जावेद अख्तर और फरहान अख्तर ने 25 साल में ऐसे बनाई सुपरहिट एक्शन फ्रेंचाइजी, रीमेक और संगीत का अनोखा सफर जावेद अख्तर और उनके बेटे फरहान अख्तर ने 'डॉन' फ्रेंचाइजी को भारतीय सिनेमा की सबसे सफल एक्शन श्रृंखलाओं में से एक बनाया, जिसमें तीन ब्लॉकबस्टर फिल्में और हिट संगीत शामिल हैं। हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई सफल फिल्में बनी हैं, लेकिन अपराध और थ्रिलर शैली में ‘डॉन’ फ्रेंचाइजी जैसी पहचान बहुत कम देखने को मिलती है। लगभग 25 साल के लंबे अंतराल में फैली इस एक्शन सीरीज की सफलता के पीछे मशहूर लेखक जावेद अख्तर और उनके निर्देशक बेटे फरहान अख्तर की अहम भूमिका रही है। बाप-बेटे की इस जोड़ी ने अपनी बेहतरीन सोच और निर्देशन कौशल से एक साधारण अंडरवर्ल्ड कहानी को बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर फ्रेंचाइजी में बदल दिया। 1978 की मूल फिल्म और सलीम-जावेद का लेखन इस शानदार सफर की शुरुआत 12 मई 1978 को हुई थी, जब निर्देशक चंद्रा बरोट ने सलीम-जावेद की लिखी पटकथा पर आधारित फिल्म ‘डॉन’ को बड़े पर्दे पर उतारा। इस एक्शन थ्रिलर में अमिताभ बच्चन मुख्य भूमिका में नजर आए थे, जबकि उनके साथ जीनत अमान, प्राण और ओम शिवपुरी जैसे दिग्गज कलाकारों ने काम किया था। फिल्म की कहानी एक अंतरराष्ट्रीय अपराधी डॉन की अचानक मौत के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसके बाद पुलिस उसके हमशक्ल विजय को गुप्त रूप से गिरोह में शामिल करवाती है। जबरदस्त मोड़ और एक्शन से भरपूर यह फिल्म 1978 की तीसरी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी और समय के साथ एक कल्ट क्लासिक बन गई। फिल्म की अपार सफलता में इसके कालजयी संगीत का बहुत बड़ा योगदान था, जिसे कल्याणजी-आनंदजी की मशहूर जोड़ी ने तैयार किया था। "जिसका मुझे था इंतजार", "खईके पान बनरास वाला", "मैं हूं डॉन" और "ये मेरा दिल" जैसे गाने उस दौर में जबरदस्त हिट साबित हुए। किशोर कुमार और लता मंगेशकर की आवाज में सजे इन गानों ने दर्शकों के दिलों पर अमिट छाप छोड़ी और भारतीय सिनेमा के सबसे लोकप्रिय गीतों में शामिल हो गए। फरहान अख्तर का 2006 का नया रीमेक लगभग तीन दशक बाद जावेद अख्तर के बेटे फरहान अख्तर ने इस क्लासिक कहानी को नए दौर के दर्शकों के हिसाब से फिर से बनाने का फैसला किया। साल 2006 में आई इस फिल्म का शीर्षक ‘डॉन: द चेज बिगेन्स अगेन’ रखा गया। इस रीमेक में पुरानी कहानी की आत्मा को बनाए रखते हुए एक आधुनिक रूप दिया गया। अमिताभ बच्चन की जगह इस बार सुपरस्टार शाहरुख खान ने मुख्य किरदार निभाया और अपनी खास शैली से डॉन के चरित्र को एक नई ऊंचाई दी। फरहान अख्तर ने फिल्म के अंतिम हिस्से में एक बड़ा नया मोड़ जोड़ा, जिसने दर्शकों को हैरान कर दिया। साल 2006 की इस थ्रिलर फिल्म में प्रियंका चोपड़ा, अर्जुन रामपाल, ईशा