जब विवेक ओबेरॉय के बदले अंदाज से आहत हो गए थे बॉस्को मार्टिस, कोरियोग्राफर ने शेयर किया पुराना किस्सा कोरियोग्राफर बॉस्को मार्टिस ने विवेक ओबेरॉय के साथ अपने शुरुआती दिनों का एक दिलचस्प किस्सा साझा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे एक्टर के स्टार बनते ही उनके काम करने का तरीका बदल गया था, जिससे उन्हें पहले बुरा लगा था लेकिन बाद में समझ आया। बॉलीवुड में जब किसी कलाकार की शुरुआती फिल्में बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर देती हैं, तो इंडस्ट्री में उसकी एक अलग धाक जम जाती है। विवेक ओबेरॉय के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था, जब साल 2002 में रिलीज हुई फिल्मों 'कंपनी' और 'साथिया' ने उन्हें रातों-रात बुलंदियों पर पहुंचा दिया था। उनके शुरुआती दौर के इस स्टारडम और उससे जुड़े एक दिलचस्प वाकये को मशहूर कोरियोग्राफर बॉस्को मार्टिस ने हाल ही में दुनिया के सामने रखा है। इस किस्से से यह पता चलता है कि कैसे एक दौर में कलाकारों के रवैये को लेकर इंडस्ट्री के अंदर काम करने वालों की सोच पर असर पड़ता है। जब बॉस्को को कॉल पर मिला नया अनुभव बास्को ने इस बात का खुलासा किया है कि जब विवेक का करियर तेजी से ऊपर उठ रहा था और वह एक बड़े स्टार के रूप में स्थापित हो चुके थे, तब उन्होंने एक्टर को एक गाने के सिलसिले में फोन किया था। बॉस्को किसी प्रोजेक्ट के लिए उनके साथ काम करने के इच्छुक थे और उन्होंने इसी को लेकर बात की थी। उस वक्त विवेक ने भी गाने में काम करने को लेकर हामी भरी और बातचीत की, लेकिन उन्होंने साथ ही एक ऐसी शर्त रखी जिसने कोरियोग्राफर को चौंका दिया। विवेक ने उनसे गाने की पूरी क्रिएटिव तैयारी और उसका पूरा ब्रेकडाउन मांग लिया था, जो आमतौर पर शुरुआती दौर के कलाकारों के साथ काम करते वक्त नहीं देखा जाता था। शुरुआत में क्यों खटक गई थी बात बास्को ने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए बताया कि विवेक के इस बदले हुए प्रोफेशनल अंदाज को देखकर वह काफी हैरान रह गए थे। उन्हें उस समय यह महसूस हुआ कि शायद स्टारडम सिर चढ़कर बोल रहा है और शोहरत मिलते ही अभिनेता के व्यवहार में बदलाव आ जाता है। बॉस्को ने खुलकर यह स्वीकार किया कि उस वक्त यह सब सुनकर उन्हें विवेक की बात से काफी बुरा लगा था और उन्हें यह तरीका थोड़ा अजीब लगा था। हालांकि, वक्त गुजरने के साथ और इंडस्ट्री में अनुभव बढ़ने के बाद बॉस्को की इस पर पूरी तरह से सोच बदल गई। उन्हें बाद में यह समझ आया कि विवेक ने जो भी कहा था, उसमें असल में कोई भी गलत बात नहीं थी क्योंकि एक बड़े कलाकार के साथ काम करने के लिए सिर्फ पुरानी जान-पहचान या दोस्ती काफी नहीं होती है। प्रोफेशनल और पर्सनल लाइफ का फर्क बॉस्को ने इसी बातचीत में यह भी साफ किया कि बाद में उन्हें यह अहसास हो गया था कि विवेक अपने काम को लेकर कितने ज्यादा गंभीर और स्पष्ट हैं। उन्होंने यह भी माना कि किसी भी कलाकार के स्टार बनने के पीछे उसकी वर्षों की कड़ी मेहनत छिपी होती है और उसके साथ काम करने वाले हर व्यक्ति की यह जिम्मेदारी बनती है कि वह उस स्टार को बेहतरीन तरीके से पर्दे पर पेश करने के लिए पूरी तैयारी के साथ पहुंचे। उनका यह भी मानना है कि विवेक ओबेरॉय ने काम के प्रति अपनी पेशेवर सोच को बहुत साफ रखा था। विवेक का यही मानना था कि दोस्ती और निजी रिश्तों को हमेशा पेशेवर जीवन से अलग रखना चाहिए, क्योंकि यदि काम के बीच में जरूरत से ज्यादा दोस्ती या व्यक्तिगत पहचान को लाया जाए, तो