# खलीफा रिव्यू (2026): पृथ्वीराज सुकुमारन का स्टाइलिश एक्शन भी नहीं छिपा पाया ढीली पटकथा

> 20 अगस्त को रिलीज हुई वैशाख निर्देशित फिल्म खलीफा को लेकर दर्शकों ने एक्स पर अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं, जहां पृथ्वीराज के एक्शन और संगीत की तारीफ के बावजूद कमजोर कहानी की आलोचना हो रही है।

**Type:** article · **Category:** बॉलीवुड · **Published:** 2026-08-21 · **Source:** TrendKia
**Canonical:** https://trendkia.com/bollywood/khalifa-rivyu-2026-prithviraj-sukumaran-ka-stailisha-ekshana-bhi-nahin-chhipa-paya-dhili-patakatha-19438 · **Language:** Hindi
**Tags:** खलीफा, पृथ्वीराज सुकुमारन, मोहनलाल, फिल्म रिव्यू, वैशाख, नील नितिन मुकेश, मालविका शर्मा, मलयालम सिनेमा

वैशाख द्वारा निर्देशित और दक्षिण भारतीय सिनेमा के प्रमुख स्टार पृथ्वीराज सुकुमारन की मुख्य भूमिका वाली एक्शन-ड्रामा फिल्म खलीफा 20 अगस्त को सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है। इस **खलीफा रिव्यू** में हम सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और सिनेमाघरों से सामने आ रही दर्शकों की शुरुआती प्रतिक्रियाओं का विस्तृत विश्लेषण करेंगे। फिल्म में नील नितिन मुकेश और मालविका शर्मा की महत्वपूर्ण भूमिकाएं हैं, जबकि मलयालम सिनेमा के दिग्गज अभिनेता मोहनलाल का एक विशेष कैमियो रोल भी शामिल है। फिल्म के बड़े पर्दे पर दस्तक देते ही एक्स पर दर्शकों ने अपनी प्रतिक्रियाएं साझा करनी शुरू कर दी हैं। जहां एक तरफ पृथ्वीराज की प्रभावशाली स्क्रीन उपस्थिति और स्टाइलिश एक्शन की प्रशंसा की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ इसकी कमजोर पटकथा, घिसे-पिटे कथानक और भावनात्मक जुड़ाव की कमी पर कड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

 

## स्क्रीन प्रेजेंस और बैकग्राउंड संगीत की सराहना
 फिल्म के तकनीकी और प्रस्तुतीकरण वाले पहलुओं पर दर्शकों ने मिली-जुली राय व्यक्त की है। फिल्म के भव्य दृश्य पैमाने को लेकर कई प्रशंसकों ने सकारात्मक विचार व्यक्त किए हैं। एक दर्शक ने X पर लिखा कि फिल्म का निर्माण काफी बड़े पैमाने पर किया गया है और यह दृश्यात्मक रूप से भव्य दिखाई देती है, लेकिन मुख्य कथानक के स्तर पर यह भटक जाती है। इस दर्शक के अनुसार, पृथ्वीराज सुकुमारन अपनी मजबूत स्क्रीन प्रेजेंस के दम पर हर दृश्य में जान फूंक देते हैं। इसके साथ ही जेक्स बिजॉय द्वारा तैयार किया गया बैकग्राउंड म्यूजिक कई महत्वपूर्ण मोड़ों पर बेहतरीन प्रभाव छोड़ता है, यद्यपि यह पूरी फिल्म के दौरान एक समान लय बनाए रखने में असमर्थ रहता है। हालांकि, स्क्रीनप्ले फिल्म के भव्य पैमाने के साथ न्याय नहीं कर पाता और भावनात्मक दृश्य काफी अधूरे प्रतीत होते हैं। मोहनलाल के कैमियो रोल को लेकर भी यह टिप्पणी की गई कि उनका चरित्र कहानी में स्वाभाविक रूप से घुलने-मिलने के बजाय केवल प्रशंसकों को खुश करने वाले एक साधन के रूप में इस्तेमाल हुआ दिखता है।

