# कहो न प्यार है से लेकर गुजारिश तक, ऋतिक रोशन के वो चुनिंदा किरदार जो बड़े पर्दे पर रहकर भी कम सराहे गए

> ऋतिक रोशन के फिल्मी सफर में कई ऐसी बेहतरीन फिल्में रही हैं, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर भले ही रिकॉर्ड न बनाए हों लेकिन उनके अभिनय को नए आयाम दिए। जानिए उनकी ऐसी ही चुनिंदा फिल्मों और उनके ओटीटी प्लेटफॉर्म्स के बारे में।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-10-11 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/kaho-naa-pyaar-hai-se-lekara-guzaarish-taka-hrithik-roshan-ke-vo-chuninda-kiradara-jo-bare-parde-para-rahakara-bhi-kama-sarahe-gae-46605 · **Language:** Hindi
**Tags:** ऋतिक रोशन, फिजा, गुजारिश, लक्ष्य, काइट्स, ओटीटी फिल्में, बॉलीवुड

भारतीय सिनेमा में साल 2000 में फिल्म कहो न प्यार है के जरिए धमाकेदार शुरुआत करने वाले अभिनेता ऋतिक रोशन ने अपने करियर में कई अलग-अलग तरह के किरदार निभाए हैं। अपनी आकर्षक स्क्रीन मौजूदगी, शानदार डांस और एक्शन से भरपूर फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने ऐसे विषय भी चुने जो आम व्यावसायिक ढर्रे से काफी अलग थे। कुछ कहानियों में उन्होंने सच्ची घटनाओं पर आधारित भूमिकाएं कीं, तो कुछ में बेहद संजीदा और चुनौतीपूर्ण पात्रों को पर्दे पर उतारा। मजबूत पटकथा और बेहतरीन अदाकारी के बावजूद उनकी कुछ ऐसी फिल्में रहीं, जिन्हें रिलीज के वक्त सिनेमाघरों में दर्शकों का वैसा भरपूर समर्थन नहीं मिल सका जिसकी वे हकदार थीं। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के दौर में ये फिल्में दर्शकों के लिए आसानी से उपलब्ध हैं और कला के लिहाज से बेहद खास मानी जाती हैं।

## पारिवारिक दर्द और तनाव के बीच भाई की खोज करती फिजा
साल 2000 में रिलीज हुई फिल्म फिजा का निर्देशन खालिद मोहम्मद ने किया था। लगभग 2 घंटे 51 मिनट लंबी इस फिल्म में संगीत का जिम्मा अनु मलिक, रंजीत बैरोट और एआर रहमान ने मिलकर संभाला था। फिल्म में करिश्मा कपूर मुख्य भूमिका में थीं, जबकि ऋतिक रोशन उनके भाई अमन के किरदार में नजर आए थे। फिल्म की सहायक भूमिकाओं में जया बच्चन, शबाना रजा, ईशा कोप्पिकर और आशा सचदेव जैसी अभिनेत्रियां शामिल थीं।

इस कहानी की पृष्ठभूमि 1993 के मुंबई दंगों से जुड़ी है, जिसके बाद से अमन लापता हो जाता है। उसकी बहन फिजा कई सालों तक अपने भाई को तलाशने की जद्दोजहद करती है। जब वह अपने भाई को खोज निकालती है, तो कहानी एक बेहद भावुक और तनावपूर्ण मोड़ ले लेती है। आईएमडीबी पर 6 रेटिंग हासिल करने वाली यह भावनात्मक थ्रिलर फिल्म फिलहाल यूट्यूब पर देखी जा सकती है।

## गुजारिश में इच्छा मृत्यु और आत्मसम्मान की भावनात्मक लड़ाई
निर्देशक संजय लीला भंसाली के निर्देशन में बनी फिल्म गुजारिश ऋतिक रोशन के करियर की सबसे संवेदनशील फिल्मों में गिनी जाती है। रिलीज के वक्त यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर अपेक्षित वित्तीय सफलता हासिल नहीं कर पाई थी, लेकिन इसमें ऋतिक और ऐश्वर्या राय के अभिनय की आलोचकों ने खूब सराहना की। इस फिल्म में आदित्य रॉय कपूर भी एक अहम भूमिका में दिखाई दिए थे।