कोप्पिकर, बोमन ईरानी, पवन मल्होत्रा और ओम पुरी ने महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाईं। फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी शंकर-एहसान-लॉय को सौंपी गई, जबकि जावेद अख्तर ने अपने बेटे के लिए गीतों के बोल लिखे। कुल 8 गानों वाले इस एल्बम में 3 नए गाने शामिल थे, जबकि 2 गाने 1978 की मूल फिल्म से दोबारा बनाकर इस्तेमाल किए गए थे। इन गानों को शान, सुनिधि चौहान, शंकर महादेवन, अलीशा, सोनू निगम और उदित नारायण जैसे गायकों ने अपनी आवाज दी। 2011 का अगला भाग और 25 साल का सफर 2006 के रीमेक की बड़ी सफलता के बाद फरहान अख्तर ने 2011 में इस कहानी को आगे बढ़ाते हुए ‘डॉन 2: द किंग इज बैक’ का निर्माण किया। एक बार फिर फरहान अख्तर के निर्देशन में शाहरुख खान ने मुख्य भूमिका निभाई। इस एक्शन से भरपूर फिल्म में प्रियंका चोपड़ा और बोमन ईरानी के साथ-साथ कुणाल कपूर, साहिल Shroff और लारा दत्ता जैसे कलाकारों को शामिल किया गया। 25 साल के दौरान बनी इन तीन एक्शन थ्रिलर फिल्मों के जरिए जावेद अख्तर और फरहान अख्तर की जोड़ी ने बॉलीवुड की सबसे यादगार सिनेमाई यात्राओं में से एक को पूरा किया। इसका आप पर असर सिनेमा प्रेमियों के लिए: • भारत में: यह कहानी दर्शाती है कि सही पटकथा और आधुनिक निर्देशन तकनीक के माध्यम से क्लासिक फिल्मों को नए दौर के दर्शकों के लिए सफलतापूर्वक रीबूट किया जा सकता है। सवाल-जवाब 1. डॉन फ्रेंचाइजी की पहली फिल्म कब रिलीज हुई थी? इस फ्रेंचाइजी की पहली फिल्म 12 मई 1978 को रिलीज हुई थी, जिसका निर्देशन चंद्रा बरोट ने किया था। 2. 1978 की डॉन फिल्म के लेखक कौन थे? 1978 की मूल फिल्म की पटकथा प्रसिद्ध लेखक जोड़ी सलीम-जावेद ने लिखी थी। 3. फरहान अख्तर ने 2006 के रीमेक में किसे कास्ट किया था? फरहान अख्तर ने 2006 के रीमेक में अमिताभ बच्चन की जगह शाहरुख खान को मुख्य भूमिका में कास्ट किया था। 4. 2006 की डॉन फिल्म में कितने गाने रीमेक किए गए थे? 2006 के 8 गानों वाले एल्बम में 3 नए गानों के साथ 1978 की मूल फिल्म के 2 सुपरहिट गानों को दोबारा बनाकर शामिल किया गया था। प्रेरणा और सबक जावेद और फरहान अख्तर के सफर से प्रेरणादायक सीख: • मूल रचना का सम्मान: नई पीढ़ी के लिए कहानी को बदलते समय उसकी मूल आत्मा और मजबूत नींव को बनाए रखना जरूरी है। • पारिवारिक और रचनात्मक तालमेल: दो पीढ़ियों का अनुभव और नया दृष्टिकोण मिलकर सिनेमाई मील का पत्थर स्थापित कर सकता है। • संगीत का सही दोहराव: क्लासिक गानों का सम्मानजनक रीमेक पुरानी यादों को ताजा करने के साथ-साथ नए दर्शकों को जोड़ता है। https://trendkia.com/bollywood/javed-akhtar-aura-farhan-akhtar-ne-25-sala-men-aise-banai-suparahita-ekshana-phrenchaiji-rimeka-aura-sngita-ka-anokha-saphara-13893 TrendKia — Har trend, sabse pehle.