जब 50 बार ठुकराई गई धुन बनी 90 के दशक का एवरग्रीन गाना, जानें दिल तो पागल है के ट्रैक की अनसुनी दास्तान फिल्म दिल तो पागल है के ब्लॉकबस्टर गाने अरे रे अरे की धुन महीनों तक खारिज होती रही, जिसके बाद उदय चोपड़ा की सहमति से इसे फाइनल किया गया। हिंदी सिनेमा के कई ऐसे सदाबहार तराने हैं, जिनका संगीत आज भी कानों में गूंजता है, मगर उनके बनने का सफर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। साल 1997 में सिनेमाघरों में आई निर्देशक यश चोपड़ा की म्यूजिकल रोमांटिक फिल्म 'दिल तो पागल है' का एक ऐसा ही जादुई गीत है, जिसे अंतिम रूप दिए जाने से पहले पूरे 50 बार नामंजूर किया गया था। संगीतकार उत्तम सिंह को इस धुन को मंजूरी दिलाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा, लेकिन जब यह गीत दर्शकों के बीच आया तो उसने भारतीय संगीत जगत में इतिहास रच दिया। महीनों की मशक्कत और 50 बार नाकामी का सामना इस अमर गीत की रचना के पीछे संगीतकार उत्तम सिंह का अटूट धैर्य छिपा है। उन्होंने इस धुन को तैयार करने के बाद फिल्म की टीम और चोपड़ा परिवार को सुनाना शुरू किया। शुरुआत में उन्हें कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिली। उत्तम सिंह करीब पांच महीनों तक लगातार इस धुन को बेहतर बनाने और चोपड़ा परिवार के सामने पेश करने की जद्दोजहद में जुटे रहे। हर मुलाकात के बाद निराशा ही हाथ लगी और धुन को बार-बार खारिज किया जाता रहा। कुल मिलाकर 50 बार ना सुने जाने के बावजूद संगीतकार ने अपनी इस रचना पर भरोसा नहीं खोया। उदय चोपड़ा की राय ने बदली धुन की किस्मत लगातार मिल रहे रिजेक्शन के बीच एक अहम मोड़ तब आया जब यश चोपड़ा के छोटे बेटे उदय चोपड़ा ने इस धुन को सुना। धुन सुनते ही उन्हें इसकी लय, ताजगी और लोकप्रियता की असीम संभावनाएं भा गईं। उन्होंने महसूस किया कि इस धुन में युवाओं को झूमने पर मजबूर करने की ताकत है और यह एक बहुत बड़ा हिट नंबर साबित हो सकता है। उनके सकारात्मक रुख के बाद आखिरकार इस धुन पर मुहर लगी और इसे फिल्म के साउंडट्रैक में शामिल करने का फैसला किया गया। आनंद बख्शी के शब्द और लता-उदित की सुरीली आवाज मंजूरी मिलने के बाद इस धुन पर दिग्गज गीतकार आनंद बख्शी ने कलम चलाई और शब्दों में पिरोकर इसे 'अरे रे अरे' जैसा यादगार नाम दिया। सुर साम्राज्ञी लता मंगेशकर और मशहूर गायक उदित नारायण ने अपनी सुरीली आवाज से इस गीत में जान फूंक दी। उत्तम सिंह का यह संगीत पूरी फिल्म में एक प्रमुख थीम की तरह बार-बार इस्तेमाल हुआ, जिसने फिल्म की भावनात्मक गहराई को और बढ़ा दिया। तीन दशक बाद भी यह गीत नब्बे के दशक के रोमांटिक दौर की ताज़ा यादें ताजा कर देता है। बॉक्स ऑफिस पर तूफान और नेशनल अवॉर्ड्स में डंका शाहरुख खान, माधुरी दीक्षित और करिश्मा कपूर की मुख्य भूमिकाओं वाली यह फिल्म प्यार, दोस्ती, नृत्य और संगीत के खूबसूरत तालमेल पर आधारित थी। फिल्म के गानों ने रिलीज होते ही चार्टबस्टर्स पर राज किया। लगभग 9 करोड़ रुपये के सीमित बजट में तैयार हुई इस फिल्म ने सिनेमाघरों में धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए 70 करोड़ रुपये से ज्यादा का ग्रॉस कलेक्शन किया। व्यावसायिक सफलता के साथ ही फिल्म ने नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में भी अपनी धाक जमाई और तीन राष्ट्रीय पुरस्कार जीते, जिनमें 'बेस्ट पॉपुलर फिल्म प्रोवाइडिंग होलसम एंटरटेनमेंट' का प्रतिष्ठित सम्मान शामिल था। इसका आप पर असर संगीत और कला के क्षेत्र में काम करने वाले रचनाकारों और सिनेप्रेमियों के लिए यह प्रेरक किस्सा महत्वपूर्ण सीख देता है। • कलाकारों के लिए: किसी भी रचनात्मक काम में शुरुआती रिजेक्शन से हताश होने के बजाय अपनी प्रतिभा पर विश्वास बनाए रखना जरूरी है। यह