कहानी एक ऐसे पूर्व जादूगर की है जो एक हादसे के बाद लकवाग्रस्त हो जाता है और पूरी तरह से व्हीलचेयर पर निर्भर रहने को मजबूर होता है। चौदह वर्षों तक इस स्थिति में जीने के बाद वह सम्मानपूर्वक अपनी जिंदगी समाप्त करने के लिए अदालत से इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगता है। फिल्म में ऋतिक ने एक असहाय लेकिन आत्मसम्मान से भरे इंसान के आंतरिक संघर्ष को जिस गहराई से दिखाया, वह काबिले तारीफ था। यह फिल्म अमेजन प्राइम पर उपलब्ध है।

## भटके हुए नौजवान से जांबाज सिपाही बनने का सफर दिखाती लक्ष्य
साल 2004 में प्रदर्शित हुई फिल्म लक्ष्य में ऋतिक रोशन ने एक ऐसे युवक की भूमिका निभाई थी, जिसका जीवन में कोई तय मकसद नहीं होता। कहानी दर्शाती है कि कैसे एक दिशाहीन और लापरवाह इंसान जब अपनी जिंदगी का असल मकसद तलाश लेता है, तो उसकी सोच, आत्मविश्वास और पूरे व्यक्तित्व में एक बड़ा बदलाव आता है।

फिल्म में भारतीय सेना में भर्ती होने और कारगिल जैसे कठिन युद्ध क्षेत्र में देश के लिए फर्ज निभाने की यात्रा को बहुत ही यथार्थवादी अंदाज में दिखाया गया है। युवा पीढ़ी को प्रेरित करने वाली यह बेहतरीन ड्रामा फिल्म दर्शकों के लिए नेटफ्लिक्स पर देखने के लिए उपलब्ध है।

## भाषा और सरहदों के बंधनों से परे काइट्स की प्रेम कहानी
साल 2010 में आई फिल्म काइट्स भी एक ऐसी रोमांटिक एक्शन थ्रिलर थी, जिसे उस दौर में सिनेमाघरों के भीतर बड़े पैमाने पर दर्शक नसीब नहीं हो सके थे। हालांकि, फिल्म के संगीत, तकनीकी भव्यता और अंतरराष्ट्रीय कलाकारों की मौजूदगी ने उस समय काफी सुर्खियां बटोरी थीं। इस फिल्म में ऋतिक रोशन के साथ मैक्सिकन अभिनेत्री बरबरा मोरी और कंगना रनौत नजर आई थीं।

फिल्म का ताना-बाना लास वेगास में बुना गया था, जहां मुख्य पात्र एक डांसर के रूप में रहता है और अपनी आजीविका चलाने के लिए तरह-तरह के छोटे-मोटे काम करता है। कहानी इस बात को रेखांकित करती है कि सच्चा प्रेम किसी भी भाषा, संस्कृति या देश की सीमाओं का मोहताज नहीं होता। दोनों किरदारों के बीच बिना एक-दूसरे की जुबान पूरी तरह समझे पनपने वाला आकर्षण इस फिल्म की धुरी है। यह फिल्म दर्शक अमेजन प्राइम और यूट्यूब पर देख सकते हैं।

## इसका आप पर असर
सिनेमा प्रेमियों और ऑनलाइन दर्शकों के लिए यह खबर मुख्य रूप से उनके वीकेंड वॉचलिस्ट चयन को आसान बनाती है।

