# हॉरर और सस्पेंस की शौकीन हैं तो बॉलीवुड की ये 7 फिल्में उड़ा देंगी होश

> बॉलीवुड सिनेमा में लोककथाओं, रहस्यमयी आत्माओं और डरावने अपार्टमेंट्स पर बनी सात बेहतरीन हॉरर फिल्में दर्शकों के रोंगटे खड़े कर देती हैं।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-11-01 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/horara-aura-saspensa-ki-shaukina-hain-to-bollywood-ki-ye-7-philmen-ura-dengi-hosha-54142 · **Language:** Hindi
**Tags:** बॉलीवुड हॉरर फिल्में, तुम्बाड 2, स्त्री, भूल भुलैया, परी, 13बी, बुलबुल

हिंदी सिनेमा में दर्शकों को डराने और रहस्य के रोमांच में डुबोने वाली कहानियों का एक समृद्ध इतिहास रहा है। पुरानी वीरान हवेलियों के सन्नाटे से लेकर आधुनिक बहुमंजिला इमारतों के फ्लैटों तक, निर्देशकों ने खौफ को अलग-अलग अंदाज में पर्दे पर उतारा है। कई फिल्मों ने प्राचीन लोककथाओं और शापित देवताओं की डरावनी दास्तानों को छुआ, तो कुछ कहानियों में रूह कंपा देने वाले डर के साथ गुदगुदाने वाली कॉमेडी का अनोखा तड़का भी लगाया गया। अगर आप भी रहस्य, रोमांच और खौफनाक माहौल वाली फिल्में देखने के शौकीन हैं, तो बॉलीवुड की सात ऐसी चुनिंदा फिल्मों की सूची आपके लिए बेहद मददगार साबित हो सकती है, जिन्होंने दर्शकों के दिलो-दिमाग पर गहरा असर छोड़ा है।

## तुम्बाड: लालच और शापित देवता की भयानक दास्तान
साल 2018 में रिलीज हुई फिल्म 'तुम्बाड' भारतीय सिनेमा की सबसे अनोखी और रोंगटे खड़े कर देने वाली फिल्मों में गिनी जाती है। राही अनिल बर्वे के निर्देशन में तैयार इस फिल्म को दर्शकों और समीक्षकों की तरफ से भरपूर सराहना मिली थी। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसे सिनेमाघरों में दोबारा रिलीज भी किया गया था। इस फिल्म की कहानी भारतीय पौराणिक मान्यताओं और महाराष्ट्र की लोककथाओं के ताने-बाने पर बुनी गई है, जो सीधे तौर पर हस्तर नाम के एक रहस्यमयी और शापित देवता के इर्द-गिर्द घूमती है।

कहानी का मुख्य किरदार विनायक राव नाम का एक व्यक्ति है, जो हस्तर से जुड़े खजाने और सोने के सिक्कों को हासिल करने के लालच में पूरी तरह अंधा हो जाता है। बारिश के कभी न थमने वाले माहौल, पुरानी हवेली के तहखाने और भयानक दृश्यों ने दर्शकों के होश उड़ा दिए थे। इस फिल्म का प्रभाव इतना गहरा रहा है कि अब दर्शक इसके दूसरे पार्ट का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, जिसका ऐलान पहले ही हो चुका है।

## स्त्री: चंदेरी की गलियों में पुरुषों का शिकार करने वाली रूह
साल 2018 में ही बॉक्स ऑफिस पर दस्तक देने वाली फिल्म 'स्त्री' ने हॉरर और कॉमेडी के जॉनर को एक नई पहचान दी। अमर कौशिक के निर्देशन में बनी इस फिल्म में राजकुमार राव और श्रद्धा कपूर ने मुख्य भूमिकाएं निभाई थीं। इस फिल्म की खासियत यह थी कि यह एक पल में दर्शकों को डराती थी और ठीक अगले ही पल ठहाके लगाने पर मजबूर कर देती थी।

