जब एक ही रात में फाइनल हुईं दो कहानियां, फिर बॉक्स ऑफिस पर बना इतिहास और मिला हिंदी सिनेमा का पहला सुपरस्टार 57 साल पहले रिलीज़ हुई 'आराधना' और दो साल बाद आई 'कटी पतंग' की स्क्रिप्ट एक ही रात में तय हुई थी, और इन्हीं दोनों फिल्मों ने राजेश खन्ना को सुपरस्टार और किशोर कुमार को रातोंरात गायक स्टार बना दिया। हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ फिल्में सिर्फ हिट नहीं होतीं, बल्कि पीढ़ियों के दिल में घर बना लेती हैं। ऐसी कहानियां इतनी असरदार होती हैं कि बार-बार देखने पर भी मन नहीं भरता और हर बार एक नई फीलिंग देती हैं। आज से 57 साल पहले परदे पर आई एक फिल्म ऐसी ही थी, जिसने एक नहीं बल्कि दो दिग्गजों का करियर बदल दिया। यह फिल्म थी 'आराधना', जो 7 नवंबर 1969 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई। एक गाना, जिसने किशोर कुमार को रातोंरात स्टार बना दिया इस फिल्म का सबसे चर्चित गाना था 'रूप तेरा मस्ताना, प्यार मेरा दीवाना', जिसे किशोर कुमार ने अपने ही अनोखे अंदाज़ में गाया। दिलचस्प बात यह है कि संगीतकार एसडी बर्मन ने पहले जो धुन तैयार की थी, किशोर कुमार ने उसमें बदलाव कर उसे एक नई सुरीली शक्ल दी। यही धुन इतनी लोकप्रिय हुई कि गाना अमर हो गया और किशोर कुमार रातोंरात गायकी के बड़े सितारे बन गए। इसी एक फिल्म ने हिंदी सिनेमा को सही मायनों में अपना पहला सुपरस्टार भी दिया, राजेश खन्ना के रूप में। 'रूप तेरा मस्ताना' की धुन के पीछे का किस्सा किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार ने एक स्टेज शो में इस गाने से जुड़ा रोचक किस्सा साझा किया था। उनके मुताबिक, शुरू में इस गाने की धुन बहुत अजीब और कठिन थी। जब एसडी बर्मन यह ट्यून सिखा रहे थे, तब किशोर दा को वह बिल्कुल पसंद नहीं आई, क्योंकि गाना काफी धीमा था। उसी पल किशोर कुमार को बर्मन दा का एक पुराना बंगाली गाना याद आया, जिसकी धुन इससे मिलती-जुलती थी। वह गाना था 'एतो कछे दूजने, प्रेम भरा जो बूने, होथट भूले भूल ना होय जाए'। किशोर कुमार ने जब यह गाना बर्मन दा को याद दिलाया तो वे खुश हो गए और गाने ने नया रूप ले लिया। विदेशी कहानियों से जन्मीं दो हिट फिल्में 'आराधना' का निर्देशन और निर्माण शक्ति सामंत ने किया था। फिल्म में राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर मुख्य भूमिका में थे, जबकि सुजीत कुमार, फरीदा जलाल और किशोर कुमार के बड़े भाई अशोक कुमार भी अहम किरदारों में नज़र आए। कहानी सचिन भौमिक ने लिखी थी, जो 1946 में आई अमेरिकन फिल्म 'To Each His Own' से प्रेरित थी। मज़े की बात यह है कि सचिन ने यह कहानी सबसे पहले ऋषिकेश मुखर्जी को सुनाई थी, लेकिन जब ऋषिकेश दा इसे नहीं बना सके, तो यही कहानी शक्ति सामंत तक पहुंची। फिल्म का पहला टाइटल 'सुबह प्यार की' रखा गया था, जिसे बाद में एसडी बर्मन की सलाह पर बदल दिया गया। एक रात में तय हुई दो फिल्मों की स्क्रिप्ट 'आराधना' के बनने की कहानी अपने आप में बेहद दिलचस्प है, क्योंकि आखिरी वक्त पर इसकी कहानी बदलनी पड़ी थी। हुआ यूं कि शक्ति सामंत, लेखक गुलशन नंदा और मधुसूदन कालेलकर फेमस स्टूडियो में बैठे थे। इसी दौरान अनिल कपूर के पिता और प्रोड्यूसर सुरेंद्र कपूर वहां पहुंचे और अपनी फिल्म 'एक श्रीमान, एक श्रीमती' की आखिरी रील दिखाने का अनुरोध किया। उस आखिरी हिस्से को देखकर शक्ति सामंत के होश उड़ गए, क्योंकि वह हूबहू 'आराधना' की कहानी से मेल खाता था। वजह साफ थी, दोनों फिल्मों के लेखक सचिन भौमिक ही थे। इससे शक्ति सामंत बेहद नाराज़ और परेशान हो गए। इस मुश्किल घड़ी में उन्होंने गुलशन नंदा से मदद मांगी। 'आराधना' की कहानी सुनने के बाद गुलशन नंदा ने हीरो से डबल रोल कराने का सुझाव दिया, जो शक्ति सामंत को पसंद आया और कई बदलावों के साथ फिल्म का क्लाइमैक्स दोबारा लिखा गया। इतना ही नहीं, उसी मुलाकात में गुलशन नंदा ने 'कटी पतंग' की कहानी भी सुना दी। इस तरह एक ही रात में दोनों फिल्मों की स्क्रिप्ट फाइनल हो गई। दोनों फिल्में करीब दो साल के अंतराल में रिलीज़ हुईं, 'आराधना' 7 नवंबर 1969 को और 'कटी पतंग' 29 जनवरी 1971 को। 