- **दर्शकों की पसंद:** यदि आप मुख्यधारा के फॉर्मूला फिल्मों से अलग कुछ देखना चाहते हैं, तो ये फिल्में बेहतरीन अभिनय का अनुभव कराती हैं। ओटीटी के जरिए बिना किसी नए टिकट खर्च के पुरानी क्लासिक फिल्मों को घर बैठे देखा जा सकता है।
- **आसानी से उपलब्धता:** यह जानकारी दर्शकों को अलग-अलग प्लेटफॉर्म्स पर भटकने से बचाती है। यूट्यूब, नेटफ्लिक्स और अमेजन प्राइम पर यह स्पष्ट हो जाता है कि कौन सी फिल्म किस सेवा पर तुरंत स्ट्रीम की जा सकती है।
- **सिनेमा की समझ:** यह लेख दर्शकों को यह परखने का मौका देता है कि बॉक्स ऑफिस पर असफल फिल्में भी कभी-कभी कलात्मक दृष्टि से बहुत समृद्ध होती हैं। दर्शक व्यावसायिक सफलता के इतर अभिनय और निर्देशन की बारीकियों को समझने के लिए इन्हें चुन सकते हैं।
- **पारिवारिक और व्यक्तिगत समय:** इन फिल्मों में एक्शन, देशभक्ति और गंभीर भावनात्मक विषयों का अलग-अलग संगम है। दर्शक अपने मिजाज के हिसाब से सही जॉनर चुनकर अपना समय सार्थक बना सकते हैं।

## ऐसा क्यों हुआ
कई उत्कृष्ट बॉलीवुड फिल्में रिलीज के समय बड़े पैमाने पर व्यावसायिक सफलता इसलिए नहीं जुटा पातीं क्योंकि उनकी पटकथाएं उस दौर के पारंपरिक सिनेमाई फॉर्मूले से बिल्कुल जुदा होती हैं। ऋतिक रोशन के करियर की इन फिल्मों में भी ऐसे ही कई विषयगत और ढांचागत कारण रहे हैं।

- **गंभीर और असामान्य विषय:** गुजारिश जैसी फिल्म में इच्छा मृत्यु और गंभीर बीमारी जैसे विषय मुख्यधारा के दर्शकों के लिए काफी भारी और भावनात्मक रूप से असहज थे। पारंपरिक नाच-गाने और हल्के-फुल्के मनोरंजन की तलाश में आने वाले दर्शक ऐसे संवेदनशील कथानक से उस समय पूरी तरह नहीं जुड़ सके।
- **प्रयोगधर्मी भाषा और पटकथा:** काइट्स में नायक और नायिका के बीच दो अलग-अलग भाषाओं का प्रयोग एक बड़ा जोखिम था। भारतीय एकल-पर्दा सिनेमाघरों के आम दर्शक उपशीर्षकों और बिना संवाद वाले भावनात्मक जुड़ाव के आदी नहीं थे।
- **विमोचन काल की धारणाएं:** फिजा और लक्ष्य जैसी फिल्में आम हीरो-केंद्रित फिल्मों की बजाय किरदार के आंतरिक द्वंद्व और संघर्ष पर अधिक केंद्रित थीं। उस दौर में दर्शकों को एक ऐसे एक्शन स्टार की उम्मीद थी जो हर बाधा को आसानी से पार कर ले, जबकि ये फिल्में मानवीय कमजोरियों और उलझनों को ईमानदारी से दिखाती थीं।

## सवाल-जवाब

### 1. फिल्म फिजा में ऋतिक रोशन के अलावा मुख्य भूमिकाओं में कौन से कलाकार थे?
इस फिल्म में करिश्मा कपूर मुख्य भूमिका में थीं, जबकि जया बच्चन, शबाना रजा, ईशा कोप्पिकर और आशा सचदेव अन्य महत्वपूर्ण किरदारों में दिखाई दी थीं।

### 2. गुजारिश फिल्म की कहानी किस विषय पर आधारित है?
यह कहानी एक लकवाग्रस्त पूर्व जादूगर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी गंभीर स्थिति के चलते अदालत से इच्छा मृत्यु की अनुमति मांगता है।

### 3. फिल्म लक्ष्य को किस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर देखा जा सकता है?
ऋतिक रोशन अभिनीत फिल्म लक्ष्य को दर्शक नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम कर सकते हैं।

### 4. फिल्म काइट्स में ऋतिक रोशन के साथ किन अभिनेत्रियों ने काम किया था?
काइट्स में ऋतिक रोशन के साथ मैक्सिकन अभिनेत्री बरबरा मोरी और कंगना रनौत नजर आई थीं।

### 5. फिल्म फिजा की कुल अवधि कितनी है और इसे आईएमडीबी पर क्या रेटिंग मिली है?
फिजा की कुल अवधि 2 घंटे 51 मिनट है और इसे आईएमडीबी पर 6 की रेटिंग प्राप्त है।

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