{
  "type": "article",
  "title": "जुदाई रिव्यू (1980): 17 साल के अंतराल पर एक ही नाम से बनी दो सुपरहिट फिल्में, जिनमें से एक ने बढ़ा दी थीं पतियों की मुश्किलें",
  "summary": "बॉलीवुड में एक ही शीर्षक से दो अलग-अलग दौर में बनी फिल्में सुपरहिट साबित हुईं। साल 1980 की जितेंद्र और रेखा स्टारर जुदाई के बाद, 1997 में श्रीदेवी, अनिल कपूर और उर्मिला मातोंडकर को लेकर इसी नाम से एक और फिल्म बनाई गई थी, जिसकी कहानी आज भी दर्शकों के जेहन में ताजा है।",
  "content": "जुदाई रिव्यू (1980) और (1997) में उन दो फिल्मों की बात की जाती है जो बॉलीवुड के इतिहास में एक ही नाम से बनीं और दोनों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार सफलता हासिल की। हिंदी सिनेमा जगत में एक ही शीर्षक से कई प्रोजेक्ट्स बनाने की परंपरा काफी पुरानी रही है, लेकिन 17 साल के फासले पर एक ही नाम से आईं इन दो फिल्मों ने दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। इनमें से पहली फिल्म में जितेंद्र के किरदार ने विवाहित पुरुषों के लिए एक अलग ही तरह की मुश्किल खड़ी कर दी थी, जबकि दूसरी फिल्म की कहानी और उसका अनूठा प्लॉट आज भी लोगों को अच्छी तरह याद है।\n\n \n\nसाल 1980 की जुदाई और जितेंद्र-रेखा की शानदार केमिस्ट्री\n\nहम बात कर रहे हैं साल 1980 में रिलीज हुई जितेंद्र और रेखा की फिल्म जुदाई की, जिसने सिनेमाघरों में आते ही धमाल मचा दिया था और बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी। इस क्लासिक फिल्म में अभिनेता जितेंद्र ने शशिकांत नाम के एक रईसजादे का किरदार निभाया था, जबकि रेखा ने गौरी की भूमिका अदा की थी। फिल्म की शुरुआत में दिखाया जाता है कि शशिकांत एक बहुत बड़े घराने का बेटा है और उनके घर में गौरी काम करती है तथा शशिकांत के पिता की देखभाल करती है। शशिकांत के पिता का यह अहम किरदार जाने-माने अभिनेता अशोक कुमार ने निभाया था।\n\n कहानी में एक बड़ा मोड़ तब आता है जब शशिकांत के पिता की अंतिम इच्छा यह होती है कि उनका बेटा घर में काम करने वाली गौरी यानी रेखा के साथ विवाह कर ले। फिल्म में यह भी स्पष्ट किया जाता है कि रेखा मन ही मन जितेंद्र के किरदार को पसंद करती है, हालांकि वह यह भी अच्छी तरह जानती है कि शशिकांत काफी फ्लर्टी स्वभाव का है और उसकी कई गर्लफ्रेंड्स भी हैं। इन सब बातों से वाकिफ होने के बावजूद वह इस रिश्ते के लिए तैयार हो जाती है और दोनों की शादी संपन्न हो जाती है। शुरुआती दिनों में दोनों का दांपत्य जीवन काफी खुशी से बीत रहा होता है।\n\n \n\nशक और गलतफहमियों का दौर\n\nजैसे-जैसे फिल्म की कहानी आगे बढ़ती है, वैसै-वैैसे रेखा का किरदार अपने पति पर शक करने लगता है। शशिकांत पेशे से डॉक्टर होता है और इसी वजह से उसकी पुरानी महिला मित्र भी अक्सर उसके क्लीनिक पर आती-जाती रहती हैं। रेखा उन महिला मित्रों को लेकर अपने पति पर शक करने लगती है और इसी शक की बीमारी की वजह से दोनों के रास्ते अलग हो जाते हैं। यह फिल्म न केवल बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी सुपरहिट रही, बल्कि इसके कर्णकंप्रीय गाने भी दर्शकों के बीच बेहद लोकप्रिय हुए थे। उस दौर में जितेंद्र के इस खास रोल ने आम पतियों की जिंदगी में अजीब सी मुसीबत बढ़ा दी थी, क्योंकि इस तरह के शक को लेकर घरों में चर्चाएं होने लगी थीं।