इसकी पटकथा चंदेरी नाम के एक ऐतिहासिक कस्बे पर आधारित है। कस्बे में एक रहस्यमयी महिला की भटकती आत्मा का खौफ फैला हुआ है। यह साया वार्षिक धार्मिक त्योहार के दौरान रात के अंधेरे में केवल पुरुषों को अपना शिकार बनाता है और उनके कपड़े पीछे छोड़ जाता है। डर, अंधविश्वास और जबरदस्त सामाजिक व्यंग्य के साथ बुनी गई इस फिल्म के कई दृश्य हंसाने के साथ-साथ रीढ़ में सिहरन पैदा कर देते हैं।

## भूल भुलैया: राजमहल में गूंजती मंजुलिका की खौफनाक आवाज
साल 2007 में प्रियदर्शन के निर्देशन में आई फिल्म 'भूल भुलैया' आज भी भारतीय सिनेमा की सबसे पसंदीदा हॉरर-कॉमेडी फिल्मों में शुमार है। फिल्म में अक्षय कुमार, विद्या बालन और शाइनी आहूजा ने मुख्य किरदार निभाए थे। यह कहानी एक पुरानी और भव्य पुश्तैनी हवेली के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके एक बंद कमरे में मंजुलिका नाम की नर्तकी की आत्मा का साया कैद माना जाता है।

जैसे ही परिवार हवेली में दाखिल होता है, वहां अजीबोगरीब और डरावनी घटनाएं शुरू हो जाती हैं। इन रहस्यों की परतें खोलने और सच्चाई का पता लगाने के लिए एक मनोचिकित्सक को बुलाया जाता है। डर, गहरा सस्पेंस, बेहतरीन कॉमेडी और कलाकारों के शानदार अभिनय के संतुलन ने इस फिल्म को दर्शकों का सदाबहार पसंदीदा सिनेमा बना दिया है।

## परी: दयालुता के पीछे छिपा रूह कंपा देने वाला सच
साल 2018 में बड़े पर्दे पर आई अनुष्का शर्मा स्टारर फिल्म 'परी' हॉरर के शौकीनों के लिए एक अलग ही स्तर का अनुभव देती है। प्रोसित रॉय के निर्देशन में बनी यह फिल्म पारंपरिक भूत-प्रेत की कहानियों से काफी हटकर थी। इसकी कहानी अर्नब नाम के एक सीधे-सादे शख्स से शुरू होती है, जिसकी जिंदगी एक सड़क दुर्घटना के बाद अचानक बदल जाती है।

हादसे के बाद अर्नब की मुलाकात रुखसाना नाम की एक बेसहारा और रहस्यमयी महिला से होती है। अर्नब इंसानियत के नाते उसकी मदद करने और उसे पनाह देने की कोशिश करता है, लेकिन धीरे-धीरे रुखसाना की असली पहचान से जुड़ा एक बेहद खौफनाक सच सामने आने लगता है। फिल्म का डार्क माहौल, खामोशी और अप्रत्याशित डरावने दृश्य दर्शकों को अंदर तक बेचैन कर देते हैं।

## 13बी: टेलीविजन स्क्रीन और हकीकत का खूनी खेल
साल 2009 में रिलीज हुई '13बी: फियर हैज अ न्यू एड्रेस' साइकोलॉजिकल हॉरर और सस्पेंस का एक बेहतरीन नमूना है। इस फिल्म में अभिनेता आर. माधवन ने केंद्रीय भूमिका निभाई थी। कहानी एक ऐसे संयुक्त परिवार की है, जो शहर के एक नए और आधुनिक अपार्टमेंट में शिफ्ट होता है।

