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  "type": "article",
  "title": "इमरजेंसी में जब किशोर कुमार की एक दो-टूक बात पर भड़क उठी थी सरकार, गानों पर ठोक दिया था रेडियो बैन",
  "summary": "इमरजेंसी के दौरान मंत्रालय के फरमान को ठुकराने के बाद मशहूर गायक किशोर कुमार के गीतों के प्रसारण पर ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन ने रोक लगा दी थी। उनके बेटे अमित कुमार ने एक टेलीविजन शो में इस टकराव की पूरी कहानी साझा की थी।",
  "content": "भारतीय संगीत जगत में अपनी अनूठी गायकी से अमिट छाप छोड़ने वाले महान फनकार किशोर कुमार ने अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने के लिए भी खास पहचान बनाई। सत्तर के दशक में जब देश भर में आपातकाल की बंदिशें लागू थीं, उस दौर में सत्ता के सामने झुकने से इनकार करने का एक चर्चित वाकया उनके जीवन से जुड़ा है। सरकार के एक तुगलकी फरमान को मानने से इनकार करने पर उस समय के प्रमुख सरकारी प्रसारण माध्यमों ने उनकी आवाज पर पूरी तरह पहरा बैठा दिया था। यह पूरा वाकया दर्शाता है कि किशोर कुमार अपने आत्मसम्मान और उसूलों से कभी समझौता नहीं करते थे।\n\nटेलीविजन मंच पर जब बेटे ने साझा की पुरानी याद\nइस ऐतिहासिक और तनावपूर्ण घटनाक्रम की परतें गायक के बेटे अमित कुमार ने एक हास्य कार्यक्रम 'द कपिल शर्मा शो' के दौरान खोली थीं। अमित कुमार ने बताया कि वर्ष 1975 से 1977 के मध्य जब देश आपातकाल के साए में था, तब उनके पिता हिंदी सिनेमा के सबसे व्यस्त और लोकप्रिय पार्श्व गायक के रूप में शीर्ष मुकाम पर थे। हर बड़ा निर्माता-निर्देशक अपनी फिल्मों में उनकी आवाज शामिल करने के लिए कतार में खड़ा रहता था। ठीक उसी दौर में हुकूमत की ओर से उन पर अपनी मर्जी थोपने का प्रयास किया गया था।\n\nदिल्ली से आए फोन कॉल पर हुआ था तीखा विवाद\nअमित कुमार के अनुसार, राजधानी दिल्ली स्थित एक मंत्रालय के अधिकारी ने सीधे फोन करके उन्हें तत्काल दिल्ली तलब किया था। अधिकारी का कहना था कि सरकार उनके लिए हवाई टिकट का बंदोबस्त कर रही है और उन्हें अगली सुबह की उड़ान पकड़कर दिल्ली पहुंचना होगा। इसके पीछे की मंशा यह थी कि अगले ही दिन उनके एक संगीत कार्यक्रम का आयोजन तय कर दिया गया था। गायक को पूर्व सूचना दिए बिना सीधे आदेश सुना दिया गया था, जो उनके मिजाज के बिल्कुल विपरीत था।\n\nकिशोर कुमार ने बिना सोचे-समझे सरकारी फरमान पर हामी भरने के बजाय साफ कह दिया कि अगर सरकार को कोई बातचीत करनी है, तो अधिकारी अपना कोई प्रतिनिधि उनके पास भेजे। इसके बाद ही वह इस यात्रा पर विचार करेंगे। बातचीत के दौरान उन्होंने बेहद दो-टूक अंदाज में कहा कि स्वयं ईश्वर भी आकर कहेंगे तब भी वह इस तरह नहीं आ सकते। गायक का यह बेबाक और निडर जवाब सुनते ही फोन पर मौजूद प्रशासनिक अधिकारी बुरी तरह तिलमिला गया।\n\nदो घंटे के भीतर सरकारी माध्यमों पर लग गई थी पाबंदी\nसत्ता के नुमाइंदे से हुई इस तीखी बहस का नतीजा बहुत जल्द सामने आ गया। अमित कुमार ने बताया कि इस फोन कॉल के महज दो घंटे के अंदर ही सरकार की ओर से आदेश जारी हो गया और गायक के गानों के प्रसारण पर तत्काल रोक लगा दी गई। इसके चलते आकाशवाणी यानी ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर उनके तमाम लोकप्रिय गीतों को बजाना पूरी तरह बंद कर दिया गया।