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  "type": "article",
  "title": "जब लता मंगेशकर ने ठुकरा दिया गाना, आशा भोसले ने पांच गुना दाम पर गाकर बनाया एवरग्रीन हिट",
  "summary": "1964 की फिल्म राजकुमार के एक सेंसुअल गाने को लता मंगेशकर ने गाने से मना कर दिया था, जिसे बाद में आशा भोसले ने पांच गुना ज्यादा फीस लेकर रिकॉर्ड किया, फिल्म बॉक्स ऑफिस पर मैसिव हिट रही।",
  "content": "साठ के दशक में हिंदी सिनेमा के पर्दे पर शम्मी कपूर का जलवा हर तरफ था। उनकी बेपरवाह डांसिंग स्टाइल और शरारती अंदाज ने उन्हें उस दौर का सबसे चहेता हीरो बना दिया था। इसी दौर में 1964 में आई उनकी फिल्म राजकुमार आज भी अपने एक गाने की वजह से चर्चा में रहती है, जिसे गाने से खुद लता मंगेशकर ने इनकार कर दिया था। इस मना करने से जुड़ा एक ऐसा किस्सा बना, जो आज भी बॉलीवुड के पुराने किस्सों में शुमार होता है। आज जब भी सुनहरे दौर की फिल्मों और गानों की चर्चा होती है, राजकुमार का जिक्र इसी किस्से के साथ जरूर होता है। यही फिल्म आगे चलकर उस साल की सबसे बड़ी हिट फिल्मों में शामिल हुई।\n\nकहानी के पीछे की कहानी\nराजकुमार का निर्देशन के. शंकर ने किया था और यह पूरी तरह एक म्यूजिकल फिल्म थी। लेकिन इसकी पटकथा से जुड़ा एक दिलचस्प विवाद भी था। फिल्म की मूल कहानी मनमोहन देसाई ने लिखी थी, जबकि स्क्रीनप्ले और संवाद रामानंद सागर की कलम से निकले थे। रामानंद सागर ने असल कहानी में इतने बदलाव कर दिए थे कि वे चाहते थे कहानी का श्रेय भी उन्हें ही मिले, लेकिन प्रोड्यूसर ने ऐसा नहीं किया और मूल कहानीकार का नाम मनमोहन देसाई का ही रखा गया। दिलचस्प बात यह है कि आगे चलकर दोनों ही राइटर्स ने अपने-अपने क्षेत्र में बड़ा नाम कमाया। मनमोहन देसाई ने बाद में धरम-वीर, परवरिश और अमर अकबर एंथोनी जैसी सुपरहिट मसाला फिल्में बनाईं, जबकि रामानंद सागर ने 1987 में रामायण जैसा कालजयी धारावाहिक बनाकर घर-घर में अपनी पहचान बनाई।\n\nजब लता मंगेशकर ने गाने से किया इनकार\nराजकुमार की सबसे बड़ी ताकत उसका संगीत था, जिसे शंकर-जयकिशन ने कंपोज किया था और गीत हसरत जयपुरी और शैलेंद्र ने लिखे थे। फिल्म के लगभग हर गाने ने उस दौर में धूम मचाई, लेकिन एक गाने को लेकर सेट पर खासा गहमागहमी रही। यह गाना था दिलरुबा दिल पे तू ये सितम किए जा, जो बेहद सेंसुअल अंदाज में लिखा गया था। जब यह गाना लता मंगेशकर को सुनाया गया तो उन्होंने इसे गाने से साफ मना कर दिया। इसके बाद शंकर-जयकिशन आशा भोसले के पास पहुंचे। आशा भोसले ने गाना गाने की हामी तो भर दी, लेकिन शर्त रखी कि वे लता मंगेशकर से पांच गुना ज्यादा फीस लेंगी। जब यह बात शम्मी कपूर तक पहुंची तो उन्होंने खुद गाने के बोल पढ़े और कहा कि आशा भोसले की मांग जायज है क्योंकि गाना वाकई बेहद सेंसुअल है, इसलिए उन्हें मुंहमांगी रकम दे दी जानी चाहिए। आखिरकार यह गाना मोहम्मद रफी और आशा भोसले की आवाज में रिकॉर्ड हुआ।\n\nहर गाना बना सुपरहिट\n20 अक्टूबर 1964 को रिलीज हुई राजकुमार में शम्मी कपूर और साधना की जोड़ी को दर्शकों ने खूब पसंद किया। फिल्म के करीब हर गाने ने चार्ट पर धमाल मचाया। जानेवाले जरा होशियार, तुमने किसी की जान को जाते हुए देखा है और इस रंग बदलती दुनिया में जैसे गाने मोहम्मद रफी की आवाज में रिकॉर्ड हुए और खूब सराहे गए। तुमने पुकारा और हम चले आए गाने में मोहम्मद रफी के साथ सुमन कल्याणपुर की आवाज शामिल थी। वहीं आ जा आई बहार गाने को लता मंगेशकर ने अपनी आवाज दी और यही गाना आगे चलकर फिल्म का सबसे आइकॉनिक और एवरग्रीन गीत बन गया।