'आराधना' ने रिलीज़ होते ही इतिहास रच दिया, वहीं 'कटी पतंग' को भी दर्शकों ने खूब सराहा और वह भी हिट साबित हुई। दशक पर राज करने वाला संगीत 'आराधना' का संगीत एसडी बर्मन ने दिया था और गीत आनंद बख्शी ने लिखे, जबकि धुनें तैयार करने में आरडी बर्मन ने बड़ी भूमिका निभाई। फिल्म में कुल 7 गाने थे और हर एक सुपरहिट रहा। यह संगीत उस पूरे दशक का सबसे ज़्यादा बिकने वाला संगीत बन गया। इसके लोकप्रिय गानों में 'रूप तेरा मस्ताना', 'मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू', 'कोरा कागज़ था ये मन मेरा', 'चंदा है तू मेरा सूरज है तू', 'सफल होगी तेरी आराधना', 'गुन गुना रहे हैं भंवरे' और 'बागों में बहार है' शामिल थे। जब गिटार की जगह बजा माउथ ऑर्गन 'मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू' गाने के साथ भी एक रोचक किस्सा जुड़ा है। दरअसल, इस गाने का रिद्म एक गिटारिस्ट ठीक से बजा नहीं पा रहा था। उस वक्त शक्ति सामंत अपनी पूरी टीम के साथ दार्जिलिंग में थे और गाने का इंतज़ार हो रहा था। ऐसे में आरडी बर्मन ने गिटार की जगह माउथ ऑर्गन बजाया। नतीजा यह रहा कि गाना तो सुपरहिट बना ही, इसका हर म्यूज़िक पीस भी लोगों की ज़ुबान पर चढ़ गया। रिकॉर्ड कमाई और फिल्मफेयर का बोलबाला 'आराधना' शक्ति सामंत के साथ राजेश खन्ना की पहली फिल्म थी और इसी फिल्म से वे रातोंरात सुपरहिट बन गए। यह राजेश खन्ना और शर्मिला टैगोर की जोड़ी की भी पहली फिल्म थी। फिल्म का नेट कलेक्शन करीब 3.5 करोड़ रुपये रहा और यह 1969 की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फिल्म साबित हुई। फिल्म को तीन फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले, बेस्ट फिल्म के लिए शक्ति सामंत, बेस्ट एक्ट्रेस के लिए शर्मिला टैगोर और 'रूप तेरा मस्ताना' के लिए बेस्ट प्लेबैक मेल सिंगर का अवॉर्ड किशोर कुमार को मिला। 'कटी पतंग' ने दी स्टारडम को नई ऊंचाई दूसरी ओर, 'कटी पतंग' ने राजेश खन्ना के स्टारडम को एक अलग ही मुकाम तक पहुंचा दिया। यह एक नायिका प्रधान फिल्म थी, जिसमें राजेश खन्ना के साथ आशा पारेख, प्रेम चोपड़ा, बिंदु और नाज़िर हुसैन जैसे कलाकारों ने अपनी अदाकारी का जलवा दिखाया। फिल्म की कहानी गुलशन नंदा की थी, जबकि संवाद वृजेंद्र गौड़ ने लिखे। यह कहानी 1948 में आए कॉर्निल वूलरिच के उपन्यास 'I Married a Dead Man' से प्रेरित थी। फिल्म का संगीत आरडी बर्मन ने दिया था, जो ब्लॉकबस्टर रहा। इसके सुपरहिट गानों में 'प्यार दीवाना होता है, मस्ताना होता है', 'ये शाम मस्तानी, मदहोश किए जा', 'ये जो मुहब्बत है, उनका है काम' और 'ना कोई उमंग है, ना कोई तरंग है' शामिल थे। इन गानों के बोल भी आनंद बख्शी ने लिखे थे और फिल्म एक मैसिव हिट साबित हुई। इसका आप पर असर • क्लासिक सिनेमा प्रेमियों के लिए: अगर आप पुराने हिंदी गानों के शौकीन हैं, तो 'रूप तेरा मस्ताना' और 'मेरे सपनों की रानी' जैसे गानों के पीछे की मेकिंग जानने के बाद इन्हें सुनने का अनुभव और भी खास हो जाएगा। • संगीत के दीवानों के लिए: यह किस्सा बताता है कि एक धुन में छोटे से बदलाव और माउथ ऑर्गन जैसे फैसले कैसे किसी गाने को अमर बना देते हैं। सवाल-जवाब 1. 'आराधना' और 'कटी पतंग' कब रिलीज़ हुई थीं? 'आराधना' 7 नवंबर 1969 को और 'कटी पतंग' 29 जनवरी 1971 को सिनेमाघरों में रिलीज़ हुई थी। 2. 'रूप तेरा मस्ताना' की धुन में किशोर कुमार की क्या भूमिका थी? किशोर कुमार ने एसडी बर्मन की मूल धुन में बदलाव कर उसे सुरीला बनाया और बर्मन दा को उनका मिलता-जुलता पुराना बंगाली गाना याद दिलाया। 3. 'आराधना' ने कितनी कमाई की और कौन-से अवॉर्ड जीते? फिल्म का नेट कलेक्शन करीब 3.5 करोड़ रुपये रहा, यह 1969 की सबसे ज़्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी और इसे तीन फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले। 4. 'कटी पतंग' किस उपन्यास से प्रेरित थी? 'कटी पतंग' की कहानी 1948 में आए कॉर्निल वूलरिच के उपन्यास 'I Married a Dead Man' से प्रेरित थी। https://trendkia.com/bollywood/jaba-eka-hi-rata-men-phainala-huin-do-kahaniyan-phira-boksa-phisa-para-bana-itih-1270 TrendKia — Har trend, sabse pehle.