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 पृथ्वीराज के लुक और संगीत की तारीफ करते हुए एक अन्य यूजर ने X पर लिखा कि अभिनेता का टोंड फिजीक, स्टाइलिश अंदाज और जेक्स बिजॉय का बीजीएम दो प्रमुख एक्शन दृश्यों में बेहद शानदार नजर आता है। इसके बावजूद, कथानक को लेकर निराशा जताते हुए उन्होंने कहा कि नील नितिन मुकेश द्वारा निभाया गया विलेन का किरदार काफी कमजोर रहा, जबकि लालेट्तन (मोहनलाल) का कैमियो सामान्य दर्ज का ही रह गया। बिना किसी नए संघर्ष या स्मार्ट स्टोरीटेलिंग के, यह फिल्म एक पूर्वअनुमानित और पुराने ढर्रे की स्मगलिंग तथा रिवेंज ड्रामा बनकर रह जाती है, जिसे औसत से नीचे की श्रेणी में ही रखा जा सकता है।

 

## धीमी रफ्तार और पटकथा लेखन में कमियां
 फिल्म की गति और शुरुआती बनावट को लेकर भी दर्शकों ने आलोचनात्मक रुख अपनाया है। कहानी की सुस्त रफ्तार पर सवाल उठाते हुए एक दर्शक ने X पर लिखा कि घिसी-पिटी कहानी और किरदारों के साथ सही जुड़ाव न बन पाने के कारण फिल्म को अपने मुख्य विषय पर आने में ही पहले 40 मिनट का समय लग जाता है। मध्यांतर के ठीक पहले का हिस्सा काफी बेहतर और पकड़ बनाने वाला था, लेकिन उस हिस्से को छोड़ दें तो पूरी फिल्म में कोई नया या विशेष रूप से आकर्षक तत्व देखने को नहीं मिलता है।

 फिल्म की राइटिंग और भारतीय सिनेमा के तकनीकी ढांचे पर टिप्पणी करते हुए एक अन्य यूजर ने X पर लिखा कि सबसे कड़वी सच्चाई यह है कि हमारे उद्योग के पास तकनीकी रूप से कुशल और अत्यधिक प्रतिभाशाली फिल्म निर्माताओं की टीम उपलब्ध है, लेकिन ऐसे दूरदर्शी लेखकों की भारी कमी है जो एक मजबूत और प्रभावकारी स्क्रिप्ट के साथ एक बेहतरीन व्यावसायिक एक्शन फिल्म रच सकें।

 

## मिला-जुला अनुभव और तीखी आलोचना
 फिल्म को देखने के बाद कई दर्शकों ने इसे एक उतार-चढ़ाव भरा सिनेमाई अनुभव बताया है। फिल्म के समग्र प्रभाव पर चर्चा करते हुए एक यूजर ने X पर लिखा कि खलीफा एक मिश्रित भावनाओं वाली फिल्म है। इसमें पृथ्वीराज के दमदार एक्शन दृश्य और जेक्स बिजॉय की संगीत रचना फिल्म के सबसे मजबूत पहलू हैं, जो दर्शकों को कई बेहतरीन मास मोमेंट्स प्रदान करते हैं। इसके विपरीत, कमजोर लेखन और भावनात्मक गहराई की कमी के कारण फिल्म का अंतिम असर काफी फीका पड़ जाता है।

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 कुछ दर्शकों की प्रतिक्रियाएं इससे भी अधिक सख्त रहीं। एक अन्य यूजर ने निराशा व्यक्त करते हुए लिखा कि यह तय कर पाना कठिन है कि फिल्म में सबसे अधिक निराशाजनक क्या था, इसकी मूल कहानी, इसकी पटकथा या फिर निर्देशन। इसके अतिरिक्त, मुख्य प्रतिपक्षी यानी विलेन के रूप में प्रस्तुत किया गया किरदार भी दर्शकों पर अपना कोई प्रभाव छोड़ने में पूरी तरह विफल रहा।

 एक दर्शक ने इसे पूरी तरह से भावनाहीन ड्रामा करार दिया। उनके अनुसार, फिल्म का निर्माण अधिकारिक तौर पर औसत दर्जे का महसूस होता है। आलसी लेखन, कमजोर संवाद और अनुभवहीन अभिनय प्रदर्शन इसे और अधिक कमजोर बना देते हैं। हालांकि पृथ्वीराज सुकुमारन ने अपने स्तर पर अच्छा अभिनय किया है, लेकिन उनके चरित्र की संरचना में कोई नयापन देखने को नहीं मिलता। परिचय दृश्य, मध्यांतर और क्लाइमेक्स के क्षणों को छोड़ दिया जाए तो यह फिल्म अधिकांश समय निराश करती है।

