

## आराधना ने राजेश खन्ना को बनाया पहला सुपरस्टार
साल 1969 में आई फिल्म आराधना राजेश खन्ना के करियर का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुई. इस एक फिल्म ने उन्हें आगे चलकर लगातार 15 सुपरहिट फिल्में दीं और उन्हें हिंदी सिनेमा का पहला सुपरस्टार बना दिया. दिलचस्प बात यह है कि इसी आराधना में सुभाष घई का भी एक कैमियो था, यानी जिस फिल्म ने राजेश खन्ना को स्टार बनाया, उसी फिल्म में सुभाष घई महज एक छोटी सी भूमिका तक सिमटे रह गए.

## हीरो नहीं बन पाए तो डायरेक्टर बनकर मचाई धूम
बतौर हीरो भले ही सुभाष घई राजेश खन्ना जैसा मुकाम हासिल न कर पाए हों, लेकिन डायरेक्शन में उतरते ही उन्होंने बड़े बड़ों को पीछे छोड़ दिया. उन्होंने कालीचरण, विश्वनाथ, कर्ज, विधाता, नायक, कर्मा, राम लखन, सौदागर, खलनायक, परदेस और ताल जैसी सुपरहिट फिल्मों का निर्देशन किया. एक के बाद एक आई इन फिल्मों ने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री के सबसे भरोसेमंद फिल्ममेकरों में शुमार कर दिया. यही वजह है कि आज सुभाष घई का नाम हिंदी सिनेमा के सबसे कामयाब फिल्ममेकरों में गिना जाता है, भले ही उनका फिल्मी सफर एक नाकाम हीरो के तौर पर शुरू हुआ था.

## सवाल-जवाब

### 1. सुभाष घई फिल्मी करियर की शुरुआत में क्या बनना चाहते थे?
वह हिंदी सिनेमा में हीरो बनने के लिए आए थे, डायरेक्टर बनने का इरादा नहीं था.

### 2. सुभाष घई ने बतौर हीरो किन फिल्मों में काम किया?
उन्होंने आराधना, दो बच्चे दस हाथ और धमाकेदार जैसी फिल्मों में छोटे रोल किए.

### 3. सुभाष घई हीरो के तौर पर सफल क्यों नहीं हो पाए?
उन्होंने खुद बताया कि जब को-स्टार और साथी कलाकार आगे बढ़ जाते हैं, तभी असली संघर्ष शुरू होता है और वह इसी वजह से पीछे रह गए.

### 4. आराधना फिल्म राजेश खन्ना के लिए क्यों खास थी?
1969 में आई इस फिल्म ने राजेश खन्ना को लगातार 15 सुपरहिट फिल्में दीं और उन्हें हिंदी सिनेमा का पहला सुपरस्टार बना दिया.

### 5. क्या सुभाष घई का भी आराधना से कोई नाता था?
हां, इसी फिल्म में सुभाष घई का एक कैमियो भी था.

### 6. सुभाष घई ने बतौर डायरेक्टर कौन सी सुपरहिट फिल्में बनाईं?
उन्होंने कालीचरण, विश्वनाथ, कर्ज, विधाता, नायक, कर्मा, राम लखन, सौदागर, खलनायक, परदेस और ताल जैसी फिल्में निर्देशित कीं.

## प्रेरणा और सबक
सुभाष घई की कहानी बताती है कि पहला सपना अधूरा रहने का मतलब करियर का खत्म होना नहीं होता.

- **राह बदलने से न डरें:** हीरो बनने का सपना पूरा न होने पर सुभाष घई ने हार मानने की बजाय डायरेक्शन की तरफ रुख किया.
- **असफलता को खुलकर स्वीकारना:** उन्होंने बेझिझक माना कि को-स्टार के आगे निकलने पर संघर्ष का सामना करना पड़ता है, यही स्वीकृति आगे बढ़ने की शुरुआत बनी.
- **नई ताकत पहचानना:** हीरो के तौर पर मौके न मिलने पर उन्होंने अपनी कहानी कहने और निर्देशन की काबिलियत पर भरोसा किया.
- **निरंतरता का नतीजा:** कालीचरण से लेकर ताल तक लगातार सुपरहिट फिल्में देकर उन्होंने साबित किया कि सही क्षेत्र चुनने पर देर से मिली शुरुआत भी बड़ी कामयाबी में बदल सकती है.

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