शुरुआत में परिवार का जीवन बेहद सामान्य और खुशहाल दिखता है, लेकिन कुछ ही दिनों में घर के अंदर रहस्यमयी घटनाएं घटने लगती हैं। परिवार के सदस्य यह देखकर हैरान रह जाते हैं कि दोपहर में टीवी पर आने वाले एक काल्पनिक डेली सोप सीरियल में वही घटनाएं दिखाई जा रही हैं, जो कुछ देर बाद उनके अपने घर में सच हो जाती हैं। धीरे-धीरे कहानी एक ऐसे बिंदु पर पहुंचती है, जहां असलियत और परदे के बीच का फर्क पूरी तरह मिट जाता है।

## भूत: नए आशियाने में पत्नी के बदलते मिजाज का खौफ
साल 2003 में निर्देशक राम गोपाल वर्मा की फिल्म 'भूत' ने हिंदी सिनेमा में हॉरर शैली को एक नया रूप दिया था। अजय देवगन और उर्मिला मातोंडकर की मुख्य भूमिकाओं वाली इस फिल्म को दर्शकों और आलोचकों से जबरदस्त सराहना मिली थी। यह कहानी एक शादीशुदा जोड़े के इर्द-गिर्द घूमती है, जो शहर के एक नए फ्लैट में रहने आता है।

कुछ समय बीतने के बाद फ्लैट में असामान्य घटनाएं घटने लगती हैं और पत्नी का बर्ताव अचानक अजीब और डरावना होने लगता है। उसके भीतर किसी अनजानी शक्ति का असर साफ दिखने लगता है। बिना किसी भारी-भरकम लाउड मेकअप के, केवल बैकग्राउंड स्कोर और उर्मिला मातोंडकर के बेहतरीन अभिनय के दम पर इस फिल्म ने दर्शकों को सिनेमाघरों में डरा दिया था।

## बुलबुल: 19वीं सदी के बंगाल में फैली अलौकिक शक्ति की दास्तान
साल 2020 में आई फिल्म 'बुलबुल' में अभिनेत्री तृप्ति डिमरी मुख्य भूमिका में नजर आई थीं। अन्विता दत्त के निर्देशन में बनी यह फिल्म पारंपरिक हॉरर फिल्मों से काफी जुदा है। कहानी 19वीं सदी के बंगाल के एक जमींदार घराने की पृष्ठभूमि पर आधारित है।

फिल्म की पूरी कहानी एक युवा महिला के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसका रहस्यमयी अतीत गांव में फैली एक खौफनाक और अलौकिक शक्ति की चर्चाओं से सीधे तौर पर जुड़ जाता है। गांव में अचानक रहस्यमयी मौतें होने लगती हैं, जिसे लोग चुड़ैल का साया मानने लगते हैं। लोककथाओं, रहस्य, सामाजिक कुरीतियों और डर का यह अनूठा मेल दर्शकों को बांधे रखता है। फिल्म की लाल रोशनी वाली सिनेमैटोग्राफी और रहस्यमयी पटकथा इसे देखने लायक एक लाजवाब सिनेमाई अनुभव बनाती है।

## इसका आप पर असर
हॉरर और सस्पेंस शैली की फिल्मों के दर्शकों के लिए यह सूची बेहतरीन सिनेमाई विकल्प उपलब्ध कराती है।

- **सिनेमा प्रेमियों के लिए:** यह संकलन दर्शकों को भारतीय लोककथाओं और मनोवैज्ञानिक सस्पेंस की सर्वश्रेष्ठ कहानियों से रूबरू कराता है। इससे दर्शकों को बेहतरीन वीकेंड वॉचलिस्ट तैयार करने में मदद मिलती है।
- **मनोरंजन के विकल्पों पर:** कॉमेडी और हॉरर के मिश्रण से लेकर गंभीर डार्क सिनेमा तक के विभिन्न विकल्प एक ही जगह मिल जाते हैं। दर्शक अपने मिजाज के हिसाब से सही फिल्म का चयन कर सकते हैं।
- **फ्रैंचाइज़ी के शौकीनों के लिए:** तुम्बाड और स्त्री जैसी फिल्मों की अगली कड़ियों को समझने के लिए मूल फिल्मों का संदर्भ जरूरी है। नए दर्शक समय रहते पुरानी कहानियों से जुड़ सकते हैं।
- **कहानी और निर्देशन के स्तर पर:** दर्शक यह जान सकते हैं कि भारतीय निर्देशकों ने बिना पश्चिमी नकल के कैसे स्थानीय परिवेश में खौफ पैदा किया। यह स्थानीय सिनेमाई कला और लोककथाओं को समझने का अवसर देता है।