\n\nमहल की साजिश और कॉमेडी से भरी कहानी\nराजकुमार की कहानी में राजसी ठाठबाट के साथ जबरदस्त कॉमेडी का तड़का भी था। इस फिल्म में शम्मी कपूर के असल जिंदगी के पिता पृथ्वीराज कपूर भी नजर आए और पर्दे पर भी उन्होंने शम्मी कपूर के पिता का ही किरदार निभाया। कहानी में शम्मी कपूर का किरदार पेरिस से पढ़ाई पूरी कर वापस लौटता है और अजीबोगरीब हरकतें करने लगता है। असल में राजकुमार को पहले ही पता चल जाता है कि उसकी सौतेली मां मनोरमा और सेनापति नरपत सिंह, जिनका किरदार प्राण ने निभाया था, महल के खिलाफ साजिश रच रहे हैं। अपने दुश्मनों को गुमराह करने के लिए ही राजकुमार जानबूझकर एक सनकी इंसान जैसा बर्ताव करता है। फिल्म में ओम प्रकाश भी अहम भूमिका में नजर आए थे।\n\nऊटी के जंगलों में हुई खूबसूरत शूटिंग\nराजकुमार की ज्यादातर शूटिंग चेन्नई के आसपास ऊटी के घने जंगलों और झरनों के बीच हुई थी। फिल्म का सबसे लोकप्रिय गाना आ जा आई बहार भी ऊटी की एक झील के किनारे ही फिल्माया गया था। लता मंगेशकर की आवाज ने इस गाने को अमर बना दिया, वहीं शम्मी कपूर ने अपनी आंखों और चेहरे के भाव-भंगिमाओं से पर्दे पर रोमांस को जीवंत कर दिया।\n\nबॉक्स ऑफिस पर छाई राजकुमार\nराजकुमार को बनाने में करीब 75 लाख रुपये खर्च हुए थे, जबकि फिल्म ने 1.5 करोड़ रुपये की कमाई करके यह रकम कई गुना कमा ली। यह उस दौर के हिसाब से एक मैसिव हिट साबित हुई और 1964 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट में पांचवें नंबर पर रही। हालांकि उस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म राज कपूर की संगम थी। इसके बावजूद 1964 में शम्मी कपूर सोलो लीड स्टार के तौर पर पूरी तरह छाए रहे, क्योंकि इसी साल उनकी एक और फिल्म कश्मीर की कली भी मैसिव हिट रही थी।\n\nइसका आप पर असर\nयह किस्सा सीधे तौर पर रोजमर्रा की जिंदगी या पैसों को प्रभावित नहीं करता, फिर भी पुराने बॉलीवुड संगीत के शौकीनों के लिए यह दिलचस्प है।\n\n• संगीत प्रेमियों के लिए: शंकर-जयकिशन, लता मंगेशकर और आशा भोसले से जुड़ा यह किस्सा राजकुमार के गाने फिर से सुनने और परखने का मौका देता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. राजकुमार फिल्म कब रिलीज हुई थी?\nयह फिल्म 20 अक्टूबर 1964 को रिलीज हुई थी।\n\n2. राजकुमार का निर्देशन किसने किया था?\nफिल्म का निर्देशन के. शंकर ने किया था।\n\n3. लता मंगेशकर ने कौन सा गाना गाने से मना कर दिया था?\nउन्होंने दिलरुबा दिल पे तू ये सितम किए जा गाना गाने से मना कर दिया था क्योंकि यह बेहद सेंसुअल था।\n\n4. यह गाना आखिर में किसने गाया?\nयह गाना मोहम्मद रफी और आशा भोसले की आवाज में रिकॉर्ड हुआ।\n\n5. आशा भोसले ने इस गाने के लिए कितनी फीस मांगी थी?\nआशा भोसले ने लता मंगेशकर से पांच गुना ज्यादा फीस मांगी थी।\n\n6. फिल्म की कहानी और स्क्रीनप्ले किसने लिखे थे?\nमूल कहानी मनमोहन देसाई ने लिखी थी, जबकि स्क्रीनप्ले और संवाद रामानंद सागर ने लिखे थे।\n\n7. फिल्म का बजट और कमाई कितनी थी?\nफिल्म का बजट करीब 75 लाख रुपये था और इसने 1.5 करोड़ रुपये की कमाई की थी।\n\n8. 1964 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म कौन सी थी?\nउस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म राज कपूर की संगम थी, जबकि राजकुमार पांचवें नंबर पर रही।",
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  "category": "बॉलीवुड",
  "publishedAt": "2026-07-07",
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