# जय वीरू से ऊंचाई तक महानायक अमिताभ बच्चन की चार फिल्में जिन्होंने बड़े पर्दे पर निभाई गहरी यारी

> साल 1969 में सात हिंदुस्तानी से करियर शुरू करने वाले अमिताभ बच्चन ने कई यादगार फिल्मों में दोस्ती की मिसाल कायम की है। शोले, याराना, दोस्ताना और ऊंचाई जैसी फिल्मों ने बड़े पर्दे पर यारी के रिश्ते को नए आयाम दिए।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-08-13 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/jai-veeru-se-uunchai-taka-mahanayaka-amitabh-bachchan-ki-chara-philmen-jinhonne-bare-parde-para-nibhai-gahari-yari-16392 · **Language:** Hindi
**Tags:** अमिताभ बच्चन, शोले, याराना, दोस्ताना, ऊंचाई, बॉलीवुड फिल्में, धर्मेंद्र

भारतीय सिनेमा के इतिहास में अमिताभ बच्चन एक ऐसा नाम हैं जिनकी अभिनय यात्रा और कार्यशैली पीढ़ियों के लिए मिसाल बनी हुई है। वर्ष 1969 में फिल्म सात हिंदुस्तानी से अपने सफर की शुरुआत करने वाले अमिताभ बच्चन ने अपने पांच दशकों से अधिक लंबे करियर में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिल्मों की सफलता या विफलता से परे रहकर उन्होंने हर दौर में दर्शकों के दिलों पर राज किया है। चाहे रोमांस हो, एक्शन हो या फिर गंभीर सामाजिक मुद्दों पर आधारित कहानियां, उन्होंने हर जॉनर में अपनी बेहतरीन अदाकारी की छाप छोड़ी है। 83 वर्ष की आयु में भी 24 घंटे निरंतर काम करने वाले अमिताभ बच्चन ने न केवल बड़े पर्दे पर बल्कि छोटे पर्दे पर भी अपने समर्पण को साबित किया है। अभिनय के साथ-साथ उन्होंने एक सफल निर्माता, गायक और टेलीविजन होस्ट के रूप में भी अपनी अलग पहचान बनाई है। उनके करियर के कई सुनहरे अध्यायों में से एक महत्वपूर्ण पहलू दोस्ती पर आधारित फिल्में रही हैं, जहां उन्होंने सह-कलाकारों के साथ स्क्रीन पर ऐसी केमिस्ट्री बनाई जो आज भी मिसाल दी जाती है।

## सात हिंदुस्तानी से लेकर बहुआयामी करियर का सफर
अमिताभ बच्चन का फिल्मी करियर विविधता और निरंतर प्रयास का बेहतरीन उदाहरण रहा है। सात हिंदुस्तानी से शुरुआत करने के बाद उन्होंने दीवार, डॉन, मुकद्दर का सिकंदर, अमर अकबर एंथनी और कभी कभी जैसी कालजयी फिल्मों में काम किया। इन फिल्मों ने उन्हें न केवल एक सुपरस्टार के रूप में स्थापित किया बल्कि उनके अभिनय की सीमाओं का भी विस्तार किया। टीवी से लेकर सिनेमा के हर प्रोजेक्ट में जी जान लगाने की उनकी आदत ने ही उन्हें इंडस्ट्री का सबसे विश्वसनीय चेहरा बनाया है। करियर के अलग-अलग चरणों में उन्होंने दोस्ती और इंसानी रिश्तों के इर्द-गिर्द बुनी गई कहानियों को बड़े पर्दे पर जीवंत किया है।

## शोले: जय और वीरू की सदाबहार आइकॉनिक जोड़ी
दोस्ती पर आधारित फिल्मों की जब भी चर्चा होती है, तो इस सूची में सबसे पहला नाम फिल्म शोले का आता है। आईएमडीबी पर 8.1 की शानदार रेटिंग हासिल करने वाली इस फिल्म में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र की केमिस्ट्री ने इतिहास रच दिया था। फिल्म में अमिताभ बच्चन ने जय और धर्मेंद्र ने वीरू का किरदार निभाया था। सलीम-जावेद की जोड़ी द्वारा लिखित और रमेश सिप्पी के निर्देशन में बनी यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर न केवल ब्लॉकबस्टर रही, बल्कि भारतीय पॉप कल्चर में अमर हो गई। आज भी जब समाज में सच्ची और अटूट दोस्ती की मिसाल दी जाती है, तो जय-वीरू की जोड़ी का नाम सबसे पहले लिया जाता है।

## याराना: किशन और बिशान की निस्वार्थ यारी
वर्ष 1981 में प्रदर्शित हुई फिल्म याराना दोस्ती के जज्बे को पेश करने वाली एक और ऐतिहासिक फिल्म साबित हुई। यह एक म्यूजिकल एक्शन ड्रामा फिल्म थी जिसमें अमिताभ बच्चन और अमजद खान की ऑनस्क्रीन यारी को बेहद खूबसूरती से दर्शाया गया था। फिल्म में किशन और बिशान के बीच की आत्मीयता को दर्शकों ने खूब सराहा। इस ब्लॉकबस्टर फिल्म में कादर खान, तनुजा, रंजीत और नीतू कपूर जैसे दिग्गज कलाकारों ने भी महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाई थीं। बॉक्स ऑफिस पर सफलता के झंडे गाड़ने वाली इस फिल्म के गाने और संवाद आज भी लोगों की जुबां पर बसे हुए हैं।