\n\nसरकारी तंत्र की इस कड़ी पाबंदी के बावजूद आम जनता के बीच गायक का जादू रत्ती भर भी कम नहीं हुआ। श्रोताओं के दिलों पर उनका राज पहले की तरह बना रहा और सिनेमाघरों में उनकी आवाज गूंजती रही। बाद में जब आपातकाल समाप्त हुआ, तब जाकर रेडियो और टेलीविजन पर उनके गानों से यह प्रतिबंध हटाया गया और वे पुनः प्रसारित होने लगे। इस कड़े इम्तिहान ने उनकी एक निडर और स्वाभिमानी कलाकार की छवि को हमेशा के लिए पुख्ता कर दिया।\n\n'जिद्दी' से शुरू हुआ सुरीला सफर और सदाबहार नगमे\nकिशोर कुमार के संगीत करियर की नींव भी काफी रोचक अंदाज में पड़ी थी। जाने-माने संगीतकार खेमचंद प्रकाश ने उनकी प्रतिभा को पहचानते हुए वर्ष 1948 में आई फिल्म 'जिद्दी' के जरिए उन्हें गायकी का पहला मौका दिया था। इसके बाद उन्होंने दशकों तक भारतीय सिनेमा को एक से बढ़कर एक यादगार गीतों का तोहफा दिया।\n\nउनके गाए सदाबहार नगमों में 'एक लड़की भीगी भागी सी', 'मेरे सपनों की रानी', 'ये शाम मस्तानी' और 'ओ मेरे दिल के चैन' जैसे गाने शामिल हैं, जो आज भी संगीत प्रेमियों की पहली पसंद हैं। इसके अलावा 'हमें तुमसे प्यार कितना', 'पल पल दिल के पास' तथा 'जिंदगी एक सफर है सुहाना' जैसे गीतों ने उन्हें हर पीढ़ी के दिलों में हमेशा के लिए अमर कर दिया।\n\nइसका आप पर असर\nसरकारी माध्यमों पर कलाकारों पर लगने वाली बंदिशें और उनके अधिकारों से जुड़े इस ऐतिहासिक प्रसंग का आज के संगीत प्रेमियों और कलाकारों के लिए व्यावहारिक महत्व है।\n\n• कलाकारों की स्वतंत्रता: यह ऐतिहासिक घटना दर्शाती है कि रचनात्मक स्वतंत्रता के लिए कलाकारों को अक्सर राजनीतिक दबावों का सामना करना पड़ता है। आज के स्वतंत्र कलाकारों के लिए यह अपने आत्मसम्मान और शर्तों पर काम करने की एक मिसाल पेश करता है।\n• श्रोताओं पर असर: आपातकाल के दौरान सरकारी रेडियो पर प्रतिबंध के बावजूद प्रशंसकों ने कैसे अपने पसंदीदा गायक का समर्थन जारी रखा, यह श्रोताओं की पसंद की ताकत को उजागर करता है। आज के डिजिटल युग में किसी एक माध्यम द्वारा पाबंदी लगाना लगभग असंभव हो चुका है।\n• संगीत इतिहास की समझ: पुराने क्लासिक गानों को सुनने वाले श्रोताओं को यह जानने में मदद मिलती है कि इन लोकप्रिय रचनाओं के पीछे कलाकारों ने क्या सामाजिक और राजनीतिक संघर्ष झेले थे। इससे ऐतिहासिक दौर की कला और नीतियों के तालमेल को बेहतर तरीके से समझा जा सकता है।\n• संग्रह और प्रसारण: दूरदर्शन और आकाशवाणी के आर्काइव में इस तरह के प्रतिबंध हटने के बाद संगीत की ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने का महत्व बढ़ा है। संगीत प्रेमियों के लिए पुराने दौर के रिकॉर्ड्स की महत्ता आज भी बरकरार है।\n\nऐसा क्यों हुआ\nआपातकाल के दौरान किशोर कुमार के गानों के प्रसारण पर अचानक रोक लगाए जाने के पीछे प्रशासनिक आदेश की अवहेलना और गायक का स्वाभिमानी रुख मुख्य कारण था।