करियर के शिखर पर जब प्यार के लिए फिल्मों को कह दिया अलविदा, जानें दिग्गज अभिनेत्री नीतू सिंह के सफर की पूरी कहानी बाल कलाकार के रूप में अभिनय की दुनिया में कदम रखने वाली नीतू सिंह ने अपनी शानदार अदाकारी से 70 के दशक में बड़ी पहचान बनाई, लेकिन शादी के बाद उन्होंने लंबे समय के लिए फिल्मों से दूरी बना ली थी। नीतू सिंह का जीवन इस बात का एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे कम उम्र में मिली बड़ी सफलता, निजी जिंदगी के लिए किए गए समझौते और उसके दशकों बाद भी बड़े पर्दे पर वापसी को पूरी गरिमा के साथ संभाला जा सकता है। उन्होंने बाल कलाकार के रूप में अभिनय की दुनिया में कदम रखा था और आगे चलकर 1970 के दशक की सबसे चमकती हुई अभिनेत्रियों में शामिल हुईं। हिंदी सिनेमा के इतिहास में उनकी यह यात्रा आज भी बेहद अनोखी और प्रेरणादायक मानी जाती है। हरनीत कौर से बेबी सोनिया तक का सफर और शुरुआती संघर्ष नीतू सिंह का जन्म 8 जुलाई 1958 को नई दिल्ली के एक पंजाबी सिख परिवार में हुआ था। बचपन में उनका नाम हरनीत कौर था। उनका शुरुआती जीवन आसान नहीं था, क्योंकि जब वह बहुत छोटी थीं, तभी उनके पिता दर्शन सिंह का साया उनके सिर से उठ गया। इस दुखद मोड़ के बाद उनकी मां राजी कौर ने एक बड़ा फैसला लिया। वह अपनी नन्ही बेटी को लेकर मुंबई आ गईं। यही वह फैसला था जिसने उनके लिए अभिनय की दुनिया के दरवाजे खोले और महज आठ साल की उम्र में उनका फिल्मी सफर शुरू हो गया। बाल कलाकार से मुख्य अभिनेत्री के रूप में पहचान साल 1966 में रिलीज हुई फिल्म सूरज से उन्होंने एक बाल कलाकार के रूप में अपने अभिनय की शुरुआत की। शुरुआती दौर में दर्शकों ने उन्हें बेबी सोनिया और बेबी नीतू के नाम से जाना। उन्होंने दस लाख और दो कलियां जैसी फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में काम किया। विशेष रूप से फिल्म दो कलियां में उनके द्वारा निभाए गए दोहरे किरदार को दर्शकों ने खूब सराहा। वह अपनी भूमिकाओं में एक स्वाभाविक मासूमियत लेकर आती थीं, जिसने दो कलियां जैसी फिल्मों को परिवारों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया। इस फिल्म में उन्होंने गंगा और जमुना नामक दो जुड़वां बहनों की चुनौतीपूर्ण दोहरी भूमिका निभाई थी, जिसमें उन्होंने अपनी उम्र से कहीं अधिक परिपक्व अभिनय कौशल का प्रदर्शन किया। बड़ी होने पर जब उन्होंने मुख्य अभिनेत्री के रूप में कदम रखा, तो उनका नाम बदलकर नीतू सिंह रख दिया गया। उन्होंने मुख्य अभिनेत्री के रूप में अपने सफर की शुरुआत फिल्म रिक्शावाला से की थी। 70 के दशक का स्वर्णिम दौर और सुपरहिट फिल्में मुख्य अभिनेत्री के तौर पर कदम रखने के बाद उन्होंने एक के बाद एक कई ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं। यादों की बारात, कभी कभी, दीवार, खेल खेल में, रफू चक्कर, अमर अकबर एंथनी, काला पत्थर और दूसरा आदमी जैसी शानदार फिल्मों ने उन्हें 1970 के दशक की सबसे सफल अभिनेत्रियों की कतार में खड़ा कर दिया। यद्यपि उन्होंने उस दौर के कई बड़े अभिनेताओं के साथ काम किया, जिनमें साल 1977 में आई फिल्म परवरिश में महानायक अमिताभ बच्चन के साथ उनका काम भी शामिल है, लेकिन एक खास अभिनेता के साथ उनकी जोड़ी ने दर्शकों के दिलों पर राज किया। ऋषि कपूर के साथ बेमिसाल ऑन-स्क्रीन और ऑफ-स्क्रीन केमिस्ट्री ऋषि कपूर और नीतू सिंह की जोड़ी बड़े पर्दे की सबसे पसंदीदा जोड़ियों में से एक बन गई। दोनों की जादुई केमिस्ट्री को दर्शकों ने हमेशा भरपूर प्यार दिया। इन दोनों ने एक साथ लगभग 12 फिल्मों में अभिनय किया। इस बेहतरीन सफर में खेल खेल में, रफू चक्कर, कभी कभी, अमर अकबर एंथनी, दूसरा आदमी, दुनिया मेरी जेब में, जहरीला इंसान, जिंदा दिल, अनजाने में, झूठा कहीं का और धन दौलत जैसी लोकप्रिय फिल्में शामिल रहीं। बड़े पर्दे पर साथ काम करते-करते उनके बीच का यह व्यावसायिक रिश्ता समय के साथ एक मजबूत और गहरे प्रेम संबंध में बदल गया। प्यार के लिए करियर का त्याग और दशकों बाद शानदार वापसी जब नीतू सिंह अपने करियर की बुलंदियों पर थीं, तब उन्होंने अपने जीवन का सबसे बड़ा निर्णय लिया। 