## दोस्ताना: विजय और रवि की बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट केमिस्ट्री
वर्ष 1980 में आई फिल्म दोस्ताना ने भी अमिताभ बच्चन के करियर में दोस्ती के विषय पर बनी फिल्मों की सूची को और समृद्ध किया। यश जौहर के प्रोडक्शन बैनर तले बनी इस सुपरहिट फिल्म में अमिताभ बच्चन के साथ शत्रुघ्न सिन्हा मुख्य भूमिका में नजर आए थे। फिल्म में अमिताभ बच्चन ने विजय और शत्रुघ्न सिन्हा ने रवि का किरदार निभाया था। दोनों दोस्तों के बीच के रिश्ते, टकराव और आपसी जुड़ाव को फिल्म में बेहद रोमांचक तरीके से पेश किया गया था। इस फिल्म में जीनत अमान और अमरीश पुरी ने भी अहम भूमिकाएं निभाई थीं, जिससे यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर बड़ी सफलता हासिल करने में कामयाब रही।

## ऊंचाई: उम्र के हर पड़ाव में सपनों को पूरा करने का संदेश
अमिताभ बच्चन ने सिर्फ 80 के दशक में ही नहीं, बल्कि आधुनिक सिनेमा के दौर में भी दोस्ती के महत्व को बखूबी पर्दे पर उतारा है। वर्ष 2022 में रिलीज हुई सूरज बड़जात्या निर्देशित फिल्म ऊंचाई इसका प्रत्यक्ष प्रमाण है। इस फिल्म में अमिताभ बच्चन के साथ अनुपम खेर और बोमन ईरानी उनके जिगरी दोस्तों के रूप में नजर आए थे। बॉक्स ऑफिस पर सेमी-हिट रही यह फिल्म इस खूबसूरत विचार को रेखांकित करती है कि इंसान किसी भी उम्र में अपने सपनों और वादों को पूरा कर सकता है। उम्र के ढलते पड़ाव में भी दोस्ती के जज्बे को कायम रखने की यह कहानी दर्शकों के दिलों को छूने में सफल रही।

## इसका आप पर असर
**सिनेमा प्रेमियों के लिए:** यह सूची भारतीय सिनेमा के स्वर्ण काल और आधुनिक युग की उन चुनिंदा फिल्मों का विश्लेषण पेश करती है जिन्होंने पर्दे पर दोस्ती की परिभाषा बदली।

**दर्शकों के लिए:** सप्ताहांत पर पुरानी क्लासिक और नई प्रेरणादायक फिल्मों को दोबारा देखने या चुनने के लिए एक बेहतरीन मार्गदर्शन मिलता है।

## सवाल-जवाब

### 1. अमिताभ बच्चन ने अपने अभिनय करियर की शुरुआत किस फिल्म से की थी?
अमिताभ बच्चन ने अपने करियर की शुरुआत साल 1969 में आई फिल्म सात हिंदुस्तानी से की थी।

### 2. फिल्म शोले में अमिताभ बच्चन और धर्मेंद्र के किरदारों के नाम क्या थे?
शोले में अमिताभ बच्चन ने जय और धर्मेंद्र ने वीरू का आइकॉनिक किरदार निभाया था।

### 3. फिल्म शोले की आईएमडीबी रेटिंग कितनी है और इसे किसने लिखा था?
शोले की आईएमडीबी रेटिंग 8.1 है और इसे सलीम-जावेद की जोड़ी ने लिखा था, जबकि इसका निर्देशन रमेश सिप्पी ने किया था।

### 4. साल 1981 में आई फिल्म याराना में अमिताभ बच्चन के साथ किस अभिनेता की दोस्ती दिखाई गई थी?
याराना में अमिताभ बच्चन और अमजद खान के बीच किशन और बिशान की गहरी दोस्ती को दिखाया गया था।

### 5. फिल्म दोस्ताना में अमिताभ बच्चन के साथ मुख्य भूमिका में कौन से अभिनेता नजर आए थे?
यश जौहर के प्रोडक्शन में बनी दोस्ताना में अमिताभ बच्चन के साथ शत्रुघ्न सिन्हा नजर आए थे, जहां उन्होंने विजय और रवि का रोल निभाया था।

### 6. साल 2022 में आई फिल्म ऊंचाई का निर्देशन किसने किया था?
फिल्म ऊंचाई का निर्देशन सूरज बड़जात्या ने किया था, जिसमें अनुपम खेर और बोमन ईरानी भी मुख्य भूमिकाओं में थे।

## प्रेरणा और सबक
**अमिताभ बच्चन के करियर से मिलने वाली सीख:**

- **निरंतरता और मेहनत:** 1969 से करियर शुरू करने के बाद हिट या फ्लॉप की चिंता किए बिना लगातार काम करते रहना।
- **उम्र की सीमाओं को तोड़ना:** 83 वर्ष की उम्र में भी 24 घंटे काम करने का जज्बा और हर प्रोजेक्ट में पूरा समर्पण दिखाना।
- **बहुमुखी प्रतिभा का विकास:** सिर्फ अभिनय तक सीमित न रहकर निर्माता, गायक और टेलीविजन होस्ट के रूप में खुद को स्थापित करना।
- **सपनों की कोई उम्र नहीं:** ऊंचाई फिल्म की तरह यह साबित करना कि किसी भी उम्र में नए लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है।

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