\n\n• सरकारी आदेश की अनदेखी: सूचना एवं प्रसारण से जुड़े मंत्रालय के अधिकारी ने गायक को अगले ही दिन दिल्ली में आयोजित एक शो में गाने का तत्काल फरमान सुनाया था। गायक द्वारा इस निर्देश को फौरन स्वीकार न करने से सत्ता पक्ष नाराज हो गया।\n• स्वाभिमानी शर्त और दो-टूक जवाब: किशोर कुमार ने सीधे आने के बजाय प्रतिनिधि भेजने की बात कही और स्पष्ट किया कि वे किसी के दबाव में इस तरह नहीं आ सकते। इस तीखे जवाब को उस दौर के नौकरशाहों ने अनुशासनहीनता और अवज्ञा माना।\n• आपातकाल का सत्तावादी माहौल: वर्ष 1975 से 1977 के बीच लागू आपातकाल में असहमति या ना-नुकर को बर्दाश्त नहीं किया जाता था। यही कारण रहा कि फोन कटने के महज दो घंटे के भीतर ही बदले की भावना से आकाशवाणी और दूरदर्शन पर प्रतिबंध लागू कर दिया गया।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. किशोर कुमार पर सरकारी प्रसारण माध्यमों ने कब प्रतिबंध लगाया था?\nयह प्रतिबंध वर्ष 1975 से 1977 के मध्य देश में लागू आपातकाल के समय लगाया गया था।\n\n2. किशोर कुमार के गानों पर किन माध्यमों में पाबंदी लगाई गई थी?\nआकाशवाणी यानी ऑल इंडिया रेडियो और सरकारी टेलीविजन चैनल दूरदर्शन पर उनके गीतों के प्रसारण पर रोक लगा दी गई थी।\n\n3. किशोर कुमार के साथ हुए इस घटनाक्रम का खुलासा किसने किया था?\nइस पूरे प्रसंग की जानकारी उनके बेटे अमित कुमार ने 'द कपिल शर्मा शो' में बातचीत के दौरान दी थी।\n\n4. मंत्रालय के अधिकारी ने किशोर कुमार को क्या निर्देश दिया था?\nअधिकारी ने गायक को तत्काल अगली सुबह की फ्लाइट से दिल्ली आकर अगले दिन आयोजित होने वाले एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने का निर्देश दिया था।\n\n5. किशोर कुमार ने सरकारी अधिकारी को क्या जवाब दिया था?\nउन्होंने कहा था कि पहले कोई प्रतिनिधि आकर उनसे बात करे और वे भगवान के कहने पर भी इस तरह बिना बात किए नहीं जा सकते।\n\n6. बहस होने के कितनी देर बाद प्रतिबंध का आदेश लागू हुआ था?\nटेलीफोन पर हुई तीखी बातचीत के करीब दो घंटे के भीतर ही उनके गानों पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।\n\n7. किशोर कुमार को फिल्मों में गायकी का पहला मौका किस फिल्म से मिला था?\nसंगीतकार खेमचंद प्रकाश ने उन्हें वर्ष 1948 में रिलीज हुई फिल्म 'जिद्दी' के जरिए गाने का पहला अवसर दिया था।\n\nप्रेरणा और सबक\nकिशोर कुमार का यह ऐतिहासिक फैसला दिखाता है कि कैसे एक व्यक्ति अपने करियर के शीर्ष पर होते हुए भी सत्ता के दबाव के आगे नहीं झुका।\n\n• आत्मसम्मान से समझौता न करना: जब सफलता चरम पर हो, तब भी अपने उसूलों और गरिमा को किसी भी बाहरी दबाव या राजनीतिक फरमान के आगे गिरवी नहीं रखना चाहिए।\n• कलाकार की निष्ठा: किसी भी सरकारी या प्रशासनिक पद के सामने बेतुकी शर्तों को स्वीकार करने के बजाय अपनी शर्तों पर डटे रहना एक सच्चे फनकार की पहचान है।\n• हुनर की प्रासंगिकता: यदि आपका काम और प्रतिभा असाधारण है, तो कोई भी औपचारिक पाबंदी या माध्यम की दूरी जनता के दिलों से आपकी लोकप्रियता को खत्म नहीं कर सकती।",
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  "category": "बॉलीवुड",
  "publishedAt": "2026-09-20",
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