22 जनवरी 1980 को उन्होंने ऋषि कपूर से शादी कर लें। शादी के बाद उन्होंने अपने परिवार को प्राथमिकता देने का फैसला किया और हमेशा के लिए अभिनय की चमचमाती दुनिया से एक लंबा ब्रेक ले लिया। 80 से अधिक फिल्मों में अपनी प्रतिभा दिखाने के बाद उनका यह फैसला वाकई चौंकाने वाला था। हालांकि, करीब 26 वर्षों के लंबे अंतराल के बाद उन्होंने बड़े पर्दे पर वापसी की। इस दूसरी पारी में उन्होंने लव आज कल, दो दूनी चार, जब तक है जान, बेशरम और जुग जुग जियो जैसी बेहतरीन फिल्मों में अपनी बेहतरीन अदाकारी से साबित कर दिया कि उनकी प्रतिभा आज भी वैसी ही है। उदाहरण के लिए, फिल्म दो दूनी चार में उन्होंने एक बार फिर ऋषि कपूर के साथ अभिनय किया, जिसमें उन्होंने एक मध्यमवर्गीय स्कूल शिक्षक की पत्नी की भूमिका निभाई। उनके इस प्रदर्शन को आलोचकों की काफी सराहना मिली और इसने दर्शकों को इस जोड़ी के पुराने जादुई दिनों की याद दिला दी। समृद्ध परिवार और नई पीढ़ी आज उनका परिवार भारतीय सिनेमा के सबसे प्रतिष्ठित परिवारों में से एक है। उनके दो बच्चे हैं। उनके बेटे रणबीर कपूर वर्तमान समय में हिंदी सिनेमा के शीर्ष अभिनेताओं में गिने जाते हैं, जिन्होंने अभिनेत्री आलिया भट्ट से विवाह किया है और उनकी एक बेटी है जिसका नाम राहा है। वहीं उनकी बेटी रिद्धिमा कपूर साहनी फैशन और ज्वैलरी डिजाइनिंग के क्षेत्र में एक बड़ा नाम हैं। रिद्धिमा की शादी जाने-माने व्यवसायी भरत साहनी से हुई है और उनकी एक बेटी है जिसका नाम समारा है। इसका आप पर असर सिनेमा प्रेमियों के लिए: यह कहानी दर्शकों को याद दिलाती है कि कैसे 70 और 80 के दशक के दिग्गज कलाकारों ने अपने व्यक्तिगत जीवन और पारिवारिक मूल्यों के लिए अपने चमचमाते करियर तक को पीछे छोड़ दिया, जो आज के समय में बेहद दुर्लभ है। सवाल-जवाब 1. नीतू सिंह का असली नाम क्या है और उनका जन्म कब हुआ था? नीतू सिंह का असली नाम हरनीत कौर था। उनका जन्म 8 जुलाई 1958 को नई दिल्ली के एक पंजाबी सिख परिवार में हुआ था। 2. नीतू सिंह ने बाल कलाकार के रूप में किस फिल्म से शुरुआत की थी? उन्होंने साल 1966 में रिलीज हुई फिल्म 'सूरज' से बाल कलाकार के रूप में शुरुआत की थी। बचपन में उन्हें 'बेबी सोनिया' और 'बेबी नीतू' के नाम से जाना जाता था। 3. ऋषि कपूर और नीतू सिंह ने एक साथ कितनी फिल्मों में काम किया? दोनों ने ऑन-स्क्रीन एक साथ लगभग 12 फिल्मों में काम किया, जिनमें 'खेल खेल में', 'रफू चक्कर', 'कभी कभी' और 'अमर अकबर एंथनी' जैसी कई ब्लॉकबस्टर फिल्में शामिल हैं। 4. शादी के बाद नीतू सिंह ने फिल्मों से ब्रेक क्यों लिया और कब वापसी की? 22 जनवरी 1980 को ऋषि कपूर से शादी करने के बाद उन्होंने अपने परिवार को समय देने के लिए अभिनय से ब्रेक लिया था। इसके बाद उन्होंने करीब 26 साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी की। 5. नीतू सिंह की नई पीढ़ी के परिवार में कौन-कौन शामिल हैं? उनके दो बच्चे हैं- बेटा रणबीर कपूर (जो एक बड़े अभिनेता हैं और आलिया भट्ट के पति हैं) और बेटी रिद्धिमा कपूर साहनी (जो फैशन और ज्वैलरी डिजाइनर हैं)। प्रेरणा और सबक नीतू सिंह के जीवन से सीखे जा सकने वाले महत्वपूर्ण सबक: • पारिवारिक प्राथमिकताओं का सम्मान: सफलता के शिखर पर रहते हुए भी अपने परिवार के लिए स्वेच्छा से करियर को विराम देना उनके मजबूत पारिवारिक मूल्यों को दर्शाता है। • शुरुआती संघर्षों से मुकाबला: पिता के असमय निधन के बाद भी हार न मानते हुए बाल कलाकार के रूप में काम करना और परिवार को संभालना उनके जुझारू व्यक्तित्व की पहचान है। • सीखने और खुद को बदलने की क्षमता: बाल कलाकार 'बेबी सोनिया' से लेकर एक परिपक्व मुख्य अभिनेत्री बनने तक का सफर उनकी बहुमुखी प्रतिभा का प्रमाण है। • दशकों बाद वापसी का साहस: लगभग 26 साल तक कैमरे से दूर रहने के बाद भी बड़े पर्दे पर वापसी करना और अपनी छाप छोड़ना यह सिखाता है कि हुनर कभी पुराना नहीं होता। https://trendkia.com/bollywood/kariyara-ke-shikhara-para-jaba-pyara-ke-lie-philmon-ko-kaha-diya-alavida-janen-diggaja-abhinetri-neetu-singh-ke-saphara-ki-puri-ka-5613 TrendKia — Har trend, sabse pehle.