## ऐसा क्यों हुआ
बॉलीवुड में हॉरर जॉनर हमेशा से दर्शकों के बीच लोकप्रिय रहा है, लेकिन पिछले कुछ दशकों में इसे पेश करने के तरीके में बड़ा बदलाव आया है। निर्माताओं ने पुरानी हवेलियों के घिसे-पिटे फॉर्मूले से बाहर निकलकर लोककथाओं, सामाजिक मुद्दों और शहरी अपार्टमेंट्स के आधुनिक डर को कहानियों का केंद्र बनाया है।

- **लोककथाओं और मान्यताओं का आकर्षण:** तुम्बाड और बुलबुल जैसी फिल्मों ने साबित किया कि स्थानीय पौराणिक कथाओं में खौफ पैदा करने की असीम क्षमता है। दर्शकों को अपनी ही मिट्टी से जुड़ी अनसुनी और रहस्यमयी कहानियां ज्यादा डरावनी और प्रामाणिक लगती हैं।
- **हॉरर-कॉमेडी के सफल फॉर्मूले का उदय:** भूल भुलैया और स्त्री जैसी फिल्मों ने डर के बीच हास्य का तड़का लगाकर पूरे परिवार को सिनेमाघरों तक खींचा। इस शैली ने उन दर्शकों को भी जोड़ा जो आमतौर पर अत्यधिक डरावनी फिल्मों से बचते हैं।
- **शहरी जीवन और आधुनिक डर:** 13बी और भूत जैसी फिल्मों ने यह दिखाया कि फ्लैट और टीवी जैसे रोजमर्रा के साधन भी खौफ का जरिया बन सकते हैं। इस मनोवैज्ञानिक डर ने सिनेमा प्रेमियों को नए तरीके से रोमांचित किया।

## सवाल-जवाब

### 1. फिल्म 'तुम्बाड' की कहानी किस विषय पर आधारित है?
यह फिल्म विनायक राव नाम के व्यक्ति और हस्तर नामक रहस्यमयी देवता के खजाने को पाने के उसके लालच के इर्द-गिर्द घूमती है।

### 2. फिल्म 'स्त्री' में रहस्यमयी आत्मा किसे अपना शिकार बनाती है?
फिल्म में चंदेरी कस्बे की रहस्यमयी महिला की आत्मा वार्षिक त्योहार के दौरान रात में केवल पुरुषों को अपना शिकार बनाती है।

### 3. फिल्म '13बी' में परिवार को किन असामान्य घटनाओं का सामना करना पड़ता है?
परिवार यह देखता है कि उनके घर में आने वाले एक टीवी सीरियल की घटनाएं असल जिंदगी में सच होने लगती हैं।

### 4. फिल्म 'भूत' का निर्देशन किस फिल्मकार ने किया था?
साल 2003 में आई इस हॉरर फिल्म का निर्देशन राम गोपाल वर्मा ने किया था, जिसमें अजय देवगन और उर्मिला मातोंडकर मुख्य भूमिका में थे।

### 5. फिल्म 'बुलबुल' की कहानी किस पृष्ठभूमि पर आधारित है?
यह फिल्म 19वीं सदी के बंगाल की पृष्ठभूमि पर आधारित है, जहां एक युवा महिला की कहानी गांव में फैली अलौकिक शक्ति से जुड़ती है।

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