\n\n \n\n17 साल बाद आया दूसरा अध्याय और श्रीदेवी का दमदार अभिनय\n\nइस पहली फिल्म के ठीक 17 साल बाद यानी साल 1997 में इसी जुदाई नाम से एक और नई फिल्म रिलीज हुई, जिसमें श्रीदेवी, अनिल कपूर और उर्मिला मातोंडकर मुख्य भूमिकाओं में नजर आए थे। इस चर्चित फिल्म के निर्माता बोनी कपूर थे और उस दौर में इस फिल्म की कहानी ने इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया था। फिल्म में अनिल कपूर और श्रीदेवी एक पति-पत्नी के रूप में दिखाई देते हैं, जिनकी एक बेहद प्यारी और खुशहाल मिडिल क्लास फैमिली होती है जिसमें उनके दो बच्चे भी होते हैं। हालांकि, श्रीदेवी के किरदार में परिवार के साधारण सुख से कहीं ज्यादा पैसों का लालच समाया होता है।\n\n फिल्म के मध्य भाग में उर्मिला मातोंडकर की एंट्री होती है, जो अनिल कपूर के किरदार से काफी ज्यादा प्रभावित हो जाती है और किसी भी कीमत पर उससे शादी करने की जिद ठान लेती है। वहीं दूसरी तरफ, पैसों के प्रति अपनी अत्यधिक लालसा के कारण श्रीदेवी अपने ही पति का सौदा कर देती है और उसे उस दूसरी औरत यानी उर्मिला को बेच देती है। फिल्म की पटकथा का यह अनोखा और चौंकाने वाला प्लॉट ऐसा था जिसे दर्शक आज तक नहीं भूल पाए हैं। हालांकि बाद में श्रीदेवी को अपनी इस गलती का गहरा अहसास होता है कि उसने अपने पति और बच्चों को महज दौलत के खातिर किसी और के हवाले कर दिया था।\n\n \n\nसह-कलाकार और दोनों फिल्मों की विरासत\n\nसाल 1997 की इस फिल्म में मुख्य कलाकारों के अलावा कई जाने-माने दिग्गज चेहरे भी सपोर्टिंग कास्ट का हिस्सा रहे थे। इस फेहरिस्त में फरीदा जलाल, जॉनी लीवर, कादर खान, परेश रावल और उपासना सिंह जैसे शानदार कलाकारों के नाम शामिल हैं जिन्होंने अपनी बेहतरीन अदायगी से फिल्म में जान डाल दी थी। यह एक दिलचस्प इत्तेफाक है कि 17 साल के अंतराल पर बने इन दोनों ही प्रोजेक्ट्स को दर्शकों ने खूब सराहा और आज भी लोग इन्हें टीवी या अन्य माध्यमों पर देखना बेहद पसंद करते हैं, जिससे इनकी कालजयी लोकप्रियता का अंदाजा लगाया जा सकता है।\n\nसवाल-जवाब\n\n1. क्या जुदाई नाम से दो अलग-अलग फिल्में बनी हैं?\nहाँ, साल 1980 में जितेंद्र और रेखा की मुख्य भूमिकाओं वाली 'जुदाई' आई थी, और इसके 17 साल बाद 1997 में श्रीदेवी, अनिल कपूर और उर्मिला मातोंडकर के साथ इसी नाम से दूसरी फिल्म रिलीज हुई थी।\n\n2. साल 1980 की जुदाई में मुख्य कलाकारों की क्या भूमिकाएं थीं?\nइस फिल्म में जितेंद्र ने शशिकांत नाम के एक रईसजादे का किरदार निभाया था और रेखा ने गौरी की भूमिका अदा की थी।\n\n3. साल 1997 की फिल्म जुदाई के निर्माता कौन थे?\nसाल 1997 में आई फिल्म 'जुदाई' के निर्माता बोनी कपूर थे।\n\n4. क्या जुदाई (1997) देखने लायक है?\nहाँ, इस फिल्म की अनोखी कहानी और बेहतरीन स्टार कास्ट के कारण इसे आज भी परिवार के साथ देखना पसंद किया जाता है।",
  "url": "https://trendkia.com/bollywood/judai-rivyu-1980-17-sala-ke-antarala-para-eka-hi-nama-se-bani-do-suparahita-philmen-13620",
  "category": "बॉलीवुड",
  "publishedAt": "2026-08-04",
  "tags": [
    "जुदाई फिल्म",
    "जितेंद्र रेखा",
    "श्रीदेवी अनिल कपूर",
    "बॉलीवुड क्लासिक",
    "पुरानी फिल्में"
  ],
  "language": "hi",
  "site": "TrendKia"
}