उदाहरण दिखाता है कि कैसे 50 बार नकारे जाने के बाद भी एक रचना ऐतिहासिक सफलता हासिल कर सकती है। • सिनेप्रेमियों के लिए: दर्शकों को किसी अमर गाने के पीछे छिपे महीनों के कठिन संघर्ष और पर्दे के पीछे की मेहनत को समझने का अवसर मिलता है। इससे फिल्मों के संगीत और संगीतकारों के योगदान को देखने का नजरिया बदलता है। • फिल्म इंडस्ट्री के लिए: यह घटना साबित करती है कि कई बार नए या युवा नजरिए से मिली राय पूरी परियोजना की किस्मत बदल सकती है। उदय चोपड़ा की समय पर दी गई राय ने एक सामान्य रिजेक्टेड धुन को राष्ट्रीय पहचान दिला दी। • छात्रों और युवाओं के लिए: लगातार पांच महीने तक प्रयास जारी रखना यह सिखाता है कि सफलता के लिए धैर्य और लगन अनिवार्य हैं। जब तक आप अपने लक्ष्य के प्रति समर्पित रहते हैं, तब तक असफलता केवल एक पड़ाव होती है। ऐसा क्यों हुआ फिल्म दिल तो पागल है के गाने 'अरे रे अरे' की धुन को चुने जाने से पहले लंबा संघर्ष देखना पड़ा क्योंकि निर्माताओं को तुरंत वह प्रभाव नहीं मिल पा रहा था जिसकी उन्हें तलाश थी। • कड़ी चयन प्रक्रिया: यश चोपड़ा की फिल्मों में संगीत कहानी का मुख्य आधार होता था और वे हर गाने की धुन पर बेहद बारीकी से काम करते थे। इसी उच्च मानक के चलते उत्तम सिंह की धुन को तुरंत हरी झंडी नहीं मिल सकी और वे महीनों तक प्रयोग करते रहे। • उचित प्रतिक्रिया का अभाव: शुरुआत में जब संगीतकार ने धुन सुनाई तो टीम की तरफ से कोई खास उत्साह नहीं दिखा। इस वजह से उत्तम सिंह को लगातार पांच महीने तक धुन में बदलाव करते हुए नए सिरे से प्रस्तुत करना पड़ा। • युवा दृष्टिकोण का प्रभाव: लगातार रिजेक्शन के सिलसिले को उदय चोपड़ा की प्रतिक्रिया ने तोड़ा, जिन्होंने धुन की आधुनिक अपील और युवाओं से जुड़ने की क्षमता को सही समय पर पहचाना। सवाल-जवाब 1. फिल्म दिल तो पागल है का कौन सा गाना 50 बार रिजेक्ट हुआ था? फिल्म 'दिल तो पागल है' का मशहूर गाना 'अरे रे अरे' फाइनल होने से पहले 50 बार रिजेक्ट किया गया था। 2. इस गाने की धुन किसने तैयार की थी? इस ब्लॉकबस्टर गाने का संगीत संगीतकार उत्तम सिंह ने तैयार किया था। 3. गाने को स्वीकार कराने में किसका अहम योगदान रहा? यश चोपड़ा के छोटे बेटे उदय चोपड़ा को यह धुन पसंद आई और उनकी राय के बाद इसे फिल्म में शामिल किया गया। 4. गाने के बोल किसने लिखे थे और इसे किन्होंने गाया था? इस गीत के बोल आनंद बख्शी ने लिखे थे, जबकि इसे लता मंगेशकर और उदित नारायण ने अपनी आवाज दी थी। 5. फिल्म दिल तो पागल है का बजट और बॉक्स ऑफिस कलेक्शन कितना था? यह फिल्म लगभग 9 करोड़ रुपये के बजट में बनी थी और इसने बॉक्स ऑफिस पर 70 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की थी। 6. फिल्म ने कितने राष्ट्रीय पुरस्कार जीते थे? फिल्म 'दिल तो पागल है' ने नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में तीन पुरस्कार अपने नाम किए थे। प्रेरणा और सबक संगीतकार उत्तम सिंह का यह सफर किसी भी क्षेत्र में संघर्ष कर रहे लोगों के लिए एक मिसाल है। • अपनी कला पर अडिग विश्वास: जब किसी काम को 50 बार रिजेक्ट कर दिया जाए, तब भी खुद पर और अपनी रचना पर भरोसा कायम रखना सबसे बड़ी ताकत बनता है। • धैर्य और निरंतरता: उत्तम सिंह ने पांच महीने तक लगातार कोशिशें जारी रखीं और कभी हार नहीं मानी। निरंतर प्रयास ही अंततः बंद दरवाजों को खोलता है। • सही अवसर की पहचान: असफलता के दौर में भी उम्मीद बनाए रखने से सही व्यक्ति का ध्यान आकर्षित करने में मदद मिलती है, जैसा उदय चोपड़ा के मामले में हुआ। https://trendkia.com/bollywood/jaba-50-bara-thukarai-gai-dhuna-bani-90-ke-dashaka-ka-evaragrina-gana-janen-dil-to-pagal-hai-ke-traika-ki-anasuni-dastana-42049 TrendKia — Har trend, sabse pehle.