 

## एक्शन सीक्वेंस और एंड-क्रेडिट सीक्वेंस पर राय
 फिल्म के सकारात्मक पहलुओं और विशेष दृश्यों को लेकर भी कुछ दर्शकों ने अपने विचार साझा किए हैं। एक दर्शक ने टिप्पणी की कि उनके लिए केवल पृथ्वीराज का स्टाइलिश लुक ही एकमात्र सकारात्मक पक्ष रहा, जबकि अनुमान लगाने योग्य कहानी और प्रभावहीन फाइट सीक्वेंस इसकी सबसे बड़ी कमजोरी साबित हुए। इसके साथ ही जेक्स बिजॉय का बैकग्राउंड म्यूजिक भी अपेक्षाओं पर खरा उतरने में नाकाम रहा।

 वहीं, कुछ चुनिंदा दृश्यों को पसंद करने वाले दर्शकों का कहना है कि पुरानी शैली की पटकथा के बावजूद हाउस अटैक और जेल में लड़े गए फाइट दृश्य देखने योग्य थे। कैमियो भले ही ठीक-ठाक रहे हों, लेकिन एक कुशल निर्देशक भी एक साधारण स्क्रिप्ट के सहारे महान फिल्म नहीं बना सकता। दूसरी ओर, फिल्म के अंतिम हिस्से की सराहना करते हुए एक यूजर ने लिखा कि यद्यपि यह एक सामान्य स्तर की फिल्म है, लेकिन इसका एंड-क्रेडिट सीक्वेंस काफी शानदार है। निर्देशक वैशाख ने इसे सरल रखने की कोशिश की है, परंतु इस श्रेणी की एक्शन फिल्मों को अधिक ओवर-द-टॉप और भव्य प्रस्तुति की आवश्यकता होती है।

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## इसका आप पर असर
- **फिल्म प्रेमियों के लिए:** यदि आप पृथ्वीराज सुकुमारन के स्टाइलिश अंदाज और भारी-भरकम बैकग्राउंड स्कोर के शौकीन हैं तो फिल्म के कुछ एक्शन सीन आकर्षित कर सकते हैं, हालांकि कमजोर कहानी और ढीली पटकथा से निराशा हो सकती है।

## सवाल-जवाब

### 1. क्या फिल्म खलीफा देखने लायक है?
यदि आप पृथ्वीराज सुकुमारन के स्टाइलिश एक्शन और भारी-भरकम बैकग्राउंड स्कोर के शौकीन हैं तो खलीफा के कुछ सीन आपको पसंद आ सकते हैं, हालांकि कमजोर पटकथा के कारण यह एक औसत फिल्म बनकर रह जाती है।

### 2. खलीफा किस तरह की फिल्मों जैसी है?
खलीफा एक पारंपरिक स्मगलिंग और रिवेंज-आधारित कमर्शियल एक्शन फिल्म है, जिसकी तुलना केजीएफ जैसी मास एक्शन ड्रामा फिल्मों से की जा सकती है, हालांकि इसमें पटकथा और भावनात्मक गहराई की कमी देखने को मिलती है।

### 3. फिल्म खलीफा में मोहनलाल का कैमियो कैसा है?
दर्शकों की प्रतिक्रियाओं के अनुसार, मोहनलाल (लालेट्तन) का कैमियो एक सामान्य फैन-सर्विस रोल जैसा है और यह कहानी में कोई नया या बड़ा मोड़ नहीं जोड़ पाता।

### 4. खलीफा का निर्देशन किसने किया है और इसमें मुख्य कलाकार कौन हैं?
फिल्म खलीफा का निर्देशन वैशाख ने किया है। इसमें पृथ्वीराज सुकुमारन मुख्य भूमिका में हैं, जबकि नील नितिन मुकेश, मालविका शर्मा और मोहनलाल भी अहम किरदारों में नजर आते हैं।

### 5. खलीफा में सबसे बेहतरीन सीन कौन से बताए गए हैं?
दर्शकों ने फिल्म में हाउस अटैक सीन, जेल फाइट सीक्वेंस, इंटरवल ब्लॉक और एंड-क्रेडिट सीक्वेंस की तारीफ की है।

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