उसका बुरा परिणाम भी भुगतना पड़ सकता है। सफर और आने वाले प्रोजेक्ट्स आपको बता दें कि विवेक ओबेरॉय ने अपने फिल्मी सफर की शानदार शुरुआत राम गोपाल वर्मा की फिल्म 'कंपनी' से की थी। अपने करियर की पहली ही फिल्म से उन्हें वो जबरदस्त पहचान और शोहरत मिल गई थी, जो किसी भी अभिनेता के लिए मील का पत्थर साबित होती है। इसके बाद रानी मुखर्जी के साथ फिल्म 'साथिया', मणिरत्नम की 'युवा' समेत कई बेहतरीन फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से उन्होंने सिनेमा जगत में तहलका मचा दिया था। अपने करियर के शुरुआती चरण में ही वह बॉलीवुड के बड़े कलाकारों की श्रेणी में शामिल हो चुके थे। इसके अलावा, विवेक ओबेरॉय इन दिनों निर्देशक नितेश तिवारी की बहुचर्चित फिल्म 'रामायण' को लेकर भी काफी चर्चा में बने हुए हैं, जिसमें वह विद्युतजिह्व का किरदार निभाते हुए नजर आने वाले हैं। इसका आप पर असर यह घटना मनोरंजन जगत में काम करने वाले कलाकारों और निर्देशकों के बीच पेशेवर अनुशासन के महत्व को दर्शाती है। • फिल्म उद्योग में: यह कलाकारों और तकनीशियनों के बीच पेशेवर दूरी और तैयारी के महत्व को रेखांकित करता है। इससे यह सीख मिलती है कि बड़े प्रोजेक्ट्स में व्यक्तिगत समीकरणों से ज्यादा काम की रूपरेखा अहम होती है। • दर्शकों के लिए: यह पर्दे के पीछे की उन वास्तविक चुनौतियों को उजागर करता है जिनसे स्टार्स गुजरते हैं। इससे प्रशंसकों को अपने पसंदीदा कलाकारों के काम करने के तरीके के बारे में एक नया नजरिया मिलता है। ऐसा क्यों हुआ यह वाकया तब सामने आया जब कोरियोग्राफर ने एक इंटरव्यू के दौरान शुरुआती दौर के अपने अनुभवों को याद किया। • तेजी से बढ़ता स्टारडम: विवेक ओबेरॉय को 'कंपनी' और 'साथिया' की सफलता के बाद बहुत कम समय में भारी प्रसिद्धि मिली थी। इस अचानक मिली शोहरत ने उनके काम करने के तौर-तरीकों और प्राथमिकताओं को पूरी तरह बदल दिया था। • पेशेवर दृष्टिकोण: एक्टर अपनी हर पेशेवर प्रतिबद्धता को लेकर बेहद संजीदा और अनुशासित होना चाहते थे। उन्होंने काम के दौरान दोस्ती के बजाय पूरी तरह से रचनात्मक तैयारी और स्पष्टता पर जोर दिया। • सोच में बदलाव: शुरुआत में कोरियोग्राफर को यह रवैया अहंकार लग सकता था लेकिन बाद में उन्हें इसके पीछे की व्यावसायिक सच्चाई समझ आई। समय बीतने के साथ बॉस्को को यह अहसास हुआ कि बड़े सितारों के साथ काम करते वक्त यह पेशेवर तरीका बिल्कुल सही था। सवाल-जवाब 1. विवेक ओबेरॉय की किन फिल्मों ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया था? साल 2002 में आई फिल्में 'कंपनी' और 'साथिया' ने विवेक ओबेरॉय को इंडस्ट्री में बड़ी पहचान दिलाई थी। 2. कोरियोग्राफर बॉस्को मार्टिस विवेक ओबेरॉय से क्यों आहत हो गए थे? विवेक द्वारा काम मांगने पर गाने की पूरी क्रिएटिव तैयारी और ब्रेकडाउन मांगने के तरीके से बॉस्को को पहले बुरा लगा था। 3. बाद में बॉस्को मार्टिस की सोच विवेक ओबेरॉय को लेकर क्यों बदल गई? बॉस्को को अहसास हुआ कि बड़े स्टार के साथ काम करने के लिए दोस्ती से ज्यादा पेशेवर तैयारी जरूरी होती है। 4. विवेक ओबेरॉय इन दिनों किस बड़ी फिल्म को लेकर चर्चा में हैं? विवेक ओबेरॉय नितेश तिवारी की आने वाली फिल्म 'रामायण' को लेकर चर्चा में हैं जिसमें वह विद्युतजिह्व का किरदार निभा रहे हैं। https://trendkia.com/bollywood/jaba-vivek-oberoi-ke-badale-andaja-se-ahata-ho-gae-the-bosco-martis-koriyographara-ne-sheyara-kiya-purana-kissa-39658 TrendKia — Har trend, sabse pehle.